- बच्चों का पोषण जीम गई दीक्षित-जैन की जोड़ी
- बचने के लिए ले रहे हैं प्रदेश टूडे की आड़
दिसंबर में भोपाल गैस त्रास्दी को 22 साल पूरे होने को है। अब भी त्रासदी जस की तस है। बस स्वरूप बदला है। 1984 में वॉरेन एंडरसन की गलतियों का खामियाजा 25 हजार मासूमों ने अपनी जान गंवाकर चुकाया था। 2016 में 10 हजार नौनिहाल दलिया माफिया सुनील जैन और ह्रदयेश दीक्षित के लालच का शिकार हुए हैं। दोनों घटनाओं में समानता यह है कि उस वक्त सरकार ने एंडरसन को बचाया। आज सार्वजनिक मंच पर विरोधी बयान देने वाले नेता दीक्षित और उसके गुर्गों के साथ खड़े हैं इसीलिए ये किलकारियों के कातिल सलाखों के पीछे होने के बजाय सड़कों पर सीना ताने घुम रहे हैं।
विनोद शर्मा/उमा प्रजापति.भोपाल।
तीन कंपनी...। 800 करोड़ सालाना का ठेका...। पांच साल में 4000 करोड़ खर्च...। फिर कुपोषण का कहर, जहां का तहां..। हालात यह कि पांच महीने में पोषक आहार की कमी से करीब 10 हजार बच्चों को जान गंवाना पड़ी। विपक्ष से लेकर सत्तापक्ष के विधायक और एनजीओ से लेकर केंद्र सरकार तक ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की कुपोषण को लेकर घेराबंदी कर दी लेकिन फिर भी अधिकारी उन कातिलों को सजा नहीं दे पाए जिनकी मनमानी के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार हुए। ह्रदयेश दीक्षित और सुनील जैन जैसे दलिया माफियाओं की आजादी उन माताओं का मुंह चिढ़ा रही है जिनकी गोद हाल में सुनी हुई है।
कुपोषण के कहर की पुष्टि किसी ऐरे-गेरे व्यक्ति ने नहीं की। बल्कि स्वयं लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री रूस्तम सिंह ने कांग्रेस विधायक रामनिवास के सवालों का जवाब देते हुए की। सिंह द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार जनवरी से मई 2016 के बीच 151 दिनों में मप्र में 0-6 से वर्ष तक ्रकी उम्र वाले 9167 बच्चों की मौत हुई। मतलब, हर दिन 60 बच्चों की मौत। इस पूरे मामले में भोपाल सबसे आगे रहा। यहां हर दिन करीब चार के औसत से इस दौरान 587 बच्चों को कुपोषण के कारण जान गंवाना पड़ी। जून में पेश हुई इस रिपोर्ट से अक्टूबर तक विधानसभा से लेकर लोकसभा तक हंगामा मचा रहा लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। ऐसा लग रहा है मानों दलिया माफियाओं की दोस्ती ने सरकार के देखने और सुनने की शक्ति खत्म कर दी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा पोषण आहार के विकेंद्रीकरण की घोषणाएं और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश तक भी गैर जिम्मेदार अधिकारी जीम गए।
हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए था, हुआ नहीं?
सरकार ने मुंह मांगे दामों पर एमी एग्रो, एमपी एग्रो न्यूट्री फुड्स और एमपी एग्रोटॉनिक्स प्रा.लि. को पोषण आहार की सप्लाई का ठेका दिया था लेकिन क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों ही जरूरत के हिसाब से नहीं मिली। कहीं आवश्यकतानुसार पोषण आहार नहीं मिला और जिससे पोषण की कमी के कारण बच्चों को जान गंवाना पड़ी। कहीं आहार पहुंचा भी सही तो उसकी क्वालिटी पोषित करने के बजाय बच्चों के लिए धीमे जहर का काम करती रही। ऐसे में छोटे-मोटे हादसे में जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा दायर करती आ रही शिव सरकार कुपोषण की आड़ में बच्चों को मौत सप्लाई करते आ रहे सुनील जैन और ह्रदयेश दीक्षित के खिलाफ मौन क्यों है? अब तक हत्या का मामला क्यों दर्ज नहीं करा पाई? ऐसे सवाल 11 साल का कार्यकाल पूरा करके मप्र में इतिहास रचने वाले मुख्यमंत्री चौहान की साख पर बट्टा लगा रहे हैं।
अब तक 4000 करोड़ स्वाहा
महिला एवं बाल विकास विभाग हर साल करीब 800 करोड़ रुपए का कांट्रेक्ट एमपी एग्रो को देता है। पोषण आहार बनाने वाली एमपी एग्रो तीन कंपनियों को इसका काम देता है। इसमें एक कंपनी एमपी एग्रो न्यूट्री फूड है। बाकी दो कंपनियां मप्र एग्रो फूड इंडस्ट्री और एमपी एग्रोटानिक्स लिमिटेड हैं। यनि विभाग इन कंपनियों पर अब तक 4000 करोड़ स्वाहा कर चुका है।
