बाद में विधायक के नाम की आड़ लेकर ही छूटी गैंग
इंदौर. विनोद शर्मा ।
धार, झाबुआ और आलीराजपुर जैसे शहरों में अपने जौहर दिखा चुकी इंदौर की चंदागैंग आगर के विधायक गोपाल परमार को भी टोपी पहना चुकी है। विधायक ने 501 रुपए का चंदा दिया लेकिन थोड़ी ही देर बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो चंदागैंग को पकड़कर आगर पुलिस के हवाले कर दिया था। बाद में संदीप चौधरी ने इंदौर और उज्जैन के वकील के माध्यम से विधायक के ही नाम की आड़ लेकर गैंग को छुड़वाया।
बताया जा रहा है कि 7 जुलाई को चंदागैंग के सदस्य अमित सिसोदिया, सचिन मलिक, अक्षय गुर्जर उर्फ राघव और एस.पी.तिवारी आगर पहुंचे। यहां दिनभर लोगों से वसूली चलती रही। किसी ने 21 रुपए की रसीद कटवाई तो किसी ने 551 रुपए की। रसीद कटवाने वालों में आगर विधायक गोपाल परमार भी शामिल थे जिन्होंने कैंसर और एड्स पीड़ितों की मदद के लिए चंदागैंग को 501 रुपए का चंदा दिया था। इसके बाद गैंग मोटरसाइकिल के एक शो-रूम पहुंची। वहां संचालक ने भी रसीद कटवाई लेकिन रसीद हाथ में लेते ही उसने सामने रखे कम्प्यूटर पर एनजीओ का नाम डाला जो उसे बार-बार सर्च करने के बाद भी नहीं मिला। इस पर उसने कहा एनजीओ और रसीद दोनों फर्जी है। तत्काल इसकी सूचना विधायक परमार को दी गई। परमार ने चंदागैंग की करतूत पर कड़ी नाराजगी जताते हुए चारों सदस्यों को आगर पुलिस के हवाले कर दिया।
कई लोगों ने दी गवाही
चूंकि आगर छोटा शहर है इसीलिए भरे बाजार हुआ हंगामा थोड़ी ही देर में पूरे बाजार में फैल गया। जिन लोगों ने भी रसीद कटवाई थी, सभी थाने पहुंच गए। वहां टीआई ने उनकी शिकायत दर्ज करते हुए गैंग के सदस्यों को लॉकअप में बंद कर दिया।
उधर, दबंग दुनिया द्वारा 5 लाख रुपए के लेनदेन के बाद आरोपियों को छोड़ने का खुलासा किया गया था तब थाना प्रभारी एस.एस.नागर ने कहा था कि हमें किसी ने शिकायत ही नहीं की थी तो कैसे कैसे दर्ज करते।
जोड़-तोड़ से छूटे...
गैंग के बंद होते ही संदीप हैरान-परेशान हुआ। इंदौर में अपने वकील से बात की। फिर उज्जैन के एक वकील से बात हुई। अधिकारियों से संबंध निकाले गए। इसके बाद थाना प्रभारी और एसडीएम से बात हुई। तब जाकर 151 की सामान्य सी धारा लगी और मुचलका भरवाकर छोड़ दिया गया। जमानत का निर्णय 30 जुलाई को हुआ।
मैंने ही पकड़कर बंद करवाया था, छुड़वाया नहीं...
