प्रदेश टूडे को बनाया सरकारी नजर से का जरिया
मेडिकल और मिड डे मिल से लेकर व्यापमं और खदानों के खेल तक में है दीक्षित का हाथ
इंदौर. विनोद शर्मा ।
बीते दिनों चिरायू हॉस्पिटल में हुई छापेमार कार्रवाई के दौरान सीबीआई के हाथ लगे दस्तावेजों में जिस हृदयेश दीक्षित का नाम था उसके खिलाफ 2007 से 2016 के बीच दो बार इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छापेमार कार्रवाई हुई। 2007 की छापेमारी ने जहां दवा व मेडिकल उपकरण की सप्लाई का गौरखधंधा बंद करवा दिया था वहीं 2016 की छापेमारी ने दीक्षित और उनके वित्तीय आकाओं की जड़े हिला दी। बहरहाल, आयकर की मार से बौखलाया दीक्षित मामले को सेटल करने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रहा है।
1989 में स्पूतनिक में बतौर फ्री लांस रिपोर्टर अपना करियर शुरू करने वाले दीक्षित ने व्यापमं के आरोपी पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, खदान माफिया सुधीर शर्मा और दलिया माफिया सुनील जैन के वित्तीय सहयोग से प्रदेश टूडे की नींव रखी। मकसद व्यापमं, अवैधानिक खनीज उत्खनन और दलिये के काले कारोबार को अखबार की आड़ देना था ताकि सरकारी नजरों से बचा जा सके। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने तमाम तथ्यों को जानने और दीक्षित बंधुओं को टॉप कनेक्शन को समझने के बाद भी धमाकेदार कार्रवाई की।
2008 : छापे ने उजागर किया दवा सप्लाई रैकेट
30 मई 2008 को इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई के भाई अभय विश्नोई, स्वास्थ्य सचिव राजेश राजौरा, रिटायर्ड आईएएस यूके सामल और हृदयेश दीक्षित के खिलाफ छापेमार कार्रवाई की। कुल 56 जगह छापे मारे थे। कार्रवाई में लघू उद्योग निगम के माध्यम से किए जा रहे 1000 करोड़ के दवा व मेडिकल उपकरणों की सप्लाई का भंडाफोड़ हुआ। 7 सितंबर 2007 को हैल्थ डायरेक्टर रहे योगीराज शर्मा के घर हुई इनकम टैक्स की कार्रवाई में स्पलाई घोटाले के सुराग डिपार्टमेंट के हाथ लगे थे। इसका जिक्र 1 फरवरी 2008 को विधानसभा में नेताप्रतिपक्ष जमूना देवी ने भी किया था। दीक्षित अशोक शर्मा के रिश्तेदार हैं और उनके भाई अवधेश दीक्षित मेडिकल सप्लायर थे।
2016 : 800 करोड़ का मिड डे मिल घोटाला उजागर
12 जुलाई 2016 को एक बार फिर इनकम टैक्स ने दीक्षित बंधुओं और एमपी एग्रो के सुनील जैन के खिलाफ छापेमार कार्रवाई की। कार्रवाई मिड डे मिल में दलिये की सप्लाई घोटाले की शिकायतों के बाद हुई। एमपी एग्रो और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच सालाना 800 करोड़ का कांट्रेक्ट था। कार्रवाई में सुनील जैन ने 50 करोड़ की काली कमाई स्वीकारी और पत्रकारिता के तथाकथित पुरौधा दीक्षित ने 5 करोड़ सरेंडर किए।
पत्रकार से अखबार मालिक तक का सफर...
