Monday, July 18, 2016

लालवानी ने ताना आलोकनगर में अवैध मार्केट

पत्नी और पार्टनरों के आवासी प्लॉटों को जोड़कर बनाया कॉम्पलेक्स
इंदौर. विनोद शर्मा।
कलेक्टर और निगमायुक्त की सख्ती के बावजूद भू-माफियाओं की मनमानी जारी है। विकास अपार्टमेंट गृह निर्माण सहकारी संस्था द्वारा विकसित आलोकनगर में तीन प्लॉट जोड़कर बन रहा मार्केट इसका बड़ा उदाहरण है। मार्केट के लिए जिन तीन प्लॉटों को जोड़ा गया है उनमें से एक प्रकाश लालवानी का है जो इंदौर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष शंकर लालवानी के भाई हैं।
बेलगाम सदस्यता देने, जमीन बेचने और प्लॉटों को जोड़कर मल्टियां तानने तक के मामले में पहले ही विवादों से जुझती आ रही विकास अपार्टमेंट संस्था इन दिनों लालवानी के मार्केट को लेकर खासी चर्चा में है। राजनीति में लालवानी के संबंधों को देखते हुए मार्केट की शिकायत मुख्यमंत्री को की गई है। शिकायत के अनुसार दो या उससे अधिक प्लॉटों को जोड़कर किसी भी तरह का निर्माण करना गैरकानूनी है बावजूद  मार्केट के लिए आलोकनगर के प्लॉट नं. 345 (मनीष पिता प्रकाशचंद्र जैन), 346 (प्रदीप पिता प्रकाशचंद्र जैन) और 347 (नेहा पति प्रकाश लालवानी) को जोड़ा गया है।
इसीलिए जोड़े प्लॉट
ग्रीन वेली वाली रोड पर प्लॉट नं. 345 और 346 हैं। हर प्लॉट का साइज 20 बाय 80 है यानी 1600 वर्गफीट। 347 तिकोना प्लॉट है जिसका साइज 2000 वर्गफीट है। फोरलेन बनने के बाद कमर्शियल वेल्यू 9000 से 11000 रुपए/वर्गफीट तक हो चुकी है। तिकोने प्लॉट पर कमर्शियल कंस्ट्रक्शन हो जाता लेकिन बाकी दोनों प्लॉट पर मकान ही बन सकते थे। चूंकि जैन बंधू और लालवानी अच्छे मित्र हैं इसीलिए उन्होंने संयुक्त रूप से काम करने का निर्णय लेते हुए तीनों प्लॉटों का संयुक्तिकरण कर दिया।
दुकानें-आॅफिस दर्जनभर, पार्किंग रत्तीभर भी नहीं
सिर्फ लालवानी के प्लॉट पर ही जी+2 कंस्ट्रक्शन है। ग्राउंड पर  5 दुकानें हैं। ऊपरी मंजिलों पर इतने-इतने ही आॅफिस हैं। 345 और 346 पर जी+2 कंस्ट्रक्शन है। नीचे कुल नौ दुकाने हैं। बीच में रास्ता है। चढ़ाव है जो तीनों प्लॉट को एक-दूसरे से जोड़ता है। ऊपरी फ्लोर दर्जनभर से ज्यादा आॅफिस है। तीनों प्लॉट की कुल 14 दुकानें और दो दर्जन आॅफिस हैं। ग्राहक को छोड़ें तो भी इतने दुकानदार और आॅफिस वालों के लिए 25 कारों और 15 दोपहिया वाहनों की पार्किंग की जरूरत थी जो नहीं है।
14 करोड़ की कमाई का खेल
कुल 5200 वर्गफीट प्लॉट पर जी+3 के हिसाब से करीब 15000 वर्गफीट निर्माण हुआ है। 3000 रुपए वर्गफीट जमीन की कीमत और 1200 रुपए वर्गफीट कंस्ट्रक्शन कास्ट के साथ छह करोड़ के घर-फ्लैट बनते। मार्केट बनने के बाद फ्रंट आॅफिस और दुकानों की कीमत 11000 रुपए/वर्गफीट है जबकि अंदर की नौ से 10 हजार। औसत 9500 रुपए वर्गफीट के हिसाब से भी कीमत आंके तो लालवानी एंड कंपनी 14.25 करोड़ कमाएगी। जो आवासीय उपयोग से 8.25 करोड़ ज्यादा है।
एमओएस भी हजम
यदि एक-एक प्लॉट का अलग-अलग नक्शा पास होता तो इन्हें एमओएस भी छोड़ना पड़ता जो संयुक्तिकरण के साथ ही हजम कर लिया गया है। तीनों तरफ से मार्केट को सड़क से टिकाकर बनाया जा रहा है। 346-347 पर पेंट हाउस भी बन रहा है जो सामने से नजर नहीं आता लेकिन पीछे से देखो तो कंस्ट्रक्शन जी+3 साफ दिखता है।
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सामने का हिस्सा मेरा है पीछे का मेरे पार्टनर प्रदीप जैन का। आॅफिस बंगाली चौराहे पर है। मार्केट में नीचे दुकाने हैं, ऊपर आॅफिस। 347 वाला पार्ट करीब-करीब तैयार है। एक दुकान बड़ी, कुछ छोटी। ऊपर आॅफिस है। कीमत है 9 से 11 हजार/वर्गफीट है।
प्रकाश लालवानी
(बतौर खरीदार बात करने पर उन्होंने बताया)

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