खजराना में नाहरशाह वली चेरिटेबल ट्रस्ट का कारनामा
इंदौर. विनोद शर्मा ।
खजराना में जमीन की कीमतों ने आसमान क्या हुआ नेक मकसद के लिए बने ट्रस्ट भी नेकी छोड़ भू-माफियाओं के नक्शेकदम पर चल दिए। इसका बड़ा उदाहरण वक्फ बोर्ड से मदरसे के लिए ली गई जमीन पर कट रही अवैध कॉलोनी है जिसका अब तक नामकरण नहीं हो पाया है लेकिन प्लॉट बिक चुके हैं। आधे घर भी बन चुके। हालांकि न सड़क के पते है, न ही बिजली के।
कॉलोनी में प्लॉट के नाम पर ठगी का शिकार हुए मोहम्मद अजीम और उनके जैसे अन्य खरीदारों की मानें तो जमीन को सैय्यद नुरुद्दीन नाहरशाह वली चेरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले कॉलोनी बनाया गया है। इस काम को शरीफ खान जैसे दलाल के साथ अंजाम दिया ट्रस्ट के सर्वेसर्वा मकसूद खान ने। शुरूआती दौर में कॉलोनी को रजिस्टर्ड बताया जा रहा था। 3 लाख रुपए छोटे प्लॉट की कीमत ली गई और 50 हजार रुपए रजिस्ट्री शुल्क। बाद में पता चला कि कॉलोनी जिस जमीन पर है वह तो वक्फ बोर्ड ने सैय्यद नुरुद्दीन नाहरशाह वली चेरिटेबल ट्रस्ट को मदरसे के लिए दी थी। यहां लड़कियों के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग की व्यवस्था भी की जाना थी।
मकसद ही बदल दिया ट्रस्ट ने
वक्फ बोर्ड ने 2012-13 में ट्रस्ट को मदरसे और वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने के लिए जमीन लीज पर दी थी लेकिन ट्रस्ट के संचालकों ने ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की कल्पना को कॉलोनी में बदल दिया। 500-600 वर्गफीट के प्लॉट काट दिए। मुंह देखकर कीमत भी वसूली। लगातार शिकायतों के बाद मप्र वक्फ बोर्ड के 2014-15 में अध्यक्ष शौकत मोहम्मद खान ने लीज निरस्त कर दी।
खरीदने के बाद पता चला अवैध है कॉलोनी
मोहम्मद अजीम ने बताया कि 2012 में जमीन मिलते ही जमीन पर कॉलोनी कटने लगी थी। 600 वर्गफीट का प्लॉट तीन लाख में बेचा जा रहा था। कहा था 15 दिन बाद ही 15 लाख में बिक जाएगा। कॉलोनी रजिस्टर्ड है। 50 हजार रजिस्ट्री के देना पड़ेंगे जो दिए भी। हालांकि रजिस्ट्री के नाम पर तारीख ही आगे बढ़ती रही। इसी बीच जब रजिस्ट्रार में जाकर पूछताछ की तो पता चला कि कॉलोनी अवैध है। पैसे मांगे लेकिन कॉलोनाइजर ने देने से मना कर दिया। उलटा खजराना थाने में झूठी शिकायत कर दी। टीआई को मैंने सच्चाई बताई। तब जनवरी 2016 में पूरे पैसे देने का करार हुआ। दिए सिर्फ 2 लाख। 1.5 लाख मांगे तो घर मु घुसकर जान से मारने की धमकी दी।
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मैं खजराना में ही रहता हूं और आते-जाते जमीन दिखती है। इसीलिए जब लीज निरस्ती के बावजूद निर्माण चलते रहे जिसकी जानकारी मप्र वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को दी। उन्होंने कलेक्टर इंदौर को कार्रवाई के लिए लिखा। निर्माण जारी है। इसीलिए दोबारा अध्यक्ष और कलेक्टर से बात करेंगे। किसी सूरत में वक्फ की जमीन का दुरुपयोग नहीं होने देंगे।
नासिर शाह, पूर्व अध्यक्ष
जिला वक्फ बोर्ड
जमीन मदरसे के लिए दी थी लेकिन मदरसा नहीं बना। कॉलोनी बनने लगी। इसीलिए बोर्ड ने डेढ़ दो साल पहले लीज निरस्त कर दी लेकिन ट्रस्ट हाईकोर्ट चला गया। मामला विचाराधीन है। संबंधित विभागों को लिखने के बाद भी कार्रवाई हो नहीं रही है।
अनवर खान, अध्यक्ष
जिला वक्फ बोर्ड