शिक्षक माता-पिता के घर के जन्में दीक्षित ने 1988-89 में स्पूतनिक से फ्री लांसर के रूप में पत्रकारिता शुरू की। कुछ दिन नवभारत में रहे। जो विवाद के बाद छोड़ा। फिर चेतना व दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग की। बतौर पत्रकार राजनीतिक गलियारों में पकड़ बनाई। इसी दोरान पिता ने बिजासन के पास पुश्तैनी जमीन बेची। करीब एक करोड़ रुपया आया। भाई अवधेश दीक्षित को पहले नगर निगम इंदौर का ठेकेदार बनाया। बाद में खुद ने भोपाल ट्रांसफर लिया। जीन्यूज, सहारा समय और 2008-09 तक राज एक्सप्रेस में भी पत्रकारिता की। 2008 में जिस वक्त छापा पड़ा था उस वक्त वे राज एक्सप्रेस में ही थे।
इस दौरान सरकार में अपने संबंधों और मीडिया में अपनी धाक को भुनाते हुए दीक्षित ने अपने भाई को नगर निगम से निकालकर दवाइयों व मेडिकल उपकरणों का बड़ा सप्लायर बना दिया।
मिलेजुले पैसे से पनपा प्रदेश टूडे
इसी दौरान आईएएस व मंत्रियों से वित्तीय मित्रता भी हो गई। जिसका फायदा उन्हें 2009- 10 में मिला जब प्रदेश टूडे पहले मेग्जीन के रूप में निकाला। सालभर बाद अखबार के रूप में। इसमें पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, खदान माफिया सुधीर शर्मा, चिरायू वाले डॉ. अजय गोयनका, दलिया वाले सुनील जैन व कुछ आईएएस की भूमिका अहम रही। कई के नाम इनकम टैक्स की हालिया सर्च में भी सामने आए हैं। बाद में राज एक्सप्रेस में अपने ही साथ काम करने वाले लोगों को तोड़ा और प्रदेश टूडे में ऊंचे ओहदे पर रखा।
पत्रकारों को बना दिया फर्जी डायरेक्टर
दीक्षित बंधुओं की एक कंपनी डमी डायरेक्टरों में देवेश कल्याणी का नाम भी शामिल है जो अखबार के भोपाल संस्करण के संपादक हैं। कल्याणी ग्लोबल रियलकॉन प्रा.लि. में शांतनु दीक्षित के साथ डायरेक्टर हैं। कंपनी लैंडमार्क बिल्डिंग न्यू लिंक रोड अंधेरी, मुंबई के पते पर पंजीबद्ध है।
ऐसा ही एक नाम है सतीश पुरुषोत्तम पिंपले का जो भी प्रदेश टूडे में डायरेक्टर है। यह भी दीक्षित के साथ राज एक्सप्रेस में रहा है। फिलहाल यह अवधुत मीडिया प्रा.लि. में भी डायरेक्टर हैं।
मेडिकल और मिड डे मिल से लेकर व्यापमं और खदानों के खेल तक में है दीक्षित का हाथ
इंदौर. विनोद शर्मा ।
बीते दिनों चिरायू हॉस्पिटल में हुई छापेमार कार्रवाई के दौरान सीबीआई के हाथ लगे दस्तावेजों में जिस हृदयेश दीक्षित का नाम था उसके खिलाफ 2007 से 2016 के बीच दो बार इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छापेमार कार्रवाई हुई। 2007 की छापेमारी ने जहां दवा व मेडिकल उपकरण की सप्लाई का गौरखधंधा बंद करवा दिया था वहीं 2016 की छापेमारी ने दीक्षित और उनके वित्तीय आकाओं की जड़े हिला दी। बहरहाल, आयकर की मार से बौखलाया दीक्षित मामले को सेटल करने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रहा है।
1989 में स्पूतनिक में बतौर फ्री लांस रिपोर्टर अपना करियर शुरू करने वाले दीक्षित ने व्यापमं के आरोपी पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, खदान माफिया सुधीर शर्मा और दलिया माफिया सुनील जैन के वित्तीय सहयोग से प्रदेश टूडे की नींव रखी। मकसद व्यापमं, अवैधानिक खनीज उत्खनन और दलिये के काले कारोबार को अखबार की आड़ देना था ताकि सरकारी नजरों से बचा जा सके। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने तमाम तथ्यों को जानने और दीक्षित बंधुओं को टॉप कनेक्शन को समझने के बाद भी धमाकेदार कार्रवाई की।
2008 : छापे ने उजागर किया दवा सप्लाई रैकेट
