Thursday, December 15, 2016

संदीप ने ‘कलश’ नहीं मिला तो ‘शांति’ से ही चलाया काम

चंदागैंग का सरगना आठ दिन से घर से है फरार
इंदौर. विनोद शर्मा ।
कैंसर और एड्स पीड़ितों के ईलाज के नाम पर चंदा वसूली करने वाली चंदागैंग के सरगना संदीप चौधरी ने दिल्ली के एनजीओ की फर्जी रसीद कट्टे बनवाने से पहले इंदौर में डेड पड़े एनजीओ से भी संपर्क किया था ताकि उन्हें टेकओवर किया जा सके। हालांकि कोशिश नाकाम रही। इसके बाद ही उसके कथित भाई सचिन मलिक ने दिल्ली के उस एनजीओ का नाम बताया जिसके डायरेक्टर की भी साल-छह महीने पहले ही मौत हुई थी।
वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जंगल की लकड़ियों की हेराफेरी और चीनी इलेक्ट्रॉनिक आईटम की हेराफेरी करते आ रहे संदीप ने दूसरे की घी लगी थाली की तरह एनजीओ के कामकाज को वित्तीय रूप से ज्यादा मजबूत समझा। नया एनजीओ रजिस्टर्ड कराने में चूंकि वक्त और दस्तावेजी प्रक्रिया ज्यादा थी इसीलिए ऐसे एनजीओ की तलाश शुरू हुई जो पहले से रजिस्टर्ड तो हो लेकिन कामकाज नहीं कर रहा हो। उनकी यही तलाश उन्हें नव कलश वेलफेयर सोसायटी तक भी ले गई। सोसायटी के रामगोपाल नामदेव को प्रलोभन और भविष्य के सब्जबाग दिखाए गए लेकिन नामदेव ने दो टूक शब्दों में मना कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं अपने स्तर पर काम कर रहा हूं और करता रहूंगा।
दिल्ली में मिली ‘शांति’
इसके बाद सचिन ने दिल्ली-नाएडा के एक एनजीओ की जानकारी संदीप को दी। संदीप ने देर नहीं की। एनजीओ की तत्काल डिटेल निकाली गई। सचिन ने यह भी बताया कि इसका संचालक मेरा दोस्त था लेकिन अब उसकी मृत्यु हो चुकी है। इसीलिए एनजीओ को यहां आगे बढ़ाया जा सकता है। इस एनजीओ का नाम शांति बताया जा रहा है।
एलोरा कॉम्पलेक्स में खोलना चाहते थे आॅफिस
एनजीओ की जुगाड़ लगने के बाद चौधरी-मलिक ने एलोरा कॉम्पलेक्स स्थित अपने एक मित्र के आॅफिस में अपना डेरा डालने की कोशिश की लेकिन वहां भी दाल नहीं गली।
अब शुरू कर दिया सुपारी का खेल
दबंग दुनिया द्वारा लगातार किए जा रहे चंदागैंग के ख्ुालासे के बाद से ही संदीप चौधरी अपने घर से फरार है। हालांकि है इंदौर में ही। अक्षय गुर्जर और एक अन्य साथी के साथ। मलिक पहले ही इंदौर छोड़ चुका है। इसीलिए अब संदीप की तैयारी यह है कि वह कैसे भी अपनी ही गैंग के साथी अमित सिसोदिया पर दबाव डाले और उसके द्वारा दिए गए बयान पलटवा दे। इसके लिए सिसोदिया के साथ किसी भी तरह से निपटने की साजिश रची जा रही है। इसकी जिम्मेदारी संदीप ने अपने दोस्त सचिन रघूवंशी को दी है। इसके अलावा जितेंद्र नाम के किसी वकील से बात की जा रही है ताकि अपने दुश्मनों के खिलाफ फर्जी मुकदमें दर्ज करवाये जा सके। 

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