सरकारी जमीन हजम करने वाली मारूति गृह निर्माण संस्था का कारनामा
54 हजार वर्गफीट पर पहले इंडस वर्ल्ड बना, बाद में आईपीएस अकेडमी ने किया टेकओवर
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इन्फॉर्मल सेक्टर के लिए प्रस्तावित जमीन सरकार को देकर फिर उस पर सार्इं कृपा-2 का ले-आउट मंजूर कराने वाली मारूति गृह निर्माण सहकारी संस्था ने सरकारी आदेश के विपरीत शैक्षणिक उपयोग की जमीन भी मनमाने ढंंग से बेच खाई। दस्तावेजों के लिहाज से बात करें तो 1988 में साई कृपा कॉलोनी काटते वक्त कलेक्टर ने जिस जमीन को जिला शिक्षा विभाग या नगर निगम इंदौर को सौंपने के लिए कहा था संस्था ने वही जमीन बाद में निजी स्कूल को बेच डाली। आज उस जमीन पर आईपीएस स्कूल (इर्स्टन कैंपस) संचालित हो रहा है।
संस्था की मनमानी का खुलासा दबंग दुनिया ने ‘सरकार को सौंपी जमीन पर ‘मारुति’ की नई साईकृपा’, शीर्षक से प्रकाशित समाचार में किया था। इसके बाद लगातार संस्था के खिलाफ शिकायतें मिलने लगी। इसी कड़ी में एक अहम सुराग हाथ लगा तकरीबन 54000 वर्गफीट जमीन की हेराफेरी का। खजराना में संस्था की 58.89 एकड़ जमीन थी। जिस पर टीएडंसीपी ने 22 अगस्त 1988 को ले-आउट मंजूर करते हुए 15 प्रशित (करीब 8.80 एकड़) भूमि इन्फॉर्मल सेक्टर के लिए आरक्षित रखी थी। 13 जनवरी 1989 को एसडीएम ने मप्र गंदी बस्ती उन्मूलन मंडल अधिकारी के रूप में जमीन का कब्जा लिया। वहीं 25 फरवरी 1989 को कलेक्टर की तरफ से डिप्टी कलेक्टर ने अध्यक्ष मारुति गृह निर्माण सहकारी संस्था को पत्र (337/कॉलोनी सेल/89) लिखा और शाला भवन व उद्यान के लिए आरक्षित रखी गई जमीन शिक्षा विभाग व नगर निगम को सौंपने के निर्देश दिए।
संस्था अग्रवाल की
मारूति गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष राजेंद्रनाथ अग्रवाल हैं जो कि सार्इं कृपा गृह निर्माण सहकारी संस्था के सर्वेसर्वा प्रेम गोयल के साले हेैं।
यह लिखा था आदेश में
सूचित किया जाता है कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा स्वीकृत अभिन्यास में शैक्षणिक प्रयोजन के लिए छोड़ी गई जमीन व बगीचे के लिए छोड़ी गई जमीन का कब्जा क्रमश: जिला शिक्षा अधिकारी(शिक्षा विभाग) और आयुक्त नगर पालिक निगम इंदौर को सौंपकर पालन प्रतिवेदन 3 दिन में कार्यालय को भिजवाने का कष्ट करें। इसकी प्रति नगर निगम, शिक्षा विभाग और टीएंडसीपी को भी भेजी गई।
ऐसे करी अफरा-तफरी
स्कूल के लिए छोड़ा गया प्लॉट करीब 54000 वर्गफीट का है। तीन तरफ 12 मीटर की रोड प्रस्तावित थी। चौथी तरफ 2000 वर्गफीट के नौ प्लॉट (480 से 488) आरक्षित छोड़े गए थे जिनका भू-उपयोग आवासीय/व्यावसायिक था। हालांकि इन प्लॉटों का जिक्र ले-आउट में तो है लेकिन मौके पर प्लॉट है नहीं। इनका समावेश स्कूल की जमीन में किया जा चुका है। एक तरफ 409 से 417, दूसरी तरफ 547 से 560 और तीसरी तरफ 513 से 516 के बीच प्लॉट हैं, जहां मकान बने हैं। 2005-06 में स्कूल की जमीन इंडस स्कूल को बेच दी गई। इसी वित्त वर्ष में स्कूल का काम शुरू हो गया। 2007-08 में स्कूल तैयार हो गया। 2009 में स्कूल आईपीएस अकेडमी को बेच दिया गया। आईपीएस ने इसे इस्टर्न कैंपस के रूप में जुलाई 2009 से शुरू किया।
