Thursday, December 15, 2016

झगड़े की जमीन पर मुख्यमंत्री से बटवा डाले 777 प्लॉट

जनकल्याण हाउसिंग सोसायटी और सहकारिता विभाग के अधिकारियों का कारनामा
2010 में हुए आवंटन के बाद अब तक न प्लॉट मिले, न कब्जा
इंदौर. विनोद शर्मा ।
विधानसभा से लेकर हाउसिंग सोसायटियों की मनमानी पर अंकुश के लिए बनी एसआईटी तक जनकल्याण हाउसिंग सोसायटी की मनमानी के चर्चे आम है। संस्था के संचालकों ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर उस जमीन पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से 2010 में  777 प्लॉटों का आवंटन पत्र जारी करवा दिया जिसके मालिकाना हक को लेकर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। आवंटन -पत्र पाने वाले सदस्यों को अब तक प्लॉटों का कब्जा न मिलने की यह भी बड़ी वजह है जिसे सहकारिता विभाग के अधिकारी अब टालते नजर आते हैं।
इस पूरे मामले का खुलासा अपने खिलाफ एक के बाद एक हो रही शिकायतों का जवाब देते हुए जनकल्याण गृह निर्माण सहकारी संस्था के संचालक मंडल ने गलती से कर दिया। 3 अक्टूबर 2016 में नगर निगम की कॉलोनी सेल उपायुक्त को सौंपी गए संस्था के जवाब में संचालकों ने कहा है कि संस्था के स्वामित्व की ग्राम पीपल्याकुमार स्थित सर्वे नं. 248/3/1 का प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है। मूल विक्रेता की की मृत्यु के बाद उनके वारिसों द्वारा निचली अदालत में वाद प्रस्तुत किया था। प्रकरण संस्था के पक्ष में होने के बाद अपील दायर की गई थी। अब तक हाईकोर्ट ने संस्था के खिलाफ कोई आदेश पारित नहीं किया है। न प्रकरण में स्टे है।
झगड़े की जमीन का डायवर्शन हो गया, टीएनसी अटकी
सर्वे नं. 248/3/1 की 0.890 हेक्टेयर जमीन राजस्व रिकार्ड में जनकल्याण गृह निर्माण सहकारी संस्था के नाम है लेकिन पीपल्याकुमार निवासी लीलाधर पिता रामप्रसाद खाती, नरेंद्र पिता रामप्रसाद, उमरावबाई पति रामप्रसाद खाती इस पर अपना मालिकाना हक जताते हैं। इसी को लेकर संस्था और किसानों के बीच मार्च 2007 से केस (सेकंड अपील 322/2007) विचाराधीन है। बावजूद इसके जनकल्याण हाउसिंग सोसायटी के संचालकों ने उक्त जमीन के साथ 364432 वर्गफीट जमीन का डायवर्शन (3/अ-24/12-13) 31 दिसंबर 2013 को कराया गया था। संस्था के आवेदन पर 2 जनवरी 2016 को टीएंडसीपी में नक्शा प्रस्तुत भी हुआ लेकिन मंजूर नहीं हुआ।
सदस्यों की पीड़ा
विवादित जमीन पर कराया आवंटन : योगेश शुक्ला और सानेश शुक्ला के नाम पर महालक्ष्मीनगर के प्लॉट नं. 311 व 312 हैं जो कि उक्त विवादित जमीन पर ही आते हैं। इन प्लॉटों का आवंटन भी मुख्यमंत्री के माध्यम से कराया गया।
पैसे लिए 1500 के, दिया 1000 वर्गफीट : द्वारकाधीश कॉलोनी निवासी बद्रीलाल गुप्ता को महालक्ष्मीनगर में 1982 में 1500 वर्गफीट का प्लॉट (501बी) दिया था संस्था ने। प्लॉट मनी, अंश पूंजी और विकास शुल्क पेटे पूरा पैसा दिया। संस्था ने 2008 में कहा कि अब आपको प्लॉट नं. 327 देंगे। टीएनसीपी से मई 2004 में अनुमोदित नक्शा दिखाते हुए कहा कि प्लॉट 1500 वर्गफीट है। बदनियती के कारण संस्था ने इसमे से 1000 वर्गफीट की ही रजिस्ट्री करके दी। संस्था ने 500 वर्गफीट जमीन दे रही है और न उसके पेटे जमा कराए गए पैसे लौटा रही है।
आवंटन पत्र दिया, प्लॉट नहीं : भगवानदीननगर निवासी डॉ.सुधीर पिता आर.एन.शर्मा ने 1980 में संस्था की सदस्यता ली। प्लॉट कीमत व विकास शुल्क लेकर संस्था ने सितंबर 2011 में प्लॉट नं. 747 का आवंटन पत्र दिया। हालांकि इस प्लॉट का आज दिन तक न कब्जा दिया। न ही रजिस्ट्री करके दी जा रही है।
