शुक्रवार को ठाकुरों ने सेंगर के लोगों को मारा था, मंगलवार को सेंगरों ने उतार फेंकी ठाकुरी की मालिकी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
बड़ा बांगड़दा क्षेत्र में शुक्रवार शाम को हुई उड़दंग मामले में नया मोड़ मंगलवार सुबह आया। जब 20-25 लोगों को लेकर पहुंचे एक भाजपा नेता ने जमीन पर हंगामा किया। शुक्रवार को जिन लोगों ने उनके चौकीदार और मैनेजरों के साथ मारपीट करके भगा दिया और अपने नाम के बोर्ड लगा दिए थे उनके बोर्ड उखाड़कर फेंक दिए। ये पूरा मामला सीसीटीवी में रिकार्ड हुआ। पुलिस को सूचना दी गई लेकिन गांधीनगर पुलिस फिर कार्रवाई से किनारा कर गई।
जो वीडियो सामने आया है उसके अनुसार जमीन नैनोद की है। शुक्रवार को हुए विवाद के बाद एडवोकेट अमित सिंह पिता सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने अपने नाम को जो बोर्ड लगाया था उस पर जमीन की पहचान सर्वे नंबर 294/1 के रूप में अंकित की गई थी। रेवेन्यू रिकार्ड में ये जमीन रियल ड्रीम क्रिएशन एलएलपी तर्फे पार्थ पिता मोहन सेंगर के नाम दर्ज है। शुक्रवार तक यहां सेंगर परिवार के सिपाही ही तैनात थे जिन्हें ठाकुरों ने मारकर भगा दिया था। अपने नाम की तख्ती लगाई। सीसीटीवी कैमरे लगाए। खम्बे खड़े किए। सोचा अब कोई विवाद नहीं होगा।
एेसा हुआ नहीं। मंगलवार की सुबह 10 से 11 बजे के बीच सेंगर परिवार के लोग 20-25 लोगों को लेकर मौके पर पहुंचे। परिवार का एक सदस्य दौड़कर गया और एक पेड़ पर टंगे अमित ठाकुर के नाम के बैनर को उखाड़कर अपने जेसीबी के पास लाकर फेंक दिया। इनकी पहचान गोलू सेंगर के रूप में की गई है। दूसरी तरफ काले कपड़ों में एक व्यक्ति पूरे अभियान को लीड कर रहे थे जिनका नाम उदल सेंगर बताया गया।
जमीन एक, दावेदार तीन
हिंदुस्तान मेल की तफ्तीश में पता चला कि नैनोद की 5.127 हेक्टेयर जमीन के मालिकाना हक को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। एडवोकेट अमित ठाकुर और सुमित ठाकुर ने बताया कि उनके पिता सुरेंद्र ठाकुर को नैनोद निवासी किसान 1980 में ही जमीन बेच चुके थे। भरोसे में नामांतरण नहीं हुआ था। लम्बे समय से खेती हम ही कर रहे थे। पिता के मरने के बाद होलकरों की नीयत बदली और वे जमीन बाजार में बेचने निकल पड़े। इस बीच नामांतरण को लेकर हमने केस लगाया था। जो तहसील में खारिज हो गया था। बाद में एसडीएम कोर्ट में लगाया। जो विचाराधीन है। इस बीच मनमाने ढंग से होलकरों ने सेंगर परिवार को रजिस्ट्री कर दी।
दूसरा धड़ा है सेंगर परिवार। जिसने भी जमीन के पेटे किसान से एग्रीमेंट किया था। दस्तावेजों की मानें तो सेंगर परिवार का कब्जा जायज नजर आता है। क्योंकि रेवेन्यू रिकार्ड में 29 अक्टूबर 2024 को ही जमीन का नामांतरण (प्र.क्र. 3236/अ-6/2024-25) सेंगर की कंपनी के नाम हो चुका है। नामांतरण 18 अक्टूबर 2024 को हुई रजिस्ट्री MP179152024A11245996 के आधार पर हुई। जो कि किशोर व सुभाष पिता गोविंद होलकर और संजय व नंदन पिता कमलाकर होलकर सभी निवासी 8 बाराभाई वैष्णव मंदिर के सामने ने की थी। इन चारों के पास 25-25 प्रतिशत जमीन थी।
तीसरा धड़ा किसान का बताया जा रहा है। जमीन की ऊंची कीमतों ने रजिस्ट्री के बावजूद किसानों का जमीन के प्रति मोह खत्म नहीं होने दिया।
पुलिस को देखकर तीतर बीतर हुए,कार्रवाई नहीं हुई
शुक्रवार को बदमाशों को यह कहकर जमीन पर ले जाया गया था कि वहां पार्टी है। जब जमीन पर पहुंचे तो वहां 25-30 लोग आपस में चिल्लापुकार कर रहे थे। पीछे के एक हिस्से में खाना भी बन रहा था। विवाद बढ़ा। सूचना मिलते ही पुलिस के 20-25 जवान मौके पर पहुंचे। जिन्हें देखकर लाठी-ठंडे से लड़ रहे लोग तीतर-बीतर हो गए। पुलिस कुछ देर के लिए गई,फिर विवाद हुआ। तब भी मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। बस यही कहा कि तुम लोग समझने को तैयार ही नहीं हो। हमारी नौकरी खाओगे।
मंगलवार को पुलिस का मौन
मंगलवार के विवाद की सूचना भी पुलिस तक पहुंची, पुलिसकर्मी पहुंचे भी लेकिन राजनीतिक रसूख के कारण किसी के पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ ईंधन को धुएं में उड़ाकर अपनी गाड़ी घुमा ली।
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