Saturday, December 27, 2025

नर्मदा के इंतजार में 2000 बीघा के गेहूं बर्बाद


तराना के 15 गांवों में नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्ववहन सिंचाई परियोजना की हकीकत
मेढ़ में तक डली 2480 करोड़ की लाइन, फिर भी खेत रीते 
उज्जैन और शाजापुर के गांवों में जल संकट
इंदौर. विनोद शर्मा । 
उज्जैन का आबादखेड़ी गांव...। तराना से लगे इस गांव में कहने को सिंचाई के लिए नर्मदा की लाइन डली है...। जिसके भरोसे किसानों ने खेतों में गेहूं के बीजे रौंपे थे। आस थी मां नर्मदा से...। अबकि बार गेहूं की फसल जोरदार होगी। हुआ उलटा, नर्मदा के पानी के इंतजार में गेहूं खेत में पड़े-पड़े सड़ गए। अंकुरित ही नहीं हो पाए। पूरे खेत में कुछ-कुछ ही हिस्से हैं, जहां गेहूं की मुरझाई सी फसल चार-छह ऊंची नजर आती है।
 ये मैदानी हकीकत है नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की महत्वकांक्षी नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्ववहन सिंचाई परियोजना की। 2489 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्चा करके इस योजना के माध्यम से नर्मदा का पानी बागली से उज्जैन और शाजापुर के 100 गांवों के लिए लाया गया। मार्च में एनवीडीए के उतावले अफसरों ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से इसका उद्घाटन भी करा दिया। 9 महीने हो चुके हैं उद्घाटन को। अब तक 75 गांव में ही पानी पहुंचा। 25 गांव में तकनीकि समस्या के कारण पानी पहुंचाने में योजना को अंजाम देने वाली कंपनी एलएंडटी भी नाकाम है। 
 जब-जब पानी की सप्लाई होती है, कहीं न कहीं लाइन फुट जाती है। जिसे सुधारने में समय लगता है। कभी टेक्नीकली। कभी लाइन फुटने से जिन किसानों का नुकसान हुआ, भरपाई के लिए उनके द्वारा की जा रही जिद के कारण। आबादखेड़ी, कनासिया, बिसनखेड़ा, इटावा, तोबरीखेड़ा, झरनावदा, दुधली, नानूखेड़ा व अन्य गांव। आबादखेड़ी गांव के जगदीश पंडाजी के अनुसार 15 नवंबर से अब तक एक ही बार पानी आया है। यदि मालूम होती कि पानी नहीं मिलेगा, तो हम गेहूं नहीं लगाते।  
किसानों के कारण फुटी लाइन 
एलएंडटी के कारिंदे कहते हैं कि लाइन खराब नहीं डली है, गुणवत्तायुक्त है। हर 300 मीटर पर एक पेटी लगी है। जिसमें 8 से 10 कनेक्शन हैं। जिससे कम्प्यूटराइज्ड जल आपूर्ति होती है। किसान अपने फायदे के लिए पेटी खोलकर कनेक्शन से छेड़छाड़ करता है, लाइन फुट जाती है। 
तराना में बनाया ऑफिस... 
योजना का ऑफिस तराना में बना है। जहां बीस लोगों का स्टाफ है। किसानों की शिकायत पर हिंदुस्तान मेल की टीम मौके पर पहुंची। जहां एलएंडटी के अफसरों से किसान बनकर बात की। उन्होंने हमें भी वैसे ही टाले दिए, जैसे किसानों को देते हैं। बोले आज पंप बंद है, कल से पानी आ जाएगा। हालांकि रविवार को जब हिंदुस्तान मेल ने अफसरों के दावे की तस्दीक की तो पता चला कि पानी नहीं पहुंचा। मतलब, किसानों की शिकायत 100 फीसदी सही थी। 
एक नजर में परियोजना 
लाभान्वित गांव : 100 
तराना-घट्टिया : 83 गांव में 27490 हेक्टेयर
शाजापुर : 17 गांव में 2728 हेक्टेयर 
उज्जैन इंडस्ट्री : 129.60 एमएलडी 
नागदा इंडस्ट्री : 129.60 एमएलडी 
घट्टिया व गुराड़िया : 21.60 एमएलडी पेयजल
आए दिन हो रही लड़ाई 
खेतों में सिंचाई के लिए किसानों के बीच आए दिन विवाद हो रहे हैं, लड़ाई हो रही है। पिछले दिनों तराना के बनावट गांव में पानी को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ। विवाद के बाद रात में किसान सुभाष पिता सीताराम गुर्जर पर हमला हुआ। घायल किसान को तराना के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे उज्जैन रेफर कर दिया गया।

sir मतदाता सूची से 23.64 लाख महिलाओं की छुट्टी

मतदाता सूची से हटने में भी लाड़ली ने मारी बाजी.... 
एसआईआर में कुल 42.74 लाख नाम कटे, इनमें 55.36 प्रतिशत महिलाएं 
पिछले चार चुनाव में रही महिलाओं की जोरदार भागीदारी 
विनोद शर्मा ।  
मप्र में महिलाएं अव्वल है। फिर स्कूल-कॉलेज की परीक्षाओं में बाजी मारने की बात हो या "लाड़ली बहना' जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में। और तो और...। अब चुनाव आयोग द्वारा कराए गए सिस्टमेटिक आइडेंटिफिकेश रिव्यू (एसआईआर) में भी बेटियों ने ही बाजी मारी है! यकीन न हो तो चुनाव आयोग के आंकड़े ही देख लो। जहां एसआईआर के आधार पर 42.74 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाना है। इनमें 19.19 लाख की वोटर पुरुष हैं जबकि महिलाओं की संख्या 23.64 प्रतिशत। मानें जिन मतदाताओं के नाम हटना है उनमें 55.36 प्रतिशत सरकार की लाड़लियां हैं।  
 एसआईआर के बाद मप्र की वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है। एसआईआर 2025 में 42.74 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं। जिनके नाम अन मैपिंग, शिफ्टेड, मल्टीपल एंट्री और डेड वोटर के रूप में एंट्री पाए गए हैं। प्रदेश में 42.74 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए हैं। 8.40 लाख नाम ऐसे हैं, जिनकी मैपिंग नहीं हुई है। इन्हें हटाने के बाद मप्र में मतदातओं की संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.56 लाख रह गई है। जिसकी जानकारी पत्रकार वार्ता में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने दी थी। झा के अनुसार SIR का पहला चरण पूरा हुआ। प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार मतदाता थे। अब 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार गणना पत्रक प्राप्त हुए हैं। प्रक्रिया के दौरान 42 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। SIR के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 2500 बीएलओ को सम्मानित किया है। 
 जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं, वे प्रारूप 6 के माध्यम से नाम जुड़वा सकते हैं। 30 दिसंबर से 22 जनवरी के बीच दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे और जिनके दस्तावेज सही पाए जाएंगे, उन्हें अंतिम प्रकाशन में जोड़ा जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 21 फरवरी को किया जाएगा।
42 लाख 74 हजार 160 नाम हटे
दिवंगत : 8.46 लाख  
अनुपस्थित : 8.42 लाख   
डुप्लीकेट मतदाता : 2.77 लाख   
शिफ्टेड : 23.09 लाख 
मध्यप्रदेश के 865832 मतदाता ऐसे हैं। इनका नाम 2003 की SIR लिस्ट में था लेकिन 2025 की SIR लिस्ट में उनका नाम नहीं आया है।
कहां कितने मृत मतदाता
अधिकतम
जबलपुर 51 हजार
इंदौर 43 हजार
न्यूनतम   
पांढुरना 4981
हरदा 5303 
   अंतिम प्रकाशन मतदाता(SIR से पहले) मतदाता(SIR से बाद)
पुरुष 2,92,74,141 2,93,91,548 2,74,82,233
महिला 2,78,17,016 2,80,13,362 2,56,48,831
थर्ड जेंडर 1,210 1253 919
कुल 5,70,92,367 5,74,06,143 5,31,31,983
45 दिन चला एसआईआर 
7 नवंबर से शुरू हुई यह प्रक्रिया लगभग 45 दिन तक चली, जिसमें हजारों बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया है। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें इलेक्शन कमीशन की तरफ से नोटिस देकर अपने नाम दोबारा जुड़वाने का अवसर दिया जाएगा।
विधानसभा चुनाव में ज्यादा बढ़े वोटर 
अक्टूबर 2018 50394086 
अक्टूबर 2023 54377095 +39,83,009
फरवरी 2024 56340064 +19,62,969
जनवरी 2025 57092367 +7,52,303
दो साल में महिलाएं बढ़ी थी 15.67 लाख  
   2023 2025 अंतर
पुरुष 28126191 29274141 11,47,950
महिला 26249578 27817016 15,67,438
(अक्टूबर 2018 के मुकाबले 2025 तक 37,40,323 महिला वोटर बढ़ी हैं। वहीं पुरुष मतदाताओं की संख्या में 30,17,984 ही बढ़ी थी। जो महिलाओं के मुकाबले 7,22,339 अधिक है। )
8.65 लाख मतदाताओं को मिलेंगे नोटिस 
23 दिसंबर से प्रदेश में 8 लाख 65 हजार 832 मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे. इनमें इंदौर में सबसे ज्यादा 1 लाख 33 हजार 696 मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे.
किस जिले में कितने जाएंगे नोटिस
इंदौर - 133696
भोपाल - 116925
जबलपुर - 69394
ग्वालियर - 68540
उज्जैन - 48035
सबसे कम नोमैपिंग वाले जिले
सीधी-1356
निवाड़ी - 1448
झाबुबा - 1948
उमरिया - 2081
डिंडोरी- 2240

सबसे ज्यादा यहां पते पर नहीं मिले
इंदौर 1,75,424
भोपाल 1,01,053
जबलपुर 66678 
सबसे ज्यादा शिफ्टेड वोटर
भोपाल 2,86,661
इंदौर 1,57,898
ग्वालियर 1,48,273 
सबसे ज्यादा मृत मिले 
जबलपुर 51354
इंदौर 43741
सागर 36467

188.35 करोड़ के बैंकिंग घोटाला में ईडी का छापा

188.35 करोड़ के बैंकिंग घोटाला में ईडी का छापा 
डमी डायरेक्टरों के दम पर खेला रूचि का खेल उजागर 
इंदौर. विनोद शर्मा।
सीबीआई ने पांच साल पहले रूचि ग्रुप से जुड़े जिस मामले में छापेमार कार्रवाई की थी, उसी मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छानबीन शुरू कर दी। मामला कर्ज के नाम पर किए गए 188.35 करोड़ के बैकिंग घोटाले से जुड़ा है। इसमें ईडी की टीम ने शाहरा परिवार के साथ नंदानगर निवासी सचिन गुप्ता के ठिकानों पर भी कार्रवाई की। सचिन को उसके मामा ने रूचि से जोड़ा था। बाद में सचिन ने अपने खाते ऑपरेट करने की जिम्मेदारी रूचि समूह को देकर बड़ी पोस्ट ले ली थी। 
  ईडी ने 23 दिंसबर को छापे मारे थे। कार्रवाई उमेश शाहरा के साथ 112/7 नंदानगर निवासी सचिन गुप्ता के घर-दफ्तर पर भी हुई। ईडी के अनुसार रूचि समूह की कंपनियों के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी, धन के गबन और दस्तावेजों में हेरफेर जैसे मामलों में सीबीआई ने प्रकरण दर्ज किया था। उसी प्रकरण के आधार पर ईडी ने छानबीन शुरू की। बताया जा रहा है कि मेसर्स रुचि ग्लोबल लिमिटेड, मेसर्स रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड और मेसर्स आरएसएएल स्टील प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जांच चल रही है। कैलाश चंद्र शाहरा और उमेश शाहरा द्वारा स्थापित कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी संस्थाओं, जाली साख पत्रों और फर्जी बिक्री/खरीद का इस्तेमाल करके धन की हेराफेरी की। कई बैंकों को नुकसान पहुंचाया।
 तलाशी के दौरान आरोपियों और उनके परिवार के खातों में 20 लाख रुपए बैलेंस मिला। 23 लाख रुपए नकद मिले, जिन्हें सीज कर लिया। बताया जा रहा है कि शिवानी गुप्तान एग्रोट्रेड, इंदिरा इंडस्ट्रीज में गजरा बिवल गियर्स, गोधा केबकॉन में सीएस है। सचिन गुप्ता का नाम आया है उसकी प्रोफाइल पर भी सीएस लिखा है। 

ऐसे खेला खेल... 
2015-16 में हुए फर्जीवाड़े के सूत्र 2019 में ही मिल गए थे। जिनके आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा ने 2020 तक गहरी छानबीन की। फिर इसी कड़ी में इसमें पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक समेत दो अन्य बैंकों में भी कंपनी के कर्ताधर्ताओं के फर्जीवाड़े सामने आए। जांच के तहत कंपनी द्वारा खरीद-फरोख्त में बड़े लेन-देन सामने आए। जिन कंपनियों से लेन-देन बताया उसमें अधिकांश रुचि ग्लोबल लिमिटेड के मुंबई पते पर ही रजिस्टर्ड है। कंपनियों में शाहरा परिवार ने करीबियों को डमी डायरेक्टर बना रखा है। रुचि ग्लोबल लिमिटेड पर करीब 300 करोड़ रु. बकाया था। बैंक 111.65 करोड़ की रिकवरी कर चुकी है। बैंकों का अभी 188.35 करोड़ से ज्यादा बाकी है।
इन कंपनियों में ऐसे किए खेल 
एग्रोट्रेड इंडिया लिमिटेड : इसका पुराना नाम रूचि ग्लोबल लिमिटेड है। दिसंबर 1996 में पंजीबद्ध कंपनी में 2019 तक साकेत बरोदिया, यामिनी जैन, ईश्वर कलांतरी, विजय गुप्ता के साथ उमेश शाहरा भी डायरेक्टर थे। शाहरा को छोड़ बाकि डमी डायरेक्टर थे। कंपनी पर देना बैंक का 343.40 करोड़ बकाया है। 
रूचि एक्रोनी इंडस्ट्री लिमिटेड : 1976 में बनी ये कंपनी अब स्टीलटेक रिसोर्सिंग लिमिटेड बन चुकी है। इसमें राजेश सोनी, नितेश नागर, प्रमोद झालानी,यामिनी जैन,प्रकाश देशमुख, इशिता खंडेलवाल डमी डायरेक्टर रहे हैं या हैं। कंपनी पर यूको बैंक का 61.50 करोड़ बाकि है। जो 2001 में बतौर लोन लिया था। 
आरएसएएल स्टील लिमिटेड : जो अब एलजीबी स्टील प्रा.लि. बन चुकी है। 2010 में कंपनी पंजीबद्ध हुई। इसमें अरविंद मिश्रा,सुनील विजय, शिवानी गुप्ता, इशिता खंडेलवाल, विजय महाजन और अखिलेश गुप्ता डायरेक्ट रहे हैं, जो डमी थे। 
इन तीनों कंपनियों का पता 611 तुलसिआनी चेम्बर नरिमन पॉइंट मुंबई है। जो रूचि समूह का ही पता है।

