- 2011 में हुई पुखराज ऐवेन्यू की टीएनसी में संसोधन का आवेदन, प्लॉटों पर कैसी चलाने की तैयारी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सात से लगातार जारी सरकारी अभियान के बावजूद हाउसिंग सोसायटी के नाम पर भू-माफियाओं का खेल बदस्तूर जारी है। बसंत विहार गृह निर्माण सहकारी संस्था इसका बड़ा उदाहरण है। सरकारी सख्ती के तहत मई 2010 में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हाथों आवंटन पत्र बटवाकर वाहवाही लूटने वाली यह संस्था आज दिन तक हकदारों को उनके प्लॉट का कब्जा नहीं दे पाई। उलटा, तथाकथित आवंटन के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से 2011 में जो नक्शा पास करवाया था उसमें संसोधन का आवेदन लगाते हुए संस्था ने प्लॉटों की साइज छोटी करने की मांग कर दी।
बसंत विहार गृह निर्माण सहकारी संस्था की ग्राम निपानिया में 6.533 हेक्टेयर जमीन (सर्वे नं. 78/1, 78/3, 79/2, 77/2, 79/5, 88/2, 79/3 व 80/2) है। 129 इमली बाजार के पते पर पंजीबद्ध इस संस्था द्वारा प्रस्तावित पुखराज एवेन्यू कॉलोनी के प्लॉटों को लेकर सदस्य वर्षों तक परेशान रहे। शिकवा-शिकायतों और 2009 में शुरू हुए सरकारी अभियान के बाद सहकारिता विभाग ने जांच की। पूर्व विधायक उमंग श्रृंगार द्वारा पूछे गए सवाल के एवज में 25 फरवरी 2011 को सहकारिता विभाग के उपायुक्त महेंद्र दीक्षित ने विधानसभा में जो जवाब प्रस्तुत किया था उसके अनुसार बसंत विहार के दो सदस्यों को पुखराज ऐवेन्यू कॉलोनी में प्लॉट दिए गए हैं। एक आयोजन में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रतीकस्वरूप दो लोगों को अपने हाथों से आवंटन पत्र दिये थे।
आवंटन मिला, प्लॉट नहीं
-- विधानसभा में जो जवाब गया था उसके अनुसार बसंत विहार की सदस्यता सूची का अंतिम प्रकाशन 25 जनवरी 2011 को हुआ है। जब मुख्यमंत्री ने आवंटन पत्र दिये थे तब तक तो कॉलोनी का विकास शुरू भी नहीं हुआ था। संस्था ने ले-आउट मंजूरी के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में आवेदन किया 13 अपै्रल 2011 को। ले-आउट मंजूर (4908/एस/181/11/नग्रानि/2011) 8 जुलाई 2011 को। 65330 वर्गमीटर कुल जमीन में से टीएनसी ने 35747 वर्गमीटर प्लाट एरिया विकसित करने की अनुमति दी।
-- इसमें 1000 वर्गफीट के 36, 1200 वर्गफीट के 40, 1500 वर्गफीट के 128 और 2400 वर्गफीट के करीब 35 प्लॉट विकसित करना थे। 7 जुलाई 2014 तक वेलिड रहने वाले इस नक्शे पर भी संस्था ने काम नहीं किया।
-- नक्शे की तीन साल की वेलिडिटी जुलाई 2014 में खत्म हुए भी दो साल से ज्यादा हो चुके थे। तब जाकर अगस्त 2016 में संस्था ने मप्र नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 29(3) के तहत 2011 में स्वीकृत हुए नक्शे का रिवाइज प्लान मंजूर कराने के लिए आवेदन किया।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग भी मेहरबान
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारी भी हाउसिंग सोसायटी के गौरखधंधे पर मेहरबान है। संस्था का नक्शा रिवाइज करने से पहले 28 सितंबर 2016 को जो विज्ञप्ति जारी की गई थी उसमें अधिकारियों ने नक्शे के रिविजन से कॉलोनी के प्लॉटधारकों के हित प्रभावित होने की आशंका तो जताई लेकिन आवेदन को खारिज नहीं किया। न ही यह जानने की कोशिश की कि 2011 में जो नक्शा मंजूर किया गया था उसके आधार पर कॉलोनी विकसित हुई भी या नहीं।
