Monday, July 18, 2016

फर्जी कंपनियों से सफेद करते थे काली कमाई

एमपी एग्रो के खिलाफ इन्वेस्टिगेशन में खुलासा
 इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
इंदौर बेस जिस दलिया किंग कंपनी एमपी एग्रो न्यूट्री फुड्स प्रा.लि. और एमपी टूडे मीडिया गु्रुप के संचालकों ने दर्जनभर से ज्यादा फर्जी कंपनियां बना रखी है। इन कंपनियों का इस्तेमाल दो नंबर की कमाई को एक नंबर में रोटेट करने के लिए किया जाता है। एमपी एग्रो के खिलाफ लगातार तीन दिन तक चली इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छापेमार कार्रवाई के दौरान यह बात सामने आई है। कार्रवाई गुरुवार देर रात तक जारी रही। कार्रवाई के दौरान 100 करोड़ की बेनामी संपत्ति का आंकलन किया जा रहा है।
मीडिया की आड़ और नेता-अफसरों से ‘बेहतर’ संबंध के कारण आयकर की छापेमार कार्रवाई को कभी एमपी एग्रो ने दिमाग में जगह नहीं दी थी। हालांकि बीते दिनों हुई रेड ने उनकी खुशफहमी दूर कर दी। विंग ने जबरदस्त कार्रवाई की। फेक्ट जुटाए। पता चला कि सुनील जैन और शांतनु दीक्षित व उनके भागीदारों के नाम पर दर्जनभर से अधिक ऐसी कंपनियां हैं जो कि सिर्फ लिस्टेड हैं। उनका मैदानी काम कुछ नहीं है। मूल कंपनियों की काली कमाई को निवेश व खर्च के रास्ते एक नंबर करने  के लिए इन कंपनियों के नाम का इस्तेमाल किया जाता है।
करीब-करीब संपन्न
गुरुवार दिन तक कार्रवाई 5-6 स्थानों पर रह गई थी। डायरेक्टरों के घर कार्रवाई संंपन्न हो गई थी। जहां जारी थी वहां कम्प्यूटर और लेपटॉप का डाटा रिकवर किया जा रहा था। हालांकि बीच-बीच में समूह सरेंडर के प्रस्ताव देता रहा लेकिन अधिकारियों ने नकार दिए।
खर्चे किए कम, बताए ज्यादा
बताया जा रहा है कि जैन, दीक्षित और उनके भागीदारों ने अपने अकाउंट्स डॉक्यूमेंट में बोगस खर्च दिखा रखे हैं ताकि खर्चे की ऊपरी रकम के नाम पर अपनी इनकम को एक नंबर किया जा सके। फर्जी कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की है। इन्वेस्टमेंट के फर्जी प्रपोजल दिखाए हैं।
‘‘‘‘ करीब-करीब सौ करोड़ की बेनामी संपत्ति के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इसीलिए यह बीते दिनों हुई कार्रवाइयों में बड़ी कार्रवाई है। हमारा दबाव सरेंडर को लेकर नहीं है, टैक्स ज्यादा से ज्यादा कलेक्ट हो इस  पर है।
आर.के.पालीवाल, पीडीआईटी


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