बच्चों का हक जीमा
उस वक्त कॉलोनी सेल व कलेक्टर की सोच थी कि यदि सार्इं कृपा की करीब 50 हजार वर्गफीट जमीन शिक्षा विभाग को मिल जाती है तो यहां भविष्य में शासकीय स्कूल शुरू किया जा सकता है। अभी सरकारी स्कूल सिर्फ खजराना में है जो कि सार्इंकृपा कॉलोनी से तकरीबन दो से तीन किलोमीटर दूर है। यदि सार्इंकृपा की जमीन पर सरकारी स्कूल बनता तो उसका फायदा निपानिया और पीपल्याकुमार जैसे उन गांवों को भी मिलता जहां अच्छा स्कूल नहीं है।
ताबिज और यंत्रों का गौरखधंधा भी कर चुकी है चंदागैंग
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कैंसर और एड्स पीड़ितों के नाम पर चंदा वसूली करते आ रही चंदा गैंग का सरगना संदीप चौधरी बीते वर्षों में वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जंगल की लकड़ियों की तस्करी और चायनामेड इलेक्ट्रॉनिक आइटम का गौरखधंधा भी कर चुका है। इधर, इंदौर पुलिस की मेहरबानी के कारण चंदागैंग का सरगना न सिर्फ बेखौफ घुम रहा है बल्कि सबूत भी मिटा रहा है।
लोगों को टोपी पहनाना संदीप चौधरी का पुराना धंधा है। फिर मामला चायनीज इलेक्ट्रॉनिक आइटम के फर्जीवाड़े का हो या फिर जंगल की लकड़ी की अफरा-तफरी का। संदीप के निकटतम दोस्तों की मानें तो डेढ़ साल पहले यंत्र और ताबिजों का गौरखधंधा भी चौधरी कर चुका है। यह सारा काम आरएनटी मार्ग स्थित सिल्वर मॉल के आॅफिस से किया। इस काम में सचिन मलिक पार्टनर नहीं था लेकिन फिर भी भागीदारों की संख्या दो बताई जाती है। तकरीबन तीन महीने तक ताबिज और यंत्र का धंधा चला लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद इन्होंने यह धंधा छोड़कर चंदाखोरी शुरू कर दी।
लोकल माल को ब्रांडेड बनाकर बेचता था
निकतम साथियों की मानें तो संदीप ने लोकल इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स, ताबिज और यंत्रों को ब्रांडेड बताकर बेचा है। इसके लिए व्यवस्थित डिब्बाबंद पैकिंग भी कराई जाती थी ताकि लोकल माल ब्रांडेड दिखे।
अब तक नहीं मिला पुलिस को घर!
संदीप और उसकी चंदागैंग का खुलासा दबंग दुनिया द्वारा लगातार किए जाने के बाद उसके ही अपने वकील ने विजयनगर थाने में शिकायत आवेदन दिया था। इस आवेदन में चौधरी और चंदागैंग का पूरा कालाचिट्ठा बयान किया गया था। बावजूद इसके विजयनगर पुलिस ‘घर नहीं मिल रहा है’, कहकर जांच आगे नहीं बढ़ा पाई। जबकि विजयनगर पुलिस स्टेशन और चौधरी के घर (बीजी 257 स्कीम-74, जो कि राष्ट्रीय विद्यामंदिर स्कूल के ठीक सामने हैं) के बीच की दूरी 1.34 किलोमीटर ही है। दो राइट और एक लेफ्ट टर्न लेकर चौधरी का घर नहीं ढूंड पा रही पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इंदौर को छोड़ बाकी पुलिस ने दिखाई सक्रीयता
आगर पुलिस : 7,8,9 जुलाई को चंदागैंग के अमित सिसोदिया, सचिन मलिक, एस.एन.तिवारी और अक्षय गुर्जर को पकड़ चुकी है आगर पुलिस।
झाबुआ पुलिस : 17 जुलाई को लोगों की शिकायत पर झाबुआ के राणापुर थाने की पुलिस ने अमित, सचिन और अक्षय को केंसर और एड्स पीड़ितों के नाम पर फर्जी एनजीओ की रसीद काटकर चंदा वसूलते रंगेहाथ पकड़ा था। धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज किया था।