आपत्ति से अटकी प्लानिंग
संस्था के खसरों पर ले-आउट संसोधन के लिए किए गए आवेदन की जानकारी सदस्यों को टीएंडसीपी द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में मिली। तब आरटीआई कार्यकर्ता और पत्रकार दिलीप जैन ने टीएंडसीपी, कलेक्टर इंदौर, विकास प्राधिकरण, सहकारिता विभाग से लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान तक को पत्र लिखकर मय दस्तावेजी प्रमाण के रिविजन पर आपत्ति ली। तब जाकर रिवाइज प्लान अटका। अन्यथा अब तक मंजूर हो चुका होता।
जनकल्याण की ही जागिर है बसंत विहार
मुख्यमंत्री के हाथों प्लॉटों का आवंटन कराने के बावजूद सदस्यों को कब्जा देने में नाकाम रही जनकल्याण गृह निर्माण सहकारी संस्था की जैबी संस्था या यूं कहें कि जागिर है बसंत विहार गृह निर्माण सहकारी संस्था। दोनों संस्थाओं के पते 129 इमली बाजार ही हैं। इतना ही नहीं दोनों संस्थाओं में अग्रवाल बंधुओं का ही एक तरफा कब्जा है। दोनों ही संस्थाओं में एक जैसी स्थिति ही है।
आदतन भू-माफिया : देवी अहिल्या में पिता पर भी केस दर्ज है
बसंत विहार और जनकल्याण गृह निर्माण सहकारी संस्था के सर्वेसर्वा मनीष अग्रवाल व अन्य का देवी अहिल्या गृह निर्माण सहकारी संस्था में भी वास्ता है। संस्था द्वारा काटी गई सार्इं श्रृद्धा पैलेस में जल्द ही प्रशासन कार्रवाई की तैयारी में है। इस संस्था में भी मनमानी हुई। इसीलिए 11 फरवरी 2010 को तुकोगंज पुलिस ने संस्था के जिन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था उनमें जनकल्याण के अध्यक्ष निखिलेश अग्रवाल के पिता सुगनलाल अग्रवाल और बसंत विहार के सर्वेसर्वा मनीष अग्रवाल के पिता ओमप्रकाश अग्रवाल का नाम भी शामिल था।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सात से लगातार जारी सरकारी अभियान के बावजूद हाउसिंग सोसायटी के नाम पर भू-माफियाओं का खेल बदस्तूर जारी है। बसंत विहार गृह निर्माण सहकारी संस्था इसका बड़ा उदाहरण है। सरकारी सख्ती के तहत मई 2010 में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हाथों आवंटन पत्र बटवाकर वाहवाही लूटने वाली यह संस्था आज दिन तक हकदारों को उनके प्लॉट का कब्जा नहीं दे पाई। उलटा, तथाकथित आवंटन के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से 2011 में जो नक्शा पास करवाया था उसमें संसोधन का आवेदन लगाते हुए संस्था ने प्लॉटों की साइज छोटी करने की मांग कर दी।
बसंत विहार गृह निर्माण सहकारी संस्था की ग्राम निपानिया में 6.533 हेक्टेयर जमीन (सर्वे नं. 78/1, 78/3, 79/2, 77/2, 79/5, 88/2, 79/3 व 80/2) है। 129 इमली बाजार के पते पर पंजीबद्ध इस संस्था द्वारा प्रस्तावित पुखराज एवेन्यू कॉलोनी के प्लॉटों को लेकर सदस्य वर्षों तक परेशान रहे। शिकवा-शिकायतों और 2009 में शुरू हुए सरकारी अभियान के बाद सहकारिता विभाग ने जांच की। पूर्व विधायक उमंग श्रृंगार द्वारा पूछे गए सवाल के एवज में 25 फरवरी 2011 को सहकारिता विभाग के उपायुक्त महेंद्र दीक्षित ने विधानसभा में जो जवाब प्रस्तुत किया था उसके अनुसार बसंत विहार के दो सदस्यों को पुखराज ऐवेन्यू कॉलोनी में प्लॉट दिए गए हैं। एक आयोजन में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रतीकस्वरूप दो लोगों को अपने हाथों से आवंटन पत्र दिये थे।
आवंटन मिला, प्लॉट नहीं
