Monday, July 18, 2016

एनएचएआई सौ करोड़ में पूरा करेगा इंदौर-अहमदाबाद रोड

आईवीआरसीएल और बैंकों के हाथ टेकने के बाद
बैंकों की अनापत्ति का इंतजार
इंदौर. विनोद शर्मा ।
हैदराबाद की आईवीआरसीएल और उसको वित्त पोषित करने वाली बैंकों द्वारा घुटने टेके जाने के बाद आखिरकार नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआई) ने इंदौर-अहमदाबाद रोड को पूरा करने का मन बना लिया है। इसके लिए सौ करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर अथॉरिटी ने उन बैंकों को सौंप दिया है जिन्होंने प्रोजेक्ट फाइनेंस किया था। इंतजार है सिर्फ बैंकों की सहमति का। उम्मीद जताई जा रही है कि नवरात्रि तक काम शुरू हो जाएगा।
इंदौर-अहमदाबाद फोरलेन कब पूरा होगा? यह सवाल उठते ही इंदौर, धार, झाबुआ और अलीराजपुर से लेकर अहमदाबाद तक के लोग अथॉरिटी को कोसना शुरू कर देते हैं। वजह है निर्माण की कड़वी यादें। 2010 में 2013 तक समयसीमा के साथ 155 किलोमीटर लंबे इस हाइवे का काम 2016 तक भी पूरा नहीं हुआ। ठेका लेने वाली आईवीआरसीएल और उसकी सहयोगी बैंकों ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के नाम पर घुटने टेक दिए हैं। अथॉरिटी के पास अब विकल्प नहीं बचा। जन जरूरत के मद्देनजर अथॉरिटी प्रोजेक्ट  की कमान अपने हाथ में लेने का मन बनाया है।
बैंक आॅफ इंडिया को भेजा 100 करोड़ का प्रस्ताव
नावदापंथ से पिटोल बार्डर तक 155.15 किलोमीटर लंबे एनएच-59 को फोरलेन करने का ठेका आईवीआरसीएल ने 2010 में 1175 करोड़ में लिया था। बताया जा रहा है कि बैंकों के कंसोर्टियम ने प्रोजेक्ट पर अब तक करीब 1300 करोड़ का कर्ज दिया। फिर भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ। कंसोर्टियम में लीड बैंक है बैंक आॅफ इंडिया, मुंबई। इसीलिए एनएचएआई ने बैंक आॅफ इंडिया को ही पत्र लिखकर कहा है कि अथॉरिटी 100 करोड़ रुपए लगाकर प्रोजेक्ट पूरा करना चाहता है। प्रस्ताव पर बैंक आॅफ इंडिया बाकी बैंकों से रायशुमारी करके अपना अनापत्ति देगा।
90 फीसदी काम हुआ
अथॉरिटी का आंकलन यह है कि प्रोजेक्ट पर अब तक बर्ड सेंच्यूरी वाला हिस्सा छोड़कर 145 किलोमीटर लंबे हिस्से में से 125 किलोमीटर लंबे हिस्से में डामरीकरण हो चुका है। इसके अलावा फ्लाईओवर और व्हीकल अंडर पास अधूरे हैं जो कि यातायात के लिहाज से बेहद जरूरी है। जिस राशि का प्रपोजल दिया गया है उसमें 10 फीसदी सड़क बनाने के साथ ही आधे-अधूरे पुल-पुलिया और फ्लाईओवर्स भी पूरे किए जाएंगे।
रोड दुरुस्त करेंगे
झाबुआ से पिटोल के बीच रोड की स्थिति खराब है। वहां बरसात के दौरान लोगों को दिक्कत का सामना न करना पड़े इसीलिए रिनुअल का टेंडर निकाला है। प्रारंभिक रूप से रिनुअल की लागत एक करोड़ आंकी गई है। इसके अलावा जरूरत के अनुसार बाकी हिस्सा भी सही करेंगे। इसके लिए बीते दिनों अथॉरिटी को 9.87 करोड़ का बजट  भी मिला है।
प्रोजेक्ट पूरा करना प्राथमिकता
‘‘‘प्रोजेक्ट काफी लेट है। लोगों की परेशानी को देखते हुए प्रोजेक्ट की पूर्णता ही हमारी प्राथमिकता है। इसीलिए सौ करोड़ का प्रस्ताव दिया है। इंतजार है बैंक की अनापत्ति का जो जल्दी मिलने की उम्मीद है। अनापत्ति मिलने के बाद महीनेभर में काम शुरू कर देंगे।
सुमित कुमार, प्रोजेक्ट आॅफिसर
एनएचएआई

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