इंदौर. विनोद शर्मा।
टॉवर चौराहे पर भाजपा नेता रमेश गोधवानी के टाइम्स स्क्वेअर को 53 अवैध बताकर 8 सितंबर को नोटिस थमाने वाले जोन-18 के भवन अधिकारी का कुछ दिन बाद ही ट्रांसफर हो गया, इसीलिए अब नए भवन अधिकारी मामले में हाथ डालने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं। वह भी तब जबकि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और हाईकोर्ट के निर्देशानुसार ही नगर निगम को रिमुवल की कार्रवाई करना है।
टॉवर चौराहा स्थित सिद्धि विनायक कंस्ट्रक्शन डेवलपर्स तर्फे विनीत गोधवानी के प्लॉट नं. 1 पर गोधवानी व भागीदारों ने मनमाने ढंग से टाइम्स स्क्वेअर बिल्डिंग तान दी। इसका खुलासा दबंग दुनिया ने 3 अक्टूबर को ‘फुटपाथ पर आ गया टॉवर चौराहे का टाइम्स’ शीर्षक से किया था। 53 फीसदी अवैध निर्माण करने वाले गोधवानी और उनके गुर्गों ने कार्रवाई की बारी आते ही नगर निगम के खिलाफ मई 2015 को हाईकोर्ट में याचिका (डब्ल्यूपी3093/2015) लगा दी। 1 सितंबर 2015 को फैसला देते हुए कोर्ट ने निगम को संयुक्त निरीक्षण कर बिल्डिंग जांचने और अवैध निर्माण पर रिमूवल के आदेश दिए थे। इसके विपरीत निगम ने सिर्फ संयुक्त निरीक्षण कर मौका व पंचनामा रिपोर्ट ही बनाई।
372 दिन लग गए जांच करके नोटिस देने में
अवैध निर्माण को लेकर निगम की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर संयुक्त जांच करके रिपोर्ट तैयार करके नोटिस देने में मैदानी अमले ने 372 दिन लगा दिए। नोटिस सर्व हुआ 8 सितंबर 2016 को। इसमें स्वीकृति और निर्मित निर्माण की समीक्षा कर 286 वर्गमीटर का अंतर निकाला गया।
नोटिस दिया, अब कार्रवाई कब
जांच में 372 दिन लगाने वाले अधिकारी नोटिस देने के 97 दिन बाद भी रमेश गोधवानी और उनके गुर्गों को अवैध निर्माण ध्वस्त करने संबंधित नोटिस नहीं दे पाए। न ही किसी तरह की रिमुवल कार्रवाई की कोशिश की गई। आजकल सब नगर निगम आयुक्त ही देखते हैं यह कहते हुए भवन अधिकारी और मैदानी स्टाफ टाइम्स स्क्वेअर से किनारा करता नजर आता है।
तीन करोड़ बचाने के लिए भर रहे हैं अधिकारियों की जेब
बिल्डिंग में 3072.71 वर्गफीट निर्माण अवैध रूप से हुआ है। चूंकि मामला मूल टॉवर चौराहे का है, जहां जमीन का मार्केट दाम 10 हजार वर्गफीट से अधिक है। इस लिहाज से गोधवानी एंड टीम के मनमाने निर्माण की बाजार कीमत ही 3.07 करोड़ रुपए है। यदि इस अवैध निर्माण पर नगर निगम हथौड़े बरसाता है तो बिल्डिंग के साथ ही रमेश गोधवानी का राजनीतिक व सामाजिक गणित भी गड़बड़ा जाएगा। इसीलिए वे अफसरों की खुशियों का ध्यान रख रहे हैं ताकि उनकी खुशी बनी रहे।
यह है कंपनी के भागीदार
सिद्धि विनायक कंस्ट्रक्शन डेवलपर्स भागीदारी फर्म है। इसमें विनित गोधवानी, जयेश बुधवानी, राजेश खुबानी और कृष्णा रमानी भागीदार हैं।
10 फीसदी से ऊपर कंपाउंडिंग नहीं हो सकती
नोटिस थमाने वाले एक अधिकारी ने बताया कि गोधवानी बिल्डिंग की कम्पाउंडिंग कराना चाहता है लेकिन नियम बात की इजाजत न उन्हें देते हैं और न ही निगम को ऐसा कोई अधिकार देते हैं। क्योंकि सामान्यत: कम्पाउंडिंग सिर्फ 10 फीसदी अवैध निर्माण की हो सकती है। यहां तो अवैध निर्माण 53 फीसदी है।
