Tuesday, July 5, 2016

बिना काम, दिया पूर्णता प्रमाण, छोड़े 191 प्लॉट


सेटेलाइट हिल्स पर एसडीएम की मेहरबानी
तेजाजीनगर पुलिस की पहल और नगर निगम की जांच में उजागर हुआ घपला
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जमीन बिक्री और सवा अरब के कर्जे के नाम पर बैंकों से हुई धोखाधड़ी का केंद्र रही सेटेलाइट हिल्स में जिला प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका भी भू-माफियाओं के मनमाफिक रही। शायद, इसीलिए 2008 में सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता के बिना ही एसडीएम ने कॉलोनी का न सिर्फ पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी कर दिया बल्कि धरोहर के रूप में रखे 191 प्लॉट भी रीलिज कर डाले। पूर्णता प्रमाण-पत्र मिलते ही भू-माफियाओं ने काम बंद कर दिया जो आज तक शुरू नहीं हुआ।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग(टीएंडसीपी) और एसडीएम को साधकर सेटेलाइट हिल्स में जमकर काला-पीला किया गया। नायता मुंडला की 37.460 हेक्टेयर जमीन की टीसीपी (4917) हुई 20 जुलाई 2007 को। एवलांचा रिएल्टी प्रा.लि. तर्फे संजय लुणावत के आवेदन पर नारायण अम्बिका इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. तर्फे रितेश उर्फ चंपू अजमेरा के नाम 25 जनवरी 2008 को विकास अनुमति (04/2008) जारी हुई। डेवलपमेंट की गारंटी के रूप में 191 प्लॉट धरोहर के रूप में एसडीएम को सौंप दिए गए। चंपू और उसकी चौकड़ी ने 850 मीटर लंबे मेनरोड सहित कुल सात किलोमीटर लंबी 18 सड़कें बनाई जो कि आधी-अधूरी थी। बावजूद इसके बड़ी रकम लेकर तत्कालीन एसडीएम ने 5 नवंबर 2008 को पूर्णता प्रमाण-पत्र (क्र. 2375/2008) जारी कर बंधक प्लॉट मुक्त कर दिए।
बिना मौके पर जाए ही छोड़े प्लॉट
कॉलोनी में कुल 765 प्लॉट विकसित होना थे। इसमें से प्लॉट नं. 575 से 765 तक कुल 191 प्लॉट धरोहर रखे गए थे। जिस वक्त अधिकारियों ने इन प्लॉटों को मुक्त किया उस वक्त कुल 10 किलोमीटर लंबी 32 सड़कों में से करीब 3 किलोमीटर लंबी 14 सड़कें कच्ची ही थी। यही स्थिति सीवरेज लाइन की थी। बावजूद इसके अधिकारियों ने मौका तस्दीक किए बिना ही पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी कर दिया।
पुलिस ने जांच कराई तो हकीकत सामने आई..
सेटेलाइट हिल्स के संचालकों के खिलाफ तेजाजीनगर पुलिस ने 27 दिसंबर 2014 को आपराधिक प्रकरण (3171/2014) दर्ज किया था। पुलिस भी पूर्णता प्रमाण-पत्र और कॉलोनी की मैदानी हकीकत देख चौक गई। इस संबंध में नगर निगम से पत्राचार चलता रहा। कॉलोनी की मैदानी जांच कराने का निर्णय लिया गया। जांच करके उपयंत्री ने मार्च 2016 में रिपोर्ट दी।
क्या कहती है रिपोर्ट
1- अधिकांश रोड नहीं बनी है।
2- डेÑनेज लाइन भी अधूरी है।
3- 13000 हजार वर्गफीट का एक ही बगीचा दिखता है। जबकि कॉलोनी  में आधा दर्जन बगीचे प्रस्तावित है।
4- बिजली के खम्बे नहीं है।
5- पानी की टंकी बनी है लेकिन लाइन नहीं है।
6- वर्षा जल निकाली की कोई व्यवस्था नहीं है।
इन खसरों पर है कॉलोनी...
109, 110, 11, 112, 113/2/2, 114/1/1, 115/1, 122/2, 123, 124, 125, 127, 128, 130/3, 130/4, 138, 138/1, 139/1, 140/1, 140/2, 141/2, 142, 143, 144, 145/2, 149/1, 149/2, 150/2, 150/1/2, 150/1/3, 150/1/4, 150/1/5, 152/1, 152/2, 153/5, 153/2, 153/3, 154/4, 157, 215/1/1, 215/1/2, 215/1/3, 215/1/4/1, 160, 161, 164
कुल जमीन : 37.460 हेक्टेयर



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