54 हजार वर्गफीट पर पहले इंडस वर्ल्ड बना, बाद में आईपीएस अकेडमी ने किया टेकओवर
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इन्फॉर्मल सेक्टर के लिए प्रस्तावित जमीन सरकार को देकर फिर उस पर सार्इं कृपा-2 का ले-आउट मंजूर कराने वाली मारूति गृह निर्माण सहकारी संस्था ने सरकारी आदेश के विपरीत शैक्षणिक उपयोग की जमीन भी मनमाने ढंंग से बेच खाई। दस्तावेजों के लिहाज से बात करें तो 1988 में साई कृपा कॉलोनी काटते वक्त कलेक्टर ने जिस जमीन को जिला शिक्षा विभाग या नगर निगम इंदौर को सौंपने के लिए कहा था संस्था ने वही जमीन बाद में निजी स्कूल को बेच डाली। आज उस जमीन पर आईपीएस स्कूल (इर्स्टन कैंपस) संचालित हो रहा है।
संस्था की मनमानी का खुलासा दबंग दुनिया ने ‘सरकार को सौंपी जमीन पर ‘मारुति’ की नई साईकृपा’, शीर्षक से प्रकाशित समाचार में किया था। इसके बाद लगातार संस्था के खिलाफ शिकायतें मिलने लगी। इसी कड़ी में एक अहम सुराग हाथ लगा तकरीबन 54000 वर्गफीट जमीन की हेराफेरी का। खजराना में संस्था की 58.89 एकड़ जमीन थी। जिस पर टीएडंसीपी ने 22 अगस्त 1988 को ले-आउट मंजूर करते हुए 15 प्रशित (करीब 8.80 एकड़) भूमि इन्फॉर्मल सेक्टर के लिए आरक्षित रखी थी। 13 जनवरी 1989 को एसडीएम ने मप्र गंदी बस्ती उन्मूलन मंडल अधिकारी के रूप में जमीन का कब्जा लिया। वहीं 25 फरवरी 1989 को कलेक्टर की तरफ से डिप्टी कलेक्टर ने अध्यक्ष मारुति गृह निर्माण सहकारी संस्था को पत्र (337/कॉलोनी सेल/89) लिखा और शाला भवन व उद्यान के लिए आरक्षित रखी गई जमीन शिक्षा विभाग व नगर निगम को सौंपने के निर्देश दिए।
संस्था अग्रवाल की
मारूति गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष राजेंद्रनाथ अग्रवाल हैं जो कि सार्इं कृपा गृह निर्माण सहकारी संस्था के सर्वेसर्वा प्रेम गोयल के साले हेैं।
यह लिखा था आदेश में
सूचित किया जाता है कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा स्वीकृत अभिन्यास में शैक्षणिक प्रयोजन के लिए छोड़ी गई जमीन व बगीचे के लिए छोड़ी गई जमीन का कब्जा क्रमश: जिला शिक्षा अधिकारी(शिक्षा विभाग) और आयुक्त नगर पालिक निगम इंदौर को सौंपकर पालन प्रतिवेदन 3 दिन में कार्यालय को भिजवाने का कष्ट करें। इसकी प्रति नगर निगम, शिक्षा विभाग और टीएंडसीपी को भी भेजी गई।
ऐसे करी अफरा-तफरी
स्कूल के लिए छोड़ा गया प्लॉट करीब 54000 वर्गफीट का है। तीन तरफ 12 मीटर की रोड प्रस्तावित थी। चौथी तरफ 2000 वर्गफीट के नौ प्लॉट (480 से 488) आरक्षित छोड़े गए थे जिनका भू-उपयोग आवासीय/व्यावसायिक था। हालांकि इन प्लॉटों का जिक्र ले-आउट में तो है लेकिन मौके पर प्लॉट है नहीं। इनका समावेश स्कूल की जमीन में किया जा चुका है। एक तरफ 409 से 417, दूसरी तरफ 547 से 560 और तीसरी तरफ 513 से 516 के बीच प्लॉट हैं, जहां मकान बने हैं। 2005-06 में स्कूल की जमीन इंडस स्कूल को बेच दी गई। इसी वित्त वर्ष में स्कूल का काम शुरू हो गया। 2007-08 में स्कूल तैयार हो गया। 2009 में स्कूल आईपीएस अकेडमी को बेच दिया गया। आईपीएस ने इसे इस्टर्न कैंपस के रूप में जुलाई 2009 से शुरू किया।
बच्चों का हक जीमा
