Thursday, December 15, 2016

डीआरआई के निशाने पर चायना फर्नीचर

- 50 फीसदी कारोबार आउट आॅफ द बुक्स
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इनकम टैक्स ने जहां ज्वैलर्स, बिल्डर्स और केटरर्स पर शिकंजा कस रखा है वहीं डायरेक्टर जनरल आॅफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) ने निशाना साधा है चायनीज फर्नीचर के बड़े कारोबारियों पर। हिंदुस्तान में ज्यादातर कारोबारी 50-50 के रेशों में चीनी फर्नीचर का कारोबार करते हैं। यानी 50 फीसदी का धंधा एक नंबर में, बाकी दो नंबर में। इन तमाम कारोबारियों के साथ डीआरआई के पास फर्नीचर के चीनी सप्लायर्स की सूची भी तैयार है। बताया जा रहा है कि इस सूची में दो दर्जन से ज्यादा कारोबारी इंदौर के हैं।
अंडर गार्मेंट, गार्मेंट, टीवी कंपोनेंट जैसे उत्पादों का बिल बनवाकर चीनी फर्नीचर की खेप बुलाई जाती है। इनलैंड कंटेनर डिपोर्ट (आईसीडी) पीथमपुर में भी फर्नीचर की ऐसी खेप पकड़ी जा चुकी है। इसे मिस डिक्लेरेशन कहा जाता है जो कि कस्टम एक्ट के तहत न सिर्फ कस्टम चोरी है बल्कि कानूनन अपराध भी है। ऐसी खेप पर अब डीआरआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है ताकि फर्नीचर के नाम पर हो रही भारीभरकम कालाबाजारी को रोका जा सके।
कालाधन खपाने का तरीका
सोने और केटरिंग की तरह ही फर्नीचर की बुकिंग भी पूरानी डेट्स में दिखाई गई है। आंकड़ों के अनुसार 8 से 15 नवंबर के बीच पुराने नोटों से फर्नीचर की सेल भी करोड़ों में हुई है। इसके अलावा फर्नीचर के आयात में हवाले के माध्यम से पैसा हिंदुस्तान से चायना जाता है। इसीलिए प्राप्त शिकायतों के आधार पर ही वित्त मंत्रालय ने डीआरआई को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है।
इंदौर में है दो दर्जनर प्लेयर
भरत लाइफ स्टाइल, महिदपुर वाला फर्नीचर, स्टेलर जैसे इंदौर में कई फर्नीचर शौ-रूप में है जहां बड़ी तादाद में आॅफिस व होम फर्नीचर के रूप में चायना के फर्नीचर का इस्तेमाल होता है। शुरूआती दौर में इनकी संख्या भले कम थी लेकिन आज इंदौर में ऐसे शो-रूम की संख्या दो दर्जन से अधिक है।
फर्नीचर की आड़ में भी गौरखधंध
बीते दिनों डीआरआई की टीम ने दिल्ली में एम्पायर सेफ कंपनी पर दबिश दी थी। जांच में पता चला कि फर्नीचर में छिपाकर ओजोन डिप्लिटिंग गैस और आर-22 गैस के साथ ही प्रिंटिंग में काम आने वाली पी.एस.प्लेट लाई गई थी।
ट्रेड बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग
बताया जा रहा है कि फर्नीचर की इन्वॉइस यदि 1 करोड़ की बनी है तो हिंदुस्तानी कंपनियां डबल बिलिंग करवाकर 50 फीसदी पेमेंट आॅन द बुक्स करती हैं और 50 फीसदी पेमेंट आॅउट आॅफ द बुक्स। हवाले के जरिये। इसे डीआरआई की भाषा में ट्रेड बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग (टीबीएमएल) कहा जाता है।  फर्नीचर या अन्य प्रतिबंधित उत्पादों के कारोबार के नाम मनी लॉन्डिंÑंग करने वाले ऐसे कारोबारियों पर डीआरआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
इन पर है नजर
मिस डिक्लेरेशन : आयात हुआ क्या और बिल बिना किसी और का ताकि कस्टम ड्यूटी, सीवीडी, एंटी डम्पिंग ड्यूटी बचाई जा सके।
अंडर इन्वॉयसिंग : यदि किसी उत्पाद की इन्वॉइस यदि एक करोड़ की है तो उसकी बिलिंग 25 या 50 लाख कराई जाती है तो बाकी के 50 या 75 लाख रुपए पर टैक्स न देना पड़े।
अन्य नोटिफिकेशन : कुछ उत्पाद कस्टम ड्यूटी से मुक्त हैं उनके नाम पर बिलिंंग करवाकर फर्नीचर बुलवाये जाते हैं। 

No comments:

Post a Comment