Tuesday, July 5, 2016

मौके पर 23.66 एकड़, दाव पर लगा दी 31.66 एकड़

गर्ग को सवा अरब लोन देने वाली तीन बैंकों की जादूगरी
बैंकें देखती रही, नामांतरित हो गई 8 एकड़ जमीन
इंदौर. विनोद शर्मा ।
हम तो डूबे हैं, तुम्हें भी ले डुबेंगे...। कुछ यही स्थिति है कैलाश गर्ग की नारायण निर्यात (इंडिया) लि. को सवा अरब का कर्ज देकर बैठी पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक की। इन बैंकों ने अपने कर्ज की रिकवरी के लिए एवलांचा रियल्टी, अम्बिका सॉल्वेक्स और दौलतवाला एक्जीम की जिस जमीन की आॅक्शन विज्ञप्ति जारी की है उसमें से आठ एकड़ जमीन 2011-12 में ही 40 से ज्यादा लोगों के नाम चढ़ चुकी है।
अगस्त 2010 में बैंक ने नायता मुंडला स्थित एवलांचा रियल्टी, अम्बिका सॉल्वेक्स और दौलतवाला एक्जीम को गिरवी रखकर नारायण निर्यात के विस्तार के लिए 110.50 करोड़ का लोन दिया था। रिकवरी न होने के बाद 3 मई 2016 को तीनों बैंकों ने तीनों कंपनियों की 31.66 एकड़ जमीन की संयुक्त रूप से विज्ञप्ति जारी  कर दी। इस विज्ञप्ति में जिन खसरों का जिक्र किया गया है उनमें से आधा दर्जन खसरों की 3.217 हेक्टेयर (7 एकड़, 41355 वर्गफीट)   जमीन पहले ही दूसरों के नाम हो चुकी है। जिसकी गाइडलाइन कीमत 27.70 करोड़ है।
प्रशासन ने दी जमीन
कॉलोनी की जमीन का नामांतरण इन्दौर के प्र.क्र.352/अ-6/2010-2011 की सुनवाई के बाद न्यायालय भूमि परिवर्तन शाखा कलेक्टोरेट  द्वारा 9 फरवरी 2011 को दिए आदेश के बाद हुआ है। जमीन पाने वालों में कुछ तो वह प्लॉट होल्डर हैं जिन्हें रितेश उर्फ चंपू अजमेरा ने प्लॉट बेचे थे। इसके अलावा कुछ बड़ी जमीनें हैं जिनके सौदे मनमाने  तरीके से हुए थे।
संकट में सौदा...
जमीन का पजेसन 2013 में  बैंकों ने लिया था। तीन वर्षों में बैंकें तीन बार आॅक्शन विज्ञप्ति जारी कर चुकी है। तीसरी विज्ञप्ति 3 मई 2016 को जारी हुई। इसमें जितनी जमीन का जिक्र है, मौके पर उतनी है ही नहीं। इसीलिए बैंकों को पहले उन खसरों की जानकारी निकालना होगी जिन्हें वह बेचने का अधिकार रखती है और नियमानुसार तब जाकर चौथी विज्ञप्ति जारी कर सकती है। अन्यथा बैंकें 31.66 एकड़ जगह 23.66 एकड़ जमीन बेचकर खरीदार को ठगेगी।
बैंक अधिकारी आंख पर पट्टी बांधे बैठे रहे
नगर निगम में जब भी किसी कॉलोनी के प्लॉट धरोहर रखे जाते हैं तो उन प्लॉटों का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराया जाता है लेकिन यहां जिन जमीनों को गिरवी रखकर बैंकों ने 110.50 करोड़ का लोन दिया उसका कोई रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं कराया गया। न ही मॉडगेज एग्रीमेंट के साथ उक्त खसरों की जानकारी जिला पंजीयक को दी गई, दी जाती  तो भू-माफिया जमीन नहींं बेच पाते। राजस्व विभाग को खसरों की जानकारी होती तो नामांतरण नहीं होता।
जमीनें जो अब बैकों के हाथ नहीं रही
नाम खसरा नं. रकबा
रमेश पिता रतनलाल जैन 111/मिन-1   0.006
योगेश पिता सरदारमल जैन 111/मिन-3 0.020
किशन पिता रामचन्द्र स्वरूप 111/मिन-4 0.030
माया पति किशन स्वरूप 111/मिन-4 0.030
प्रवीण भूषण गुप्ता 111/मिन-5 0.033
(सहित सर्वे नं. 111 कुल 111/मिन-18 तक 18 लोगों के नाम हो चुका है। )
खसरा नं.
रमेश पिता रतनलाल जैन 112/मिन-2 0.065
113/मिन-1 0.405
130/4/मिन-2 0.024
140/2/मिन-2 0.020
संजय लुणावत 138/1/1 0.069
नार्थ राजस्थान होल्डिंग प्रा.लि. 114/1/1 0.527
114/2 0.162
मंसूर हाजी पटेल 122/1/मिन-3 0.052
रविन्द्रसिह पिता गुरमेलसिंह 122/1/मिन-2 0.060
(सहित 122/1/मिन सात अन्य नाम पर)
स्वाति पति नीरज जैन   122/2/मिन-2 व 123 पै    0.484
124/मिन-2 व 125 पै   0.161
कुल-31.66 एकड़ में से 8 एकड़...बिकी। बची 23.66 एकड़।

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