अवैध नव आदर्श स्कूल में मनमानी की तालीम
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जमीनी हेराफेरी का गढ़ बन चुकी कैलोदहाला की फिनिक्स टाउन कॉलोनी के बच्चों को तालीम भी चंपू-चिराग चौकड़ी से बना अवैध स्कूल दे रहा है। तीन प्लॉटों को जोड़कर स्कूल बना और प्रस्तावित सड़क सहित अन्य दो प्लॉटों पर कब्जा करके स्कूल बसों की पार्किंग बना दी गई। पीछे के प्लॉट कब्जाकर मैदान बना दिया। स्वीकृत नक्शे से ज्यादा निर्माण किया। अब पड़ौसियों को परेशान किया जा रहा है ताकि वे ओनेपोने दाम पर मकान बेचकर चलते बने।
30 अक्टूबर 2010 को कैलोद हाला की 41.575 हेक्टेयर जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से कॉलोनी के तीन अलग-अलग नक्शे मंजूर हुए थे। तीनों नक्शों में स्कूल के लिए तीन अलग-अलग जमीन आरक्षित है जबकि कॉलोनी में एक मात्र स्कूल बना प्लॉट नं. 1211, 1212 और 1213 को जोड़कर। इसके बाद स्कूल संचालक ने 1213 और 1214 के बीच से निकलने वाली 12 मीटर चौड़ी रोड पर कब्जा किया और गेट लगा दिया। 1214, 1215, 1248 और 1249 नंबर के प्लॉट व रास्ते पर स्कूल की बसों की पार्किंग बना दी है। लोगों ने आपत्ति ली तो स्कूल संचालक ने कहा कि जाकर कॉलोनाइजर से बात करो, मेरे आड़े आने की कोशिश मत करना।
धोखाधड़ी का आरोपी रह चुका है चंपू का ‘चतुर’
स्कूल का संचालक चतुरसिंह यादव है जो कि चंपू अजमेरा का खास है। यादव नव आदर्श विद्या निकेतन के नाम से वीणानगर में स्कूल चलाता था लेकिन वहां मकान मालिक की रजिस्ट्री पर लोन ले लिया था। मामले का खुलासा होने के बाद हीरानगर में केस दर्ज हुआ। जेल भी जाना पड़ा।
स्वीकृत के विपरीत निर्माण
‘युक्तियुक्तकरण’ से यादव ने प्लॉटों का संयुक्तिकरण करके स्कूल का नक्शा मंजूर करवाया। नक्शा जी+2 मंजूर हुआ था लेकिन मौके पर निर्माण हुआ जी+3 का । एमओएस भी हजम किया गया।
पीछे के प्लॉट को मैदान बना दिया
यादव ने तीन प्लॉट जोड़कर स्कूल बनाया और पीछे जो तीन प्लॉट थे प्लॉट नं. 1250 और 1251 पर भी कब्जा किया। इन दोनों प्लॉट को बच्चों के खेल मैदान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
एक ने तो बेच दिया घर, दूसरा बेचने की तैयारी में
स्कूल बनने के बाद सड़क और चार प्लॉट जोड़कर जो पार्किंग बनाई गई वहां सिर्फ बसें खड़ी होती है जबकि स्कूल आने वाले टीचर्स और स्टूडेंट्स के वाहन खड़े होते हैं सामने वाले प्लॉट(1157) पर या बने हुए मकानों (1158 व 1159) के सामने। इससे लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है। लोग अपने वाहन नहीं खड़े कर पाते। इसीलिए एक मकान मालिक ने तो मकान का सौदा कर भी दिया है। उनका साफ कहना है कि अपना घर, अपना नहीं रहा। हम स्कूल मालिक के बंधक बनकर रह गए हैं। कुछ ही दिन हुए थे मकान बनाकर रहते हुए लेकिन जीना मुश्किल कर दिया। छह महीने से बेचने की फिराक में था लेकिन स्कूल देखकर कोई खरीदार भी नहीं मिल रहा था। जैसे-तैसे सौदा हुआ है। वहीं दूसरे पर स्कूल संचालक द्वारा दबाव बनाया जा रहा है ताकि वह भी बेचकर चला जाए।