Thursday, December 15, 2016

कालाधन खपाने वाले पेट्रोल पंपों पर इनकम टैक्स की पैनी निगाह

भोपाल में हुई पूछताछ, अब इंदौर की बारी, कई पंप है राडार पर
इंदौर. विनोद शर्मा ।
नोटबंदी के दौरान मिली पुराने नोट लेने की छूट का बेजा फायदा उठाते हुए प्रदेश के कई पेट्रोल पंपों ने लोगों के कालेधन को उजला कर दिया है। ऐसे पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने छानबीन शुरू कर दी है। इनकम टैक्स को लगातार सूचना मिल रही है कि कुछ पेट्रोल पंप संचालकों ने लोगों के कालेधन को छह गुना तक की एडवांस बुकिंग के रूप में पेट्रोलियम कंपनियों में जमा करवा दिया है। ऐसे में डिपार्टमेंट पेट्रोलियम कंपनियों से पेट्रोल पंपों की एडवांस बुकिंग का रिकार्ड भी मांग सकता है।
3 दिसंबर को कानपूर, 7 दिसंबर को इनकम टैक्स ने जहां रांची में पेट्रोल पंपों पर सर्वे की कार्रवाई की है वहीं भोपाल में भी कुछ पंप संचालकों के बहीखाते खंगाले गए हैं। नोटिस व सूचना पत्रों के माध्यम से पंप संचालकों से आय व्यय का लेखा जोखा मांगा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इंदौर में भी आयकर सभी पेट्रोल पंप के कागजात खंगालेगा।  जांच में नए नोट और पुराने नोटों के ट्रांजेक्शन पर भी खास नजर रखी जा रही है। नोटबंदी के शुरूआती 10 दिनों में हुए आय के बारे में भी पूरी जानकारी मांगी जा रही है ताकि कैश फ्लो की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट की जा सके।
रांची में थमाए जा चुके हैं 100 पेट्रोल पंपों को सख्त नोटिस
रांची में एक पेट्रोल पंप पर हुए सर्वे के बाद सामने आई धांधली को देखते हुए इनकम टैक्स ने शहर के सभी पेट्रोल पंपों को नोटिस थमा दिए हैं। इन नोटिस का जवाब सात दिन में मय दस्तावेजी प्रमाणों के देना है। नोटिस से हड़कंप मची। सभी पेट्रोल पंप संचालक कागजात दुरुस्त करने में जुट गए।
भोपाल में हुई पूछताछ : बताया जा रहा है कि लगातार शिकायतों के चलते भोपाल में इनकम टैक्स की टीम ने चुनिंदा पेट्रोल पंपों के संचालकों से नोटबंदी के बाद का लेखा-जोखा तक मांगा और पूछताछ की। हालांकि इस मामले में अब तक इंदौर में इनकम टैक्स ने मैदानी कार्रवाई नहीं की है।
कंपनियों का रिकार्ड खोलेगा राज
आयकर तक पहुंच रही सूचनाओं के अनुसार पेट्रोल पंप संचालकों ने नियमित खपत के मुकाबले छह-छह गुना ज्यादा स्टॉक कंपनियों में बुक करवाया है। यदि कंपनियों से रिकार्ड बुलाया जाता है तो इनकम टैक्स के सामने दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। क्योंकि पंप के रिकार्ड को व्यवस्थित किया गया है ताकि पहली नजर में गड़बड़ न नजर आए।
ऐसे समझे: एक पेट्रोल पंप की एक दिन की सेल 2 करोड़ की है। मतलब, उस पंप पर एक दिन की सेल के बाद संचालक के हाथ में 2 करोड़ रुपए रहते हैं। आमतौर पर कमीशन व खर्च काटकर करीब इतने ही रूपए के र्इंधन की एडवांस बुकिंग होती है। नोटबंदी के बाद स्थिति उलट है। जिस पंप पर 2 करोड़ का डीजल बिका उसके संचालक ने 12 करोड़ रुपए कंपनी में बतौर एडवांस बुकिंग जमा करवा दिए। ऐसे में इनकम टैक्स को इस बात की तस्दीक करने की जरूरत है कि जब केशइन हैंड ही 2 करोड़ है तो बाकी के 10 करोड़ रुपए जो एडवांस जमा हुए हैं वे किसके हैं।
ऐसे लौटाएंगे पैसा : पंप संचालकों ने बड़े नोटों की बड़ी खेप ली और एडवांस के रूप में कंपनी में जमा कर दी। अब जैसे-जैसे कंपनी से खेप आएगी, माल सेल होगा, वैसे-वैसे अपनी कमीशन काटकर पैसा उन लोगों को लौटाया जाएगा जिनका काले से उजला किया है।
ऐसे किए खेल
-- संचालक अपने यहां आ रहे छोटे नोटों को एकत्र कर 15 लाख रुपये के पुराने नोटों के बदले 10 लाख रुपये के छोटे नोट दे रहे हैैं और पुराने नोटों को अपनी बिक्री में दिखा कर बैैंक में जमा कर दिए।
--  सिटी के पंपों पर छोटे वाहनों की अधिकता के कारण पेट्रोल की बिक्री ज्यादा होती है। ज्यादातर खरीदी 50 से 500 रुपए के बीच होती है। संचालकों ने खुल्ले का संकट बताकर शुरूआत में राउंडफिगर में 500 और 1000 रुपए काटे हैं। खुल्ले पैसों को 20 से 30 फीसदी की कमीशन के साथ बड़े नोटों से रिप्लेस किया गया।
-- कई पेट्रोल पंपों ने ‘जहां डीजल की बिक्री ज्यादा है’, वहां बड़ी गाड़ियों के नंबर डालकर बड़े बिल बनाए हैं जबकि जिन गाड़ियों के नंबरों के नाम पर बल्क बिल बनाए गए हैं वे गाड़ियां वहां से गुजरी ही नहीं है।
हमने तो सेवा की है, नोटिस आएगा तो देंगे जवाब
पेट्रोल पंपों को सरकार ने नोट चलाने की छूट तो दी लेकिन खुल्ले पैसे नहीं दिए थे। अब 500 और 1000 का नोट देने वाला पूरे पैसे का पेट्रोल-डीजल तो डलवाता नहीं है, 300, 700, 800 रुपए का र्इंधन डला तो ऊपर के पैसे हमने दिए ही हैं। जैसे-जैसे पैसा आया, वैसे-वैसे लोगों को दिया भी। फिर हेराफेरी हुई कैसे? हमने पंपों को स्पष्ट कर दिया था कि न उधार दें, न खुल्ले देने से मना करें, हैं तो दें।
पारस जैन, सचिव
इंदौर पेट्रोल डीलर एसोसिएशन

No comments:

Post a Comment