Thursday, July 7, 2016

हमें नहीं बताना काली कमाई, मार लो छापा

इनकम टैक्स की आईडीएस में लोगों की रुचि कम
45 प्रतिशत से घटकर 31 प्रतिशत हो सकती है स्कीम की टैक्स स्लैब
इंदौर. विनोद शर्मा ।
मोदी सरकार के तमाम प्रयास और विभागीय प्रलोभन के बावजूद लोग आयकर के सामने अपनी काली कमाई की जानकारी नहीं देना चाहते। इनकम डिस्क्लोस्ड स्कीम (आईडीएस) में काली कमाई को सफेद करने के लिए 45 प्रतिशत की जो टैक्स स्लैब तय है वही लोगों को स्कीम से दूर कर रही है। लोग 45 प्रतिशत टैक्स चुकाने के बजाय सर्च के दौरान सरेंडर करके 33 प्रतिशत टैक्स चुकाना ज्यादा मुनासिब समझ रहे हैं। करदाताओं के इसी रवैये को देखते हुए सरकार भी आईडीएस को सफल बनाने के लिए टैक्स स्लैब कम कर सकती है।
आईडीए 1 जून से शुरू की। 30 सितंबर तक चलेगी। स्कीम के तहत 45 प्रतिशत टैक्स देकर अपनी काली कमाई को किताबों में दर्ज कराया जा सकता है। टैक्स 30 नवंबर जमा कराया जा सकता है। आयकर आयुक्त के सामने जो डिक्लेरशन फाइल किया जाएगा उसकी जानकारी गुप्त रखी जाएगी। लांचिंग के एक महीने बाद भी परिणाम संतोषजनक नहीं थे। इसीलिए मन की बात में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने चेताया लेकिन उनकी चेतावनी का भी लोगों पर असर नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि इसीलिए इनकम टैक्स ने स्कीम के तहत जो 45 प्रतिशत की टैक्स स्लैब तय की है उसे जल्द ही घटाकर 31 प्रतिशत किया जा सकता है। इस संबंध में सभी आयकर मुख्य आयुक्तालयों से राय ली जा रही है।
मार लो छापा मारना है तो...
स्कीम के तहत टैक्स स्लैब 45 प्रतिशत है। राहत है सिर्फ सर्च या सर्वे की कार्रवाई से मुक्ति की। इन दोनों कार्रवाइयों के दौरान यदि व्यक्ति मौके पर ही सरेंडर कर दे तो 33 प्रतिशत टैक्स में ही काली कमाई की कम्पाउंडिंग हो जाती है। दोनों के बीच का अंतर है 12 प्रतिशत जो बहुत बड़ा है। इसीलिए इनकम डिसक्लोज करने से बेहतर विकल्प लोग सर्च और सर्वे की कार्रवाई को मानते है जो जरूरी नहीं कि साल-दो साल में ही हो। तब तक टैक्स की एवज में जो रकम आज जमा करवाई जाना है उस पर ब्याज ही अच्छा कमाया जा सकता है।
जटिल है प्रक्रिया...
10-15 साल पहले खरीदी गई किसी भी चल/अचल संपत्ति को यदि व्यक्ति बुक्स में लाना चाहता है तो डिक्लेरेश्न में उसकी जानकारी देना होगी। दिक्कत यह है कि 10-15 साल पहले जमीन की कीमत भले एक लाख रुपए रही हो लेकिन डिक्लेरेशन में वेल्युएशन आज की मार्केट वेल्यु के हिसाब से करना होगा। यदि मार्केट वेल्यु आज 1 करोड़ रुपए है तो आप पर 45 लाख रुपए की डिमांड निकाल दी जाएगी। जो बड़ा झटका है, किसी भी व्यक्ति के लिए। स्कीम में ऐसे कई इश्यू हैं जिन्हें टैक्स पेयर के हित में क्लीयर नहीं किया गया है।
ब्लैमेलिंग का खतरा भी..
डिसक्लोजर में व्यक्ति सभी जरूरी दस्तावेज लगा देता है। इसके बाद  भी यदि कोई दस्तावेज रह जाता है तो आयकर अधिकारी उसे ब्लैकमेल भी कर सकते हैं क्योंकि एक बार डिसक्लोजर फाइल करने के बाद वापस नहीं होता। अधिकारियों को आपकी काली कमाई के दस्तावेजी प्रमाण आप स्वयं दे देते हो।
मार्केट की खराब स्थिति
स्कीम के पर्याप्त परिणाम न मिलने की बड़ी वजह मार्केट में छाई मंदी भी है। मेन्युफेक्चरर, ट्रेडर, डिस्ट्रीब्यूटर, सेलर सभी मंदी की मार झेल रहे हैं। अभी रकम की उपलब्धता उतनी नहीं है जितनी की कुछ वर्षों पहले थी। इसीलिए लोग डिस्क्लोज करे भी तो क्या। कर भी दे तो जमा करने के लिए टैक्स की रकम भी तो हो।
33 प्रतिशत भी स्लैब तो परिणाम बेहतर होते
सर्च और सर्वे की कम्पाउंडिंग प्रक्रिया के आगे 45 प्रतिशत टैक्स स्लैब अट्रेक्टिव नहीं है। यदि इसे घटाकर 33 प्रतिशत भी किया जाता है तो डिसक्लोजर की संख्या बढ़ना तय है। स्कीम सोच-समझकर बनाई जाना चाहिए ताकि विफल न हो। स्कीम में कई इश्यू क्लीयर नहीं है। मंदी के मारे बाजार की स्थिति खराब है। स्कीम यदि दो-एक साल पहले आती तो ज्यादा बेहतर परिणाम देती।
अजीत जैन, सीए

No comments:

Post a Comment