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जमीनी हेराफेरी का गढ़ बन चुकी कैलोदहाला की फिनिक्स टाउन कॉलोनी के बच्चों को तालीम भी चंपू-चिराग चौकड़ी से बना अवैध स्कूल दे रहा है। तीन प्लॉटों को जोड़कर स्कूल बना और प्रस्तावित सड़क सहित अन्य दो प्लॉटों पर कब्जा करके स्कूल बसों की पार्किंग बना दी गई। पीछे के प्लॉट कब्जाकर मैदान बना दिया। स्वीकृत नक्शे से ज्यादा निर्माण किया। अब पड़ौसियों को परेशान किया जा रहा है ताकि वे ओनेपोने दाम पर मकान बेचकर चलते बने।
30 अक्टूबर 2010 को कैलोद हाला की 41.575 हेक्टेयर जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से कॉलोनी के तीन अलग-अलग नक्शे मंजूर हुए थे। तीनों नक्शों में स्कूल के लिए तीन अलग-अलग जमीन आरक्षित है जबकि कॉलोनी में एक मात्र स्कूल बना प्लॉट नं. 1211, 1212 और 1213 को जोड़कर। इसके बाद स्कूल संचालक ने 1213 और 1214 के बीच से निकलने वाली 12 मीटर चौड़ी रोड पर कब्जा किया और गेट लगा दिया। 1214, 1215, 1248 और 1249 नंबर के प्लॉट व रास्ते पर स्कूल की बसों की पार्किंग बना दी है। लोगों ने आपत्ति ली तो स्कूल संचालक ने कहा कि जाकर कॉलोनाइजर से बात करो, मेरे आड़े आने की कोशिश मत करना।
धोखाधड़ी का आरोपी रह चुका है चंपू का ‘चतुर’
स्कूल का संचालक चतुरसिंह यादव है जो कि चंपू अजमेरा का खास है। यादव नव आदर्श विद्या निकेतन के नाम से वीणानगर में स्कूल चलाता था लेकिन वहां मकान मालिक की रजिस्ट्री पर लोन ले लिया था। मामले का खुलासा होने के बाद हीरानगर में केस दर्ज हुआ। जेल भी जाना पड़ा।
स्वीकृत के विपरीत निर्माण
‘युक्तियुक्तकरण’ से यादव ने प्लॉटों का संयुक्तिकरण करके स्कूल का नक्शा मंजूर करवाया। नक्शा जी+2 मंजूर हुआ था लेकिन मौके पर निर्माण हुआ जी+3 का । एमओएस भी हजम किया गया।
पीछे के प्लॉट को मैदान बना दिया
यादव ने तीन प्लॉट जोड़कर स्कूल बनाया और पीछे जो तीन प्लॉट थे प्लॉट नं. 1250 और 1251 पर भी कब्जा किया। इन दोनों प्लॉट को बच्चों के खेल मैदान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
एक ने तो बेच दिया घर, दूसरा बेचने की तैयारी में
स्कूल बनने के बाद सड़क और चार प्लॉट जोड़कर जो पार्किंग बनाई गई वहां सिर्फ बसें खड़ी होती है जबकि स्कूल आने वाले टीचर्स और स्टूडेंट्स के वाहन खड़े होते हैं सामने वाले प्लॉट(1157) पर या बने हुए मकानों (1158 व 1159) के सामने। इससे लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है। लोग अपने वाहन नहीं खड़े कर पाते। इसीलिए एक मकान मालिक ने तो मकान का सौदा कर भी दिया है। उनका साफ कहना है कि अपना घर, अपना नहीं रहा। हम स्कूल मालिक के बंधक बनकर रह गए हैं। कुछ ही दिन हुए थे मकान बनाकर रहते हुए लेकिन जीना मुश्किल कर दिया। छह महीने से बेचने की फिराक में था लेकिन स्कूल देखकर कोई खरीदार भी नहीं मिल रहा था। जैसे-तैसे सौदा हुआ है। वहीं दूसरे पर स्कूल संचालक द्वारा दबाव बनाया जा रहा है ताकि वह भी बेचकर चला जाए।
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