Tuesday, July 5, 2016

तहसीलदार-आरआई ने कैबिन में ही नाप दी ज्योति की जमीन

- एडीएम खारिज कर चुके हैं 2011 को सीमांकन
- 2015 में फिर वही कहानी दोहराई
- राजस्व मंडल के स्टे से मंसूबे ध्वस्त
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
आईडीए की सड़क उखाड़कर फेंकने वाली ज्योतिनगर गृह निर्माण सहकारी संस्था पर राजस्व निरीक्षक और पटवारी मेबरहान हैं। इसीलिए 2011 में बिना आसपास के किसानों को सूचना दिए बिना सीमांकन कर दिया जिसे बाद में अपर कलेक्टर को रद्द करना पड़ा।  इसके बाद भी समझ नहीं आई, 2015 में दूसरी बार उसी तरह से मनमाना सीमांकन कर दिया। आसपास के किसानों को भनक भी नहीं लगी और सीमांकन की रिपोर्ट तैयार हो गई। यदि वक्त रहते किसान राजस्व मंडल, ग्वालियर की शरण नहीं ली। राजस्व मंडल ने स्टे दे दिया, अन्यथा अब तक संस्था जमीन पर बाउंड्रीवाल तान चुकी होती।
25 हजार वर्गफीट जमीन से सड़क उखाड़कर फेंकने और अपनी 7 हजार वर्गफीट जमीन पर नई सड़क निकालने के बाद संस्था के कर्ताधर्ताओं ने सीमांकन की तैयारी शुरू कर दी। समीपवर्ती भू-स्वामियों को सूचना दिए बिना ही 5 सितंबर 2011 को राजस्व अधिकारियों ने विवादित जमीन (सर्वे नं. 308/2 पैकी, 308/4 और 308/5 पैकी ) का सीमांकन प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया। प्रतिवेदन को किसान बलजीतसिंह साहनी और पुरुषोत्तम राठौर ने चुनौती दी। अंतत: अपर कलेक्टर, आलोक सिंह ने 26 जून 2012 को सीमांकन रद्द कर दिया। चार साल बाद तहसीलदार डीडी शर्मा और राजस्व निरीक्षक राजेश सरवटे ने फिर संस्था पर दरियादिली दिखाई। 1 अगस्त 2015  को बिना मैदान में जाए कैबिन में बैठे-बैठे ही सीमांकन कर दिया। इस सीमांकन पर समीपवर्ती किसानों ने फिर से आपत्ति ली। इस बार अपर कलेक्टर का दरवाजा खटखटाने के बजाय वे राजस्व मंडल पहुंच गए। मंडल के स्टे बाद बाउंड्रीवाल का काम रूका।
समीपवर्ती किसानों की मौजूदगी जरूरी
मप्र भू-राजस्व सहिंता 1959 की धरा 129 के तहत सीमांकन आवेदन मिलने पर भूमि से लगे समीपवर्ती किसानों को सूचना पत्र जारी किए जाने चाहिए। प्रकरण में जिन किसानों को सूचना-पत्र तामिल कराए गए उनमें से एक भी व्यक्ति के साइन सीमांकन के दौरान बनाए गए पंचनामे पर नहीं है। इसीलिए सीमांकन गलत और असंवैधानिक है।
बिना मौके पर आए हुआ सीमांकन
दोनों शिकायकर्ताओं का कहना है कि राजस्व अधिकारियों ने  2015 में सीमांकन की जो तारीख बताई थी उस दिन हम मौके पर दिनभर इंतजार करते रहे। हमारा मौके पर रहना जरूरी था क्योंकि सीमांकन के बाद हमारा रास्ता बंद हो रहा था। दिनभर इंतजार करने के बाद भी अधिकारी नहीं है लेकिन दूसरे दिन पता चला कि सीमांकन हो चुका है, कैसे?
बिना शुल्क जमा कराए कर दिया सीमांकन
सीमांकन कराने के लिए निर्धारित शुल्क जमा कराना पड़ता है लेकिन  ज्योति का सीमांकन बिना शुल्क के हुआ। सीमांकन रिपोर्ट पर स्पष्ट लिखा था कि प्रतिप्राथी संस्था सीमांकन का आवश्यक शुल्क जमा कराने के लिए तैयार है।

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