टॉवर चौराहे पर भाजपा नेता रमेश गोधवानी के टाइम्स स्क्वेअर को 53 अवैध बताकर 8 सितंबर को नोटिस थमाने वाले जोन-18 के भवन अधिकारी का कुछ दिन बाद ही ट्रांसफर हो गया, इसीलिए अब नए भवन अधिकारी मामले में हाथ डालने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं। वह भी तब जबकि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और हाईकोर्ट के निर्देशानुसार ही नगर निगम को रिमुवल की कार्रवाई करना है।
टॉवर चौराहा स्थित सिद्धि विनायक कंस्ट्रक्शन डेवलपर्स तर्फे विनीत गोधवानी के प्लॉट नं. 1 पर गोधवानी व भागीदारों ने मनमाने ढंग से टाइम्स स्क्वेअर बिल्डिंग तान दी। इसका खुलासा दबंग दुनिया ने 3 अक्टूबर को ‘फुटपाथ पर आ गया टॉवर चौराहे का टाइम्स’ शीर्षक से किया था। 53 फीसदी अवैध निर्माण करने वाले गोधवानी और उनके गुर्गों ने कार्रवाई की बारी आते ही नगर निगम के खिलाफ मई 2015 को हाईकोर्ट में याचिका (डब्ल्यूपी3093/2015) लगा दी। 1 सितंबर 2015 को फैसला देते हुए कोर्ट ने निगम को संयुक्त निरीक्षण कर बिल्डिंग जांचने और अवैध निर्माण पर रिमूवल के आदेश दिए थे। इसके विपरीत निगम ने सिर्फ संयुक्त निरीक्षण कर मौका व पंचनामा रिपोर्ट ही बनाई।
372 दिन लग गए जांच करके नोटिस देने में
अवैध निर्माण को लेकर निगम की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर संयुक्त जांच करके रिपोर्ट तैयार करके नोटिस देने में मैदानी अमले ने 372 दिन लगा दिए। नोटिस सर्व हुआ 8 सितंबर 2016 को। इसमें स्वीकृति और निर्मित निर्माण की समीक्षा कर 286 वर्गमीटर का अंतर निकाला गया।
नोटिस दिया, अब कार्रवाई कब
जांच में 372 दिन लगाने वाले अधिकारी नोटिस देने के 97 दिन बाद भी रमेश गोधवानी और उनके गुर्गों को अवैध निर्माण ध्वस्त करने संबंधित नोटिस नहीं दे पाए। न ही किसी तरह की रिमुवल कार्रवाई की कोशिश की गई। आजकल सब नगर निगम आयुक्त ही देखते हैं यह कहते हुए भवन अधिकारी और मैदानी स्टाफ टाइम्स स्क्वेअर से किनारा करता नजर आता है।
तीन करोड़ बचाने के लिए भर रहे हैं अधिकारियों की जेब
बिल्डिंग में 3072.71 वर्गफीट निर्माण अवैध रूप से हुआ है। चूंकि मामला मूल टॉवर चौराहे का है, जहां जमीन का मार्केट दाम 10 हजार वर्गफीट से अधिक है। इस लिहाज से गोधवानी एंड टीम के मनमाने निर्माण की बाजार कीमत ही 3.07 करोड़ रुपए है। यदि इस अवैध निर्माण पर नगर निगम हथौड़े बरसाता है तो बिल्डिंग के साथ ही रमेश गोधवानी का राजनीतिक व सामाजिक गणित भी गड़बड़ा जाएगा। इसीलिए वे अफसरों की खुशियों का ध्यान रख रहे हैं ताकि उनकी खुशी बनी रहे।
यह है कंपनी के भागीदार
सिद्धि विनायक कंस्ट्रक्शन डेवलपर्स भागीदारी फर्म है। इसमें विनित गोधवानी, जयेश बुधवानी, राजेश खुबानी और कृष्णा रमानी भागीदार हैं।
10 फीसदी से ऊपर कंपाउंडिंग नहीं हो सकती
नोटिस थमाने वाले एक अधिकारी ने बताया कि गोधवानी बिल्डिंग की कम्पाउंडिंग कराना चाहता है लेकिन नियम बात की इजाजत न उन्हें देते हैं और न ही निगम को ऐसा कोई अधिकार देते हैं। क्योंकि सामान्यत: कम्पाउंडिंग सिर्फ 10 फीसदी अवैध निर्माण की हो सकती है। यहां तो अवैध निर्माण 53 फीसदी है।
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