आयकर मुख्य आयुक्त ने गिनाए आईडीएस के फायदे
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
इनकम डिस्क्लोज स्कीम (आईडीएस) के तहत 45 प्रतिशत टैक्स देकर अपनी काली कमाई को किताबों में दर्ज कराया जा सकता है। टैक्स 30 नवंबर जमा कराया जा सकता है। आयकर आयुक्त के सामने जो डिक्लेरशन फाइल किया जाएगा उसकी जानकारी गुप्त रखी जाएगी। शुक्रवार को पत्रकारों से मुखातिब होते हुए यह जानकारी मुख्य आयकर आयुक्त वी.के.माथुर ने दी। शाम को यशवंत क्लब में भी आयकर अधिकारियों ने सदस्यों को स्कीम की जानकारी दी।
श्री माथुर ने बताया कि केंद्र सरकार की आईडीएस में जिन लोगों ने अपने पास ब्लैक मनी रखी है और उसे सरेंडर करना चाहते हैं तो वो इस स्कीम के तहत कर सकते हैं। इसमें लोग अपना काला धन सफेद कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को डिपार्टमेंट में आॅनलाइन या मेन्युअल फॉर्म-1 भरकर जमा कराना है। 45 फीसदी (30 प्रतिशत टैक्स, 7.5 प्रतिशत कृषि उपकर और 7.5 प्रतिशत पेनल्टी) टैक्स भरकर सारी रकम सफेद हो जाएगी। व्यक्ति द्वारा भरे फॉर्म को सिर्फ प्रिंसिपल कमिश्नर ही देखेंगे। उस व्यक्ति को कमिश्नर खुद ही संपर्क करेंगे। इसके साथ ही उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी। श्री माथुर ने बताया कि अब तक स्कीम में कुछ लोगों ने आवेदन किए भी हैं लेकिन उम्मीद है जैसे-जैसे दिन 30 सितंबर पास आ रहा है वैसे-वैसे लाभार्थी बढ़ेंगे। यदि किसी कारण डिस्क्लोजर स्वीकार नहीं होता है तो भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी। न जानकारी शेयर होगी। बस सामान्य आयकर नियमों के तहत टैक्स जमा कराया जाएगा।
ऐसे समझें स्कीम का फायदा
मानलें कि किसी की एक करोड़ रुपए ब्लैक मनी है। उसे 45 फीसदी टैक्स भरना है, यानि 45 लाख रुपए टैक्स बाकी सारी मनी व्हाइट में कनवर्ट हो जाएगी। अगर किसी ने 5-6 साल पहले इनवेस्ट किया है, पर आय नहीं दिखाई। वो भी इस स्कीम में इनकम शो करके बच सकता है। इसके अलावा जिसके पास कैश पड़ा है, इसे भी डिक्लेयर कर सकता है। अगर अब भी लोग इस स्कीम का फायदा नहीं उठाते तो डिपार्टमेंट के सर्वे के बाद उन्हें 300 फीसदी पेनल्टी चुकानी होगी। यानि 5 साल के लिए 35 फीसदी टैक्स, 300 फीसदी पेनल्टी और 5 साल का ब्याज 18 फीसदी। अवेयरनेस के लिए क्लबों, मॉल, अस्पतालों और बाजार वगैरह में बैनर लगाकर इस स्कीम के बारे में अवेयर किया जाएगा।
20 साल बाद आई है स्कीम
कर चोरों को छूट से ईमानदार करदाताओं में नाराजगी के मामले पर प्रिंसिपल कमिश्नर श्री चांदोरकर ने बताया कि इससे पहले वीडीआईएस स्कीम 1996-1997 में आई थी। 20 साल बाद आईडीएस आई है। दोनों में अंतर है। आईडीएस में करंट वेल्युएशन मान्य है।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
इनकम डिस्क्लोज स्कीम (आईडीएस) के तहत 45 प्रतिशत टैक्स देकर अपनी काली कमाई को किताबों में दर्ज कराया जा सकता है। टैक्स 30 नवंबर जमा कराया जा सकता है। आयकर आयुक्त के सामने जो डिक्लेरशन फाइल किया जाएगा उसकी जानकारी गुप्त रखी जाएगी। शुक्रवार को पत्रकारों से मुखातिब होते हुए यह जानकारी मुख्य आयकर आयुक्त वी.के.माथुर ने दी। शाम को यशवंत क्लब में भी आयकर अधिकारियों ने सदस्यों को स्कीम की जानकारी दी।
श्री माथुर ने बताया कि केंद्र सरकार की आईडीएस में जिन लोगों ने अपने पास ब्लैक मनी रखी है और उसे सरेंडर करना चाहते हैं तो वो इस स्कीम के तहत कर सकते हैं। इसमें लोग अपना काला धन सफेद कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को डिपार्टमेंट में आॅनलाइन या मेन्युअल फॉर्म-1 भरकर जमा कराना है। 45 फीसदी (30 प्रतिशत टैक्स, 7.5 प्रतिशत कृषि उपकर और 7.5 प्रतिशत पेनल्टी) टैक्स भरकर सारी रकम सफेद हो जाएगी। व्यक्ति द्वारा भरे फॉर्म को सिर्फ प्रिंसिपल कमिश्नर ही देखेंगे। उस व्यक्ति को कमिश्नर खुद ही संपर्क करेंगे। इसके साथ ही उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी। श्री माथुर ने बताया कि अब तक स्कीम में कुछ लोगों ने आवेदन किए भी हैं लेकिन उम्मीद है जैसे-जैसे दिन 30 सितंबर पास आ रहा है वैसे-वैसे लाभार्थी बढ़ेंगे। यदि किसी कारण डिस्क्लोजर स्वीकार नहीं होता है तो भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी। न जानकारी शेयर होगी। बस सामान्य आयकर नियमों के तहत टैक्स जमा कराया जाएगा।
ऐसे समझें स्कीम का फायदा
मानलें कि किसी की एक करोड़ रुपए ब्लैक मनी है। उसे 45 फीसदी टैक्स भरना है, यानि 45 लाख रुपए टैक्स बाकी सारी मनी व्हाइट में कनवर्ट हो जाएगी। अगर किसी ने 5-6 साल पहले इनवेस्ट किया है, पर आय नहीं दिखाई। वो भी इस स्कीम में इनकम शो करके बच सकता है। इसके अलावा जिसके पास कैश पड़ा है, इसे भी डिक्लेयर कर सकता है। अगर अब भी लोग इस स्कीम का फायदा नहीं उठाते तो डिपार्टमेंट के सर्वे के बाद उन्हें 300 फीसदी पेनल्टी चुकानी होगी। यानि 5 साल के लिए 35 फीसदी टैक्स, 300 फीसदी पेनल्टी और 5 साल का ब्याज 18 फीसदी। अवेयरनेस के लिए क्लबों, मॉल, अस्पतालों और बाजार वगैरह में बैनर लगाकर इस स्कीम के बारे में अवेयर किया जाएगा।
20 साल बाद आई है स्कीम
कर चोरों को छूट से ईमानदार करदाताओं में नाराजगी के मामले पर प्रिंसिपल कमिश्नर श्री चांदोरकर ने बताया कि इससे पहले वीडीआईएस स्कीम 1996-1997 में आई थी। 20 साल बाद आईडीएस आई है। दोनों में अंतर है। आईडीएस में करंट वेल्युएशन मान्य है।
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