उस वक्त कॉलोनी सेल व कलेक्टर की सोच थी कि यदि सार्इं कृपा की करीब 50 हजार वर्गफीट जमीन शिक्षा विभाग को मिल जाती है तो यहां भविष्य में शासकीय स्कूल शुरू किया जा सकता है। अभी सरकारी स्कूल सिर्फ खजराना में है जो कि सार्इंकृपा कॉलोनी से तकरीबन दो से तीन किलोमीटर दूर है। यदि सार्इंकृपा की जमीन पर सरकारी स्कूल बनता तो उसका फायदा निपानिया और पीपल्याकुमार जैसे उन गांवों को भी मिलता जहां अच्छा स्कूल नहीं है।
ताबिज और यंत्रों का गौरखधंधा भी कर चुकी है चंदागैंग
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कैंसर और एड्स पीड़ितों के नाम पर चंदा वसूली करते आ रही चंदा गैंग का सरगना संदीप चौधरी बीते वर्षों में वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जंगल की लकड़ियों की तस्करी और चायनामेड इलेक्ट्रॉनिक आइटम का गौरखधंधा भी कर चुका है। इधर, इंदौर पुलिस की मेहरबानी के कारण चंदागैंग का सरगना न सिर्फ बेखौफ घुम रहा है बल्कि सबूत भी मिटा रहा है।
लोगों को टोपी पहनाना संदीप चौधरी का पुराना धंधा है। फिर मामला चायनीज इलेक्ट्रॉनिक आइटम के फर्जीवाड़े का हो या फिर जंगल की लकड़ी की अफरा-तफरी का। संदीप के निकटतम दोस्तों की मानें तो डेढ़ साल पहले यंत्र और ताबिजों का गौरखधंधा भी चौधरी कर चुका है। यह सारा काम आरएनटी मार्ग स्थित सिल्वर मॉल के आॅफिस से किया। इस काम में सचिन मलिक पार्टनर नहीं था लेकिन फिर भी भागीदारों की संख्या दो बताई जाती है। तकरीबन तीन महीने तक ताबिज और यंत्र का धंधा चला लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद इन्होंने यह धंधा छोड़कर चंदाखोरी शुरू कर दी।
लोकल माल को ब्रांडेड बनाकर बेचता था
निकतम साथियों की मानें तो संदीप ने लोकल इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स, ताबिज और यंत्रों को ब्रांडेड बताकर बेचा है। इसके लिए व्यवस्थित डिब्बाबंद पैकिंग भी कराई जाती थी ताकि लोकल माल ब्रांडेड दिखे।
अब तक नहीं मिला पुलिस को घर!
संदीप और उसकी चंदागैंग का खुलासा दबंग दुनिया द्वारा लगातार किए जाने के बाद उसके ही अपने वकील ने विजयनगर थाने में शिकायत आवेदन दिया था। इस आवेदन में चौधरी और चंदागैंग का पूरा कालाचिट्ठा बयान किया गया था। बावजूद इसके विजयनगर पुलिस ‘घर नहीं मिल रहा है’, कहकर जांच आगे नहीं बढ़ा पाई। जबकि विजयनगर पुलिस स्टेशन और चौधरी के घर (बीजी 257 स्कीम-74, जो कि राष्ट्रीय विद्यामंदिर स्कूल के ठीक सामने हैं) के बीच की दूरी 1.34 किलोमीटर ही है। दो राइट और एक लेफ्ट टर्न लेकर चौधरी का घर नहीं ढूंड पा रही पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इंदौर को छोड़ बाकी पुलिस ने दिखाई सक्रीयता
आगर पुलिस : 7,8,9 जुलाई को चंदागैंग के अमित सिसोदिया, सचिन मलिक, एस.एन.तिवारी और अक्षय गुर्जर को पकड़ चुकी है आगर पुलिस।
झाबुआ पुलिस : 17 जुलाई को लोगों की शिकायत पर झाबुआ के राणापुर थाने की पुलिस ने अमित, सचिन और अक्षय को केंसर और एड्स पीड़ितों के नाम पर फर्जी एनजीओ की रसीद काटकर चंदा वसूलते रंगेहाथ पकड़ा था। धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज किया था।
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