Thursday, December 15, 2016

टैक्स चोर ह्दयेश दीक्षित अब आयकर को दिखाने लगा आंख

जुलाई में हुई छापेमार कार्रवाई को हाईकोर्ट में दी फर्जी तथ्यों से चुनौती
कहा : मैं आईडीएस में काली कमाई स्वीकारना चाहता था, विंग ने छापा मारकर इज्जत खराब कर दी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
एक कहावत है, उलटा चोर, कोतवाल को डांटे, जो कि पत्रकारिता की आड़ में सरकारी दलाली करते आ रहे ह्रदयेश दीक्षित पर सटीक बैठती है। क्योंकि अगस्त में इनकम टैक्स की छापेमार कार्रवाई में दीक्षित ने पांच करोड़ की काली कमाई स्वीकारी और अक्टूबर में उसी कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। मकसद है, कार्रवाई को गलत साबित करके इनकम टैक्स के आला अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करना।
12 जुलाई को इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने दलिया माफिया सुनील जैन और पत्रकारिता की आड़ में मिड डे मिल घोटाले को पोषित करते आए प्रदेश टूडे के मालिक ह्रदयेश दीक्षित के 35 ठिकानों पर दबिश दी थी। प्रोबेशरी आॅर्डर (पीओ) के कारण कार्रवाई अगस्त के दूसरे सप्ताह तक चली। पहले जैन ने 50 करोड़ की काली कमाई स्वीकारी। इसके बाद आयकर अधिकारियों को अपने राजनीतिक और प्रशासनिक संबंधों से प्रभावित करने में बूरी तरह नाकाम रहे दीक्षित बंधुओं ने 5 करोड़ की अघोषित आय सरेंडर की।
अब इनकम टैक्स को दिखा रहे हैं आंख...
66 भक्त प्रहलादनगर निवासी अवधेश पिता मोहनलाल दीक्षित ने 26 सितंबर को रीट पिटिशन(डब्ल्यूपी) 6648/2016  फाइल की और इनकम टैक्स की कार्रवाई को चुनौती दी। पिटिशन में दीक्षित बंधुओं ने मिनिस्ट्री आॅफ फाइनेंस, डायरेक्टर इनकम टैक्स (इन्वेस्टिगेशन), भोपाल और प्रिंसिपल कमिश्नर इनकम टैक्स, आयकर भवन इंदौर को पार्टी बनाया।
इनकम टैक्स पर आरोप, अवैध तरीके से मारा छापा
संविधान के आर्टीकल 226 और 227 के तहत फाइल की गई इस याचिका में इनकम टैक्स एक्ट की धारा 132 को चुनौती दी गई जिसके तहत दीक्षित बंधुओं के घर पर छापेमार कार्रवाई की गई थी। 29 सितंबर 2016 को हाईकोर्ट ने याचिका पर मिनिस्ट्री आॅफ फाइनेंस, डायरेक्टर इनकम टैक्स (इन्वेस्टिगेशन), भोपाल और प्रिंसिपल कमिश्नर इनकम टैक्स, आयकर भवन इंदौर को नोटिस जारी कर दिए। सुनवाई के लिए अगली तारीख 20 दिसंबर 2016 मुकरर्र कर दी।
इस याचिका के माध्यम से दीक्षित बंधुओं का यह कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 1 जून से इनकम डिस्क्लोज स्कीम (आईडीएस) लांच की थी ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी काली कमाई स्वत: ही स्वीकार ले। हम भी इस योजना का लाभ लेकर अपनी काली कमाई स्वीकारना चाहते थे लेकिन इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने बीच में ही छापेमार कार्रवाई कर दी। कार्रवाई का मकसद सिर्फ और सिर्फ हमें परेशान करना था। ताकि हमारी छवि हो।
हां मैं टैक्स चोर हूं.... दीक्षित
कालेधंधे को बचाए रखने के लिए निकाले जा रहे प्रदेश टूडे में उद्योगपतियों को टैक्स चोर बताते आए दीक्षित बंधुओं ने अगस्त में 5 करोड़ की काली कमाई सरेंडर करके यह स्वीकारा कि उन्होंने टैक्स चोरी करके भारीभरकम काली कमाई संग्रह की। इसके बाद जो याचिका लगाई है उसमें भी साफ लिखा है कि हम तो आईडीएस के तहत अपनी अघोषित आय स्वीकारना चाहते थे। उधर, आयकर विभाग से जुड़े जानकारों की मानें तो  अघोषित आय / काले धन को उजागर करने के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धाराए 132 व 133अ के तहत आयकर प्राधिकारीगण आयकर सर्च व सर्वे की कार्यवाही को अंजाम दिया जाता है। इसमें सरेंडर कराने का कोई प्रावधान नहीं है लेकिन असेसी बड़ी कार्रवाई से बचने के लिए कार्रवाई के दौरान स्वीकार लेता है उसने फला-फला रकम गलत तरीके से अर्जित की। जिसकी जानकारी उसने अकाउंट बुक्स में नहीं दी थी ताकि टैक्स चोरी की जा सके। इसीलिए इसे अघोषित आय कहते हैं जिसे सरेंडर करने के बाद दीक्षित जैसे लोगों को न सिर्फ आयकर बल्कि पेनल्टी भी चुकाना पड़ती है।
अगली तारीख तय नहीं
अवधेश दीक्षित ने इनकम टैक्स की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अभी नोटीस जारी हुए हैं। बीच में एक तारीख लगी थी लेकिन नंबर नहीं आया। अगली तारीख तय नहीं हुई है। तब तक विभाग भी अपना रिप्लाय फायल कर देगा। प्रथम दृष्टया ही दीक्षित बंधुओं का केस और तर्क कमजोर हैं।
वीना मांडलिक
इनकम टैक्स की एडवोकेट
दम नहीं है दीक्षित की चुनौती में...
1- सरकार ने आईडीएस की स्कीम घोषित की थी लेकिन ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई कि स्कीम समयसीमा में इनकम टैक्स की टीम सर्च या सर्वे की कार्रवाई नहीं कर सकती।
2- स्कीम 1 जून से लागू हुई। छापा पड़ा 12 जुलाई को। मतलब स्कीम लागू होने के बाद 42 दिन बाद। इन 42 दिनों में दीक्षित बंधुओं ने काली कमाई क्यों नहीं स्वीकारी। किस बात का इंतजार करते रहे?
3- 12 जुलाई को हुई कार्रवाई। 12 अगस्त को सरेंडर किए पांच करोड़। कार्रवाई को चुनौती 77 दिन बाद चुनौती क्यों दी? क्या इस दौरान मजबूत फैक्ट्स नहीं थे?
4- कार्रवाई यदि अवैध थी तो फिर पांच करोड़ की काली कमाई सरेंडर क्यों की?
5- 2008 में भी कार्रवाई हुई थी। मतलब आप आदतन टैक्स चोर हैं। इसीलिए इसीलिए सरकार से राहत के पात्र भी नहीं है। फिर सहानुभूति की उम्मीद क्यों? 

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