Thursday, December 15, 2016

दो दिन पुलिस रिमांड पर रही है चंदागैंग

सरगना तलाश रही है राणापुर पुलिस, दूसरी तरफ सबूत मिटा रही है चंदागैंग
इंदौर. विनोद शर्मा।
कैंसर और एड्स पीड़ितों के नाम पर चंदा वसूली करती आ रही इंदौर की चंदा गैंग झाबुआ के राणापुर थाने में दो दिन की पुलिस रिमांड पर रह चुकी है। हालांकि पुलिस रिमांड में रहते हुए चंदा गैंग के तीन कारिंदों ने सरगना उस संदीप चौधरी का नाम नहीं बताया था जिसने एक वकील के माध्यम से थाने के आला स्टाफ को पैसे देकर गैंग को आगर थाने से छुड़वाया था। बहरहाल, दबंग दुनिया के सामने गैंग के अमित सिसोदिया ने अपना जो पक्ष रखा था उसकी रिकॉर्डिंग मिलने के बाद राणापुर पुलिस ने नए सिरे से तफ्तीश शुरू कर दी है।
7, 8 और 9 जुलाई को आगर थाने में बंद रहने के बाद चंदागैंग को 17 जुलाई 2016 को झाबुआ की राणापुर पुलिस ने पकड़ा था। दोपहर में गिरफ्तार किए गए। पुलिस की मांग पर कोर्ट ने दो दिन का पुलिस रिमांड दिया। थाना प्रभारी भीमसिंह सिसोदिया ने दबंग दुनिया से खास बातचीत में बताया कि गिरफ्तारी के दौरान चंदागैंग से करीब 35 हजार रुपए नकद बरामद किए गए थे। इसके साथ ही तीन रसीद कट्टे भी पकड़े गए। इनमें से कुछ पूरे थे, कुछ से रसीद कट चुकी थी। पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में तीनों ने कई राज उगले थे जिनमें से कुछ पर जांच हो चुकी है, कुछ पर जांच जारी है।
पते थे मेरठ के...
थाना प्रभारी सिसोदिया ने बताया कि जो रसीद कट्टे पकड़े गए थे। उन पर न पंजीयन नंबर था। न इनके पास कोई लाइसेंस था। न और किसी तरह की जानकारी थी। संस्था का जो नाम और पता रसीदों पर था वह भी जांच के दौरान पूर्णत: फर्जी निकला। इनमें सिर्फ अमित सिसोदिया का पता इंदौर का था, सचिन मलिक और एक अन्य का पता मेरठ का था। अमित सिसोदिया ने आलीराजपुर के किसी रिश्तेदार का पता दर्ज करवाया था।
कॉल रिकॉर्डिंग भी निकाल रहे हैं
सिसोदिया ने बताया कि तीनों शातिर अपराधी हैं। कड़ी पूछताछ के बाद भी कुछ जानकारियां उन्होंने नहीं बताई। सचिन मलिक ने बोस होना स्वीकारा लेकिन फिर भी कॉल रिकॉर्डिंग व अन्य साधनों से जांच जारी है। कैंसर और एड्स पीड़ितों के ईलाज के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले ऐसे लोगों को बक्शा नहीं जाना चाहिए।
कहीं फरारी, कहीं सबूत मिटाने की कोशिश
दबंग दुनिया द्वारा लगातार किए जा रहे खुलासों और डीआईजी संतोष सिंह द्वारा जांच को लेकर दिए गए निर्देश के बाद से ही चंदा गैंग इधर-उधर फरारी काट रही है। वहीं संदीप चौधरी की कोशिश है कि कैसे भी करके उसका नाम पुलिस के सामने नहीं आए। इसके लिए वह अन्य सभी साथियों पर भी दबाव डाल रहा है। इतना ही नहीं उन तमाम  लोगों को भी डराया-धमकाया जा रहा है जिनकी मदद से दबंग दुनिया ने चंदा गैंग का खुलासा किया।
आगर पुलिस भी शंका के घेरे में
एक तरफ संदीप और उसकी गैंग अपने दामन को पाकसाफ बताने के लिए जी-जान लगा रही है वहीं ‘पांच लाख देकर आगर थाने से छूटी थी चंदा गैंग’ शीर्षक से 25 नवंबर को प्रकाशित समाचार के बाद आगर एसपी आर. मीणा ने मामले में छानबीन शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि इस मामले में उन्होंने थाने के उस बड़े अधिकारी की जांच शुरू कर दी जिसने इंदौर के वकील और एक अन्य व्यक्ति से थाने में ही पैसे लिए और चंदागैंग को 151 जैसी सामान्य प्रतिबंधात्मक धारा लगाकर छोड़ा। 

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