मौत के सरकारी आंकड़े
-प्रदेश में 0-6 वर्ष के बीच कुपोषण से 9167 बच्चे मारे गए।
-नवजात बच्चों की यह मौत जनवरी से मई 2016 के बीच हुई।
-प्रदेश के 51 जिलों में 152 दिनों में सर्वाधिक 587 मौत भोपाल जिले में हुई।
-सतना जिले में बीते साल अप्रैल से नवंबर के बीच 356 नवजात बच्चों की मृत्यु हुई।
-प्रदेश में सबसे ज्यादा 22 प्रतिशत कुपोषित बच्चे नीमच जिले में है।
-श्योपुर में ही 100 के लगभग बच्चे कुपोषण के शिकार, -कराहल में 64 और विजयपुर में 25 बच्चे ।
फैक्ट फाइल
प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्र-80,160
उपआंगनबाड़ी केंद्र-12070
कुपोषित बच्चे व महिलाएं-97 लाख 68 हजार
पोषण आहार पैकिट में क्या- ग्रेहूं सोया बरर्फी मिक्स, खिचड़ी मिक्स, आटा-बेसन लड्डू मिक्स।
-सरकारी दस्तावेजों पर दावा 97 लाख 68 हजार बच्चों का है, जो 92 हजार केंद्रों पर दर्ज हैं।
-------------
महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया से दबंग दुनिया के कुछ सवाल
सवाल-सीएम के आदेश के बाद अब पोषण आहार कंपनियों को क्या ब्लैक लिस्टेट किया जाएगा?
जबाव-नो कमेंट्स
सवाल-इन कंपनियों से 5 साल का करार किया गया है, क्या इसे तोड़ा जाएगा?
जबाव-नो कमेंट्स
सवाल-आंगनबाड़ियों से पोषण आहार के पैकिट वापस मंगवाए जाएंगे?
मैं सिर्फ एक ही जबाव दे सकता हूं, नो कमेंट्स
जे.एन.कंसोटिया, प्रमुख सचिव
महिला एवं बाल विकास विभाग
- बचने के लिए ले रहे हैं प्रदेश टूडे की आड़
दिसंबर में भोपाल गैस त्रास्दी को 22 साल पूरे होने को है। अब भी त्रासदी जस की तस है। बस स्वरूप बदला है। 1984 में वॉरेन एंडरसन की गलतियों का खामियाजा 25 हजार मासूमों ने अपनी जान गंवाकर चुकाया था। 2016 में 10 हजार नौनिहाल दलिया माफिया सुनील जैन और ह्रदयेश दीक्षित के लालच का शिकार हुए हैं। दोनों घटनाओं में समानता यह है कि उस वक्त सरकार ने एंडरसन को बचाया। आज सार्वजनिक मंच पर विरोधी बयान देने वाले नेता दीक्षित और उसके गुर्गों के साथ खड़े हैं इसीलिए ये किलकारियों के कातिल सलाखों के पीछे होने के बजाय सड़कों पर सीना ताने घुम रहे हैं।
विनोद शर्मा/उमा प्रजापति.भोपाल।
तीन कंपनी...। 800 करोड़ सालाना का ठेका...। पांच साल में 4000 करोड़ खर्च...। फिर कुपोषण का कहर, जहां का तहां..। हालात यह कि पांच महीने में पोषक आहार की कमी से करीब 10 हजार बच्चों को जान गंवाना पड़ी। विपक्ष से लेकर सत्तापक्ष के विधायक और एनजीओ से लेकर केंद्र सरकार तक ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की कुपोषण को लेकर घेराबंदी कर दी लेकिन फिर भी अधिकारी उन कातिलों को सजा नहीं दे पाए जिनकी मनमानी के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार हुए। ह्रदयेश दीक्षित और सुनील जैन जैसे दलिया माफियाओं की आजादी उन माताओं का मुंह चिढ़ा रही है जिनकी गोद हाल में सुनी हुई है।
कुपोषण के कहर की पुष्टि किसी ऐरे-गेरे व्यक्ति ने नहीं की। बल्कि स्वयं लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री रूस्तम सिंह ने कांग्रेस विधायक रामनिवास के सवालों का जवाब देते हुए की। सिंह द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार जनवरी से मई 2016 के बीच 151 दिनों में मप्र में 0-6 से वर्ष तक ्रकी उम्र वाले 9167 बच्चों की मौत हुई। मतलब, हर दिन 60 बच्चों की मौत। इस पूरे मामले में भोपाल सबसे आगे रहा। यहां हर दिन करीब चार के औसत से इस दौरान 587 बच्चों को कुपोषण के कारण जान गंवाना पड़ी। जून में पेश हुई इस रिपोर्ट से अक्टूबर तक विधानसभा से लेकर लोकसभा तक हंगामा मचा रहा लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। ऐसा लग रहा है मानों दलिया माफियाओं की दोस्ती ने सरकार के देखने और सुनने की शक्ति खत्म कर दी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा पोषण आहार के विकेंद्रीकरण की घोषणाएं और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश तक भी गैर जिम्मेदार अधिकारी जीम गए।
हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए था, हुआ नहीं?
