20 साल में हर परिषद में दिखी दो नंबर की दादागिरी, इस बार एकलव्य पड़ा भारी
विनोद शर्मा ।
पार्षद कमलेश कालरा के घर पर हमला करवाने वाले जीतू यादव को संगठन ने चुल्हा दिखा दिया है। पुलिस का शिंकसा कस रहा है। पूरी गैंग फरार है। नि:शब्द है। जीतू की गैंग कालरा के बेटे की चड्डी उताकर अपने उन राजनीतिक आकाओं को सामाजिक रूप से नंगा कर दिया है जिन्होंने एक दर्जन मुकदमे दर्ज होने के बावजूद न सिर्फ जीतू को पार्षद बनाया बल्कि अड़ के एमआईसी में भी जगह दिलाई।
इस पूरे घटना क्रम ने यह बता दिया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर की राजनीति कितनी गंदी हो चुकी है। कालरा के घर पर हमला कराकर जीतू तीन दिन तक सीना ताने घुमता रहा। उम्मीद थी कि आकाओं की छत्रछाया में वह सेफ है। इंदौर-1 और इंदौर-2 के बड़े नेताओं का मौन वृत अब तक कायम है। उनके पास न घटना को लेकर कोई जवाब है, न ही जीतू को सियासी सीढ़ी चढ़ाने की ठोस वजह।
महापौर और उनकी टीम को घेरने का जिम्मा लिए बैठे नगर निगम के नेताप्रतिपक्ष चिंटू चौकसे तो दूर कांग्रेस का एक पार्षद उठकर यह कहने नहीं आया कि जो हुआ गलत हुआ। शायद डर है कि कुछ बोले तो उनके कारनामें बाहर न आ जाएं। कैलाश विजयवर्गीय पर आए दिन कटाक्ष कसने वाले कांग्रेस नेता सज्जनसिंह वर्मा के मुंह से एक शब्द नहीं फुटा। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की इंदौर से जुड़े मामलों में खामौशी पार्टी कार्यकर्ताओं को हमेशा खलती है। पटवारी के खामौश होने की एक वजह उनके भाई नाना और जीतू की बेजोड़ दोस्ती भी हो सकती है। जिन लोगों ने कालरा के घर हमला किया था उसमें कुछ ऐसे भी थे जो नाना समर्थक थे। फिर पटवारी क्यों बोले? कांग्रेस को सोचना चाहिए कि वह हाथ आए मुद्दों पर यदि ऐसे चुप रही तो लोग उन्हें मौका देंगे भी नहीं। सिर्फ देवेंद्रसिंह यादव की बयानबाजी से कुछ नहीं होगा।
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने घटना के विरोध में ट्वीट करके इंदौर के नेताओं के मुंह में जुबान दे दी। हाथ में अंगुली दे दी ताकि सांसद शंकर लालवानी जैसे लोग अपने ही समाज के व्यक्ति के लिए चार लाइन लिख सके। महापौर को भी कालरा की याद सीएम के ट्वीट के बाद आई।
दो नंबर पर गृहण लगा हुआ है
आपराधिक कार्यकर्ताओं को संरक्षण देने की इंदौर-2 के विधायक रमेश मेंदोला की आदत उनके लिए गृहण साबित हो रही है। जिसके आगे उनकी व्यक्तिगत चमक फिकी पड़ जाती है। 2004 से 2024 तक जितनी भी परिषद रही, किसी न किसी पार्षद की हरकत उनके गले की फांस बनती रही। यही वजह है कि रिकार्ड मतों से जीत के बावजूद पार्टी उन्हें बड़ा मौका देने लायक नहीं समझती।
तीखे प्रहार से हिली इंदौर-2 की जमीन
इस पूरे घटनाक्रम में एक ही चेहरा हीरो बनकर उभरा। वो था एकलव्य गौड़। जिसके तीखे शाब्दिक तीरों ने बड़े-बड़े सियासतदानों का मुंह बंद कर दिया। एकल्व्य ही थे जो अकेले डटे थे। डटे हैं। जीतू की गिरफ्तारी तक डटे भी रहेंगे। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि एकलव्य ने इंदौर-2 के जमें जकड़े नेताओं की जमीन भी हिला दी। एकल्व्य खुलकर जीतू का समर्थन करने वाले नेताओं के खिलाफ ऐलान-ए-जंग कर चुके हैं।
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