कचरे में कंचन ढूंढने वालों ने कंचन का कचरा कर दिया

सफाई में नंबर-1 इंदौर के नंबर-1 मार्केट में सफाई ने तोड़ा दम
शायद अफसर थक गए खिताब लेते-लेते
इंदौर. विनोद शर्मा ।
देश-दुनिया को कचरे से कंचन बनाने का हुनर सीखाने वाले इंदौर में "कंचन' का बाजार कचरे से परेशान है। हद तो यह है कि कचरे के कारण कारोबारी और उनके कारिंदे बीमार है। कंचन का कारोबार अपनी चमक खो रहा है। 311 से लेकर 181 तक पर शिकायतें की। निदान के नाम पर कर्मचारी आते हैं, चार तगारी माल उठाते हैं, इससे ज्यादा नहीं होगा कहते हैं और चलते बनते हैं। 
 स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर लगातार आठ बार से नंबर-1 है। भारत सरकार अवार्ड देते हुए नहीं थकी लेकिन लगता है कि इंदौर नगर निगम के जिम्मेदारों का अवार्ड से मन भर चुका है। इसीलिए देश के सबसे साफ शहर इंदौर का सबसे खास मार्केट (सराफा) में 100 मीटर लम्बी और 30 फीट चौड़ी बेकलेन कचरे और मलबे से ओवर फ्लो है। चैम्बर चौक है। ड्रेनेज का गंदा पानी ओवर फ्लो होकर 80 साल पुराने मार्केट की तल मंजिल पर बहता है। बदबू इतनी कि ग्राहक तो ग्राहक, दुकानदार बैठने की हिम्मत न कर पाए। ऊपर से मच्छर-मक्खी और चूहों का आतंक अलग।
 सबसे ज्यादा हालत बुलियन मार्केट की खराब है। जहां तल मंजिल पर 10 ज्वैलर्स की दुकानें हैं। पीछे दो चैम्बर हैं। दोनों चौक। गंदा पानी चार फीट नीचे मार्केट की फ्लोर पर रेलता नजर आता है। यही स्थित जोशी मार्केट व अन्य मार्केट की है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने सीएम हैल्पलाइन से लेकर महापौर हैल्पलाइन तक पर शिकायत करके देख लिया, निदान नहीं होता। 
कचरा हटाकर निगम पार्किंग बना सकता है
बेकलाइन 100 मीटर लम्बी और 30 फीट चौड़ी है, कचरा साफ करके निगम इसका इस्तेमाल पार्किंग के तौर पर कर सकता है। 200 गाड़ियां लग सकती है। दिक्कत यह है कि शिकायत के बावजूद निगम के लोग ध्यान देने को तैयार नहीं। इसीलिए कचरा नहीं उठता। हर जगह शिकायत करके देख लिया, किसी को कोई मतलब नहीं। सभी को मेनरोड की सफाई से मतलब है, बेकलेन बर्बाद हो जाए, क्या लेना-देना। 
ललित बड़जात्या, बड़जात्या ज्वैलर्स 
दो तगाड़ी कचरा, चार दिन की चांदनी
पार्षद को बोलो तो कर्मचारी भेज देते हैं, जो बेमन से काम करते हैं, दो-चार तगारी माल हटाते हैं, उसके भी पैसे लेकर चले जाते हैं। चार दिन बाद फिर वही हालत। 
प्रवीण सोनी, बाबूलाल हेमराज फर्म
मार्केट नीचे, सीवरेज ऊपर 
पहले गली खुदी थी, पेवर लगने के लिए। तब सीवरेज लाइन डली थी। मार्केट की तल मंजिल से चार फीट ऊंची कर गए लाइन। इसीलिए चैम्बर का ओवर फ्लो बुलियन मार्केट से क्रॉस होता है। 
कौशल सोनी, सोनी ज्वैलर्स 
एक दिन में निदान नहीं, 15 दिन लगेंगे 
चैम्बर जाम है। मार्केट में पानी घुसता है। चूहें और कॉकरोच से व्यापारी परेशान है। गली के साथ ही दुकानें भी पोली कर दी है। व्यवस्था सुधारना, एक दिन का काम नहीं है। 15 दिन सतत काम करना होगा।  
अजय रांका, राजहंस 
कस्टमर बैठने की हिम्मत नहीं करता
बदबू के कारण हमारा बैठना मुश्किल होता है। कस्टमर पूरे टाइम मुंह पर रूमाल रखकर बैठता है। हमें तो बैठना है, मजबूरी है लेकिन मच्छरों के काटने से ग्राहक बीमार होता है सो अलग। 
आरती जैन, गौरव ज्वैलर्स
सेहत और कारोबार प्रभावित 
मैंने ऑनलाइन शिकायत की। कारीगर आते हैं, कचरा उठाते हैं, बदबू और कीड़ों का निराकरण नहीं होता। बदबू के मारे ग्राहक बैठता नहीं। कारोबार प्रभावित हो रहा है। 
अंकित राठौर, आदिनाथ ज्वैलर्स
चूहो ने कुरेद दी दुकानें 
कारोबार करना है तो बैठना है। मच्छर काटे या कीड़े। बस इसी चक्कर में बीमार हो रहे हैं। चूहे बड़े-बड़े हैं, दुकानों को पोला कर रहे हैं। गली सुधर जाएगी तो पार्किंग या अन्य काम भी आ सकती है।  
राधेश्याम जोशी, जोशी ज्वैलर्स 
हल्के में ले रहे हैं सराफे की समस्या 
सराफे की समस्या को हल्के में लिया जा रहा है। सराफा- चौपाटी धरोहर मानते हैं लेकिन सफाई नहीं होती। ड्रेनेज लाइन चौक रहती है। शिकायत करते हैं, दो बजे गाड़ी लेकर आते हैं, परेशान करते हैं। 
गगन गुप्ता, व्यापारी
बाजार खुलने के बाद नहीं आती कचरा गाड़ी
लम्बे समय से परेशान हैं। शिकायतों का निदान नहीं। कचरा गाड़ी सुबह 7 बजे आती है। बाजार खुलता है 12 बजे। फिर गाड़ी नहीं आती। बैकलाइन में जाने का रास्ता बंद कर रखा है। कहते हैं जाने की जगह नहीं।   
विजय सोनी, व्यापारी 
संवारने का बोला, तब से गली खराब
गली पहले अच्छी थी। निगम ने संवारने का सपना दिखाया था उसके बाद से हालात बद्तर हो गए। जगह बहुत है। कमसकम हम जैसे रहवासियों के बच्चों के ही खेलने के काम आ जाएगी, यदि साफ रहे तो।  
जम्बू जैन,व्यापारी-रहवासी

सबसे अलग, जनबस की झलक

 लोक परिवहन की तैयारियां तेज, इंदौर पहुंचा 24 बसों का लॉट
सभी एडवांस फेसिलिटिज से लैस है बसें 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
मप्र की आवाम से सरकारी परिवहन सेवा देना को वादा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले दिनों किया था उस पर मैदानी काम शुरू हो चुका है। अप्रैल से इंदौर में जो लोक परिवहन शुरू होना है उसके लिए दो दर्जन बसें इंदौर पहुंच चुकी है। मुंडला नायता आईएसबीटी पर खड़ी ये बसें इलेक्टिक और फूली ऐसी है। बहरहाल, इन बसों की टेस्टिंग जारी है। 
 लोक परिवहन का पहला चरण इंदौर से शुरू होगा। इसके तहत 32 रूट तय हुए हैं। जहां कुल 310 बसें चलेगी। नए बस स्टैंड की दोपहिया-चार पहिया पार्किंग में ई-बसों (जनबस) का पहला लॉट आ चुका है। सबसे पहले हिंदुस्तान मेल ने इन बसों का जायजा लिया। बसें आइशर कंपनी की है। जिन्हें स्काईलाइन प्रो का नाम दिया है। इस बस में 25 लोगों के सीट पर बैठने की व्यवस्था है। फूली ऐसी है। आपको गर्मी का अहसास नहीं होगा। ड्राइवर सीट के सामने पंखा लगा है, ताकि ड्राइवर को हवा मिलती रहे।  
 फायर एस्टिंग्यूशर हैं। जीपीएस इंस्टॉल है। आगे-पीछे स्क्रीन लगी है, जिस पर यात्रियों को स्टॉप की जानकारी मिलेगी। इमरजेंसी सर्विस के तहत दो गेट है। दोनों ही ऑटोमेटिक हैं। मेनगेट वैसा ही बड़ा है, जैसा सिटी बसों में हम देखते आए हैं। इसके साथ आपातकालीन स्थिति में ड्राइवर को बस रोकने का संदेश देने के लिए हैंडल पर स्टॉप बटन लगा है। 
 सीटें दो-दो के सेट में लगी है। विंडो साइड दोनों तरफ पांच-पांच लाइन है। बीच का स्पेस खाली है। दो चेयर ड्राइवर के पीछे है। सीट स्ट्रेट हैं और कम्फर्टेबल है। इन बसों के लिए तकरीबन दो हजार वर्गफीट का चार्जिंग स्टेशन बनना है, जिसका काम शुरू हो चुका है। 
व्हीलचेअर भी अंदर चली जाएगी 
खास बात यह है कि मेनगेट और क्लीनर गेट के बीच तीन से साढ़े तीन फीट चौड़ा एक गेट अलग लगा है, जहां फोर्डेबल रैंप की व्यवस्था है। यदि कोई यात्री व्हीलचेयर पर है तो रैंप के माध्यम से उसकी व्हीलचेयर सीधे बस में चली जाएगी। यात्री को उतरने या उतारने या चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
भगवा रंग... 
दूसरी खास बात बसों का भगवा रंग है। चूंकि इंदौर से लेकर दिल्ली तक भाजपा की सरकार है और भाजपा भगवा-सनातन की पेरोकार है। इसीलिए पहले चरण की इन बसों का रंग भगवा रखा गया है। इन बसों का उपयोग लोकार्पण में होगा। 
अन्य सुविधाएं...
स्पीड गर्वनर, जीपीएस, ऑटोमेटिक ड्राइविंग सिस्टम (अडास), लाइव मॉनिटरिंग व अन्य।

Monday, November 10, 2025

जीतू पटवारी

गरीबों का हक जीम गया जीतू

मात्र 30 सेकंड में आग का गोला बन जाती है बस

काले हिरन का शिकार

o भैया बुरा मानो या भला मैं तो चला

प्रभु मेट्रो ही नहीं हमारी सोच नियोजित है

मानवों के खिलाफ मच्छरों का निर्णायक युद्ध

धोखाधड़ी का आदि पालावत निकला कर्जा किंग


चार कंपनियों के नाम से 20 साल में लिया 116 करोड़ का लोन, 104 करोड़ अब भी बाकि
राजस्थान के जोधपुर में भी बैंक की शिकायत पर हुई कोर्ट ने कहा था केस दर्ज करें 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
जोधपुर की सीबीआई कोर्ट के आदेश की जानकारी छिपाकर झूठे शपथ-पत्र से कॉलोनाइजर लाइसेंस लेने वाला विनोद पालावत बैंकों को टोपी पहनाने में भी माहिर है। बुलढाणा अर्बन क्रेडिट सोसाइटी और पंजाब नेशनल बैंक इसके पीडित है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो 2023 से 2023 के बीच 20 साल में पालावत की कंपनियों ने 116 करोड़ से ज्यादा का लोन लिया और चुकाया सिर्फ 12 करोड़ ही। अब भी आधा दर्जन से अधिक बैंका का 100 करोड़ रुपए से ज्यादा पालावत और उनसे जुड़ी कंपनियों पर बकाया है।  
 पालावत ने अपने करियर की शुरुआत लक्ष्मी पाइप्स नाम की कंपनी से की थी। वे लक्ष्मी पाइप्स एंड फिटिंग, सोनिका इंजीनियरिंग और रिद्धि इन्फ्रास्ट्रक्चर छोड़ चुके हैं। इन कंपनियों पर 70 करोड़ से ज्यादा बकाया है। पूरा लोन तब तक ही लिया गया जब तक पालावत डायरेक्टर रहे। अब पालावत जी-9 इन्फ्राटेक, शुभांगी एस्टेट प्रा.लि. और लक्ष्मी लैंड डेवलपर्स में डायरेक्टर हैं। इन कंपनियों पर 34.50 करोड़ रुपए बकाया है। पंजाब नेशनल बैंक ने 25.25 करोड़ का लोन दिया था। ये लोन पालावत की कंपनी लक्ष्मी पाइपस एंड फिटिंग्स प्रा.लि. के नाम पर लिया गया था। इस पैसे की रिकवरी के लिए बैंक को सरफेसी एक्ट के तहत कार्रवाई करना पड़ी। जिसे पालावत ने कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने 10 मार्च 2022 को इसे खारिज कर दिया था।  
 दूसरी तरफ ईओडब्ल्यू पालावत और हरीश चौधरी के बुलढाणा अर्बन क्रेडिट सोसाइटी से कनेक्शन व लोन की प्रक्रिया की जांच कर रहा है। ईओडब्ल्यू के अधिकारियों का कहना है कि बुलढाणा से लोन मिलीभगत से मिला। इसमें हरीश चौधरी ने अहम रोल निभाया। 
इन कंपनियों के नाम पर किया खेल 
लक्ष्मी पाइप्स एंड फीटिंग : 1987 से पंजीबद्ध इस कंपनी को 2003 से 2009 के बीच पंजाब नेशनल बैंक की मनोरमागंज ब्रांच व अन्य शाखाओं से कुल 48.45 कराड़ का लोन मिला था। विभिन्न वेबसाइट्स के अनुसार अब तक इसमें से बमुश्किल 2 करोड़ का लोन चुकाया गया। 11 नवंबर 2011 को पालावत ने कंपनी छोड़ी थी। उनके कंपनी में रहते 48.20 करोड़ का लोन हुआ। उनके कंपनी छोड़ने से ठीक पांच महीने पहले पीएनबी ने 27.50 करोड़ का लोन रिन्यू किया था। अब कंपनी में श्रीचंद अोसवाल और छगनचंद जैन डायरेक्टर हैं। 
सोनिका इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड : ये कंपनी 2009 में बनी। भोपाल के पते पर पंजीबद्ध कंपनी जुलाई 2022 तक डायरेक्टर और एडिशनल डायरेक्टर रहे। 28 अप्रैल 2011 से 20 अगस्त 2016 के बीच कुल इलाहबाद बैंक, बैंक ऑफ बरौदा, चर्चगेट इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी और आंध्रा बैंक से कुल 27.13 करोड़ का लेान हुआ है। इसमें से 3.13 करोड़ का लोन ही क्लोज हुआ है जो आंध्रा बैंक से लिया था। बाकि कायम है।  
जी-9 इन्फ्राटेक प्रा.लि. : ये कंपनी 14 दिसंबर 2013 में बनी। एक लाख रुपए की पेडअप और एक लाख रुपाए की अथॉराइज्ड कैपिटल वाली इस कंपनी को 21 दिसंबर 2016 से 16 मई 2022 के बीच बुलडाना अर्बन कोऑपरेटिव सोसाइटी से 20 करोड़ का लोन मिल चुका है। इस कंपनी में विनोद के साथ पंकज चौधरी पार्टनर है जो कि हरीश चौधरी का भाई है। बड़ी बात 21 से 31 दिसंबर 2016 के बीच 10 दिन में ही 7 करोड़ का लोन मिल चुका था।  
लक्ष्मी लैंड डेवलपर्स प्रा.लि : दिसंबर 2007 में कंपनी बनी। 2.5 लाख रुपए की अथॉराइज्ड और पेडअप केपिटल के साथ बनी इस कंपनी को अब तक 24 जुलाई 2008 से लेकर 20 दिसंबर 2023 के बीच 20.77 करोड़ का लोन मिला। जो एचडीएफसी, पीएनबी, ओरिएंट बैंक, रेलीगेयर फिनवेस्ट और बुलढाणा अर्बन क्रेडिट सोसाइटी ने दिया। इसमें से 6.20 करोड़ का लोन क्लोज हो गया। 14.5 करोड़ की बुलढाणा की मेहरबानी कायम है।

स्वीमिंग पूल में धूल ही धूल


प्रगति पथ पर खत्म नहीं हो रहा नेहरू पार्क और अटल पूल के जीर्णोद्धार का सफर 
विश्राम बाग का पूल प्रगति पर, पुष्कर में ही तरण सुविधा
आईडीए का पूल ठेके पर 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
स्वच्छता में आठ साल से नंबर-1 आ रहा इंदौर अद्भूत इंजीनियरिंग, विकास कार्यों की गति और विकास के नाम पर फिजुलखर्ची में भी ऊंचाई छू रहा है। शहर के कई सरकारी मुजस्समें इसका उदाहरण है। हालांकि हम आज बात करेंगे सिर्फ स्वीमिंग पुल की। जो कि सरकारी अनदेखी और हिलाहवाली के कारण मुफलिसी में हैं। 4 करोड़ की लागत से नेहरूपार्क स्वीमिंग पुल का रिनोवेशन शुरू तो हुआ लेकिन निगम समय पर काम पूरा कराने में नाकाम रहा। दूसरी तरफ अटल खेल संकूल में बना स्वीमिंग पुल है जो 20 साल से उद्घाटन के इंतजार में बदहाल है।  
 सबसे पहले बात नेहरू पार्क स्वीमिंग पुल की। 4 करोड़ की लागत से इस पूल का जीर्णोद्धार हो रहा है। भोपाल की कंपनी काम कर रही है। जीर्णोद्धार का मकसद है पूल को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। हालांकि नगर निगम के अधिकारी यह भूल गए कि इंदौर विकास प्राधिकरण पहले ही रिंग रोड पर अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला पूल बना चुका है। ये बात अलग है कि अब तक अंतरराष्ट्रीय हुई नहीं। ऐसे में नेहरू पार्क पूल पर इतना पैसा लगाने की जरूरत तो नहीं थी। थोड़ी-बहुत साज-सजावट हो जाती, पूल संवर जाता। खैर, काम शुरू हुआ ठीक है, अप्रैल 2025 तक खत्म होना था लेकिन कार्य लगातार प्रगति पर ही है।   
 शनिवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मौके पर पहुंचकर कंपनी के कर्मचारियों की खिंचाई की। काम जल्दी पूरा करने को कहा है। जब भार्गव मौके पर पहुंचे तो देखा कि टाइल्स लगाने में मनमानी की जा रही है। इससे पहले एमआईसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया भी कंपनी की क्लास लगा चुके हैं लेकिन कंपनी को सबक नहीं मिला।  
20 साल से तैराकों का इंतजार है... 
स्कीम-78 में बड़ा भारी अटल खेल संकूल बना है। इस संकूल में 2005-06 में इस परिसर में 3800 वर्गफीट का स्वीमिंग पूल बनाया था। तब तकरीबन 65 लाख रुपए की लागत से बने इस स्वीमिंग पूल के साथ चैंजिंग रूम और खिलाड़ियों ठहरने के लिए भी कमरे बने थे। मौजूदा सभापति मुन्नालाल यादव जब वार्ड 10 के पार्षद थे तब ये बना था। इसके बाद एक बार और पार्षद रह लिए। इससे पहले उनके खास छाया देशमुख, जितेंद्र बुंदेला भी पार्षद रह लिए। अभी राजेंद्र राठौर जैसे कद्दावर पार्षद हैं लेकिन पूल की दशा है कि सुधरती नहीं। 2022 में निकाय चुनाव से पहले आप नेताओं ने प्रदर्शन करके स्वीमिंग पूल चालू करने की मांग की थी। अब भी हालात यह है कि बरसात का पानी ही जमा मिलता है। उसे निकालने की भी व्यवस्था नहीं है। 
जल्द मिलेंगे दोंनों पूल 
नेहरू पार्क और अटल पूल का जीर्णोद्धार जारी है। जल्द ही अत्याधुनिक सुविधाओं से लेस पूल तैयार हो जाएंगे। अन्य खेल गतिविधियों का भी विस्तार होगा। कंपनियों को स्पष्ट कर दिया है काम में गति लाएं। 
राजेंद्र राठौर, प्रभारी 
जनकार्य 
------------------------------------
महू नाका पूल में मनमानी 
महू नाका पर जो तरण पुष्कर है। जो 1969 में बना था। महू नाका पर जो फ्लाईओवर बनना है पुल उसके अलाइनमेंट में आ रहा है। इसीलिए उसके टुटने की संभावना बढ़ गई है। पूर्व महापौर मालिनी गौड़ और आयुक्त प्रतिभा पाल इसकी विधिवत घोषणा कर चुके थे। इस पुल पर पिछले दिनों ही रंगाई-पुताई पर खर्च हुआ है। यहां 800 लोग रोज स्वीमिंग के लिए आते हैं। एक व्यक्ति 1240 रुपए महीने देता है। पूल ने हाल ही में उत्तराखंड में संपन्न हुई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में 2 मैडल दिए हैं।  
आराम से बन रहा है विश्राम पूल 
2018 में विश्राम बाग में अंतराष्ट्रीय स्तर के स्वीमिंग पूल का काम शुरू हुआ था जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। काम आराम से चल रहा है। 50 मीटर लंबे व 25 मीटर चौड़े इनडोर स्विमिंग पूल में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं कराए जाने के दावे किए जाते रहें हैं लेकिन यहां एक ही पूल बना है। एक पूल छोटा है, जिसमें घुटने तक भी पैर नहीं डूबेंगे। इसीलिए इसे फ़ेडरेशन इंटरनेशनेल डी नैटेशन ( फिना) की मान्यता प्राप्त होना मुश्किल है। जैसी कि आईडीए के स्वीमिंग पूल को मिली है।

धूल से मुक्ति दिलाने की कर दी भूल

हे भगवान ! ये क्या किया...?