सरकार ने मुंह मांगे दामों पर एमी एग्रो, एमपी एग्रो न्यूट्री फुड्स और एमपी एग्रोटॉनिक्स प्रा.लि. को पोषण आहार की सप्लाई का ठेका दिया था लेकिन क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों ही जरूरत के हिसाब से नहीं मिली। कहीं आवश्यकतानुसार पोषण आहार नहीं मिला और जिससे पोषण की कमी के कारण बच्चों को जान गंवाना पड़ी। कहीं आहार पहुंचा भी सही तो उसकी क्वालिटी पोषित करने के बजाय बच्चों के लिए धीमे जहर का काम करती रही। ऐसे में छोटे-मोटे हादसे में जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा दायर करती आ रही शिव सरकार कुपोषण की आड़ में बच्चों को मौत सप्लाई करते आ रहे सुनील जैन और ह्रदयेश दीक्षित के खिलाफ मौन क्यों है? अब तक हत्या का मामला क्यों दर्ज नहीं करा पाई? ऐसे सवाल 11 साल का कार्यकाल पूरा करके मप्र में इतिहास रचने वाले मुख्यमंत्री चौहान की साख पर बट्टा लगा रहे हैं।
अब तक 4000 करोड़ स्वाहा
महिला एवं बाल विकास विभाग हर साल करीब 800 करोड़ रुपए का कांट्रेक्ट एमपी एग्रो को देता है। पोषण आहार बनाने वाली एमपी एग्रो तीन कंपनियों को इसका काम देता है। इसमें एक कंपनी एमपी एग्रो न्यूट्री फूड है। बाकी दो कंपनियां मप्र एग्रो फूड इंडस्ट्री और एमपी एग्रोटानिक्स लिमिटेड हैं। यनि विभाग इन कंपनियों पर अब तक 4000 करोड़ स्वाहा कर चुका है।
मौत के सरकारी आंकड़े
-प्रदेश में 0-6 वर्ष के बीच कुपोषण से 9167 बच्चे मारे गए।
-नवजात बच्चों की यह मौत जनवरी से मई 2016 के बीच हुई।
-प्रदेश के 51 जिलों में 152 दिनों में सर्वाधिक 587 मौत भोपाल जिले में हुई।
-सतना जिले में बीते साल अप्रैल से नवंबर के बीच 356 नवजात बच्चों की मृत्यु हुई।
-प्रदेश में सबसे ज्यादा 22 प्रतिशत कुपोषित बच्चे नीमच जिले में है।
-श्योपुर में ही 100 के लगभग बच्चे कुपोषण के शिकार, -कराहल में 64 और विजयपुर में 25 बच्चे ।
फैक्ट फाइल
प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्र-80,160
उपआंगनबाड़ी केंद्र-12070
कुपोषित बच्चे व महिलाएं-97 लाख 68 हजार
पोषण आहार पैकिट में क्या- ग्रेहूं सोया बरर्फी मिक्स, खिचड़ी मिक्स, आटा-बेसन लड्डू मिक्स।
-सरकारी दस्तावेजों पर दावा 97 लाख 68 हजार बच्चों का है, जो 92 हजार केंद्रों पर दर्ज हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया से दबंग दुनिया के कुछ सवाल
सवाल-सीएम के आदेश के बाद अब पोषण आहार कंपनियों को क्या ब्लैक लिस्टेट किया जाएगा?
जबाव-नो कमेंट्स
सवाल-इन कंपनियों से 5 साल का करार किया गया है, क्या इसे तोड़ा जाएगा?
जबाव-नो कमेंट्स
सवाल-आंगनबाड़ियों से पोषण आहार के पैकिट वापस मंगवाए जाएंगे?
मैं सिर्फ एक ही जबाव दे सकता हूं, नो कमेंट्स
जे.एन.कंसोटिया, प्रमुख सचिव
महिला एवं बाल विकास विभाग
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