तीन मंजूर नक्शों को जोड़ा और चौथा नक्शा बना दिया चंपू चौकड़ी ने
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जैसे तुलसीनगर में प्लॉट कॉलोनी का फर्जी नक्शा दिखाकर बेचे गए हैं उसी तरह का फर्जी नक्शा रितेश उर्फ चंपू अजमेरा की कैलोदहाला स्थित फिनिक्स टाउन में भी बना है। इसी फर्जी नक्शे से चंपू चौकड़ी ने 281 प्लॉट बेचे। करोड़ों कमाए और प्लॉट होल्डरों की आंख में धूल झौंकी। ले-आउट मंजूर करने वाले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से लेकर डावर्शन करने वाले जिला प्रशासन तक तमाशा देखते रहे।
30 अक्टूबर 2010 को कैलोद हाला की 41.575 हेक्टेयर जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से कॉलोनी के तीन अलग-अलग नक्शे मंजूर हुए थे। तीन नक्शों को जोड़कर एक कॉलोनी बनी जिसमें कुल प्लॉट मंजूर हुए थे 2188 प्लॉट। 11.792 हेक्टेयर जमीन के पहले नक्शे में 497 प्लॉट थे, 17.625 हेक्टेयर जमीन के दूसरे नक्शे में 941 प्लॉट थे जबकि 12.158 हेक्टेयर जमीन के तीसरे नक्शे में 750 प्लॉट थे। बाद में भू-माफियाओं ने जो फाइनल नक्शा प्लॉट बेचने के लिए बनाया उसमें प्लॉट की संख्या बढ़ गई।
कैसे पकड़ में आई गड़बड़
विगत दिनों कॉलोनी के रहवासियों ने क्राइम ब्रांच को तीन अलग-अलग नक्शे दिए साथ ही वह नक्शा दिया जिससे प्लॉट बेचे गए। इस नक्शे में 11.792 हेक्टेयर जमीन के पहले नक्शे में उत्तर की तरफ प्रस्तावित एमआर-12 तक कॉलोनी की मेन रोड के दोनों तरफ बड़ी जमीन और जोड़कर प्लॉट काट दिए। तीनों नक्शों का मिलना जब चौथे नक्शे से किया तो पता चला कि इस फर्जी नक्शे में 281 प्लॉट बिना ले-आउट प्लान के ही सर्वे नं. 251, 254/3, 254/1, 256, 253/3, 252, 254/2 पर काट दिए।
खेल करोड़ों का
जो 281 प्लॉट बेचे गए है उन सबका औसत क्षेत्रफल 1250 वर्गफीट है। मतलब कुल 351250 वर्गफीट जमीन का सौदा किया। सौदा 500 रुपए वर्गफीट से भी हुआ है तो इसका मतलब यह है कि चंपू चौकड़ी ने 17.56 करोड़ का सौदा किया।
बड़ी बात यह है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर 150 से अधिक प्लॉटों की रजिस्ट्री क्षेत्रवासियों की आपत्ति के बावजूद करने वाले जिला पंजीयक कार्यालय ने बिना टीएंडसीपी और डायवर्शन देखे इन प्लॉटों की रजिस्ट्री कर दी।
क्यों गैरकानूनी
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने जितनी जमीन का ले-आउट मंजूर किया है वही मान्य होगा। यदि कोई जमीन जोड़ना है तो उसके लिए जमीन जोड़कर नए सिरे से नक्शा मंजूर करना होता है। टीएंडसीपी होने के बाद डाइवर्शन शाखा से डाइवर्शन होता है। इसके बाद विकास शुल्क मंजूर कराना होता है। तब जाकर प्लॉट काटने और विकास करने की अनुमति मिलती है। यहां हर विभागीय प्रक्रिया का निर्धारित शुल्क जमीन के आकार के हिसाब से तय है।
मामला फिनिक्स टाउन का है।
प्लॉट नं. कुल
1, 2, 2
3 से 18 16
19 से 31 13
153 से 165 13
208 से 220 13
166 से 186 21
187 से 207 21
221 से 251 31
281 से 286 31
252 से 266 15
267 से 280 14
320 से 346 27
347 से 356 10
307 से 328 22
357 से 378 22
379 से 389 11