दिवाली पर संवरना थी सड़कों की सूरत, 70 प्रतिशत बड़ी सड़कें अब भी बदहाल
निर्माणाधीन फ्लाईओवर की "सर्विस" ले रही शहरवासियों की सांसों की परीक्षा 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
रविवार की सुबह बेमौसम बरसात करके भगवान ने नगर निगम की करी-कराई महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया...। जैसे-तैसे सड़कें उधड़ी थी...चूरी बिखरी थी...धूल का गुबार बनने लगा था...वाहनों की गति थमी थी...कोरोना के बाद से ठंडी पड़ी मास्क की डिमांड ने रफ्तार पकड़ी ही थी...कि अचानक हुई बेमौसम बरसात ने लोगों को फौरी ही सही लेकिन बड़ी राहत दे दी। कमसकम एक-दो दिन तो धूल नहीं उड़ेगी।
 देश के सबसे साफ शहर इंदौर की सड़कों की मौजूदा दशा दिग्विजय शासन की याद दिला रही है जिसे भुनाकर भाजपा ने जनता के दिलों में जगह बनाई थी। एबी रोड पर देवास नाका और सत्यसाईं फ्लाईओवर बन रहे हैं। मेनरोड पर काम जारी है। वहीं सर्विस रोड पूरी तरह बर्बाद है। यही हाल रिंग रोड का है। जहां रेडीसन से लेकर खजराना तक मेट्रो का काम चल रहा है। सड़क पर गड्ढे ज्यादा हैं। धूल उड़ रही है। 
 बायपास की हालत सबसे जुदा है। ये रोड नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की जद में आता है। अब तक एनएचएआई को उसके काम की गति और गुणवत्ता के लिए जाना जाता था लेकिन इंदौर के अफसर इस बार अर्जुन बरौदा, बेस्ट प्राइज, रालामंडल फ्लाईओवर के नाम पर लेटलतीफी का इतिहास रच रहे हैं। जिसका खामियाजा लोगों को धूल और धूल के साथ उड़ती रेती के रूप में चुकाना पड़ रही है। लोर्कापण के कुछ ही महीनों बाद धूलपूर बने राऊ फ्लाईओवर ने गुणवत्ता के गुणगान पर ब्रेक लगा दिया।  
 भरी बरसात में नगर निगम जो पेंचवर्क करने की मशीन लाया था, वह लापता है। कहां के गड्ढे भर रही है, राम जाने। हर बरसात में सड़कें खराब होती है लेकिन दिवाली तक 70 प्रतिशत संवर भी जाती है। यह पहली बार है कि दिवाली के बाद भी 70 प्रतिशत सड़कें खराब है। जहां धूल बड़ी समस्या है इसीलिए जरा भी बेमौसम बरसात होती है और लोग भगवान का धन्यवाद अदा करने लगते हैं।  
सर्विस रोड बाद में बनाने का नया सिस्टम
इंदौर को राजनीतिक-प्रशासनिक नवाचारों की लत लग गई है। इसीलिए तो नवाचार शुरू करते हुए विकास के नाम पर पहले मैन रोड को उखाड़ा जाता है। ट्रेफिक सर्विस रोड पर छोड़ा जाता है। सरकार की इस "सर्विस" से लोगों की "स्लीप" और "सांसों" के साथ गाड़ियों की " सर्विसिंग" सांसत में है। जब विकास पूर हो जाता है और लोगों के लिए सर्विस रोड की जरूरत नहीं रह जाती तब जाकर उसका जीर्णोद्धार शुरू करने की अद्भूत परम्परा इंदौर ने शुरू की।
यूं खराब नहीं हो जाती सड़कें..मेहनत लगती है
इंदौर मालवा में है और मालवा की मिट्टी काली है। काली मिट्टी बरसात होते ही फूलती है और मिट्टी फूलते ही डामर की सड़क में गड्ढे और दरारें आ जाती है...। इंजीनियरों की इन बेहुदा दलिलों और उम्रदराजी के लम्बे दावों ने इंदौर को सीमेंटेड सड़कों का गढ़ बना दिया। ये बात अलग है कि तीन-चार साल बाद ही कांक्रिड की सड़क भी उधड़ने लगी और अफसरों को डामर बिछाकर दरारें छिपाना पड़ी। 
अब ये कोई नहीं समझा पा रहा है कि कांक्रिट की सड़कें कैसे उखड़ी। चलो उखड़ गई तो भी उस पर जो डामर की सड़क बनी वह कैसे उखड़ गई उसके नीचे तो काली मिट्टी भी नहीं थी? जैसे सवालों के जवाबों से बचने के लिए अफसरों ने फ्लाईओवर पर ऐसे काम किए हैं जो जारी सी बरसात में गड्ढे बन जाते हैं। जबकि वहां तो पानी भी नहीं रूकता।

'सरकार' के हटते ही तोड़फोड़ बंद

फिर अटकी बीआरटीएस की बिदाई

आज आएंगे एजेंसी मालिक, जानेंगे काम क्यों बंद हुआ
इंदौर. विनोद शर्मा । बीआरटीएस तोड़ने के लिए नगर निगम को एजेंसी भी अपने जैसी ही मिली है। जैसे नगर निगम के कर्मचारियों से कोई काम लेना है तो उनके सामने खड़े रहना जरूरी है। जैसे ही आप हटे, निगमकर्मी फुर्र। ऐसे ही खुजनेर की एजेंसी ने रविवार को तब तक ही बीआरटीएस का तोड़ा जब तक जनप्रतिनिधि और मीडिया के लोग वहां खड़े थे। जैसे ही सब गए, वैसे ही काम बंद। 
 बीआरटीएस हटाने को लेकर नगर निगम कितना गंभीर है? इसका अंदाजा हाईकोर्ट के आदेश और काम शुरू होने के बीच के नौ महीनों की गेप से लगाया जा सकता है। बीआरटीएस तोड़ने का ठेका दिनेश यादव 'बाबा' ने लिया है। जो खुजनेर के ठेकेदार हैं। इतना ही नहीं खजुनेर विधायक अमरसिंह यादव के भांजे भी हैं। दिनेश यादव एंड कंपनी ने देव उठनी ग्यारस पर जीपीओ से बीजेपी कार्यालय के बीच उस हिस्से को तोड़ना शुरू कर दिय था जहां हाईकोर्ट से मिले आदेश के तत्काल बाद नगर निगम ने रैलिंग हटा दी थी।
 महापौर पुष्यमित्र भार्गव और जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर के साथ ही शहर के 50 से ज्यादा मीडियाकर्मी तोड़ार्पण के साक्षी बने थे। हालांकि जैसे ही सब गए, काम बंद हो गया। इसीलिए रविवार को जीपीओ से लेकर पीसी सेठी हॉस्पिटल के सामने के हिस्से को ही तोड़ा गया। चार दिन हो चुके हैं। काम क्यों बद है? किसी को नहीं पता। 
 प्रदेश में चल रहे यदुकाल में दिनेश यादव एंड कंपनी से सवाल करने की हिमाकत करे भी कौन? इसीलिए किसी ने ये पूछा ही नहीं कि आखिर काम बंद क्यों हैं। हिंदुस्तान मेल ने दिनेश यादव से बात की। उन्हें ये तो पता था कि काम बंद है लेकिन काम क्यों बंद है, नहीं पता था। उन्होंने कहा कि मैं अभी खुजनेर हूं। गुरूवार को इंदौर आऊंगा। तब पता करूंगा कि आखिर काम बंद क्यों है? 
'सरकार' मौके पर होंगे, तभी हटेगी रैलिंग 
बीआरटीएस पर तोड़ार्पण बंद होने से शहर की आवाम नाराज है। लोगों का कहना है कि कंपनी शायद तभी काम करेगी जब 'सरकार' मौके पर खड़े होंगे। इसीलिए शहर के सभी जनप्रतिनिधियों को अपनी ड्यूटी डिसाइड कर लेना चाहिए ताकि कॉरिडोर जल्द से जल्द टूटे। 
ऐसे कितने दिन लगेंगे.... 
- 21 नवंबर 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि बीआरटीएस हटेगा। 
- 27 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बीआरटीएस तोड़ने के आदेश दिए थे।  
- 27 फरवरी 2025 की इसी रात को जनप्रतिनिधियों ने बीआरटीएस की रैलिंग हटाना शुरू कर दी।  
- जीपीओ से लेकर बीजेपी कार्यालय तक की रैलिंग हटी। फिर काम रूक गया। 
- फरवरी से लोग कॉरिडोर हटने का इंतजार करते रहे। काम दोबारा शुरू हुआ 1 नवंबर को। 
- कुल 11.500 किलोमीटर लम्बा है कॉरिडोर। इसमें से फ्लाईओवर निर्माण के कारण 2.5 किलोमीटर हिस्से की रैलिंग हट चुकी है। 9 किमी रैलिंग हटना है। स्टेशन टूटना है। गति यही रही तो टूट फुट में ही सालभर लग जाएगा।

3.25 करोड़ ट्रांसफर, सुविधाओं के नाम पर िगना रहे हैं संकट

माहेश्वरी ट्रस्ट ने कॉलेज को बनाया कमाई का जरिया 

जिम्नेशियम-कैफेटेरिया सिर्फ ब्रोशर में ही, स्टूडेंट्स ने डिमांड की, जवाब मिला जहां है वहां एडमिशन ले लो 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
77 से 4700 स्टूडेंट्स तक का सफर तय करने वाला आरपीएल माहेश्वरी कॉलेज इन दिनों माहेश्वरी ट्रस्ट की मनमानियों की मार झेल रहा है। कॉलेज को ट्रस्ट अपनी कमाई का जरिया बना चुका है। इसीलिए तो 2025 के 10 महीनों में कॉलेज के अकाउंट से ट्रस्ट ने 3.25 करोड़ रुपए अपने अकाउंट में ट्रांसफर किए हैं। अब तंगी का बहाना बनाकर कॉलेज में जिम्नेशियम और कैफेटेरिया बनाने को तैयार नहीं है। उलटा, जो स्टूडेंट्स आवाज उठाते हैं, उन्हें कहा जाता है जिन्हें जिम्नेशियम चाहिए वे दूसरे कॉलेज में एडमिशन ले लें। 
 कॉलेज में अकेडमिक स्टाफ और मैनेजमेंट के बीच तनातनी जारी है। जिसका खामियाजा स्टूडेंट्स और कॉलेज चुका रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक दर्जन से अधिक स्टूडेंट्स टीसी निकाल चुके हैं जिन्होंने जुलाई में ही एडमिशन लिया था। इसमें कई फस्र्ट ईअर में हैं। जिस कॉलेज ने अपने पैसों से कॉलेज परिसर में स्कूल की बिल्डिंग बनवा दी, उसे अचानक किसकी नजर लग गई? इसका जवाब है पुरुषोत्तमदास पसारी। ट्रस्ट मैदान के सबसे बड़े खिलाड़ी कहलाने वाले पसारी दो साल पहले ही माहेश्वरी के ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हैं। 
 उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद ही कॉलेज के प्रेसिडेंट रामअवतार जाजू के माध्यम से कॉलेज के खाते से 3.25 करोड़ रुपया ट्रस्ट के अकाउंट में ट्रांसफर करा लिया। इसके लिए न कोई प्रस्ताव पास हुआ। न ये बताया गया कि इस रकम का ट्रस्ट क्या करेगा? ट्रस्ट ने इसके पहले भी कॉलेज के अकाउंट से बतौर लोन पैसा लिया था। जिसका जिक्र अकाउंट सेक्शन में है। इस बार ऐसे किसी कारण का उल्लेख नहीं है। 
नियमों के खिलाफ है फंड ट्रांसफर
कॉलेज आरपीएल माहेश्वरी विद्यालय ट्रस्ट द्वारा संचालित है। ये ट्रस्ट फर्म एंड सोसाइटी में पंजीबद्ध है। इसके बायलॉज के अनुसार कॉलेज के फंड को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।  
विश्वविद्यालय परिनियम कॉलेज कोड 28 के तहत कॉलेज का पैसा उसकी फाउंडेशन सोसाइटी भी नहीं ले सकती। पैसे का उपयोग कॉलेज में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और स्टाफ के नियमित वेतन पर खर्च होना चाहिए।  
ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एज्यूकेशन (एआईसीटीई) कॉलेजों को मान्यता देती है। उसके द्वारा एडमिशन एंड फीस रेग्यूलेटरी कमेटी(एएफआरसी) बनती है जिसके तहत कॉलेज का पैसा ट्रांसफर नहीं हो सकता।  
सभी संस्थाओं के साथ धोखा 
इन सभी जगह कॉलेज के अध्यक्ष या ट्रस्ट को शपथ-पत्र के साथ लिखकर देना पड़ता है कि वह भविष्य में इन संस्थाओं के नियमों का पालन करेगा? वहीं माहेश्वरी काॅलेज के पैसे का मनमाना उपयोग करके माहेश्वरी ट्रस्ट सभी के मापदंडों का उल्लंघन कर रहा है। 
कॉलेज की साख गिरने लगी है...
काॅलेज में स्टूडेंट्स की संख्या 2021-22 में बढ़बर 4700 तक पहुंच गई है जो कि फिर से 3100 तक आ गई है। इसका असर कॉलेज की कमाई पर भी पढ़ेगा। जो 5.25 करोड़ तक पहुंच गई थी। 
विगत कई दिनों से कॉलेज की नकारात्म्क खबरों से स्टूडेंट्स के साथ ही फेकल्टी भी टेंशन में है। मैनेजमेंट लगातार नोटिस पर नोटिस दे रहा है, ताकि फाइल मजबूत हो जाए, उसी के आधार पर फेकल्टी की छूट्‌टी की जा सके।  
(मामले में कॉलेज के अध्यक्ष रामअवतार जाजू से हिंदुस्तान मेल ने उनका पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने आधी बात सुनकर फोन काट दिया।)

पसारी के प्रताप से पसर गए स्कूल


आरके डागा और बीडी तोषनीवाल स्कूल बंद
ताला लगाने में माहिर है शैक्षणिक संस्थाओं का ट्रस्टमैन
इंदौर. विनोद शर्मा ।  
माहेश्वरी ट्रस्ट की कमान जब से पुरुषोत्तम दास पसारी को सौंपी गई है आरपीएल माहेश्वरी कॉलेज की उलटी गिनती शुरू हो गई। कॉलेज की अच्छी-भली व्यवस्था को बिगाड़ने में पसारी माहिर है। उनकी इसी अदा ने उनका श्री व्यंकटेश्वर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज बंद करा दिया। अब बारी माहेश्वरी कॉलेज की है, जो इन दिनों अकेडमिक स्टाफ और मैनेजमेंट के कलेश का केंद्र बना हुआ है।  
 पुरुषोत्तम पसारी दो साल पहले आरपीएल माहेश्वरी विद्यालय ट्रस्ट के अध्यक्ष बने थे। उनके अध्यक्ष रहते ट्रस्ट द्वारा संचालित आरके डागा स्कूल और बीडी तोषनीवाल स्कूल बंद हो चुके हैं। दो साल पहले जब पसारी अध्यक्ष बने थे, तब ही बीडी तोषनीवाल स्कूल का 26वां व आखिरी वार्षिकोत्सव हुआ था। 1997 से 2011 के बीच पसारी इसी स्कूल की वर्किंग कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं।  
  राधाकृष्ण (आरके) डागा स्कूल की भी यही कहानी है। ये स्कूल 2004 में शुरू हुआ था। इंदौर के श्रेष्ठ स्कूलों में से एक रहा है ये स्कूल। 2024-25 के शिक्षा सत्र तक ये स्कूल भी अच्छा चला। आए दिन बेहतर परिणाम और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सुर्खियों में रहा। अब स्कूल की इस इमारत का उपयोग ट्रस्ट ऑफिस की तौर पर किया जा रहा है। दाेनों ही स्कूल में तकरीबन 1200 स्टूडेंट्स पढ़ाई करते थे।