-- विधानसभा में जो जवाब गया था उसके अनुसार बसंत विहार की सदस्यता सूची का अंतिम प्रकाशन 25 जनवरी 2011 को हुआ है। जब मुख्यमंत्री ने आवंटन पत्र दिये थे तब तक तो कॉलोनी का विकास शुरू भी नहीं हुआ था। संस्था ने ले-आउट मंजूरी के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में आवेदन किया 13 अपै्रल 2011 को। ले-आउट मंजूर (4908/एस/181/11/नग्रानि/2011) 8 जुलाई 2011 को। 65330 वर्गमीटर कुल जमीन में से टीएनसी ने 35747 वर्गमीटर प्लाट एरिया विकसित करने की अनुमति दी।
-- इसमें 1000 वर्गफीट के 36, 1200 वर्गफीट के 40, 1500 वर्गफीट के 128 और 2400 वर्गफीट के करीब 35 प्लॉट विकसित करना थे। 7 जुलाई 2014 तक वेलिड रहने वाले इस नक्शे पर भी संस्था ने काम नहीं किया।
-- नक्शे की तीन साल की वेलिडिटी जुलाई 2014 में खत्म हुए भी दो साल से ज्यादा हो चुके थे। तब जाकर अगस्त 2016 में संस्था ने मप्र नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 29(3) के तहत 2011 में स्वीकृत हुए नक्शे का रिवाइज प्लान मंजूर कराने के लिए आवेदन किया।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग भी मेहरबान
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारी भी हाउसिंग सोसायटी के गौरखधंधे पर मेहरबान है। संस्था का नक्शा रिवाइज करने से पहले 28 सितंबर 2016 को जो विज्ञप्ति जारी की गई थी उसमें अधिकारियों ने नक्शे के रिविजन से कॉलोनी के प्लॉटधारकों के हित प्रभावित होने की आशंका तो जताई लेकिन आवेदन को खारिज नहीं किया। न ही यह जानने की कोशिश की कि 2011 में जो नक्शा मंजूर किया गया था उसके आधार पर कॉलोनी विकसित हुई भी या नहीं।
आपत्ति से अटकी प्लानिंग
संस्था के खसरों पर ले-आउट संसोधन के लिए किए गए आवेदन की जानकारी सदस्यों को टीएंडसीपी द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में मिली। तब आरटीआई कार्यकर्ता और पत्रकार दिलीप जैन ने टीएंडसीपी, कलेक्टर इंदौर, विकास प्राधिकरण, सहकारिता विभाग से लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान तक को पत्र लिखकर मय दस्तावेजी प्रमाण के रिविजन पर आपत्ति ली। तब जाकर रिवाइज प्लान अटका। अन्यथा अब तक मंजूर हो चुका होता।
जनकल्याण की ही जागिर है बसंत विहार
मुख्यमंत्री के हाथों प्लॉटों का आवंटन कराने के बावजूद सदस्यों को कब्जा देने में नाकाम रही जनकल्याण गृह निर्माण सहकारी संस्था की जैबी संस्था या यूं कहें कि जागिर है बसंत विहार गृह निर्माण सहकारी संस्था। दोनों संस्थाओं के पते 129 इमली बाजार ही हैं। इतना ही नहीं दोनों संस्थाओं में अग्रवाल बंधुओं का ही एक तरफा कब्जा है। दोनों ही संस्थाओं में एक जैसी स्थिति ही है।
आदतन भू-माफिया : देवी अहिल्या में पिता पर भी केस दर्ज है
बसंत विहार और जनकल्याण गृह निर्माण सहकारी संस्था के सर्वेसर्वा मनीष अग्रवाल व अन्य का देवी अहिल्या गृह निर्माण सहकारी संस्था में भी वास्ता है। संस्था द्वारा काटी गई सार्इं श्रृद्धा पैलेस में जल्द ही प्रशासन कार्रवाई की तैयारी में है। इस संस्था में भी मनमानी हुई। इसीलिए 11 फरवरी 2010 को तुकोगंज पुलिस ने संस्था के जिन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था उनमें जनकल्याण के अध्यक्ष निखिलेश अग्रवाल के पिता सुगनलाल अग्रवाल और बसंत विहार के सर्वेसर्वा मनीष अग्रवाल के पिता ओमप्रकाश अग्रवाल का नाम भी शामिल था।
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