इंदौरी चंदागैंग का कारनामा
ट्रस्ट के वास्तविक संचालक मनोज को एनकाउंटर में मार चुकी है दिल्ली पुलिस
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कैंसर और एड्स के नाम पर चंदा वसूली करती रही इंदौरी चंदागैंग के कनेक्शन मई 2015 में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए मनोज वशिष्ठ के एनजीओ देशभक्त सेना ट्रस्ट से भी हैं। मनोज के एनकाउंटर के सालभर बाद संदीप चौधरी और उसके कथित भाई सचिन मलिक ने इस ट्रस्ट को इंदौर में आगे बढ़ाया। इसके लिए दिल्ली और मेरठ के लड़के भी बुलाये गए जो देशभक्त सेना ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं।
आगर पुलिस की मेहरबानी से छूटी और झाबुआ पुलिस के हत्थे चढ़ी इंदौरी चंदागैंग के कनेक्शन दिल्ली तक है। बताया जा रहा है कि आदत के अनुसार संदीप चौधरी नस्तीबद्ध हो चुके ट्रस्टों पर नजर रखता था। इसी कड़ी में मेरठ से इंदौर पहुंचे उसके भाई सचिन मलिक ने दिल्ली के देशभक्त सेना ट्रस्ट की जानकारी दी। इस ट्रस्ट को 2007 में बनाने वाले मोस्ट वांटेड मनोज वशिष्ठ को 16 मई 2015 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एनकाउंटर में मार गिराया था।
बागपत कनेक्शन...
दिल्ली पुलिस ने जिस मनोज वशिष्ठ का एनकाउंटर किया था वह मुलत: बागपत के पावला गांव् का रहने वाला था। दिल्ली में 10 साल से रह रहे मनोज की पत्नी प्रियंका वशिष्ठ 2010 से 2015 के बीच बागपत जिला पंचायत की अध्यक्ष रही। भाई अनिल वरिष्ठ को बागपत नगर पालिका के चेयरमैन पद पर सपा के बैनर तले चुनाव लड़ा चुका है। दबंग दुनिया के हाथ लगे दस्तावेजों की मानें तो मेरठ होते हुए संदीप के पास इंदौर पहुंचे सचिन पिता राजवीरसिंह मलिक का स्थाई पता 204ब हिसावदा-2 बागपत है। 1984 में जन्में सचिन का मतदाता पहचान पत्र (जीएमएस1928381) भी इसी पते का बना है।
सचिन इंदौर लाया ‘देशभक्त’
मई 2015 में हुए मनोज के एनकाउंटर के बाद अगस्त 2015 में सचिन मेरठ से इंदौर पहुंचा और अपने मामा के लड़के संदीप से मिला। संदीप ने उसे चंदागैंग के कथित धंधे की जानकारी दी। इस पर सचिन ने संदीप को देशभक्त सेवा ट्रस्ट और मनोज के एनकाउंटर की जानकारी दी। इस पर संदीप ने अपना शैतानी दिमाग दौड़ाते हुए पहले इस ट्रस्ट के पंजीयन नंबर हासिल किए। फिर लोगो व अन्य दस्तावेजों की कॉपी। इस ट्रस्ट को नए कलेवर में आगे बढ़ाने के लिए दोनों निपानिया स्थित एनजीओ भवन भी गए। वहां इसमें आंशिक संसोधन की सलाह दी गई। संदीप ने इसके लिए आरएनटी मार्ग स्थित एक मार्केट में आॅफिस खोलने की तैयारी भी कर ली थी।
सरहद और सेना के नाम का लेना था फायदा
अगस्त से इस नए ट्रस्ट पर ज्यादा से ज्यादा काम किया जाना था। इसके लिए अमित सिसोदिया जैसे बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के नाम पर ट्रस्ट से जोड़ा जाने लगा। अमित सिसोदिया ने बताया कि जून में जिस वक्त वह संदीप से जुड़ा उस वक्त देशभक्त सेना ट्रस्ट पर काम चल ही रहा था। संंदीप ने कहा था कि जल्द ही आॅफिस भी खोल रहे हैं इस ट्रस्ट का लेकिन एनजीओ भवन से मिली समझाइश और मनोज की हिस्ट्री समझने के बाद मामला थोड़ा आगे बड़ा। तब तक के लिए हमें कहा गया कि तुम कैंसर और एड्स के नाम पर ही चंदा करो।
संदीप के एक अन्य राजदार ने बताया कि ट्रस्ट को लेकर मनोज का मकसद जो भी रहा लेकिन यहां संदीप का मकसद सिर्फ सरहद और सेना के जवानों के नाम पर चंदा वसूली करना ही था।
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