Tuesday, October 7, 2025

10 साल पहले बना था अनिल अंबानी पर कार्रवाई का पाथ


जयपुर-रिंगस रोड का ठेका लेकर आर.इन्फ्रा ने सौंपा था महू की कंपनी को
बाद में पाथ के रास्ते गीत एक्जिम के खातों से दुबई तक पहुंचे थे 80 करोड़ 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
अनिल अंबानी की आर.इन्फ्रा के चक्कर में महू की पाथ इंडिया पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमार कार्रवाई की। अगस्त 2014 को पाथ पर हुई इनकम टैक्स की सर्च और आर.इन्फ्रा के खिलाफ सेबी की जांच में हुए खुलासों के आधार पर कार्रवाई हुई। बताया जा रहा है कि दोनों कंपनियों की जुगत ने तकरीबन 700 करोड़ की हेराफेरी और 100 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय हवाले को अंजाम दिया था। 
 हिंदुस्तान मेल की छानबीन में पता चला कि पाथ और अग्रोहा इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ इनकम टैक्स ने 27 अगस्त 2014 में छापा मारा था। 1 सितंबर को दोनों कंपनियों ने संयुक्त रूप से 75 करोड़ की अघोषित आय सरेंडर की थी। 2015 की शुरूआत में इनकम टैक्स ने एक रिपोर्ट भोपाल-दिल्ली भेजी। रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2009 में आर-इन्फ्रा को मिले 53 किलोमीटर लंबे एनएच-11 (जयपुर-रींगस रोड) के ठेके का काम पाथ ने पूरा किया। मुंबई निवासी नरेश मांगीलाल दवे और सैफुद्दीन अब्बासभाई कपाड़िया की कंपनी गीत एक्जिम प्रा.लि. को पाथ ने मई और जून 2010 में अलग-अलग किश्त में 80 करोड़ का भुगतान किया। ये रकम तत्काल दुबई पहुंच गई।  
कैसे हुआ खुलासा...
पाथ के छापे में जयपुर-रींगस रोड की फाइल मिली। फाइल में आर.इन्फ्रा और गीत एक्जिम की डिटेल मिली। चूंकि पैसा पाथ से गीत के पास गया था इसीलिए आयकर की टीम ने गीत के ठिकानों पर भी सर्वे किया। जानकारी गोपनीय रखी गई। सर्वे में पता चला गीत डमी कंपनी है। कोई अस्त्वि नहीं है। जैसा पाथ ने बताया था। सर्वे के दौरान गीत के संचालकों ने कहा कि वे न पाथ को जानते हैं, न ही आर इन्फ्रा को। उन्होंने कमीश्न के लालच में अपना बैंक अकाउंट मुंबई के ही कुछ लोगों को इस्तेमाल के लिए दे दिया था। 
20 डमी कंपनियों में लगा पैसा 
इसके बाद आयकर ने आईएनजी वैश्य बैंक (जंजीरवाला चौराहा) पर शिकंजा कसा। परिणाम स्वरूप गीत जैसी 20 कंपनियां सामने आई। जिनके डेड अकाउंट इस्तेमाल करके भारतीय पैसा दुबई भेजा गया। मामले में आयकर ने बैंक अधिकारियों के बयान भी रिकार्ड किए। 
24 से 48 घंटों में चैन के रास्ते देश का पैसा बाहर 
अधिकारी यह देखकर हैरान थे कि एक जगह से दूसरी जगह चला पैसा, 24 से 48 घंटों में कैसे अलग-अलग कंपनियों के रास्ते विदेश पहुंच गया। मामले में आईएनजी वैश्य बैंक, की मुंबई शाखा की भूमिका भी संदिग्ध मिली।
यूं समझे रिलायंस की भूमिका पर उठे सवालों को...
- एनएचएआई ने जयपुर-रींगस का ठेका आर-इन्फ्रा को दिया था। आर.इन्फ्रा ने 20 अक्टूबर 2009 को विज्ञप्ती जारी करके इसकी विधिवत घोषणा कर दी। प्रोजेक्ट को अंजाम देने के लिए आर-इन्फ्रा ने 9 दिसंबर 2009 को जयपुर रींगस टोल रोड प्रा.लि. (जेआरटीआरपीएल) कंपनी पंजीबद्ध कराई। इस कंपनी का एनएचएआई के साथ अनुबंध हुआ 19 फरवरी 2010 को।
- मार्च-अपै्रल 2010 में जेआरटीआरपीएल ने महू की पाथ इंडिया से अनुबंध किया और सड़क बनाने की जिम्मेदारी उसे सौंप दी। काम मिलते ही मई और जून में सात अलग-अलग किश्तों में पाथ ने सूरत के पते पर पंजीबद्ध गीत एक्जिम प्रा.लि. को 80 करोड़ का भुगतान कर दिया।

तलावली लैक में तुलसी समर्थकों का मनमाना व्यू*

*
*2020 में कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद अस्तित्व में आया रिसोर्ट एंड रेस्ट्रो*
*तकरीबन 15 हजार वर्गफीट पर बना है जी+2 होटल*
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जब माथे पर सरकार का हाथ हो तो किसी के भी नौ गृह बलवान हो सकते हैं। यकीन न हो तो तलावली चांदा तालाब के किनारे बने लैक व्यू रिसोर्ट एंड रेस्ट्रो को देख लें। जो भाजपा नेता राजेश पांडे और अजय उर्फ पप्पू शर्मा का है। दोनों मंत्री तुलसीराम सिलावट के लैफ्ट एंड राइट हैं। दोनों के खिलाफ जमीन पर कब्जे संबंधित कई शिकायतें कलेक्टर तक पहुंची है। 
 मामला ग्राम तलावली चांदा का है। जो 2013-14 से नगर निगम का हिस्सा है। यहां तालाब से लगी सर्वे नंबर 154 की जमीन पर लेक व्यू रिसोर्ट एंड रेस्ट्रो बना है। जो तकरीबन 15 हजार वर्गफीट से अधिक जमीन पर है। इसके अलावा अन्य 18 हजार वर्गफीट पर गार्डन और कर्मचारियों के रहने की जगह की गई है। सामने की ओर 15 हजार वर्गफीट में पार्किंग बनी है। 
 मामले की शिकायत सीएम डॉ.मोहन यादव से लेकर डीएम आशीष सिंह तक से की गई है। गुगल अर्थ से निकाली गई रिवर्स इमेज के साथ बताया गया है कि लेक व्यू का निर्माण 2021 में शुरू हुआ था। पहले 3100 वर्गफीट पर एक हिस्से का काम पूरा हुआ। 2022-23 में बगल के प्लॉट पर स्वीमिंग पुल बनाया गया। 2024-25 में स्वीमिंग पुल को कवर करते हुए तकरीबन 11 हजार वर्गफीट का भवन अलग बनाया गया। जो जी+2 है। 
 जोन क्रमांक 22 के एक अधिकारी ने बताया कि जिस जमीन पर रिसोर्ट बना है वहां नक्शा पास नहीं हो सकता। बावजूद इसके वहां होटल बनाई गई है। निर्माणकर्ता मंत्री के खास हैं इसीलिए हम कार्रवाई करें भी तो क्या? जोन क्षेत्र के दूसरे वार्डों में भी जमीन पर कब्जे की शिकायतें मिली थी लेकिन हम बेबस हैं।  
कोई अनुमति नहीं है 
आसपास के लोगों ने बताया कि तालाब के केचमेंट एरिया का हिस्सा रही जमीन पर मनमाने तरीके से निर्माण किया गया है। न टीएनसी हुई। न निगम से सक्षम स्वीकृति ली गई। लेक व्यू के कर्ताधर्ताओं का दायरा लगातार बढ़ते जा रहा है। किसी से खरीदी, किसी की कब्जाई है। 
पक्की सड़क बन गई...
पप्पू शर्मा और राजेश पांडे ने मंत्री के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए मेनरोड से होटल तक तकरीबन 500 मीटर लम्बी और 15 फीट चौड़ी कांक्रीट की मजबूत रोड़ बनाई है। जबकि तलावली को बायपास से जोड़ने वाली सड़क की हालत खस्ता है। जिसका इस्तेमाल इलाके के हजारों लोग करते हैं।

कलेक्टर का भू-माफियाओं की जेब पर करारा वार रद्द होगी अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्रियां


नई शुरुआत, अवैध कॉलोनियों के गढ़ बनी बिचौली हप्सी तहसील से 
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इंदौर में अवैध कॉलोनियों पर लगाम कसने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने बुधवार को कड़ा निर्णय लिया। तय किया जिन अवैध कॉलोनियों को लेकर पिछले दिनों प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई की है उन कॉलोनियों की रजिस्ट्रियां भी रद्द होगी। इसकी शुरुआत बिचौली हप्सी तहसील से होगी। जिसे अफसरों की जुगलबंदी और भू-माफियाओं की जोड़ी ने अवैध कॉलोनी का गढ़ बना दिया है। 
 बिचौली हप्सी तहसील में देवगुराड़िया, दुधिया, बिचौली मर्दाना, सनावदिया, बिहाड़िया, जामनिया खुर्द जैसे गांव आते हैं। जहां वैध कॉलोनियों के नक्शे कदम पर अवैध कॉलोनियां कट रही है। 1100 से 2100 रुपए वर्गफीट में लोगों को प्लॉट बेचे जा रहे हैं। इन कॉलोनियों में सड़क हैं, बगीचे हैं, सीवरेज है। बस अनुमति नहीं है। पिछले डेढ़ साल में कलेक्टर आशीष सिंह के आदेश पर क्षेत्र के एक दर्जन भू-माफियाओं पर एफआईआर हुुई लेकिन कॉलोनियों में रजिस्ट्री होती रही। प्लॉट बिकते रहे। मकान बनते रहे।
 इस मामले में हिंदुस्तान मेल लगातार आवाज और सवाल उठाता रहा कि क्या केस दर्ज करके भू-माफियाओं को रजिस्ट्री करने की छूट दे दी है। इसीलिए मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर सिंह ने अब यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन अवैध कॉलोनियों को लेकर पूर्व में भू-माफियाओं पर केस दर्ज कराए जा चुके हैं या कराए जा रहे हैं, उन कॉलोनियों की रजिस्ट्री शुन्य कराई जाएगी। इसकी शुरुआत बिचौली हप्सी तहसील से ही होगी। 
कमाई पर चोट जरूरी... 
इंदौर में अब तक जितनी अवैध कॉलोनियों के मामले में कानूनी कार्रवाई हुई उनमें से एक भी ऐसी नहीं है जिसे प्रशासन बसने से रोक पाया हो। 
यहां प्रकरण दर्ज होने, जेल जाने और जमानत पर छूटने को ही भू-माफिया अवैध कॉलोनी काटने का सरकारी लाइसेंस मान लेते हैं। 
जमीन निजी हो...। भू-उपयोग ग्रीन बेल्ट हो या कृषि या एअरपोर्ट ही अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की बिक्री प्रतिबंधित कभी नहीं हुई। इसीलिए भू-माफिया के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद भी कॉलोनियां बसती रही।  
सिंह का नया सिस्टम... 
यह पहला मौका है जब कलेक्टर आशीष सिंह ने नई पहल करते हुए भू-माफियाओं की कमाई पर चोट की है। क्योंकि यदि रजिस्ट्री ही रद्द होने लगेगी तो खरीदार भी अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने से बचेंगे। जब प्लॉट ही नहीं बिकेंगे तो भू-माफियाओं की कमाई कैसे होगी?
फिर भी सावधानी जरूरी... 
रजिस्ट्री रद्द कराकर भी प्रशासन अवैध कॉलोनियों पर अंकुश तब तक नहीं लगा सकता जब तक जमीन की सेटेलाइट मैपिंग करके रिकार्ड उन सभी विभागों में साझा नहीं होगा, जिनकी कॉलोनी में जरूरत होती है। जैसे नगर निगम, बिजली कंपनी, नर्मदा परियोजना, पंचायत। सेटेलाइट मैपिंग से प्रशासन भी हिसाब रख सकेगा कि केस दर्ज कराने तक कॉलोनी कितनी जमीन पर विकसित थी, कितने मकान बने हुए थे। ऐसा होगा तब ही भू-माफिया नोटरी भी नहीं कर पाएंगे। 
इन कॉलोनाइजरों पर हुई एफआईआर 
गांव भू-माफिया प्लॉट बेचे
सनावदिया अतुल अग्रवाल 27
सनावदिया शुभम सोनकर 35
जामनिया खुर्द अनिल पिता श्याम 33
जामनिया खुर्द राकेश यादव 40 
मोरोद आशीष वर्मा 17
मोरोद इंदर सिंह 20
बिहाड़िया वासुदेव भागीरथ 17
उमरिया रामनारायण 16
तिल्लौर खुर्द सचिन पाटीदार 20
अतुल अग्रवाल बड़ा खिलाड़ी 
सनावदिया में अतुल अग्रवाल ने खदान रोड पर दो कॉलोनी और बिहाड़िया रोड पर कैंब्रिज स्कूल के पास बड़ी कॉलोनी काट रखी है। जिसका नक्शा फार्म हाउस के नाम पर पास हुआ था। दो-तीन बार एफआइआर हो चुकी है लेकिन अतुल की वाटिकाओं में प्लॉटों की बिक्री जारी है। बढ़ियाकीमा में शिव वाटिका पर काम जारी है। इसी क्रम में विकास सोनकर भी है, जो भी बिहाड़िया में दो-तीन अवैध कॉलोनी काट चुका है।

केम्को पर 28 करोड़ का इनकम टैक्स बाकी


जेसवानी का कागजों से किनारा, फसे डायरेक्टर, जो असल में नौकर हैं 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
जीआरवी बिस्किट प्रा.लि. नाम की कन्फेक्शनरी कंपनी हड़पने के आरोपों से घिरे संजय जेसवानी की केम्को च्यू फुड्स प्रा.लि. और उसकी सहयोगी कंपनियों पर इनकम टैक्स ने लगाम कसना शुरू कर दी है। इनकम टैक्स से प्राप्त जानकारी के अनुसार केम्को समूह पर तकरीबन 28 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स बाकी है। विभागीय हिदायत के बावजूद कंपनी टैक्स चुका नहीं रही है। इसीलिए इनकम टैक्स ने अब नोटिस जारी करना शुरू कर दिए हैं। 
 कन्फेक्शनरी के धंधे में अच्छे-अच्छे को "चॉकलेट" चखा चुके जेसवानी अब किसी कंपनी में डायरेक्टर नहीं है। अब केम्को च्यू फुड्स प्रा.लि. में करतार सिंह और गिरीश वाधवानी डायरेक्टर है। इसी साल अंशु डेम्बला इस्तिफा दे चुकी हैं। कंपनी पर 2017 से 2024 तक तक इनकम टैक्स और इंट्रेस्टस्ट मिलाकर कुल 23.55 करोड़ रुपए टैक्स बकाया है। 

 इसी तरह समूह की दूसरी कंपनी केम्को मार्ट है। इस कंपनी से भी जेसवानी परिवार बाहर हो चुका है। अब नितिन जीवनानी और दिनेश मनवानी डायरेक्टर हैं। कंपनी पर 2024 का 21.07 लाख टैक्स और 1.47 लाख ब्याज बाकी है। तीसरी कंपनी है खालसा न्यूट्रिशियन प्रा.लि.। 103/4/2/1, 103/4/2/2 अमलीखेड़ा उज्जैन रोड के पते पर रजिस्टर्ड इस कंपनी पर इनकम टैक्स का 2.94 करोड़ बकाया है। कंपनी में दिनेश मनवानी के साथ संजय का भाई विजय जेसवानी डायरेक्टर है। 
 चौथी कंपनी है सुपरनेस फुड्स प्रा.लि। 67/2/2, SK-1 कम्पाउंड लसूडिया का पता। 1.20 करोड़ की अथॉराइज्ड कैपिटल और 1.11 करोड़ की पेडअप केपिटल वाली इस कंपनी पर 1 करोड़ 22 लाख 77 हजार 094 रुपए का इनकम टैक्स बाकी है। इस कंपनी में भी दिनेश मनवानी और गिरीश वाधवानी डायरेक्टर है।  
डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करेगा आईटी... 
बैंकों की तरह इनकम टैक्स भी कंपनियों में क्रेडिटर रहता है। कंपनियों का एक्जिस्टेंस नहीं होता। कंपनी संबंधित निर्णय डायरेक्टर और बोर्ड लेते हैं। ऐसे में इनकम टैक्स अपनी रकम वसूल करने के लिए कंपनी के डायरेक्टरों व उन बोर्ड मैम्बरों की संपत्तियों को भी राजसात करता है जो उन फाइनेशियल ईअर में कंपनी के कर्ताधर्ता रहें हैं जबसे इनकम टैक्स बकाया है। 
यहां तो सब नौकर हैं.... 
दिनेश मनवानी, गिरीश वाधवानी, करतार सिंह, नितिन जीवनानी, इरफान अली सयैद और सम्मन अफरोज खान जैसे नौकर जिन्हें जेसवानी ने अपनी कॉलर बचाने के लिए डायरेक्टर बना रखा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इन लोगों से यदि इनकम टैक्स ने टैक्स वसूली शुरू की तो इनके तो बर्तन बिक जाएंगे, फिर भी कर्ज अदा नहीं होगा। वहीं जेसवानी मजे में रहेगा क्योंकि वह कागज पर नहीं है। ये बात अलग है कि इन्हें दुल्हा बनाकर मलाई वही खा रहा है।

