Thursday, August 21, 2025

पहले एक लाख की बात की, अब तुम 10 हजार दिखा रहे हो... सब्जी की दुकान नहीं थाना है.. समझे...


चंद्रावतिगंज की एसआई जोड़ी ने पैसे की बात बिगड़ने पर लगाई सुनील पर संगीन धाराएं, बोले अब जमानत कराकर दिखा दो
इंदौर. विनोद शर्मा । 
नाबालिग दुल्हन को ससुराल भेजने और दुल्हे पर दुश्कर्म और पॉक्सो जैसी संगीन धाराओं में फंसाकर जेल भेजने के मामले में चंद्रावतिगंज थाने के एसआई कृष्णा पदामकर और विकास राठौर की भूमिका सामने आई है। इस मामले में हिंदुस्तान मेल के हाथ रिकार्ड लगी है जिसमें दोनों ने पैसे न देने पर दुल्हे को फंसाने की बात कही थी। 
 11 दिसंबर को पूजा और सुनील साथ भागे थे। भागकर शादी कर ली थी। 1 जनवरी को परिवार ने दोनों को थाने में पेश कर दिया था। पुलिस ने उनके पेश होने से पहले ही लड़के के परिवार पर एक लाख रुपए देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था। पहले गांव के दो लोगों के द्वारा बातचीत की गई। रकम बड़ी थी। लड़के के पिता देने में अक्षम थे। इसीलिए मामला इंदौर निवासी जितेंद्र यादव को बताया गया। यादव ने 30 दिसंबर की रात 8.45 बजे एसआई पदमाकर से बात की। 40 सेकंड बातचीत हुई। जिसमें तय हुआ कि 31 दिसंबर को थाने में मुलाकात होगी। 
 31 दिसंबर को दोपहर 12.19 बजे फिर जितेंद्र की पदमाकर से 17 सेकंड बातचीत हुई। इसमें पदामकर ने कहा कि थाने में ही आ जाओ, यहीं बात करेंगे। जितेंद्र और इंदौर जनपद सदस्य मुकेश यादव थाने पहुंचे। थाने में पदमाकर और राठौर दोनों थे। पदमाकर से दोनों ने पूछा चलों पैसे की बातचीत करने के बाद क्या होगा? पदमाकर ने कहा लड़के को लिखा-पढ़ी करके थाने से ही छोड़ देंगे। लड़की के मामले में कह देंगे कि वह मामा के यहां चली गई थी। कोर्ट में उसके बयान करा देंगे। दोनों बरी हो जाएंगे। केस भी नहीं होगा।  
 पदमाकर ने विकास की ओर इशारा करते हुए कहा बाकि बात इनसे कर लो। राठौर ने कहा जितेंद्र पत्रकार है इसीलिए उनसे बात नहीं करेंगे। इसीलिए वह कमरे में जनपद सदस्य को ले गया। दो अन्य भी थे। विकास ने कहा कितने पैसे दे देंगे। मुकेश ने कहा परिवार गरीब है। आपकी सेवा-पानी करा देंगे। विकास ने कहा सेवा-पानी मतलब। मुकेश ने मोबाइल पर टाइप करके 10 हजार बताए। विकास तिलमिला गया। पदमाकर से बात करने चला गया। फिर आकर बोला गांव के लोग पहले एक लाख रुपए की बात करके गए थे। अब तुम 10 हजार की बात कर रहे हैं। सब्जी-भाजी बिक रही है क्या यहां? कोई मदद नहीं होगी। जाओ अब तुम सुनील को बचाकर दिखाओ।  
 जितेंद्र 1 जनवरी को दोबारा थाने गए। दोपहर 2 बजे 31 सेकंड बात हुई। इस बार जितेंद्र ने कहा कि फाइनल बात कर लेते हैं। इस पर दोनों ने मुलाकात की। जितेंद्र ने कहा कि घर के जेवर बेचकर भी 25 हजार रुपए जुटा पाएंगे। इससे ज्यादा नहीं हो पाएगा। पदमाकर-राठौर ने कहा कि तुम रहने दो, तुम्हारे बस की बात नहीं है। हम देख लेंगे, हमें क्या करना है? ऐसे कोई मदद होती है क्या? 
फिर दोनों ने करके दिखा दिया...
1 जनवरी वही दिन था जब सुनील और पूजा थाने में पेश हुए थे, परिवार के साथ। पूजा के शादी करने और सुनील के साथ ही रहने की जिद पर परिवार झूग गया, माता-पिता-भाई ने कहा कि साहब ठिक है ये जब शादी कर चुकी है तो इसे ससुराल ही जाने दो। हमें कोई दिक्कत नहीं है। चूंकि लेनदेन की बात बिगड़ चुकी थी इसीलिए पदमाकर-राठौर ने पहले सांवेर अस्पताल में पूजा का मेडिकल कराया और फिर उसे ससुराल भेज दिया लेकिन सुनील को थाने में ही रखकर उस पर संगीन धाराएं बढ़ा दी ताकि उसकी जल्दी जमानत न हो। इनमें से एक है पॉक्सो। 
मैंने कोई शिकायत नहीं की...
पुलिस ने जिस पूजा से दुश्कर्म की कहानी गढ़कर सुनील को जेल पहुंचाया है उसका कहना है कि मैंने दुश्कर्म की कोई बात नहीं की। मुझे सुनील अच्छा लगता है। इसीलिए हमने रजामंदी से शादी की। शादी के बाद एक बार शारीरिक संबंध बने थे, वह भी दोनों की मर्जी से बने। मैंने पुलिस से कोई शिकायत नहीं की।

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