30 मई 2008 को इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई के भाई अभय विश्नोई, स्वास्थ्य सचिव राजेश राजौरा, रिटायर्ड आईएएस यूके सामल और हृदयेश दीक्षित के खिलाफ छापेमार कार्रवाई की। कुल 56 जगह छापे मारे थे। कार्रवाई में लघू उद्योग निगम के माध्यम से किए जा रहे 1000 करोड़ के दवा व मेडिकल उपकरणों की सप्लाई का भंडाफोड़ हुआ। 7 सितंबर 2007 को हैल्थ डायरेक्टर रहे योगीराज शर्मा के घर हुई इनकम टैक्स की कार्रवाई में स्पलाई घोटाले के सुराग डिपार्टमेंट के हाथ लगे थे। इसका जिक्र 1 फरवरी 2008 को विधानसभा में नेताप्रतिपक्ष जमूना देवी ने भी किया था। दीक्षित अशोक शर्मा के रिश्तेदार हैं और उनके भाई अवधेश दीक्षित मेडिकल सप्लायर थे।
2016 : 800 करोड़ का मिड डे मिल घोटाला उजागर
12 जुलाई 2016 को एक बार फिर इनकम टैक्स ने दीक्षित बंधुओं और एमपी एग्रो के सुनील जैन के खिलाफ छापेमार कार्रवाई की। कार्रवाई मिड डे मिल में दलिये की सप्लाई घोटाले की शिकायतों के बाद हुई। एमपी एग्रो और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच सालाना 800 करोड़ का कांट्रेक्ट था। कार्रवाई में सुनील जैन ने 50 करोड़ की काली कमाई स्वीकारी और पत्रकारिता के तथाकथित पुरौधा दीक्षित ने 5 करोड़ सरेंडर किए।
पत्रकार से अखबार मालिक तक का सफर...
शिक्षक माता-पिता के घर के जन्में दीक्षित ने 1988-89 में स्पूतनिक से फ्री लांसर के रूप में पत्रकारिता शुरू की। कुछ दिन नवभारत में रहे। जो विवाद के बाद छोड़ा। फिर चेतना व दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग की। बतौर पत्रकार राजनीतिक गलियारों में पकड़ बनाई। इसी दोरान पिता ने बिजासन के पास पुश्तैनी जमीन बेची। करीब एक करोड़ रुपया आया। भाई अवधेश दीक्षित को पहले नगर निगम इंदौर का ठेकेदार बनाया। बाद में खुद ने भोपाल ट्रांसफर लिया। जीन्यूज, सहारा समय और 2008-09 तक राज एक्सप्रेस में भी पत्रकारिता की। 2008 में जिस वक्त छापा पड़ा था उस वक्त वे राज एक्सप्रेस में ही थे।
इस दौरान सरकार में अपने संबंधों और मीडिया में अपनी धाक को भुनाते हुए दीक्षित ने अपने भाई को नगर निगम से निकालकर दवाइयों व मेडिकल उपकरणों का बड़ा सप्लायर बना दिया।
मिलेजुले पैसे से पनपा प्रदेश टूडे
इसी दौरान आईएएस व मंत्रियों से वित्तीय मित्रता भी हो गई। जिसका फायदा उन्हें 2009- 10 में मिला जब प्रदेश टूडे पहले मेग्जीन के रूप में निकाला। सालभर बाद अखबार के रूप में। इसमें पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, खदान माफिया सुधीर शर्मा, चिरायू वाले डॉ. अजय गोयनका, दलिया वाले सुनील जैन व कुछ आईएएस की भूमिका अहम रही। कई के नाम इनकम टैक्स की हालिया सर्च में भी सामने आए हैं। बाद में राज एक्सप्रेस में अपने ही साथ काम करने वाले लोगों को तोड़ा और प्रदेश टूडे में ऊंचे ओहदे पर रखा।
पत्रकारों को बना दिया फर्जी डायरेक्टर
दीक्षित बंधुओं की एक कंपनी डमी डायरेक्टरों में देवेश कल्याणी का नाम भी शामिल है जो अखबार के भोपाल संस्करण के संपादक हैं। कल्याणी ग्लोबल रियलकॉन प्रा.लि. में शांतनु दीक्षित के साथ डायरेक्टर हैं। कंपनी लैंडमार्क बिल्डिंग न्यू लिंक रोड अंधेरी, मुंबई के पते पर पंजीबद्ध है।
ऐसा ही एक नाम है सतीश पुरुषोत्तम पिंपले का जो भी प्रदेश टूडे में डायरेक्टर है। यह भी दीक्षित के साथ राज एक्सप्रेस में रहा है। फिलहाल यह अवधुत मीडिया प्रा.लि. में भी डायरेक्टर हैं।
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