निगम की मेहरबानी से नहीं टूट रहा प्रतिभा का ड्रीम


339 दिन,पांच नोटिस, हर नोटिस में 7 से 30 दिन की मोहलत
नक्शे को कोने में रखकर किया मनमाना काम, जनवरी से जारी है दिखावे की तोड़फोड़
अवैध निर्माण वहीं का वहीं   
इंदौर. विनोद शर्मा । 
स्कीम-134 में नगर निगम की मंजूरी के विपरीत अपने ड्रीम को आकार दे रहे बिल्डरों पर ले-देकर अफसर मेहरबान हैं। इतने कि 339 दिन में एक के बाद एक पांच नोटिस थमाएं। हर नोटिस में अवैध निर्माण पर नाराजी जताई। तोड़ने की मोहलत दी लेकिन आज तक नगर निगम का अमला बिल्डिंग तोड़ने नहीं पहुंचा। यह बात अलग है कि नुकसानी से बचने और शिकायकर्ताओं की आंख में धूल झौंकने के मकसद से निर्माणकर्ता स्वयं अपने निर्माण पर दिखावटी हथौड़े बरसा रहे हैं।  
   प्रतिभा सिन्टेक्स लिमिटेड व अन्य मिलकर कैसे स्कीम-134 के प्लाट नंबर 19आरसी पर कैसे नगर निगम द्वारा 2 फरवरी 2024 को स्वीकृत नक्शे के विपरीत मनमाना निर्माण किया जा रहा है? इसका खुलासा हिंदुस्तान मेल ने किया था। इसके बाद बिल्डर ने बिल्डिंग बचाने के लिए इंदौर से लेकर भोपाल तक मेहनत की। जो बेनतीजा रहा। अंतत: नगर निगम ने नोटिस जारी करके स्पष्ट कर दिया कि बिल्डिंग तो टूटेगी। इसके बाद बिल्डर ने आखिरी कोशिश करते हुए अपने स्तर पर ही बिल्डिंग में तोड़फाेड़ शुरू कर दी है ताकि नुकसान कम हो। 
अब भी निगम की आंख में धूल... 
स्वीकृत भवन अनुज्ञा के अनुसार सामने 25 फीट, पीछे 20 फीट, एक तरफ 20 फीट, दूसरी तरफ 20 फीट जमीन खूली छोड़ना थी ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक हित में हो सके। नीमा ने चारों तरफ कब्जा कर लिया। बिल्डिंग की प्लींथ तीन तरफ सड़कों से मिला दी वहीं पश्चिम की ओर बनी बिल्डिंग तरफ 5-6 फीट जमीन छोड़ी। ऐसा करके नीमा ने ग्राउंड कवरेज (प्लींथ) बढ़ा लिया ताकि उस पर मंजूरी से ढ़ाई-तीन गुना अधिक निर्माण करके मनमाना मुनाफा कमाया जा सके। अब नुकसानी से बचने या किसी के यह समझाए जाने "िक थोड़ा अपने हाथ से तोड़ लो, मामला ठंडा हो जाएगा, फिर चाहे जैसी बना लेना', के बाद उसने स्वयं निर्माण तोड़ना शुरू कर दिया। हालांकि तोड़फोड़ सामने के हिस्से में हो रही है। 
तीन तरफ के एमओएस पर कोई कार्रवाई नहीं। तोड़फोड़ दिखावा है क्योंकि बिल्डर ने प्लींथ ही मनमानी रखी है, उसी के ऊपर दो मंजिला निर्माण कर चुका है जो पड़ौस की चार मंजिला इमारत से आगे की तरफ ही बनी है। ऐसे में फ्रंट का रैंम्प तोड़कर ही बिल्डर बिल्डिंग का वैध नहीं कर सकता। बिल्डिंग में अभी नगर निगम की नपती के अनुसार टूटना बाकि है। 
ये नोटिस दे रहे थे या टाइम पास कर रहे थे....
25 अक्टूबर 2024 : इसमें लिखा है आपको एक तलघर की मंजूरी दी थी, आपने दो बना दिए। एमअोएस में रैंप बनाया। 7 दिन में तोड़े। 
20 दिसंबर 2024 : 7 दिन की मोहलत खत्म होने के 49 दिन बाद दिया नोटिस। लिखा है तलघर का विस्तार 6 मीटर फ्रंट एमओएस में कर दिया, जो गलत है। 15 दिन में हटाने को कहा। 
27 फरवरी 2025 : 15 दिन की मोहलत खत्म होने के 54 दिन बाद जारी नोटिस। इस बीच स्लैब काटने की कार्रवाई शुरू की थी लेकिन चलताऊ। नोटिस में निगम ने नाराजी जताई। कहा काम बंद करके पहले अवैध हिस्से हटाएं।  
6 जून 2025 : इसमें नाराजगी जताते हुए कहा कि आपको एक महीने में अवैध निर्माण हटाना था। आपने फ्रंट एमओएस से स्लैब हटाए, कॉलम नहीं हटाए। अतिरिक्त निर्माण भी यथावत है। 10 जून को जोनल अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर प्रगति बताएं।  
8 सितंबर 2025 : नाराजी जताते हुए कहा कि 10 जून को आपको जोनल अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होना था लेकिन न आप आए, न आपका कोई प्रतिनिधि। न कोई जवाब दिया।  
एक नजर में नीमा का ड्रीम
प्लॉट मालिक : प्रतिभा सिंटेक्स, तर्फे डायरेक्टर शिवकुमार चौधरी व अन्य 
स्वीकृत नक्शा : (PMT/IND/0152/296/2024) 
स्वीकृति दिनांक : 2 फरवरी 2024 
प्लॉट एरिया : 16951.32 वर्गफीट 
एफएआर : 1.3 
ग्राउंड कवरेज : 26.52 प्रतिशत 
कुल निर्माण अनुमति : 21949.44 वर्गफीट (व्यावसायिक 3862.73 वर्गफीट, 18086.70 वर्गफीट निर्माण आवासीय)
अवैध निर्माण : जिस ग्राउंड कवरेज के साथ बिल्डिंग बन रही है उसमें 81 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण होना है। जो मंजूरी से 59416.89 वर्गफीट अधिक है।

Sunday, August 24, 2025

कारोबारी कलह में घर में घुसकर चिराग जैन की हत्या, पार्टनर पर आरोप

 



बेटे ने की शिनाख्त, बोला विवेक अंकल आए थे घर में 

विवेक ने वीडियो जारी करके कहा चिराग ने मुझे धोखा दिया

शनिवार सुबह व्यापारी चिराग जैन की उनके पूर्व साझेदार विवेक जैन ने चाकू मारकर हत्या कर दी। कनाडिया थाना क्षेत्र स्थित मिलन हाइट्स बिल्डिंग में हुई इस वारदात को मृतक के बेटे ने अपनी आंखों से देखा।आरोपी की पहचान की। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। फरार आरोपी की तलाश में टीमें गठित कर दी। शुरुआती जांच में कारोबारी विवाद को वजह माना गया है। 

जानकारी के मुताबिक, चिराग जैन और आरोपी विवेक जैन बिजनेस पार्टनर थे। दोनों के बीच लंबे समय से व्यापार को लेकर विवाद चल रहा था। चिराग स्कीम-140 के पास स्थित मिलन हाइट्स में रहते थे। विवेक जैन मौके प पहुंचा। दोनों के बीच कहासुनी हुई। विवाद इतना बढ़ा कि विवेक ने घर में रखा चाकू उठाकर चिराग पर कई वार कर दिए। चिराग की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद विवेक मौके से भाग निकला। 

कुछ देर बाद आसपास के लोगों ने देखा कि घर का गेट खुला हुआ है। अंदर खून फैला हुआ है। फौरन पुलिस को सूचना दी। घटना के वक्त चिराग की पत्नी पूनम जिम गई हुई थी। जब लौटी, तो देखा पति खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। परिवार में हड़कंप मच गया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। 

घटना के समय चिराग का 10 साल का बेटा घर पर मौजूद था। जिसने पूरे मामले को देखा। बाद में पुलिस को बताया कि पापा के बिजनेस पार्टनर विवेक अंकल ही घर में आए थे। बच्चे की गवाही के बाद पुलिस ने विवेक को मुख्य आरोपी मानते हुए केस दर्ज कर लिया। पुलिस ने चिराग के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से कुछ अहम सबूत भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। 

लम्बे समय से अनबन थी चिराग-विवेक में 

एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह के मुताबिक, चिराग जैन अपने परिवार के साथ रहते थे। उनकी सांवेर रोड पर पाइप की फैक्ट्री है। तिलक नगर में रहने वाले बिजनेस पार्टनर विवेक जैन से पिछले कुछ समय से चिराग का विवाद चल रहा था। शनिवार सुबह विवेक बात करने के बहाने चिराग के घर पहुंचा था।

आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाल रहे

कनाडिया टीआई सहर्ष यादव ने बताया कि घटना सुबह करीब 6:30 से 7 बजे के बीच की है। दोनों के बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ, ये जांच के बाद ही पता चलेगा। आरोपी बिजनेस पार्टनर फरार है। 

दोस्त ने कहा- गले-पेट पर चाकू के 10-12 घाव

चिराग के दोस्त दीपक जैन ने बताया कि जब हम पहुंचे तो चिराग खून से लथपथ थे। उनके गले और पेट पर 10-12 चाकू के निशान थे। चिराग- विवेक दोनों भिंड के रहने वाले थे। कारोबार के लिए इंदौर आए थे। कारोबार के लिए लोन लिया था। प्रॉपर्टी गिरवी रखी थी। जिसे  विवेक फ्री कराना चाहता था। चिराग ने मना कर दिया था। सांवेर रोड पर कारखाना है। चिराग ने वहां विवेक का आनाजाना प्रतिबंधित कर दिया था।  

चिराग ने दिया धोखा 

आरोपी विवेक जैन ने एक वीडियो जारी की। जिसमें बताया कि मैं 12 साल से अरियन सेल्स में चिराग के साथ पार्टनर हूं। 50% हिस्सेदारी है। मेरी संपत्ति भी लगी है। जिसका  निपटारा नहीं हुआ। चिराग ने मेरे साथ बेईमानी की। कई बार समझाया। नहीं समझा। मुझे कंपनी से ही बाहर कर दिया। हिसाब-किताब की बात करता हूं तो जवाब नहीं देता। 


Saturday, August 23, 2025

महेंद्र जैन और अरूण डागरिया की प्रिंसेसे एस्टेट को वैध का तमगा

 कॉलोनी सेल का कमाल, देने जा रहे हैं

2023 में इसी सेल ने हीना पैलेस वैध कर दी थी, फिर अवैध छोड़ना पड़ा 

इंदौर. विनोद शर्मा । 

नगर निगम की कॉलोनी सेल अवैध कॉलोनियों को वैध करने के नाम पर "कमाल' कर रही है। 2023-24 में कलेक्टर द्वारा सरकारी घोषित की गई जमीन पर प्रस्तावित हीना पैलेस को नियमित करने की नाकाम कोशिश की गई। अब उसी अंदाज में लसूड़िया की सबसे विवादित कॉलोनी प्रिंसेस एस्टेट काॅलोनी को बालेबाले वैध किया जा रहा है। ये कॉलोनी कुख्यात भू-माफिया महेंद्र जैन और उनके साले अरूण डागरिया की है। जिनके खिलाफ प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी के एक दर्जन केस लसूड़िया थाने में लम्बित है। 

नगर निगम के "गांधीवादी' अफसरों ने भ्रष्टाचार को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक सीधे-सीधे करना पड़ता है। दूसरा करना नहीं पड़ता, हो जाता है। इसका बड़ा उदाहरण है कॉलोन सेल। जब से अवैध कॉलोनियों के नियमीतिकरण की प्रक्रिया शुरू हुई है, कॉलोनी सेल ने एक के बाद एक ऐसे जादू दिखा दिए, जिससे सब हैरान हैं। इस कड़ी में  19 अगस्त 2025 को अखबारों में जाहिर सूचना प्रकाशित कराई गई। इसमें सर्वे क्रमांक 257पार्ट, 258पार्ट, 259पार्ट, 260पार्ट, 261 पार्ट, 262पार्ट, 263पार्ट, 264/1पार्ट, 268 पार्ट, 269 पार्ट, 324पार्ट, 325पार्ट, 326पार्ट, 328पार्ट, 329 पार्ट, 330 पार्ट पर कटी प्रिंसेस एस्टेट कॉलोनी का ही जिक्र है।  

सूचना के माध्यम से कॉलोनी के प्लॉटधारकों को सूचित करते हुए कहा गया है कि वे विकास शुल्क की राशि अनुसार अनिवार्य रूप से जमा कराएं। इसमें नगरीय प्रशासन एवं आवास  विभाग द्वारा 18 जुलाई 2023 को जाी पत्र (2915/1452905/2023/18-3)  का हवाला देते हुए कहा गया है कि 150 रुपए/वर्गफीट की दर से विकास शुल्क जमा कराने वालों की कॉलोनी वैध की जाएगी। हालांकि नियमानुसार कॉलोनी में मकान होना भी जरूरी है लेकिन इस कॉलोनी में मकान नहीं बने हैं। न रहवासी है। न रहवासी संघ। बावजूद इसके  कुख्यात भू-माफियाओं ने कॉलोनी को वैध करने का आवेदन लगा दिया। जिसे ले-देकर कॉलोनी सेल के कर्ताधर्ताओं ने स्वीकार भी कर लिया।

इससे पहले हीना पैलेस में हुआ था खेल

अगस्त 2023 में ही नगर निगम ने श्रीराम गृह निर्माण की अशरफ नगर को वैध करने की तैयारी की थी। इमसें खजराना के सर्वे नंबर 106, 1018, 1019/2, 1020, 1023/1, 1024, 1027, 1030 सहित 1028, 1437, 1015 1435, 1004, 1527 सहित अन्य खसरों की कुल 8.861 हेक्टेयर यानी 20 एकड़ से अधिक जमीन शामिल की गई है। इनमें से अधिकांश खसरे हीना पैलेस के थे। जिसकी जमीन कलेक्टर मनीष सिंह सरकारी घोषित कर चुके थे।  

कॉलोनी सेल कई जादू सफलता पूर्वक दिखा चुका...

लोकायुक्त तक पहुंची एक शिकायत के अनुसार बिजलपुर की सनसाइन कॉलोनी और सिरपुर गांव की श्रीहरि विहार कॉलोनी भी वैध की गई। सनसाइन फार्म हाउस प्रोजेक्ट था जहां सिंधी समुदाय की अधिकांश हवेलियां बिना नक्शे या निगम से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनी है। इसी तरह श्रीहरि विहार में प्लॉटधारकों के पास न रजिस्ट्री है, न नोटरी। फिर भी कॉलोनी वैध हो गई। 

अक्षरधाम भी वैध करने की तैयारी 

इसी तरह 19 अगस्त 2025 को ग्राम मुसाखेड़ी के सर्वे नंबर 456/1, 456/2, 459, 460, 461, 461/1, 461/2, 463/5/4, 465/1, 465/3 की जमीन पर कटी अक्षरधाम कॉलोनी को वैध करने की तैयारी की गई। कॉलोनी से 1614 रुपए/वर्गमीटर पैसा विकास शुल्क मांगा गया। इसमें  1036 रुपए/वर्गमीटर आतंरिक विकास पर खर्च होगा और  578 रुपए/वर्गमीटर बाह्य विकास पर। तीन साल पहले कॉलोनी की शिकायतों के बाद अपर कलेक्टर डॉ. अभय बेड़ेकर ने जांच कराई थी। अमृता, मेघना और गणपति तीन सहकारी समितियों को मिलाकर करीब 90 एकड़ जमीन पर कुलभूषण मित्तल, अरविंद बागड़ी, रमेश जैन, जगदीश, राम ऐरन, किशोर गोयल, जगदीश टाइगर पर हेरफेर के आरोप लगे थे।  


Thursday, August 21, 2025

कलेक्टर ने फोड़ा बम...नौ दशक का होप ध्वस्त*

*
*1000 करोड़ की 22.24 एकड़ जमीन सरकारी, कब्जा लिया* 
सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने का कलेक्टर आशीष सिंह का अभियान जारी है। इस कड़ी में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने होप टेक्सटाइल की 86 साल पुरानी लीज निरस्त कर दी। सीमांकन कराकर तकरीबन 22 एकड़ जमीन का कब्जा ले लिया, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत 1000 करोड़ से ज्यादा है। भाजपा के आयातित नेता अक्षय बम के कब्जे में रही यह जमीन जिला कोर्ट के पीछे है। 
  पिछले दिनों जमीन को लेकर प्रशासन ने नोटिस जारी किए थे, लेकिन प्रबंधन की तरफ से जवाब में कहा गया कि जमीन की लीज शासन द्वारा दी गई है। लीजधारक शासकीय पट्टेदार की श्रेणी में है, इस कारण उसके खिलाफ सुनवाई का अधिकार शासन या कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण बुधवार को कलेक्टर ने सर्वे नंबर 282/2 की 22 एकड़ जमीन की लीज निरस्त कर दी। अपने आदेश में कलेक्टर ने पूर्व में इस तरह के मामले में हुई कोर्ट निर्णय का हवाला भी दिया गया।   
99 साल की लीज पर मिली थी जमीन 
सितंबर 1939 में नंदलाल एंड भंडारी संस को सर्वे नंबर 148, 151/1654, 148/1653 की 3.18 एकड़ और सर्वे नंबर 282/2 की 22.24 एकड़ जमीन इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए दी गई। जमीन 99 साल की लीज पर पांच लाख रुपए में दी गई। पांच लाख की राशि 50-50 हजार की किश्तों में चुकाई जाएगी और साथ ही 6 हजार रुपए/साल किराया होगा। 1967 में सरकार के आदेश पर जमीन की सब लीज हुई। संकट के दौरान सरकार ने मजदूरों के हित में 1.35 करोड़ की गारंटी दी। बदले में जमीन का एक हिस्सा शासन में समाहित कर दिया। तय हुआ 8.24 एकड़ पर जो होप मिल है, वह चलती रहेगी। बाकि 14 एकड़ जमीन में से 2.60 एकड़ सड़क में जाएगी। बची 11.37 एकड़ में से 6.8 एकड़ सरकार के पास रहेगी। 4.5 एकड़ का व्यावसायिक-आवासीय उपयोग होगा। जो पैसा मिलेगा उससे मजदूरों का बकाया भुगतान होगा।
10.2 एकड़ पर न्यू सियागंज डेवलप करके बेच दिया
2012 में जिला प्रशासन को शिकायत मिली। बताया गया कि बम परिवार ने मनमाने तरीके से न्यू सियागंज बनाकर आधी जमीन बेच दी। पूर्व कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने जांच कराई। पता चला 4.5 एकड़ की व्यावसायिक-आवासीय अनुमति के विपरीत 10.2 एकड़ जमीन पर न्यू सियागंज डेवलप करके बेच दिया। अब 12 एकड़ जमीन ही खाली है। बम ने अपने जवाब में बताया कि 1996 के आदेश से पूरी जमीन मिल गई थी। न्यू सियागंज डेवलप करके मजदूरों की 14.25 करोड़ की देनदारी खत्म की। कलेक्टर कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई और इसे लीज शर्तों का उल्लंघन माना। 
2012 में ही सरकारी हो गई थी जमीन 
2012 में कलेक्टर ने जमीन सरकारी घोषित की थी। बम कोर्ट चले गए। 
अप्रैल 2025 को कोर्ट ने कलेक्टर के आदेश को रद्द किया। कहा विधिवत सुनवाई नहीं हुई, फिर से सुने। 
कलेक्टर आशीष सिंह ने दो बार बम को नोटिस जारी किया। बम ने मामला कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से बाहर का है। 
20 अगस्त को कलेक्टर ने लीज निरस्त कर दी। उसी आदेश पर एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी ने जमीन का कब्जा लिया।