इंदौर. विनोद शर्मा ।
खजराना में जमीन की कीमतों ने आसमान क्या हुआ नेक मकसद के लिए बने ट्रस्ट भी नेकी छोड़ भू-माफियाओं के नक्शेकदम पर चल दिए। इसका बड़ा उदाहरण वक्फ बोर्ड से मदरसे के लिए ली गई जमीन पर कट रही अवैध कॉलोनी है जिसका अब तक नामकरण नहीं हो पाया है लेकिन प्लॉट बिक चुके हैं। आधे घर भी बन चुके। हालांकि न सड़क के पते है, न ही बिजली के।
कॉलोनी में प्लॉट के नाम पर ठगी का शिकार हुए मोहम्मद अजीम और उनके जैसे अन्य खरीदारों की मानें तो जमीन को सैय्यद नुरुद्दीन नाहरशाह वली चेरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले कॉलोनी बनाया गया है। इस काम को शरीफ खान जैसे दलाल के साथ अंजाम दिया ट्रस्ट के सर्वेसर्वा मकसूद खान ने। शुरूआती दौर में कॉलोनी को रजिस्टर्ड बताया जा रहा था। 3 लाख रुपए छोटे प्लॉट की कीमत ली गई और 50 हजार रुपए रजिस्ट्री शुल्क। बाद में पता चला कि कॉलोनी जिस जमीन पर है वह तो वक्फ बोर्ड ने सैय्यद नुरुद्दीन नाहरशाह वली चेरिटेबल ट्रस्ट को मदरसे के लिए दी थी। यहां लड़कियों के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग की व्यवस्था भी की जाना थी।
मकसद ही बदल दिया ट्रस्ट ने
वक्फ बोर्ड ने 2012-13 में ट्रस्ट को मदरसे और वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने के लिए जमीन लीज पर दी थी लेकिन ट्रस्ट के संचालकों ने ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की कल्पना को कॉलोनी में बदल दिया। 500-600 वर्गफीट के प्लॉट काट दिए। मुंह देखकर कीमत भी वसूली। लगातार शिकायतों के बाद मप्र वक्फ बोर्ड के 2014-15 में अध्यक्ष शौकत मोहम्मद खान ने लीज निरस्त कर दी।
खरीदने के बाद पता चला अवैध है कॉलोनी
मोहम्मद अजीम ने बताया कि 2012 में जमीन मिलते ही जमीन पर कॉलोनी कटने लगी थी। 600 वर्गफीट का प्लॉट तीन लाख में बेचा जा रहा था। कहा था 15 दिन बाद ही 15 लाख में बिक जाएगा। कॉलोनी रजिस्टर्ड है। 50 हजार रजिस्ट्री के देना पड़ेंगे जो दिए भी। हालांकि रजिस्ट्री के नाम पर तारीख ही आगे बढ़ती रही। इसी बीच जब रजिस्ट्रार में जाकर पूछताछ की तो पता चला कि कॉलोनी अवैध है। पैसे मांगे लेकिन कॉलोनाइजर ने देने से मना कर दिया। उलटा खजराना थाने में झूठी शिकायत कर दी। टीआई को मैंने सच्चाई बताई। तब जनवरी 2016 में पूरे पैसे देने का करार हुआ। दिए सिर्फ 2 लाख। 1.5 लाख मांगे तो घर मु घुसकर जान से मारने की धमकी दी।
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मैं खजराना में ही रहता हूं और आते-जाते जमीन दिखती है। इसीलिए जब लीज निरस्ती के बावजूद निर्माण चलते रहे जिसकी जानकारी मप्र वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को दी। उन्होंने कलेक्टर इंदौर को कार्रवाई के लिए लिखा। निर्माण जारी है। इसीलिए दोबारा अध्यक्ष और कलेक्टर से बात करेंगे। किसी सूरत में वक्फ की जमीन का दुरुपयोग नहीं होने देंगे।
नासिर शाह, पूर्व अध्यक्ष
जिला वक्फ बोर्ड
जमीन मदरसे के लिए दी थी लेकिन मदरसा नहीं बना। कॉलोनी बनने लगी। इसीलिए बोर्ड ने डेढ़ दो साल पहले लीज निरस्त कर दी लेकिन ट्रस्ट हाईकोर्ट चला गया। मामला विचाराधीन है। संबंधित विभागों को लिखने के बाद भी कार्रवाई हो नहीं रही है।
अनवर खान, अध्यक्ष
जिला वक्फ बोर्ड
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