Tuesday, July 12, 2016

छह महीने पिछड़ी नर्मदा-गंभीर, एनवीडीए परेशान

नवयुग पर ठोकी 10 करोड़ की एक पेनल्टी, दूसरी की तैयारी
इंदौर. विनोद शर्मा।
मुख्यमंत्री की मॉनिटरिंग में नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना रिकार्ड टाइम में पूरा करने वाला नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) नर्मदा-गंभीर के काम में समय नहीं साध पाया। वजह है निर्माणकर्ता नवयुग इंजीनियरिंग का मिस मैनेजमेंट। दर्जनों नोटिस के बावजूद कंपनी काम की गति नहीं बढ़ा पाई। इसीलिए कंपनी पर 10 करोड़ की पेनल्टी ठोककर भुगतान रोक दिया है।
प्रोजेक्ट की लागत 2146 करोड़ आंकी गई थी। 1842 करोड़ में ठेका मिला था मेसर्स नवयुग इंजीनियरिंग को। 25 फरवरी 2015 को वर्कआॅर्डर के साथ कंपनी को काम सौंप दिया था। काम शुरू से ही ठंडा रहा है। कभी न्यायालयीन मामले तो कभी भू-अर्जन में देर जैसे कारण गिनाती आई कंपनी अनुबंध में तय समयसीमा से छह महीने पीछे काम कर रही है। कंपनी को अब तक 40 प्रतिशत काम कर देना था, वहीं काम हुआ है महज 20 फीसदी। 36 महीने की तय समयसीमा के अनुसार 24 फरवरी 2018 तक प्रोजेक्ट पूरा होना है लेकिन कंपनी की मौजूदा वर्किंग स्टाइल से काम फरवरी 2019 तक ही पूरा होगा। सिर्फ काम में ढ़िलाई ही नहीं बल्कि ढिलाई को लेकर बार-बार विधानसभा में उठते सवाल एनवीडीए से लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की चिंता का विषय भी है।
एक बार पेनल्टी लगा दी, दूसरी बार की तैयारी
ढिलाई को लेकर कंपनी पर 10 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई है। वहीं पेनल्टी के बाद भी काम की गति जस की तस है। लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि अगस्त के महीने में एनवीडीए दोबारा पेनल्टी ठोक सकता है।
आर्थिक स्तर पर भी पिछड़ा
मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार 1842 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम करती आ रही कंपनी ने फरवरी 2016 तक 182 करोड़ (9.88 प्रतिशत) का ही काम किया था। चार महीनों में बमुश्किल 50 करोड़ के काम हुआ। कुल काम हुआ 232 करोड़ के 12.99 प्रतिशत ही काम हुए।
क्यों पिछड़ा काम
डिजाइन और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) ही देर से बनाकर दी गई।
प्रोजेक्ट पर 15 दिसंबर 2014 से काम शुरू होना था, शुरू हुआ 25 फरवरी 2015 से।
भू-अर्जन और न्यायालयीन प्रकरणों में उलझे रहने के दौरान कंपनी को दूसरे फ्रंट खोलकर काम करना था जो नहीं हुआ।
पर्यावरणीय अनुमति मिलने के बाद भी अब तक सिर्फ पंपिंग स्टेशन एक-दो पर ही काम चल रहा है जबकि तीन-चार पर भी काम शुरू हो जाना था।
कंपनी को गंभीर तक नर्मदा लाने के बाद में 600 किलोमीटर लंबी डिस्ट्रीब्यूशन लाइन भी डालना है जिन पर काम शुरू नहीं।
प्रोजेक्ट की भव्यता को देखते हुए जितने मैदानी अमले की जरूरत है कंपनी के पास उतना अमला है नहीं।
कंपनी के प्रोजेक्ट इंचार्ज वाय.रमेश की बायपास सर्जरी हुई।
कटेंगे 5 हजार पेड़
प्रोजेक्ट के लिए 21 हेक्टेयर वनभूमि की जरूरत है। यहां से सागवान, अंजन, पलाश समेत कई प्रजातियों के करीब 5 हजार पेड़ों को बाधक के रूप में चिह्नित किया गया है जिन्हें जल्द हटाया जाएगा। बदले में एनवीडीए को 3 लाख पौधे रोपना होंगे। ये पौधे लैंड कंवर्जन के तहत मिलने वाली जमीन पर रोपे जाएंगे, वन विभाग की मदद से।

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