अवैध आरवी क्लब पर कार्रवाई के नाम पर टालमटौल


चिंटू की चमक के आगे फीकी पड़ी आयुक्त की धमक
इंदौर से लेकर भोपाल तक आया दबाव 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के वार्ड में बेधड़क चल रहे आरवी पुल एंड क्लब के खिलाफ नगर निगम का रवैया के ढूलमूल रवैये ने ये बात साबित कर दी है कि सत्ता पक्ष-विपक्ष कितनी ही दिखावटी लड़ाई लड़ ले, असल में एक है। इसीलिए तो चौकसे का संरक्षण प्राप्त इस अवैधानिक क्लब को तोड़ने में नगर निगम ने कोई रूचि नहीं ली। जबकि चौकसे अफसरों से लेकर महापौर तक की घेराबंदी का अवसर नहीं छोड़ते। 
 आरवी पुल एंड क्लब सुखलिया ग्राम के सर्वे नंबर 376/1 व अन्य खसरों की तकरीबन 90 हजार वर्गफीट जमीन पर है। जो कि राजस्व रिकार्ड में अशोक व विनोद पिता गोपाल चौधरी के नाम दर्ज है। निर्माण अवैध है। न भवन अनुज्ञा है, न ही संपत्ति कर चुका रहे हैं। इसका खुलासा हिंदुस्तान मेल ने 12 दिसंबर को किया था। तब निगमायुक्त शिवम वर्मा ने आश्वस्त करते हुए कहा था कि क्लब के खिलाफ कानूनन कार्रवाई की जाएगी। 
 इसके बाद आयुक्त ने उपायुक्त लता अग्रवाल को निर्देशित किया। अग्रवाल के निर्देश पर पहले ही क्लब संचालकों और क्षेत्रीय पार्षद से उपकृत भवन अधिकारी सुधीर गुलवे ने एक नोटिस चस्पा कर दिया था। नोटिस में मालिकाना हक व वैधानिकता संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन क्लब संचालकों ने "गांधीजी' को आगे कर दिया। खूद पीछे हो गए। 
भोपाल तक का प्रेशर डलवाया
बताया जा रहा है कि आरवी क्लब को बचाना क्षेत्रीय पार्षद व नेताओं के लिए नाक का विषय बन चुका है। इसीलिए उन्होंने भवन अधिकारी से लेकर आयुक्त तक पर भोपाल के नामचीनों के फोन का दबाव डलवा दिया है। इसीलिए जो कार्रवाई शिवम वर्मा ने तत्पर्ता से शुरू कराई थी वह ठंडे बस्ते में पड़ गई।
अब मामले की शिकायत लोकायुक्त
शिकायतकर्ता ने बताया कि भवन अधिकारी भ्रष्ट है और हर नवनिर्मित से वसूली करते हैं। उन्हें चार साल से चल रहा अवैध आरवी क्लब क्यों दिखेगा। हमने सोचा था कि आयुक्त परिणाममुलक कार्रवाई करते हैं, उनसे अपेक्षा थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पहले से पार्षद का प्रश्रय प्राप्त क्लब संचालक अब उन्मादी हो चुके हैं। वे गरिया रहे हैं। कहते हैं जिसको जितनी शिकायतें करना है, कर ले। मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा। इसीलिए मामले की शिकायत लोकायुक्त को की है। जिसमें क्लब संचालक से लेकर अधिकारियों तक को पार्टी बनाया है।
अनुमति के नाम पर कुछ नहीं  
क्लब-मैिरज गार्डन भले चार साल से चल रहा हो लेकिन इसका डायवर्शन (क्र. 22085559949) हुआ 28 जून 2024 को। इसके लिए चालान क्र. 051/9999999/0029/06/24/178100 से 315040 रुपए जमा किए गए थे। फिर भी क्लब का संपत्ति कर खाता नहीं खुला है। डायवर्शन अलग विषय है लेकिन उक्त जमीन चूंकि खसरे की है इसीलिए वहां टीएनसी के साथ निगम से भवन अनुज्ञा होना जरूरी है। जो क्लब संचालकों के पास नहीं है।

नीतीश, ममता, आतिशी, भजनलाल पर भारी है मप्र का मोहन


सबसे रईस मुख्यमंत्रियों में पांचवें स्थान पर है डॉ.यादव 
तीन के पास है 60 से लेकर 910 करोड़
8 राज्यों के सीएम की संपत्ति 10 से 50 करोड़ के बीच है
18 सीएम ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 1 से 10 करोड़ रुपए के बीच है
इंदौर. विनोद शर्मा । 
देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वर्तमान मुख्यमंत्रियों की संपत्ति की जानकारी सामने आई है। एडीआर की 2024 की रिपोर्ट की मानें तो मप्र के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव संपत्ति और इनकम के मामले में दिल्ली, पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बने पहली बार के मुख्यमंत्री तो दूरी की बात तकरीबन दो दशक से बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार से भी कई गुना आगे हैं।  
 एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि, प्रति मुख्यमंत्री की औसत संपत्ति 52.59 करोड़ रुपये है। भारत की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय 2023-2024 में लगभग 1,85,854 रुपये थी, जबकि एक मुख्यमंत्री की औसत आमदनी 13,64,310 रुपये है, जो भारत की औसत प्रति व्यक्ति आय का लगभग 7.3 गुना है। एडीआर के डेटा के मुताबिक, देश के 31 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति 1,630 करोड़ रुपये है।
 मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास 42 करोड़ की कुल संपत्ति है। उनकी स्वयं की आय 24 लाख से अधिक है। उन्होंने बिजनस और एग्रीकल्चर से अच्छा पैसा बनाया है। उनके पास 32.1 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। वहीं, 9.9 करोड़ रुपये की चल सपत्ति है। इसके अलावा मोहन यादव के पास 8.5 करोड़ रुपये की लायबिलिटीज भी हैं। 2013 में उनकी संपत्ति 16 करोड़ थी जो बढ़कर 2018 में 31 करोड़ हो गई। 2013 से 2018 के अनुपात में 2018-2023 में उनकी संपत्ति नहीं बढ़ी। चुनाव आयोग को दिए गए ताजा हलफनामे में मोहन यादव ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया था। इसके अनुसार मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के पास 1.41 लाख रुपये कैश थे। जबकि उनकी पत्नी के पास 3.38 लाख रुपये की नकदी थी। बैंकों में जमा राशि की बात करें, तो अलग-अलग बैंकों में उनके और उनकी पत्नी के अकाउंट्स में 28,68,044.97 रुपये जमा थे। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी के साथ कई कंपनियों के शेयर, डिबेंचर और बॉन्ड्स में 6,42,71,317 रुपये का निवेश किया हुआ है।
कितना कैश-कितना निवेश
चुनाव आयोग को दिए गए ताजा हलफनामे में मोहन यादव ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया था। इसके अनुसार मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के पास 1.41 लाख रुपये कैश थे। जबकि उनकी पत्नी के पास 3.38 लाख रुपये की नकदी थी। बैंकों में जमा राशि की बात करें, तो अलग-अलग बैंकों में उनके और उनकी पत्नी के अकाउंट्स में 28,68,044.97 रुपये जमा थे। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी के साथ कई कंपनियों के शेयर, डिबेंचर और बॉन्ड्स में 6,42,71,317 रुपये का निवेश किया हुआ है।
नायडू सबसे रईस सीएम 
एडीआर के मुताबिक,आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू 931 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सिर्फ 15 लाख रुपये की संपत्ति के साथ सबसे कम संपत्ति वाली मुख्यमंत्री हैं। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू 332 करोड़ रुपये से अधिक की कुल संपत्ति के साथ दूसरे सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया 51 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं।
 -----------------------
भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री 
राज्य सीएम संपत्ति
आंध्रप्रदेश चंद्रबाबू नायडू 910 करोड़
अरुणाचल प्रदेश पेमा खांडू 332 करोड़ 
कर्नाटक सिद्धरमैया 51 करोड़
नागालैंड नेफ्यू रियो 46 करोड़ 
मप्र डॉ.मोहन यादव 42 करोड़
पुडुचेरी एन.रंगास्वामी 38 करोड़
झारखंड हेमंत सोरेन 25.33 करोड़
असम हेमंत विसवा सरमा 17.10 करोड़
महाराष्ट्र देवेंद्र फडणवीस 13.27 करोड़
त्रिपुरा माणिक साहा 13.10 करोड़
अन्य करोड़ पति सीएम 
गुजरात भूपेंद्र पटेल 8.22 करोड़
हिमाचल प्रदेश सुखविंदरसिंह सुक्खू 7.81 करोड़
हरियाणा नायब सैनी 5.80 करोड़
उत्तराखंड पुष्करसिंह धामी 4.64 करोड़
छत्तीसगढ़ विष्णु देव साह 3.80 करोड़
बिहार नीतीश कुमार 3.10 करोड़
उप्र योगी आदित्यनाथ 1.55 करोड़
मणिपुर बिरेन सिंह 1.47 करोड़
राजस्थान भजनलाल शर्मा 1.46 करोड़
दिल्ली आतिशी 1.41 करोड़ 
केरल पिनरई विजयन 1.18 करोड़
 सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्री
राज्य सीएम संपत्ति
प.बंगाल ममता बेनर्जी 15.38 लाख
जम्मू-कश्मीर उमर अब्दुल्ला 55.13 लाख
उप्र योगी आदित्यनाथ 54.94 लाख
बिहार नीतीश कुमार 64.82 लाख
पंजाब भगवंत मान 97.10 लाख 

 किसी सीएम पर कितना कर्ज?
खांडू पर सबसे ज्यादा 180 करोड़ रुपये की देनदारी भी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिद्धरमैया पर 23 करोड़ रुपये और नायडू पर 10 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि 13 (42 प्रतिशत) मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि 10 (32 प्रतिशत) ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें हत्या के प्रयास, अपहरण, रिश्वतखोरी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामले शामिल हैं।

18 बीघा जमीन को लेकर इंदौर-उज्जैन के बदमाशों में विवाद


फेंसिंग उखाड़ी, गेट तोड़ा, हवाई फायर हुए, पुलिस आंख पर पट्‌टी बांधे खड़ी रही
इंदौर. विनोद शर्मा । 
इंदौर में एक तरफ जमीन की कीमत आसमान छू रही है तो दूसरी तरफ जमीन पाने और कब्जाने के लिए गुंडे-बदमाशों से लेकर नेताओं तक होड़ लगी हुई है। दो दिन पहले इंदौर और उज्जैन के बदमाशों के बीच जमीन को लेकर जमकर जोरआजमाइश हुई। इसमें हवाई फायर भी हुए लेकिन प्रभावी नेता के दबाव में पुलिस ने मामला रफा-दफा कर दिया।  
 मामला सुपरकॉरिडोर से लगे पालाखेड़ी का है। यहां राधेलाल यादव की 18 बीघा जमीन है। जो उनके पिताजी बेच चुके हैं लेकिन यादव का कब्जा कायम है। उसकी मदद इंदौर-2 में कांग्रेस से भाजपा में आए एक नेता कर रहे हैं। जिन्होंने अपनी टीम बैठा रखी थी। इस बीच शनिवार को इंदौर-2 में ही रहने वाले कुछ बदमाश जमीन पर पहुंचे। उन्होंने कब्जेदार किसान और उसकी मदद करने वाले मैनेजर की पिटाई कर दी। डराने-धमकान के हिसाब से हितेश प्रधान "गोलू' और उसके सहयोगियों ने हवाई फायर भी किए। 
 सूचना उज्जैन पहुंची। जहां स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताने वाले नेता "जो राधे यादव के कब्जे को जायज मानते हैं, और उसको सुरक्षा का भरोसा दे चुके हैं', ने अपने गुंडे भेज दिए। दोनों पक्षों में जमकर हंगामा हुआ। सूचना मिलने पर गांधीनगर और बाणगंगा थाने का बल भी पहुंचा। पुलिस को देखकर सभी रवाना हो गए।  
पुलिस तमाशा देखती रही, कायम नहीं की
पुलिस मौके पर ऐसे पहुंची थी जैसे कोई मैच देखने आई हो। जैसे ही उज्जैन वालों का नाम आया, पुलिस के जवान किनारे हो गए। दूसरी तरफ के लोग स्वयं को कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला का समर्थक बताते रहे। इसीलिए पुलिस ने कार्रवाई न करने में भलाई समझी। 
एक बड़े बिल्डर की भूमिका भी सामने आई  
मामले में पालिया और पालाखेड़ी क्षेत्र में एक के बाद एक कॉलोनी काट रहे इंदौर-2 से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बिल्डर की भूमिका भी सामने आई है। जो इस जमीन पर कॉलोनी काटने की इच्छा रखता है। 
विवाद इसीलिए हुआ...
बताया जा रहा है कि 1980 में राधे के पिताजी जमीन बेच चुके थे। इसके बाद भी राधे ने कब्जा नहीं छोड़ा। बल्कि इंदौर-2 के आयातीत भाजपाई नेता की मदद से फेंसिंग करके गेट लगा दिया। कथित खरीदार की तरफ से जब प्रधान, राजा ठाकुर, सतीश ठाकुर, व अन्य लोग मौके पर पहुंचे तो उन्होंने गेट तोड़ दिया। फेंसिंग उखाड़ दी। सुरक्षाकर्मियों से लेकर मैनेजर तक से मारपीट की। बताया जा रहा है कि इस मामले में समझौता बैठक एक-दो दिन में होगी। जिसमें ठाकुरवाद हावी रहेगा। दूसरी तरफ राधेलाल को उज्ज्ैन के यादव से उम्मीदें हैं।

नैनोद की जमीन को लेकर ठाकुर-सेंगर परिवार आमने-सामने

मंगल को दंगल

शुक्रवार को ठाकुरों ने सेंगर के लोगों को मारा था, मंगलवार को सेंगरों ने उतार फेंकी ठाकुरी की मालिकी 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
बड़ा बांगड़दा क्षेत्र में शुक्रवार शाम को हुई उड़दंग मामले में नया मोड़ मंगलवार सुबह आया। जब 20-25 लोगों को लेकर पहुंचे एक भाजपा नेता ने जमीन पर हंगामा किया। शुक्रवार को जिन लोगों ने उनके चौकीदार और मैनेजरों के साथ मारपीट करके भगा दिया और अपने नाम के बोर्ड लगा दिए थे उनके बोर्ड उखाड़कर फेंक दिए। ये पूरा मामला सीसीटीवी में रिकार्ड हुआ। पुलिस को सूचना दी गई लेकिन गांधीनगर पुलिस फिर कार्रवाई से किनारा कर गई। 
 जो वीडियो सामने आया है उसके अनुसार जमीन नैनोद की है। शुक्रवार को हुए विवाद के बाद एडवोकेट अमित सिंह पिता सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने अपने नाम को जो बोर्ड लगाया था उस पर जमीन की पहचान सर्वे नंबर 294/1 के रूप में अंकित की गई थी। रेवेन्यू रिकार्ड में ये जमीन रियल ड्रीम क्रिएशन एलएलपी तर्फे पार्थ पिता मोहन सेंगर के नाम दर्ज है। शुक्रवार तक यहां सेंगर परिवार के सिपाही ही तैनात थे जिन्हें ठाकुरों ने मारकर भगा दिया था। अपने नाम की तख्ती लगाई। सीसीटीवी कैमरे लगाए। खम्बे खड़े किए। सोचा अब कोई विवाद नहीं होगा। 
 एेसा हुआ नहीं। मंगलवार की सुबह 10 से 11 बजे के बीच सेंगर परिवार के लोग 20-25 लोगों को लेकर मौके पर पहुंचे। परिवार का एक सदस्य दौड़कर गया और एक पेड़ पर टंगे अमित ठाकुर के नाम के बैनर को उखाड़कर अपने जेसीबी के पास लाकर फेंक दिया। इनकी पहचान गोलू सेंगर के रूप में की गई है। दूसरी तरफ काले कपड़ों में एक व्यक्ति पूरे अभियान को लीड कर रहे थे जिनका नाम उदल सेंगर बताया गया। 
जमीन एक, दावेदार तीन 
हिंदुस्तान मेल की तफ्तीश में पता चला कि नैनोद की 5.127 हेक्टेयर जमीन के मालिकाना हक को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। एडवोकेट अमित ठाकुर और सुमित ठाकुर ने बताया कि उनके पिता सुरेंद्र ठाकुर को नैनोद निवासी किसान 1980 में ही जमीन बेच चुके थे। भरोसे में नामांतरण नहीं हुआ था। लम्बे समय से खेती हम ही कर रहे थे। पिता के मरने के बाद होलकरों की नीयत बदली और वे जमीन बाजार में बेचने निकल पड़े। इस बीच नामांतरण को लेकर हमने केस लगाया था। जो तहसील में खारिज हो गया था। बाद में एसडीएम कोर्ट में लगाया। जो विचाराधीन है। इस बीच मनमाने ढंग से होलकरों ने सेंगर परिवार को रजिस्ट्री कर दी।   
दूसरा धड़ा है सेंगर परिवार। जिसने भी जमीन के पेटे किसान से एग्रीमेंट किया था। दस्तावेजों की मानें तो सेंगर परिवार का कब्जा जायज नजर आता है। क्योंकि रेवेन्यू रिकार्ड में 29 अक्टूबर 2024 को ही जमीन का नामांतरण (प्र.क्र. 3236/अ-6/2024-25) सेंगर की कंपनी के नाम हो चुका है। नामांतरण 18 अक्टूबर 2024 को हुई रजिस्ट्री MP179152024A11245996 के आधार पर हुई। जो कि किशोर व सुभाष पिता गोविंद होलकर और संजय व नंदन पिता कमलाकर होलकर सभी निवासी 8 बाराभाई वैष्णव मंदिर के सामने ने की थी। इन चारों के पास 25-25 प्रतिशत जमीन थी। 
तीसरा धड़ा किसान का बताया जा रहा है। जमीन की ऊंची कीमतों ने रजिस्ट्री के बावजूद किसानों का जमीन के प्रति मोह खत्म नहीं होने दिया।  
पुलिस को देखकर तीतर बीतर हुए,कार्रवाई नहीं हुई 
शुक्रवार को बदमाशों को यह कहकर जमीन पर ले जाया गया था कि वहां पार्टी है। जब जमीन पर पहुंचे तो वहां 25-30 लोग आपस में चिल्लापुकार कर रहे थे। पीछे के एक हिस्से में खाना भी बन रहा था। विवाद बढ़ा। सूचना मिलते ही पुलिस के 20-25 जवान मौके पर पहुंचे। जिन्हें देखकर लाठी-ठंडे से लड़ रहे लोग तीतर-बीतर हो गए। पुलिस कुछ देर के लिए गई,फिर विवाद हुआ। तब भी मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। बस यही कहा कि तुम लोग समझने को तैयार ही नहीं हो। हमारी नौकरी खाओगे।  
मंगलवार को पुलिस का मौन
मंगलवार के विवाद की सूचना भी पुलिस तक पहुंची, पुलिसकर्मी पहुंचे भी लेकिन राजनीतिक रसूख के कारण किसी के पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ ईंधन को धुएं में उड़ाकर अपनी गाड़ी घुमा ली।

