पूणे की इस कंपनी पर मेहरबान है मंडलेश्वर तक के सरकार
- ट्रासंफार्मर जला चुकी है, नया ठेका 21 करोड़ का दिया
इंदौर. विनोद शर्मा ।
नगर निगम में नाली से लेकर नर्मदा तक में भ्रष्टाचार का जहर मिल चुका है। इसका ताजा उदाहरण है 363 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) लाइन का बिजली मेंटेनेंस। जिसमें पीएचई मुसाखेड़ी से लेकर मंडलेश्वर तक बैठे अफसर सिर्फ एक कंपनी पर मेहरबान हैं। उसी कंपनी की जरूरत के लिहाज से टेंडर की शर्तें प्लान की जाती है ताकि दूसरी कंपनी ठेका न ले पाए।
21 अक्टूबर 2024 को नगर निगम की एक जाहिर सूचना प्रकाशित हुई थी। जो संधारण खंड क्रमांक-1 मंडलेश्वर के कार्यपालन यंत्री द्वारा जारी की गई थी। इसमें नर्मदा 363 एमएलडी पानी इंदौर पहुंचाने वाली लाइन (इंटकवेल से लेकर बेकप्रेशर टेंक) के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे। 3 साल का ठेका होगा। लागत 21.38 करोड़ आंकी गई है। टेंडर 25 नवंबर 2024 को खुलना था लेकिन केंसल हो गया।
चीमाटेक प्रोजेक्ट प्रा.लि. नाम की कंपनी है जो पिछले छह साल से टेंडर डाल रही है। हर बार इसी कंपनी को टेंडर मिलता है। कंपनी पूणे की है। 18 सितंबर 2020 को भी जो टेंडर निकाले गए थे उसमें भी अकेली चीमा टेक ने ही भाग लिया था। तब लागत आंकी गई थी 13.98 करोड़। इस बार भी कंपनी ने ही भाग लिया है।
करोड़ों का नुकसान कर चुकी है कंपनी
इससे पहले कंपनी के पास माइनर मैनेजमेंट था। इस दौरान कंपनी की लापरवाही से जलूद का एक ट्रांसफार्मर जल गया। जिसकी कीमत तकरीबन 3 करोड़ थी। अपनी और कंपनी की गलती छिपाने के लिए नर्मदा प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने बिजली कंपनी से एक ट्रांसफार्मर किराए पर लिया और उससे काम करते रहे। जब शिकायतें मुख्यालय तक पहुंची तो उक्त ट्रांसफार्मर खरीद लिया। कंपनी ने जो ट्रांसफार्मर जलाया था वह अब भी जला ही पड़ा है। 2
कंपनी पर मेहरबानी क्याें?
चीमा टेक को नगर निगम इंदौर के लोग जाने क्यों इतना बड़ा मानते हैं जबकि इंटरनेट पर कंपनी की वेबसाइट तक नहीं है। इंडिया मार्ट पर जो डिटेल है उसके अनुसार कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 5 से 25 करोड़ है। जीएसटीएन पर 27AACCC3047N1ZI नंबर डालते हैं तो पता चलता है कि कंपनी सर्विस प्रोवाइडर है और केपिसिटर डिजाइन करती और बनाती है।
मामला मंडलेश्वर का है, मैं नहीं देखता। वहां पटेल साहब है वो देखते हैं। ट्रांसफार्म जला था लेकिन उसे यह कह देना कि कंपनी की वजह से जला था गलत है। नए टेंडर में मेजर मेंटेनेंस भी शामिल किया है ताकि हर नुकसानी की जिम्मेदारी कंपनी की हो।
संजीव श्रीवास्तव, पीएचई
डी.एस.पटेल मंडलेश्वर में पोस्टेड है। उनके मोबाइल नंबर पर कई मर्तबा संपर्क किया लेकिन वे फोन न उठाने की कसम खाकर बैठे हैं।
कंपनियां नहीं आती
ठेका हो चुका है। कंपनियां आती ही नहीं है। इंदौर में इतनी बड़ी कंपनी है नहीं। इसीलिए चीमा टेक को काम दिया है। अब माइनर से लेकर मैजर मेंटेनेंस तक कंपनी करेगी। हमारा काम सप्लाई चालू-बंद करना ही होगा। फिर भी कोई शिकायत है तो देखेंगे।
अभिषेक शर्मा "बबलू'
प्रभारी जलकार्य
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