धाकड की धांक, प्रबंधक पर कार्रवाई का श्रीगणेश नहीं
21 हजार से लेकर 1 लाख तक की पैकेज डील होती थी गर्भगृह के लिए
पंडों के वेश में भेजे जाते थे श्रृद्धालु, कैमरे हो जाते थे बंद
जितना ज्यादा समय, उतना ज्यादा चार्ज
कलेक्टर ने कहा सबूत का इंतजार है, कार्रवाई जरूर होगी
उज्जैन. विनोद शर्मा ।
महाकाल मंदिर में हुए भ्रष्टाचार मामले में अब तक आरोपियों की संख्या 17 हो चुकी है लेकिन प्रशासक रहे गणेश धाकड पर कोइ कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों की मानें तो धाकड के आने के बा ही मंदिर में श्रृद्धालुओं को दर्शन कराने की फीस बढी है। हद तो यह है कि गर्भग्रह में एक लाख तक की पैकेज डील होती है। जो ये डील करता है उसे पूजारी-पंडे के कपडे पहनाकर मंदिर में पहुंचा दिया जाता है। इस दौरान बिजली कटौती के नाम पर गर्भगृह के कैमरे भी बंद कर दिए जाते थे। इस काम में महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी और पंडों का भी साथ मिलता रहा।
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में चुनिंदा हस्तियों को ही प्रवेश की छूट है लेकिन इंस्टाग्राम, टेलीग्राफ, ट्वीटर, फेसबुक पर हर कोई महाकाल के साथ अपनी तस्वीर चाहता है। हर किसी की ये मनोकाना पूरी नहीं होती। महाकाल को छुकर उनका करीब से आशीर्वाद लेना है तो पहले 'सिस्टम' के तहत पैसा चुकाना पडता है। सूत्रों की मानें तो गर्भगृह में प्रवेश की फीस 11 हजार प्रति व्यक्ति से लेकर एक लाख रुपए में चार लोगों का पैकेज बना हुआ है। किसी को शंका न हो इसके लिए ऐसे धनवानों को पुजारी-पंडों जैसे कपडे पहना दिए जाते हैं। उसके बाद प्रवेश मिलता है। ये उसी तरह महाकाल की सेवा करते हैं जैसे पंडे करते हैं लेकिन इनकी वीडियो रील बनती है। तस्वीरें निकलती है। अलग-अलग पोज में। अधिकतम 10 मिनट तक की छूट रहती है।
इन दस मिनट में सोशल श्रृद्धालु जल भी चढाता है। फल-फुल भी चढाता है और पुजारी उनसे मंत्राचार के साथ अनुष्ठान भी करा देते हैं। इसीलिए पैकेज डील बढी है। पैकेज डील हर किसी से नहीं होती है। जिनसे संबंध अच्छे हो जाते हैं या अच्छे संबंधों की अनुसंशा पर आए हों। उन्हीं से पैसा लिया जाता था।
धाकड पर कार्रवाई क्यों नहीं
महाकाल मंदिर समिति के प्रबंधक के रूप में गणेश धाकड को नियुक्त किया था। धाकड को पिछले दिनों ही हटाया। वे इंदौर के एक दानदाता राहुल रोकडे के साथ मिलकर शिखर के नीचे मनमाने ढंग से कमरे और पुजारियों के कैबिन बना रहे थे। जिसकी जानकारी कलेक्टर तक को नहीं थी। इसीलिए कलेक्टर नीरज सिंह ने उन्हें नोटिस दिया था। बाद में हटा दिया। हालांकि पैसा लेकर महाकाल के दर्शन कराने का जो मामला खुला उसमें धाकड को राजनीतिक दबाव के कारण बाहर रखा गया।
जिम्मेदार धाकड है, कार्रवाई हो
मंदिर समिति का प्रशासक रहते धाकड का ही काम था पूरे सिस्टम की निगरानी करना। ऐसा नहीं हुआ। धाकड की नाक के नीचे श्रृद्धालुओं से वसूली होती रही, ऐसा भी नहीं है कि यह धाकड को पता नहीं था। जब कलेक्टर मामले को पकड सकते हैं तो धाकड क्यों नहीं पकड पाए। इसके अलावा कलेक्टर ने उस दानदाता पर भी कार्रवाई नहीं की जिसने कैबिन बनाने में पैसा लगाया था।
पूरी समिति में भांग घुली है...
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया महाकाल मंदिर में दर्शन प्रभारी राकेश श्रीवास्तव और सफाई निरीक्षक विनोद चौकसे ने पूछताछ में अपने चार साथियों के नाम का खुलासा किया है। दोनों से मिली जानकारी व इनके बैंक खाते और इंटरनेट मीडिया अकांउट वॉट्सएप की जांच की गई। जिसके आधार पर मंदिर में भस्म आरती प्रभारी रितेश शर्मा, प्रोटोकाल प्रभारी अभिषेक भार्गव, आईटी सेल प्रभारी राजकुमार, सभामंडप प्रभारी राजेंद्र सिसौदिया, आशीष शर्मा के नाम सामने आए। महाकाल मंदिर की सुरक्षा संभाल रही क्रिस्टल कंपनी के कर्मचारी जितेंद्र परमार और ओमप्रकाश माली को भी आरोपी बनाया गया है। पूछताछ में उन्होंने मीडियाकर्मी पंकज शर्मा, विजेन्द्र यादव, पूर्व नंदी हॉल प्रभारी उमेश पंड्या और क्रिस्टल कंपनी के कर्मचारी करण राजपूत के नाम बताते हुए ट्रेवल ऐजेंट, हारफूल वालों सहित कई अन्य नामों का खुलासा किया।
जांच जारी है साक्ष्यों का इंतजार
धाकड को प्रथमदृष्ट्या जो गडबड सामने आई थी उसके आधार पर हटा दिया है। मंदिर समिति का प्रबंधक रहते उन्होंने किसी से पैकेज डील की है या नहीं? इसकी पुलिस जांच कर रही है। जो लोग पकडे गए हैं उनसे भी धाकड के रिश्तों की जांच होगी।
नीरज सिंह, कलेक्टर
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