इंदौर के चार लड़के कैंसर-एड्स पीड़ितों की मदद के लिए मेरे पास आए थे। मैंने भी 501 रुपए की रसीद कटवाई तब तक मुझे उनकी वास्तविकता का भान नहीं था। वास्तविकता सामने आई तब मैंने ही बाजार के अन्य लोगों के साथ मिलकर चारों को पुलिस के हवाले किया था। इसके बाद क्या हुआ मुझे जानकारी नहीं थी। मैंने छुड़वाया यह कहना गलत है। आज पता चला कि धोखाधड़ी की जगह पुलिस ने 151 जैसी सामान्य प्रतिबंधात्मक धारा लगाई। मैं इस संबंध में एसपी से बात करके मामले की आगर थाना स्टाफ की भूमिका की जांच करवाऊंगा। ऐसे कैसे धोखाधड़ी दर्ज नहीं हुई। मेरे नाम की आड़ लेकर छोड़ दिया गया।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
धार, झाबुआ और आलीराजपुर जैसे शहरों में अपने जौहर दिखा चुकी इंदौर की चंदागैंग आगर के विधायक गोपाल परमार को भी टोपी पहना चुकी है। विधायक ने 501 रुपए का चंदा दिया लेकिन थोड़ी ही देर बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो चंदागैंग को पकड़कर आगर पुलिस के हवाले कर दिया था। बाद में संदीप चौधरी ने इंदौर और उज्जैन के वकील के माध्यम से विधायक के ही नाम की आड़ लेकर गैंग को छुड़वाया।
बताया जा रहा है कि 7 जुलाई को चंदागैंग के सदस्य अमित सिसोदिया, सचिन मलिक, अक्षय गुर्जर उर्फ राघव और एस.पी.तिवारी आगर पहुंचे। यहां दिनभर लोगों से वसूली चलती रही। किसी ने 21 रुपए की रसीद कटवाई तो किसी ने 551 रुपए की। रसीद कटवाने वालों में आगर विधायक गोपाल परमार भी शामिल थे जिन्होंने कैंसर और एड्स पीड़ितों की मदद के लिए चंदागैंग को 501 रुपए का चंदा दिया था। इसके बाद गैंग मोटरसाइकिल के एक शो-रूम पहुंची। वहां संचालक ने भी रसीद कटवाई लेकिन रसीद हाथ में लेते ही उसने सामने रखे कम्प्यूटर पर एनजीओ का नाम डाला जो उसे बार-बार सर्च करने के बाद भी नहीं मिला। इस पर उसने कहा एनजीओ और रसीद दोनों फर्जी है। तत्काल इसकी सूचना विधायक परमार को दी गई। परमार ने चंदागैंग की करतूत पर कड़ी नाराजगी जताते हुए चारों सदस्यों को आगर पुलिस के हवाले कर दिया।
कई लोगों ने दी गवाही
चूंकि आगर छोटा शहर है इसीलिए भरे बाजार हुआ हंगामा थोड़ी ही देर में पूरे बाजार में फैल गया। जिन लोगों ने भी रसीद कटवाई थी, सभी थाने पहुंच गए। वहां टीआई ने उनकी शिकायत दर्ज करते हुए गैंग के सदस्यों को लॉकअप में बंद कर दिया।
उधर, दबंग दुनिया द्वारा 5 लाख रुपए के लेनदेन के बाद आरोपियों को छोड़ने का खुलासा किया गया था तब थाना प्रभारी एस.एस.नागर ने कहा था कि हमें किसी ने शिकायत ही नहीं की थी तो कैसे कैसे दर्ज करते।
जोड़-तोड़ से छूटे...
गैंग के बंद होते ही संदीप हैरान-परेशान हुआ। इंदौर में अपने वकील से बात की। फिर उज्जैन के एक वकील से बात हुई। अधिकारियों से संबंध निकाले गए। इसके बाद थाना प्रभारी और एसडीएम से बात हुई। तब जाकर 151 की सामान्य सी धारा लगी और मुचलका भरवाकर छोड़ दिया गया। जमानत का निर्णय 30 जुलाई को हुआ।
मैंने ही पकड़कर बंद करवाया था, छुड़वाया नहीं...
इंदौर के चार लड़के कैंसर-एड्स पीड़ितों की मदद के लिए मेरे पास आए थे। मैंने भी 501 रुपए की रसीद कटवाई तब तक मुझे उनकी वास्तविकता का भान नहीं था। वास्तविकता सामने आई तब मैंने ही बाजार के अन्य लोगों के साथ मिलकर चारों को पुलिस के हवाले किया था। इसके बाद क्या हुआ मुझे जानकारी नहीं थी। मैंने छुड़वाया यह कहना गलत है। आज पता चला कि धोखाधड़ी की जगह पुलिस ने 151 जैसी सामान्य प्रतिबंधात्मक धारा लगाई। मैं इस संबंध में एसपी से बात करके मामले की आगर थाना स्टाफ की भूमिका की जांच करवाऊंगा। ऐसे कैसे धोखाधड़ी दर्ज नहीं हुई। मेरे नाम की आड़ लेकर छोड़ दिया गया।
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