किसान मोर्चा के मंडल महामंत्री ने गुप्तांग दिखाकर बोले कांग्रेसी मेरा कुछ नहीं उखाड़ सकते

नए साल का नशीला जश्न
मंदिर के सामने "कृष्णा' की अस्लील लीला

इंदौर. विनोद शर्मा । 
विधायक से लेकर प्रधानमंत्री तक भाजपा की छवि बेदाग बनाए रखने में जुटे हैं वहीं उनके मैदानी कार्यकर्ता अपनी हरकतों से पार्टी की इज्जत मटियामेट करने में कसर नहीं छोड़ते। ऐसा ही ताजा मामला राऊ विधानसभा से आया है। जहां विधायक मधु वर्मा की अनुसंशा पर मंडल महामंत्री बनाए गए कृष्णा देवड़ा नए साल के जश्न में नंगाई पर उतर आए। शराब के नशे में धुत कृष्णा पैंट उतारकर कांग्रेसियों को कहते हैं तुम हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे। वीडियो वायरल होने के बाद मंडल अध्यक्ष रवि चौधरी कहते हैं कि देवड़ा मानसिक रूप से बीमार है। 
 नए साल का जश्न सबने मनाया। अपने-अपने अंदाज में। भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष और उनके सहयोगी नेताओं का जश्न अलग ही सुरूर में मना। जिसकी वीडियो वायरल हुई। वीडियो में पहले तो एक नेता इनोवो के ऊपर खड़े होकर नाच रहा है और दो नीचे खड़े होकर। गाना बज रहा है "आओ गुरु, करें पीना शुरू....आज तो जाम जमकर चले, कल अंगुर की पेटी मिले न मिले...'। ये सब हो रहा था मंदिर के पास। कुछ देर बाद नीचे खड़े होकर नाच रहे नेता मंदिर के ओटले पर बैठे कृष्णा गौड़ के पास जाते हैं। कहते हैं यार इतनी दारू पी रिया है, अने वीडियो बनई रिया है। कोई ने वायरल कर दी तो कांग्रेस के मौको मिली जाएगा। 
 इस पर शराब पीते हुए कहते हैं कृष्णा देवड़ा कांग्रेसी वीडियो वायरल करेंगे। यह कहते हुए वह अपनी पेंट ढीली करने लगते हैं। फिर अपना गुप्तांग निकालता है। मोबाइल की टार्च निकालकर गुप्तांग दिखाता है। कहता है देखिलो रे कांग्रेसीहुण योज लगेगा हाथ तमारा। तक कितरी ही मेहतन कर लो। 
 बाकि नेता भी इसका विरोध नहीं करते। बल्कि इस रासलीला में कृष्णा का साथ देते नजर आते हैं। फिर "पार्टी ऑल नाइट्स...' गाने की धून पर घुटने तक उतारकर नाचने लगते हैं। पीछे से एक कार्यकर्ता आता है और कृष्णा की पीली हुड़ी की टोपी उसे पहननाकर कोशीश करता है कि उसका चेहरा कम से कम दिखे। इस वीडियो को जिसने बनाया वह भी मंडल का नेता ही है। 
पिछले साल ही हुई थी नियुक्ति 
19 अगस्त 2023 को ही इनकी नियुक्ति मधु वर्मा की अनुसंशा पर भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा में राऊ विधानसभा किसान मोर्चा केपंचायत व नगर परिषद पदाधिकारियों के रूप में हुई थी। इसमें अध्यक्ष रवि चौधरी है। वहीं महामंत्री है कृष्णा गौड़ जो कि कलारिया गांव के रहने वाले हैं। 
मानसिक रूप से बीमार है देवड़ा  
जो वीडियो वायरल हो रही है उसमें कौन है?
कृष्णा देवड़ा है और अन्य उसी गांव के लोग होंगे।
वीडियो में देवड़ा जो कर रहे हैं क्या वह सही है?
अब क्या बताएं, वह मानसिक रूप से बीमार है। हम तो हम उसका परिवार भी उसकी हरकतों से परेशान है। 
ऐसे मानसिक रोगियों की जरूरत क्यों है भाजपा को?
जब पद दिया था तब ऐसा नहीं था। 
कहा जा रहा है कि वीडियो आपने बनाया? 
नहीं, मैं नहीं पड़ता ऐसे लोगों के चक्कर में। 
देवड़ा को 2023 में महामंत्री तो आपने ही बनाया?
हां, बनाया लेकिन इसका मतलब ये थोड़ी है कि हम सबको मित्रवत जानते हैं।
क्या अब देवड़ा पर कार्रवाइ होगी?
आला पदाधिकारियों से मागर्दशन लेकर कार्रवाई करेंगे। 
रवि चौधरी, अध्यक्ष 
 भाजपा किसान मोर्चा राऊ मंडल

1000 रुपए में नंदी हॉल और 1500 रुपए में भस्मआरती

---------------------------
भ्रष्ट खा रहे हैं महाकाल में मलाई

मंदिर समिति का पूर्व पदाधिकारी दीपक मित्तल भी आरोपी, फरार
तीन पत्रकारों के नाम सामने आए, एक गिरफ्तार 
उज्जैन. विनोद शर्मा ।
महाकाल मंदिर को पंडे, पुजारियों, सफाईकर्मियों से लेकर मीडियाकर्मियों तक ने कैसे कमाई का अड्‌डा बना दिया था‌? इसका खुलासा रिमांड के दौरान आरोपियों द्वारा लगातार किया जा रहा है। इस कडी में एक बडा नाम जुडा है दीपक िमत्तल का। जो कि कांग्रेस नेता हैं और कमलनाथ की 15 महीने की सरकार में ही उन्हें पूर्व विधायक बटूक शंकर की अनुसंशा पर मंदिर समिति की सदस्यता मिली थी। 
 महाकाल मंदिर में हुए भ्रष्टाचार की सूची लंबी होती जा रही है। अब मंदिर समिति के पूर्व सदस्य दीपक मित्तल की कारगुजारियां सामने आई है। एफआईआर में नाम आने के बाद सवे ही दीपक फरार है। 2018 से फरवरी 2020 के बीच कांग्रेस सरकार अस्तित्व में आई थी। इसी दौरान मित्तल मंदिर से जुड़ा। तीन साल पूरे होने के बाद मित्तल को हटा दिया गया था लेकिन जब तक समिति में रहे तूती बोलती रही। सवाल चर्चा में है कि मित्तल का नाम किसने बताया? महाकाल पुलिस के अनुसार मित्तल के खाते में लाखों का ट्रांजेक्शन सामने आया है। लिहाजा उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 
 मामले में तीन पत्रकारों के नाम भी सामने आए हैं जो महाकाल दर्शन के एवज में लोगों से पैसा एंठते थे। इनमें पंकज शर्मा और विजेंद्र यादव के साथ तीसरा नाम भी शामिल है। जिसका खुलासा अभी नहीं हुआ है।  
लगातार बढ़ रही है आरोपियों की फेहरिस्त
पिछले दिनों कलेक्टर नीरज सिंह ने मंदिर परिसर का औचक निरीक्षण किया। सुबह-सुबह नंदी हॉल में भक्तों की भीड़ दिखी। पूछताछ में पता चला उन्हें पैसा लेकर नंदी हॉल तक लाया गया है। इसके बाद 6600 रुपए देकर दर्शन करने आए श्रृद्धालुओं के माध्यम से केस दर्ज कराया गया था। केस में पूछताछ और मोबाइल डिटेल के आधार पर लगातार आरोपियों की संख्या बढ़ती जा रही है। सूची में अब 17 नाम जुड़ चुके हैं।
इनकी रेट लिस्ट
मंदिर परिसर में वीआईपी इंट्री : 500 रुपए/व्यक्ति 
नंदी हॉल में बैठाना : 1000 रुपए/व्यक्ति
भस्म आरती के दर्शन : 1500 रुपए/व्यक्ति
गर्भगृह में दर्शन : 2500 रुपए/व्यक्ति
कमाई का खेल....
महाकाल मंदिर समिति में काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वा 8 हजार से लेकर 50 हजार रुपए तक है। वहीं दिनभर में 12-15 लोगों को मंदिर में वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाकर ये लोग 15000 से लेकर 30000 रुपए रोज तक कमा लेते हैं। ज्यादातर खेल भस्मआरती में होता है। 
रोजाना 5 लाख रुपए से ज्यादा का खेल....
भक्ताें की भीड़ को भ्रष्टाचारी भूना रहे हैं। लोग कम समय में दर्शन करने के लिए पैसे देते हैं। ताकि सहुलियत और करीब से दर्शन हो जाए। एक-एक दलाल दिनभर में ऐसे 10 से 12 दर्शनार्थी पकड़ता है। यदि 1000 रुपए औसत भी मानें तो 10 से 12 हजार रुपए/रोज की कमाई होती है। अब तक 17 नाम सानमे आए हैं जबकि सूत्रों की मानें तो पंडे-पूजारी सहित ऐसे 50 लोग हैं। जो दिनभर में 6 लाख से ज्यादा का खेल करते हैं। 
चौकी की बंधी भी तय है...
महाकाल थाने की एक चौकी महाकाल परिसर में ही है। हैरानी की बात यह है कि पैसा लेकर दर्शन कराने के मामले में 17 आरोपियों पर कार्रवाई होने के बावजूद चौकी पर तैनात एक पुलिसकर्मी का नाम इस मामले में सामने नहीं आया। जबकि पुलसकर्मी भी इन दलालों से मिले हुए थे। किसी से प्रति व्यक्ति 150 रुपए मिलते थे, तो किसी से 300 रुपए तक। 
ऐसे जुड़ते गए नाम....
नितेश फरार था। जिसे पुलिस ने पकड़ा। रिमांड के दौरान उसने पत्रकारों पंकज शर्मा और विजेंद्र यादव सहित मेवाड़ा के नाम लिए। क्रिस्टल कंपनी के सुपरवाइजर करण राठौर और मंदिर समिति के उमेश पंड्या को कोर्ट में पेश किया। पत्रकारों में पंकज शर्मा ही पकड़ाया, बाकि फरार है। तीसरे पत्रकार की पहचान मेवाड़ा के रूप में हुई है। जो दिनभर मंदिर में ही रहता था। इसे पहले भी ब्लैकलिस्टेड करके मंदिर परिसर में इसके प्रवेश पर रोक लगा दी थी।

नर्मदा सप्लाई : चीमा के नाम पर अफसरों की चांदी


पूणे की इस कंपनी पर मेहरबान है मंडलेश्वर तक के सरकार
- ट्रासंफार्मर जला चुकी है, नया ठेका 21 करोड़ का दिया
इंदौर. विनोद शर्मा । 
नगर निगम में नाली से लेकर नर्मदा तक में भ्रष्टाचार का जहर मिल चुका है। इसका ताजा उदाहरण है 363 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) लाइन का बिजली मेंटेनेंस। जिसमें पीएचई मुसाखेड़ी से लेकर मंडलेश्वर तक बैठे अफसर सिर्फ एक कंपनी पर मेहरबान हैं। उसी कंपनी की जरूरत के लिहाज से टेंडर की शर्तें प्लान की जाती है ताकि दूसरी कंपनी ठेका न ले पाए। 
 21 अक्टूबर 2024 को नगर निगम की एक जाहिर सूचना प्रकाशित हुई थी। जो संधारण खंड क्रमांक-1 मंडलेश्वर के कार्यपालन यंत्री द्वारा जारी की गई थी। इसमें नर्मदा 363 एमएलडी पानी इंदौर पहुंचाने वाली लाइन (इंटकवेल से लेकर बेकप्रेशर टेंक) के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे। 3 साल का ठेका होगा। लागत 21.38 करोड़ आंकी गई है। टेंडर 25 नवंबर 2024 को खुलना था लेकिन केंसल हो गया।  
 चीमाटेक प्रोजेक्ट प्रा.लि. नाम की कंपनी है जो पिछले छह साल से टेंडर डाल रही है। हर बार इसी कंपनी को टेंडर मिलता है। कंपनी पूणे की है। 18 सितंबर 2020 को भी जो टेंडर निकाले गए थे उसमें भी अकेली चीमा टेक ने ही भाग लिया था। तब लागत आंकी गई थी 13.98 करोड़। इस बार भी कंपनी ने ही भाग लिया है। 
करोड़ों का नुकसान कर चुकी है कंपनी 
इससे पहले कंपनी के पास माइनर मैनेजमेंट था। इस दौरान कंपनी की लापरवाही से जलूद का एक ट्रांसफार्मर जल गया। जिसकी कीमत तकरीबन 3 करोड़ थी। अपनी और कंपनी की गलती छिपाने के लिए नर्मदा प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने बिजली कंपनी से एक ट्रांसफार्मर किराए पर लिया और उससे काम करते रहे। जब शिकायतें मुख्यालय तक पहुंची तो उक्त ट्रांसफार्मर खरीद लिया। कंपनी ने जो ट्रांसफार्मर जलाया था वह अब भी जला ही पड़ा है। 2
कंपनी पर मेहरबानी क्याें? 
चीमा टेक को नगर निगम इंदौर के लोग जाने क्यों इतना बड़ा मानते हैं जबकि इंटरनेट पर कंपनी की वेबसाइट तक नहीं है। इंडिया मार्ट पर जो डिटेल है उसके अनुसार कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 5 से 25 करोड़ है। जीएसटीएन पर 27AACCC3047N1ZI नंबर डालते हैं तो पता चलता है कि कंपनी सर्विस प्रोवाइडर है और केपिसिटर डिजाइन करती और बनाती है। 
मामला मंडलेश्वर का है, मैं नहीं देखता। वहां पटेल साहब है वो देखते हैं। ट्रांसफार्म जला था लेकिन उसे यह कह देना कि कंपनी की वजह से जला था गलत है। नए टेंडर में मेजर मेंटेनेंस भी शामिल किया है ताकि हर नुकसानी की जिम्मेदारी कंपनी की हो। 
संजीव श्रीवास्तव, पीएचई
डी.एस.पटेल मंडलेश्वर में पोस्टेड है। उनके मोबाइल नंबर पर कई मर्तबा संपर्क किया लेकिन वे फोन न उठाने की कसम खाकर बैठे हैं। 
कंपनियां नहीं आती 
ठेका हो चुका है। कंपनियां आती ही नहीं है। इंदौर में इतनी बड़ी कंपनी है नहीं। इसीलिए चीमा टेक को काम दिया है। अब माइनर से लेकर मैजर मेंटेनेंस तक कंपनी करेगी। हमारा काम सप्लाई चालू-बंद करना ही होगा। फिर भी कोई शिकायत है तो देखेंगे। 
अभिषेक शर्मा "बबलू'
प्रभारी जलकार्य