मुख्यमंत्री से ही करेंगे बात
संस्था की मनमानी और सहकारिता विभाग से लेकर एसआईटी तक के अधिकारियों की मिलीभगत से परेशान सदस्य अब मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखेंगे जिन्होंने प्लॉट आवंटित किए थे। इस संबंध में जल्द ही प्लॉटधारक आरटीआई कार्यकर्ता दिलीप जैन के साथ भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस लेंगे। धरना देंगे।
मई 2010 को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हाथों सहकारिता विभाग के अधिकारियों और जनकल्याण गृह निर्माण सहकारी संस्था के संचालकों ने सदस्यों को प्लॉट दिलवाकर वाहवाही लूटी उन्हें आज दिन तक
हान ने ही 2010 में इंदौर की जनकल्याण गृहनिर्माण सोसायटी के 350 प्लाट सदस्यों को वितरित किये थे और सर्टिफिकेट भी दिए थे। परंतु उक्त प्लाट का कब्जा अभी तक नहीं दिया गया।
मु?यमंत्री के निर्देश के बावजूद जनकल्याण गृह निर्माण संस्था द्वारा सदस्यों को प्लॉट न देने के मामले में सहकारिता उपायुक्त ने संस्था को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में पूछा गया है कि संस्था द्वारा मु?यमंत्री के निर्देश पर भी सदस्यों को भू?ांडों का आवंटन क्यों नहीं किया गया। सदस्यों को भूखंड न देने का क्या कारण है इसकी जानकारी तुरंत प्रस्तुत करें। इस पूरे मामले का खुलासा डीबी स्टार ने २ मार्च को किया था। इसके बाद सहकारिता विभाग ने कार्रवाई शुरू की। उपायुक्त सहकारिता ने डीबी स्टार को बताया हमने संस्था को नोटिस जारी किया है, जवाब आने के बाद अगली कार्रवाई तय होगी।
अब जवाब मांगा है
मु?यमंत्री के निर्देश के बावजूद जनकल्याण सोसायटी ने कई सदस्यों को प्लॉट नहीं दिए। इस सोसायटी के हजारों सदस्यों को प्लॉट मिलना है। बमुश्किल सौ सदस्यों को प्लॉट दिए गए। प्लॉट मांगने वालों को सोसायटी ही औने पौने दाम में प्लॉट सरेंडर करने के लिए कह रही है ताकि ये प्लॉट बाद में दूसरों को बेचकर मुनाफा कमा सकें, क्योंकि अब यह जमीन करोड़ों रुपए की हो गई है। डीबी स्टार ने इस संबंध में पड़ताल की तो सामने आया कि अब भी सैकड़ों लोग सदस्यता होने के बावजूद प्लॉट से वंचित हैं। कई लोग तो ऐसे हैं जिन्हें मु?यमंत्री ने प्लॉट देने का प्रमाण- पत्र दे दिया और पीड़ित ने लाखों रुपए ?ाी जमा कर दिए, लेकिन प्लॉट नहीं मिला। सोसायटी यह कहकर टाल रही है कि जमीन का विवाद चल रहा है। उपायुक्त सहकारिता का कहना है कि सोसायटियों ने फिर गड़बड़ शुरू कर दी है। हम इसकी जांच करवा रहे हैं।
इन्हें मिलाकर गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के 981 सदस्यों को प्लाट आवंटन पत्र देने का काम शुरू किया गया। इनमें विजयश्री गृह निर्माण सहकारी संस्था के 125, इंदौर विकास संस्था के 24, जनकल्याण गृह निर्माण संस्था के 777 तथा पीताम्बरा गृह निर्माण सहकारी संस्था के 55 सदस्य शामिल हैं।
जनकल्याण गृह निर्माण संस्था के राकेश बच्चनलाल जैन, रामनिवास रामसहाय अग्रवाल, एबरेल बडसृजन डॉ. बैराम जंगलवाला, श्रीमती देवीबाई दामोदर दास भाटिया, मनोज जमनादास गणाज्ञा
समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रतीक स्वरूप चार गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के 20 सदस्यों को आवंटन पत्र सौंपे। 

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