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जैसे तुलसीनगर में प्लॉट कॉलोनी का फर्जी नक्शा दिखाकर बेचे गए हैं उसी तरह का फर्जी नक्शा रितेश उर्फ चंपू अजमेरा की कैलोदहाला स्थित फिनिक्स टाउन में भी बना है। इसी फर्जी नक्शे से चंपू चौकड़ी ने 281 प्लॉट बेचे। करोड़ों कमाए और प्लॉट होल्डरों की आंख में धूल झौंकी। ले-आउट मंजूर करने वाले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से लेकर डावर्शन करने वाले जिला प्रशासन तक तमाशा देखते रहे।
30 अक्टूबर 2010 को कैलोद हाला की 41.575 हेक्टेयर जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से कॉलोनी के तीन अलग-अलग नक्शे मंजूर हुए थे। तीन नक्शों को जोड़कर एक कॉलोनी बनी जिसमें कुल प्लॉट मंजूर हुए थे 2188 प्लॉट। 11.792 हेक्टेयर जमीन के पहले नक्शे में 497 प्लॉट थे, 17.625 हेक्टेयर जमीन के दूसरे नक्शे में 941 प्लॉट थे जबकि 12.158 हेक्टेयर जमीन के तीसरे नक्शे में 750 प्लॉट थे। बाद में भू-माफियाओं ने जो फाइनल नक्शा प्लॉट बेचने के लिए बनाया उसमें प्लॉट की संख्या बढ़ गई।
कैसे पकड़ में आई गड़बड़
विगत दिनों कॉलोनी के रहवासियों ने क्राइम ब्रांच को तीन अलग-अलग नक्शे दिए साथ ही वह नक्शा दिया जिससे प्लॉट बेचे गए। इस नक्शे में 11.792 हेक्टेयर जमीन के पहले नक्शे में उत्तर की तरफ प्रस्तावित एमआर-12 तक कॉलोनी की मेन रोड के दोनों तरफ बड़ी जमीन और जोड़कर प्लॉट काट दिए। तीनों नक्शों का मिलना जब चौथे नक्शे से किया तो पता चला कि इस फर्जी नक्शे में 281 प्लॉट बिना ले-आउट प्लान के ही सर्वे नं. 251, 254/3, 254/1, 256, 253/3, 252, 254/2 पर काट दिए।
खेल करोड़ों का
जो 281 प्लॉट बेचे गए है उन सबका औसत क्षेत्रफल 1250 वर्गफीट है। मतलब कुल 351250 वर्गफीट जमीन का सौदा किया। सौदा 500 रुपए वर्गफीट से भी हुआ है तो इसका मतलब यह है कि चंपू चौकड़ी ने 17.56 करोड़ का सौदा किया।
बड़ी बात यह है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर 150 से अधिक प्लॉटों की रजिस्ट्री क्षेत्रवासियों की आपत्ति के बावजूद करने वाले जिला पंजीयक कार्यालय ने बिना टीएंडसीपी और डायवर्शन देखे इन प्लॉटों की रजिस्ट्री कर दी।
क्यों गैरकानूनी
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने जितनी जमीन का ले-आउट मंजूर किया है वही मान्य होगा। यदि कोई जमीन जोड़ना है तो उसके लिए जमीन जोड़कर नए सिरे से नक्शा मंजूर करना होता है। टीएंडसीपी होने के बाद डाइवर्शन शाखा से डाइवर्शन होता है। इसके बाद विकास शुल्क मंजूर कराना होता है। तब जाकर प्लॉट काटने और विकास करने की अनुमति मिलती है। यहां हर विभागीय प्रक्रिया का निर्धारित शुल्क जमीन के आकार के हिसाब से तय है।
मामला फिनिक्स टाउन का है।
प्लॉट नं. कुल
1, 2, 2
3 से 18 16
19 से 31 13
153 से 165 13
208 से 220 13
166 से 186 21
187 से 207 21
221 से 251 31
281 से 286 31
252 से 266 15
267 से 280 14
320 से 346 27
347 से 356 10
307 से 328 22
357 से 378 22
379 से 389 11
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