महाकाल से मुलाकात में माल कमाने वाले 17 नंदी आरोपी बने


धाकड की धांक, प्रबंधक पर कार्रवाई का श्रीगणेश नहीं
21 हजार से लेकर 1 लाख तक की पैकेज डील होती थी गर्भगृह के लिए
पंडों के वेश में भेजे जाते थे श्रृद्धालु, कैमरे हो जाते थे बंद
जितना ज्यादा समय, उतना ज्यादा चार्ज 
कलेक्टर ने कहा सबूत का इंतजार है, कार्रवाई जरूर होगी
उज्जैन. विनोद शर्मा । 
महाकाल मंदिर में हुए भ्रष्टाचार मामले में अब तक आरोपियों की संख्या 17 हो चुकी है लेकिन प्रशासक रहे गणेश धाकड पर कोइ कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों की मानें तो धाकड के आने के बा ही मंदिर में श्रृद्धालुओं को दर्शन कराने की फीस बढी है। हद तो यह है कि गर्भग्रह में एक लाख तक की पैकेज डील होती है। जो ये डील करता है उसे पूजारी-पंडे के कपडे पहनाकर मंदिर में पहुंचा दिया जाता है। इस दौरान बिजली कटौती के नाम पर गर्भगृह के कैमरे भी बंद कर दिए जाते थे। इस काम में महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी और पंडों का भी साथ मिलता रहा। 
 महाकाल मंदिर के गर्भगृह में चुनिंदा हस्तियों को ही प्रवेश की छूट है लेकिन इंस्टाग्राम, टेलीग्राफ, ट्वीटर, फेसबुक पर हर कोई महाकाल के साथ अपनी तस्वीर चाहता है। हर किसी की ये मनोकाना पूरी नहीं होती। महाकाल को छुकर उनका करीब से आशीर्वाद लेना है तो पहले 'सिस्टम' के तहत पैसा चुकाना पडता है। सूत्रों की मानें तो गर्भगृह में प्रवेश की फीस 11 हजार प्रति व्यक्ति से लेकर एक लाख रुपए में चार लोगों का पैकेज बना हुआ है। किसी को शंका न हो इसके लिए ऐसे धनवानों को पुजारी-पंडों जैसे कपडे पहना दिए जाते हैं। उसके बाद प्रवेश मिलता है। ये उसी तरह महाकाल की सेवा करते हैं जैसे पंडे करते हैं लेकिन इनकी वीडियो रील बनती है। तस्वीरें निकलती है। अलग-अलग पोज में। अधिकतम 10 मिनट तक की छूट रहती है। 
 इन दस मिनट में सोशल श्रृद्धालु जल भी चढाता है। फल-फुल भी चढाता है और पुजारी उनसे मंत्राचार के साथ अनुष्ठान भी करा देते हैं। इसीलिए पैकेज डील बढी है। पैकेज डील हर किसी से नहीं होती है। जिनसे संबंध अच्छे हो जाते हैं या अच्छे संबंधों की अनुसंशा पर आए हों। उन्हीं से पैसा लिया जाता था। 
धाकड पर कार्रवाई क्यों नहीं 
महाकाल मंदिर समिति के प्रबंधक के रूप में गणेश धाकड को नियुक्त किया था। धाकड को पिछले दिनों ही हटाया। वे इंदौर के एक दानदाता राहुल रोकडे के साथ मिलकर शिखर के नीचे मनमाने ढंग से कमरे और पुजारियों के कैबिन बना रहे थे। जिसकी जानकारी कलेक्टर तक को नहीं थी। इसीलिए कलेक्टर नीरज सिंह ने उन्हें नोटिस दिया था। बाद में हटा दिया। हालांकि पैसा लेकर महाकाल के दर्शन कराने का जो मामला खुला उसमें धाकड को राजनीतिक दबाव के कारण बाहर रखा गया। 
जिम्मेदार धाकड है, कार्रवाई हो  
 मंदिर समिति का प्रशासक रहते धाकड का ही काम था पूरे सिस्टम की निगरानी करना। ऐसा नहीं हुआ। धाकड की नाक के नीचे श्रृद्धालुओं से वसूली होती रही, ऐसा भी नहीं है कि यह धाकड को पता नहीं था। जब कलेक्टर मामले को पकड सकते हैं तो धाकड क्यों नहीं पकड पाए। इसके अलावा कलेक्टर ने उस दानदाता पर भी कार्रवाई नहीं की जिसने कैबिन बनाने में पैसा लगाया था। 
पूरी समिति में भांग घुली है...
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया महाकाल मंदिर में दर्शन प्रभारी राकेश श्रीवास्तव और सफाई निरीक्षक विनोद चौकसे ने पूछताछ में अपने चार साथियों के नाम का खुलासा किया है। दोनों से मिली जानकारी व इनके बैंक खाते और इंटरनेट मीडिया अकांउट वॉट्सएप की जांच की गई। जिसके आधार पर मंदिर में भस्म आरती प्रभारी रितेश शर्मा, प्रोटोकाल प्रभारी अभिषेक भार्गव, आईटी सेल प्रभारी राजकुमार, सभामंडप प्रभारी राजेंद्र सिसौदिया, आशीष शर्मा के नाम सामने आए। महाकाल मंदिर की सुरक्षा संभाल रही क्रिस्टल कंपनी के कर्मचारी जितेंद्र परमार और ओमप्रकाश माली को भी आरोपी बनाया गया है। पूछताछ में उन्होंने मीडियाकर्मी पंकज शर्मा, विजेन्द्र यादव, पूर्व नंदी हॉल प्रभारी उमेश पंड्या और क्रिस्टल कंपनी के कर्मचारी करण राजपूत के नाम बताते हुए ट्रेवल ऐजेंट, हारफूल वालों सहित कई अन्य नामों का खुलासा किया। 
जांच जारी है साक्ष्यों का इंतजार  
धाकड को प्रथमदृष्ट्या जो गडबड सामने आई थी उसके आधार पर हटा दिया है। मंदिर समिति का प्रबंधक रहते उन्होंने किसी से पैकेज डील की है या नहीं? इसकी पुलिस जांच कर रही है। जो लोग पकडे गए हैं उनसे भी धाकड के रिश्तों की जांच होगी।  
नीरज सिंह, कलेक्टर

सावन को संजोने में बटी इन्वेस्टिगेशन विंग


पैकेज लेकर दी जा रही है राहत, छोड़ा साेना, नकद भी नजरअंदाज 

इंदौर. विनोद शर्मा ।  
अपनी छापेमार कार्रवाइयों से कारोबारियों की नींद उड़ाने वाली इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग में इन दिनों कुछ तो ऐसा हो रहा है जो अब तक नहीं हुआ। अफसरों के बीच आपसी समन्वय नहीं है। न ही मैदानी अमला सीनियर्स के फैसले से सहमत है। इसकी वजह है पिछले महीने धार में हुई छापेमार कार्रवाई। जो एक आला अधिकारी की व्यक्तिगत रूचि के चलते मैनेज होती नजर आ रही है। 
 दिसंबर के महीने में इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने सलाउद्दीन शेख, राजेश शर्मा, आसिफ शेख, पंकज शर्मा, अमित शर्मा, पंकज जैन के साथ ही सावन पहाड़िया के ठिकानों पर दबिश दी थी। इनकम टैक्स का दस्ता कार्रवाई की सफलता को लेकर आश्वस्त तो था ही लेकिन जिस कदर की टैक्स चोरी सामने आई उसने अफसरों को हैरान कर कर दिया। सूत्रों की मानें तो मामला 500 करोड़ के इर्द-गिर्द पहुंच गया। 
 एक तरफ तकरीबन 52 ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई चल रही थी तो दूसरी तरफ विंग के एक अधिकारी स्कीम-140 स्थित एक बार में शराब की बाेतलें खाली कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने पैसा देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्होंने आज बड़े-बड़े लोगों पर छापेमार कार्रवाई की है। पंगा लोगे तो तुम भी नहीं बचोगे। हंगामा मचाने के बाद वे इनोवा मेें बैठकर निकल गए। जो कि मां सरस्वती ट्रेवल्स से छापे के लिए हायर की थी। अधिकारी का वहां बाटा अपना नंबर और ट्रू कॉलर पर उनकी पुरानी तस्वीर कई दिन तक वायरल होती रही। वीडियो फुटेज भी सामने आए लेकिन उन्हें साहब के दूसरे दिन होश में आने के बाद मामला दबा दिया गया। हालांकि पूरे विभाग को इस बारे में पता है। ऐसी स्थिति में अधिकारी 'मैं नहीं था' कहकर विभाग के हम नाम कर्मचारी का नाम बता देता है। बताया जा रहा है छापे के दिन पब में साहब की इंट्री जांच के दायरे में है। 
 इसके बाद विभागीय छापा पीड़ितों ने अधिकारियों की दलाली करने वाले एक सीए की शरण ली। जिसने अधिकारियों से कहकर तीन किलोग्राम से अधिक सोना और बड़ी तादाद में नकद को नजरअंदाज करवाया। सोना संजय नाम के व्यक्ति का था। जबकि नकदी सावन पहाड़िया की थी। जिसकी मोटी फीस मिली लेकिन ये रकम किसी एक अधिकारी के पास गई। जिससे नीचे के दूसरे अधिकारी नाराज हो गए। जिस आदमी का सोना छोड़ा उसके बैंक अकाउंट खुलवाने की बात आई तो नीचले अधिकारियों ने यह कहकर भगा दिया कि जिनसे तुम्हारी बात हो चुकी है उन्हीं के पास जाओ। हम भी देखते हैं वे तुम्हारी मदद कैसे करते हैं। 
सीबीआई को शिकायत
अरसे बाद यह ऐसा हुआ है कि किसी रेड के दौरान अधिकारी दो धड़े में बंट गए। एक धड़ा सेटलमेंट करके काले कुबेरों को राहत देना चाहता है तो दूसरा सख्त कार्रवाई का पक्षधर है। बहरहाल, मामले में सीबीआई तक शिकायत पहुंची है। जिस तरह से 2012 में रूचि सोया पर इनकम टैक्स की छापेमार कार्रवाई हुई और उसके आठ दिन बाद सीबीआई ने रेड करके एक सीए की गाड़ी से लाखों रुपया बरामद किया था जो कि चीफ कमिश्नर तक पहुंचाने के लिए लाया गया था। इसी तरह इस बार भी सीबीआई बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

दिलीप ने कपड़े उतारे, पिंटू ने नेमप्लेट तोड़ी और कृष्णा ने बनाई वीडियो


कालरा के घर पर हमला करने वाली जीतू की गैंग बेनकाब 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
एमआईसी सदस्य जीतू जाटव "यादव' के समर्थकों के बीच पार्षद कमलेश कालरा के घर जो हंगामा मचाया है। उसकी वीडियो वायरल हो रही है। वीडियो में कालरा के नाबालिग बेटे को उसकी मां और दादी के सामने नंगा कर दिया। मामले में एमआईसी सदस्य यहकहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि हंगामा करने वाले मेरे समर्थक नहीं थे जबकि वीडियो में जो लोग दिख रहे हैं वे पिछले दिनों ही जन्मदिन के होर्डिंगों पर जीतू के साथ नजर आए हैं। 
 वीडियो 1 मिनट 7 सेकंड का है। जो उन्हीं लोगों ने बनाया है जिन्होंने कालरा के बेटे के कपड़े उतारे। हिंदुस्तान मेल ने वीडियो के आधार पर आरोपियों की शिनाख्ती की। पता चला कि वीडियो में पिंटू शिंदे, धन्ना राय, बंटी ठाकुर, नवीन शर्मा, अक्षय दुबे और पिंटू आर्य भी दिख रहे हैं। वीडियो से स्क्रीनशॉट लेकर हिंदुस्तान मेल ने इसकी तफ्तीश की। वीडियो कृष्णा शर्मा ने बनाया है जो नगर निगम में ठेकेदारी करता है। कपड़े दिलीप ने उतारे और पिंटू ने आर्य नेमप्लेट तोड़ी। 
 वीडियो में 10 से 12 गुंडे पार्षद के घर में घुसे दिख रहे हैं। जो अश्लील गालियां दे रहे हैं। पार्षद की मां और पत्नी के सामने। बेटा नाबालिग है। सबसे पहले उसके कपड़े उतर वाए। वह हाथ जोड़कर माफी मांगता रहा लेकिन बदमाशों ने उसे पूरा नंगा कर दिया और कहा कि बता देना तेरे बाप को जीतू यादव से पंगा न ले। वरना अगली बार पूरे परिवार को नंगा कर देंगे। 
कर्मचारी की बदजुबानी से हुआ था झगड़ा
झगड़ा यतींद्र यादव की वजह से हुआ था। यतींद्र ने पार्षद को जूनी इंदौर ब्रिज के पास बुलाया। पार्षद नहीं गए। इस पर यतींद्र ने बताया जीतू यादव का करता हूं। इस पर कालरा ने कहा कि जीतू का नाम लेकर डरा क्यों रहे हो, अपना काम करो। जो आपका जिम्मा है। विवाद के बाद सभापति मुन्नालाल यादव ने यतींद्र का समर्थन किया था जो कि यादव है। दूसरी तरफ जीतू यादव की ओर से कहा गया कि समाज उनके साथ है जबकि वे यादव ही नहीं। जाटव हैं। 
सीएम से मिले दोनों पार्षद 
विवाद के दूसरे दिन एक तरफ जहां विधायक मालिनी गौड़ और सिंधी समाज के नेताओं की मौजूदगी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कमलेश कालरा से मुलाकात की। वहीं उसी दिन कुछ भाजपा नेताओं ने जीतू यादव की मुलाकात भी सीएम से करा दी। सीएम ने सिर और गाल पर हाथ फेरा। इसके बाद यादव बेफिकर हो गए। 
एमआईसी सदस्यता खतरे में  
पिछले 20 साले से नगर निगम की परिषद में ऐसा ही होता है। इंदौर-2 से जुड़े पार्षद कुछ ऐसा कारनामा करते हैं कि महापौर से लेकर क्षेत्रीय विधायक तक सिर पकड़ लेते हैं। इससे पहले लाल बहादुर वर्मा को आए दिन के झगड़े के कारण डॉ.उमाशशि शर्मा की एमआईसी हटाया गया था। इसके बाद कृष्णमुरारी मोघे को इस्तीफा तक देना पड़ा जो बाद में उन्होंने वापस ले लिए। फिलहाल नगर अध्यक्ष गौरव रणदीवे ने कालरा और यादव दोनों को नोटिस थमाकर जवाब मांगा है। 
मैं बताता तुझे जीतू यादव क्या है...
जीतू : लोगों के सामने आप मेरी बेइज्जती करोगे। 
कालरा : सुनो तो सही वीडियो बना रहे हैं उन्हें कह दो चले जाए। मेरी मदर 75 इअर ओल्ड है। 
जीतू : वीडियो बना नहीं दूंगा, वीडियो डालो बनाकर। तू कोई पहलवान है क्या? 
कालरा : मैंने तो कभी ऐसा सोचा भी नहीं। 
जीतू : तू हे कौन बे। संगठन का सिर्फ एक पार्षद है। इसीलिए तेरी इज्जत रह गई अभी तक। वरना मैं बताता तुझे जीतू यादव क्या है। 
कालरा : भैया मैं माफी मांग रहा हूं। 
जीतू : अब जीवनभर झेलना तू। समझा।

क्लीनिक का 5 महीने में दो बार लोकार्पण भी नहीं दे पाया जीतू को संजीवनी

क्लीनिक का पांच महीने में दो बार लोकार्पण भी नहीं दे पाया जीतू को 'संजीवनी'
5 अगस्त पहला और 7 जनवरी को दूसरा लोकार्पण
दोनों ही कार्यक्रम में महापौर-विधायक अतिथि
इंदौर से अंतरध्यान टीम जीतू पहुंची प्रयागराज
इंदौर. विनोद शर्मा ।  
पार्षद कमलेश कालरा के घर पर हमला कराने और सिंधी समाज के द्वारा पुलिस को शिकायत कराए जाने के बावजूद पार्षद जीतू यादव का कॉन्फिडेंस चरम पर था। 7 जनवरी को पांच महीने में दूसरी बार संजीवनी क्लीनिक का लोकार्पण कराकर उन्होंने जलवा दिखाने की कोशीश भी की। कामयाबी मिलती भी। तब तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नाराजगी और संगठन की सख्ती ने सब किए-कराए पर पानी फेर दिया। 
 कमलेश कालरा के घर पर हमला कराने के बाद स्वयं को चौतरफा घिरता देख जीतू ने ठान लिया था कि वह संगठन को एक बार फिर अपनी ताकत दिखाएंगे। इसीलिए विजन 2047 के रवींद्र नाट्य गृह में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने यह जचाने की कोशीश कि उन्हें आरोपों से फर्क नहीं पड़ता। कुछ पिछलग्गू मीडिया बंधुओं ने भी उनकी तारीफ में कसीदे गढ़ दिए। इससे हिम्मतजदा जीतू ने 7 जनवरी की दोपहर मां कनकेश्वरी देवी संजीवनी क्लीनिक का शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित कर दिया। महापौर पुष्य मित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा की मौजूदगी में भाषणबाजी के दौरान जीतू ने इठलाते हुए अपनी बात रखी और तमाम आरोपों को झूठा बताकर अपनी साफ-स्वच्छ छवि बताने की कोशीश की।
 जबकि हकीकत यह है कि मां कनकेश्वरी देवी संजीवनी क्लीनिक का शुभारंभ 5 महीने पहले ही हो चुका था। तब भी महापौर और विधायक ने ही फीता काटा था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आयोजन के पीछे जीतू का जो भी मकसद रहा हो लेकिन महापौर और विधायक को तो कमसकम ये पूछना चाहिए था कि आखिर पांच महीनें में दोबारा लोकार्पण क्यों कराया जा रहा है। यूं तो महापौर ने निगम की फिजूलखर्ची को लेकर कमर कस रखी है, फिर इस आयोजन को छूट क्यों दी? यह सवाल अब सबके जहन में है। 
इंदौर से गायब...प्रयागराज पहुंचे जीतू....
सूत्रों की मानें तो शनिवार को संगठन द्वारा छह साल के लिए निष्काशित किए जाने और महापौर द्वारा एमआईसी से हटाए जाने के बाद जीतू और उनके समर्थकों ने इंदौर छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि वे प्रयागराज गए हैं महाकुंभ में 13 जनवरी का शाही स्नान करने। 
 धरपकड़ जारी है...
डीसीपी (जोन-2) अभिनय विश्वकर्मा और डीसीपी (जोन-4) ऋषिकेश मीणा ने परदेशीपुरा और एमआइजी थाने की खुफिया टीम से आरोपितों के मकान-दुकान और उठक-बैठक के अड्डों की रैकी करवा कर एक साथ दबिश दी। जीतू के करीबी लोकेश प्रजापत के घर की तलाशी ली। तीन पुलिया स्थित कमलदीप मार्केट में सोनू बैस उर्फ सोनू सूरवीर की तलाश की। जहां सोनू की ज्वैलरी शॉप है। उसके भाई उदय को हिरासत में लिया। पुलिस ने पूछताछ के बाद दुकान बंद करवा दी। 
22 आरोपियों की लिस्ट तैयार हुई...
सीएम के आदेश के बाद एसआईटी गठित की गई। कुल 22 आरोपी चिन्हित किए गए है। कुछ आरोपियों के यहां दबिश भी दी गई। लेकिन वह नहीं मिले। पुलिस ने जीतू के साथियों के यहां दबिश दी है। जिसमें सोनू जिनका सोना चांदी का काम है। वह नही मिला। उसके परिवार से पूछताछ कर पुलिस वापस आ गई। फिलहाल पुलिस को धन्ना राय, धीरज शिंदे, नवीन शर्मा, आशीष मालवीय, संपत यादव, मिथुन डागर, अभिलाष यादव, नितिन अड़ागले, देवेन्द्र सरोज, सोनू सूरवीर, गोलू आदिवाल, दिलीप बसवाल, नाथू काला, लोकेश प्रजापत, संतोष केमिया, परमजीत तोमर, विशाल गोस्वामी, दीपू काका, बंटी पिंटू, अक्षय और बंटी ठाकुर की तलाश है।
एक हमलवार और चिह्नित
कालरा के घर पर हमला करने वालों में से वीडिया के आधार पर एक की और शिनाख्त हुई है। इसका नाम प्रमोद सिंह भदोरिया उर्फ लम्बू डॉन है। इस पर विभिन्न थानों में पहले भी अपराध दर्ज है।