Monday, July 18, 2016

पीड़ितों ने रोका गर्ग का ‘खात्मा’

पांच साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में भंवरकुआं पुलिस लगा रही थी खात्मा रिपोर्ट
पीड़ितों की कड़ी आपत्ति, बिना पैसा, क्यों हुआ ऐसा
 इंदौर. विनोद शर्मा ।
कर्जे के नाम पर तीन बैंकों को सवा सौ करोड़ की चपत लगाने वाले अम्बिका सॉलवेक्स के सर्वेसर्वा कैलाश गर्ग पर तेजाजीनगर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है वहीं भंवरकुआं पुलिस उसे बचाने के प्रयास में लगी है। शायद इसीलिए 75 लाख की धोखाधड़ी के मामले में पहले हाईकोर्ट के निर्देश पर एफआईआर की और अब 40 लाख चुकाते ही गर्ग खात्मा लगाने की तैयारी शुरू कर दी। सही वक्त पर पीड़ित ने पुलिस की साजिश भांप ली और आपत्ति ली तब जाकर खात्मा रूका है।
मामला भंवरकुआं थाने का है। तेजाजीनगर थाना बनने से पहले मुंडला नायता इसी थाना क्षेत्र का हिस्सा था। इसी मुंडला नायता में एवलांचा रीयलिटी की जमीन पर जो सेटेलाइट हिल्स कॉलोनी कटी है उसमें मुनाफे का सब्जबाग दिखाकर गर्ग ने बलराम सचदेव और नागरानी वेयर हाउसिंग को दो दर्जन प्लॉट बेचे थे जिनका कुल क्षेत्रफल था 55 हजार वर्गफीट। बाद में समाचार पत्रों से दोनों को पता चला कि जो प्लॉट उन्हें बेचे गए है उनका सौदा पहले भी किसी को किया जा चुका है। इतना ही नहीं जमीन को गिरवी रखकर लोन भी लिया जा चुका है। विवादों में कौन पढ़े? यही सोचकर दोनों ने गर्ग से पैसे मांगे। नहीं मिले। दोनों ने 2013 में कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश के पर 19 दिसंबर 2013 को भंवरकुआं पुलिस ने गर्ग के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा 923/2013 दर्ज कर लिया।
ठगी की रकम दो, तभी जमानत
केस दर्ज होने के बाद गर्ग ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया। कोर्ट ने कहा दोनों से जितने पैसे की ठगी की है, लौटा दो तभी जमानत मिलेगी। इस पर गर्ग ने बलराम सचदेव के 40 लाख रुपए लौटा दिए। जमानत भी मिल गई।
पुलिस ने गर्ग के सुर में मिलाया सुर
ठगी की रकम लौटाए जाने के बाद  पुलिस ने गर्ग के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया। इन्वेस्टिगेशन करने के बजाय पुलिस ने खात्मा पेश करने की तैयारी कर ली। पुलिस का कहना है कि जब रकम लौटा दी तो ठगी का केस भी खत्म हो गया। हालांकि अब तक न सचदेव ने शिकायत वापस ली, न ही नागरानी को 35 लाख रुपए मिले हैं।
ऐसे की धोखाधड़ी
सेटेलाइट हिल्स की जमीन एवलांचा रिएल्टी की थी। डायरेक्टरों ने नारायण अम्बिका इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पॉवर आॅफ अटर्नी की 21 अक्टूबर 2011 को जबकि बलराम और नागरानी के डायरेक्टरों के साथ गर्ग ने 55000 वर्गफीट जमीन का एग्रीमेंट कर दिया था 30 अगस्त 2011 को।
गर्ग ने पीएनबी, कॉपर्रेशन और यूको बैंक से अगस्त 2010 में 110.50 करोड़ का लोन लिया था जबकि एवालांचा ने उसके नाम पॉवर आॅफ अटर्नी 14 महीने बाद की थी। फिर कौनसे एग्रीमेंट से बैंकों ने लोन दिया?
जब वे एवलांचा की जमीन गिरवी रख चुके थे तो उन्होंने सचदेव और नागरानी को अगस्त 2011 में प्लॉट क्यों बेचे? जबकि इन प्लॉटों को पहले भी बेचा जा चुका था।
गर्ग न एवलांचा में डायरेक्टर थे उस वक्त न ही नारायण अम्बिका इन्फ्रास्ट्रक्चर के डायरेक्टर थे। फिर भी रजिस्ट्री उन्होंने की। दस्तावेजों पर उनके दस्तखत हैं।
ब्याज सहित पैसा दे या प्लॉट दे
525 रुपए/वर्गफीट के हिसाब से कुल सौदा 2 करोड़ 88 लाख 75 हजार में हुआ था। 75 लाख दे चुके थे। 40 लाख वापस कर दिए। 35 लाख अब भी जमा है।  बचते है 2 करोड़ 53 लाचा 75 हजार। गर्ग जब चाहे हम उसे पैसा दे सकते हैं। या फिर गर्ग हमें हमारा पैसा ब्याज सहित लौटा दे। हम तो यही चाहते हैं जबकि पैसा मांगने पर वह मारपीट और धक्कामुक्की भी कर चुका है।

मुकेश तिवारी,  संचालक
नागरानी वेयरहाउसिंग
हमने कभी शिकायत वापस नहीं ली है। गर्ग ने जो पैसा लौटाया है वह भी जमानत के लिए कोर्ट द्वारा तय की गई शर्त के अनुसार लौटाया। वह भी सिर्फ मूलधन जो गर्ग ने चार साल इस्तेमाल किए। खात्मे का सवाल नहीं उठता। इसीलिए खात्में पर आपत्ति ली।
बलराम सचदेव, पीड़ित

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