Thursday, December 15, 2016

30 दिन में हो स्कीम-54 के दो प्लॉटों का नामांतरण

अवमानना याचिका : हाईकोर्ट ने प्राधिकरण को फटकारा
यदि दस्तावेज जब्त हैं तो ईओडब्ल्यू से लें सत्यापित प्रतिलिपि
इंदौर. विनोद शर्मा ।
स्कीम-54 मैकेनिकनगर स्थित दो प्लॉट के नामांतरण को लेकर लगी मानहानि याचिका का निराकरण करते हुए  हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर विकास प्राधिकरण को जमकर लताड़ा। जस्टिस पी.के.जायसवाल की सिंगल बैंच ने दो टूक शब्दों में कह दिया है प्राधिकरण की माफी नाकाफी है। हाईकोर्ट की सिंगल और डबल बैंच द्वारा दिए गए आदेश का पालन करते हुए प्राधिकरण को शपथ-पत्र के साथ अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगी। अन्यथा प्राधिकरण के खिलाफ कोर्ट कार्रवाई करेगा।
जिस कंटेम्ट केस (412/2015) की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्राधिकरण को फटकारा है वह 2015 में वह एससीएस बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्रायवेट लिमिटेड द्वारा दायर किया गया था। 21 नवंबर 2016 को जारी आदेश में कोर्ट ने कहा कि सिर्फ माफी प्राधिकरण के लिए मामले से बचने का हथियार साबित नहीं हो सकती। सिंगल और डिविजनल बैंच के आदेश का पालन करके प्राधिकरण को आदेश जारी होने से 30 दिन के भीतर शपथ-पत्र के साथ अनुपालन रिपोर्ट प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करना होगी। एससीएस ने 4 नवंबर 2008 को एमपी रीयल एस्टेट एंड डेवलपर्स की डायरेक्टर सुनंदा गुप्ता और वंदना गुप्ता से खरीदा था। रजिस्ट्री के बाद एससीएस बिल्डर्स ने दोनों प्लॉटों के नामांतरण के लिए 9 जनवरी 2009 को आईडीए में आवेदन किया। प्राधिकरण ने नामांतरण नहीं किया। उल्टा आवेदन खारिज कर दिया। इस फैसले को कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती (डब्ल्यूपी 2195/2012) दी। कंपनी की पेरवी वरिष्ठ अभिभाषक एके सेठी ने की।
आईडीए ने कहा कोर्ट में है मामला
मामले में आईडीए ने अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट को ईओडब्ल्यू द्वारा एमपी रीयल एस्टेट एंड डेवलपर्स और प्राधिकरण पदाधिकारियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120बी और पीसीए की धारा 13(1)(डी) और 13 (2) के तहत दर्ज प्रकरण (11/2008) की जानकारी दी। कहा कि प्लॉट और लीज संबंधित सभी दस्तावेज ईओडब्ल्यू 25 मार्च 2008 और 26 अगस्त 2008 को जब्त कर चुका है।
कोर्ट ने कहा दूसरे कागज बनाकर करें नामांतरण
10 सितंबर 2013 को कोर्ट ने कहा कि इसमें प्लॉट खरीदार का क्या कसूर। प्राधिकरण डुप्लीकेट दस्तावेज तैयार करे और कंपनी द्वारा लगाई गए नामांतरण आवेदन का दो महीने में निराकरण करें।
डिविजनल बैंच में भी हारा आईडीए
आईडीए ने 2014 में कोर्ट के इस फैसले को हाईकोर्ट की डिविजनल बैंच में चुनौती (डब्ल्यूए-316/2014) दी। मामले में 10 नवंबर 2014 को कोर्ट ने आईडीए की अपील खारिज करते हुए सिंगल बैंच के आदेश को यथावत रखा। कहा कि प्राधिकरण के पास यदि दस्तावेज नहीं है तो वह ईओडब्ल्यू में अप्लाई करके जब्त दस्तावेजों की सर्टिफाई कॉपी मांगे और नामांतरण करे।
लगाना पड़ी अवमानना याचिका
कंपनी ने 3 मई 2015 को नोटिस जारी किया और सिंगल व डिविजनल बैंच से हुए आदेश के आधार पर नामांतरण करने की अपील की। यदि नामांतरण नहीं हुआ तो इसे कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी। कंपनी प्राधिकरण के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर कर सकती है। बावजूद इसके प्राधिकरण की अड़बाजी जारी रही। इसीलिए 14 जुलाई 2015 को कंपनी ने अवमानना याचिका दायर कर दी।
फिर भी आवेदन निरस्त, आईडीए ने बताये यह कारण
प्लॉट नं. 14 और 16 की लीज में अनियमितता की शिकायत हुई जिसके आधार पर ईओडब्ल्यू ने केस दर्ज किया था। इसी लीज के आधार पर गुप्ता परिवार ने प्लॉट एससीएस कंपनी को बेचे थे। जब तक केस का निराकरण नहीं होता नामांतरण कैसे करें?
विवादित भूखंडो की स्थिति और क्षेत्रफल में संसोधित ले-आउट अनुसार परिवर्तन हुआ है। जिसके संबंध में भी न्यायालय में प्रकरण 9/09 दर्ज होकर लंबित है। दोनों मामलों के निराकरण न होने तक नामांतरण नहीं हो सकता।
विवाद परत-दर-परत
प्लॉट नं. 14 व 16 (स्कीम-54)
लीज आवंटित : 21 अक्टूबर 2005
लीज अवधि : 25 साल (2030 तक)
मान्य : हस्तांतरण या नामांतरण
आवंटी : एमपी रीयल एस्टेट प्रा.लि.
सौदा : 4 नवंबर 2008
किनके बीच : एमपी रीयल एस्टेट प्रा.लि.  और एससीएस बिल्डर्स एंड डेवलपर्स।
विक्रेता बरी : ईओडब्ल्यू अब तक जितने लोगों को मामले से बरी कर चुका है उनमें एमपी रीयल एस्टेट प्रा.लि.के डायरेक्टर भी हैं। 

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