चंपू चौकड़ी ने बिना सौदे के ही करा ली टीएनसी व डाइवर्शन
इंदौर. विनोद शर्मा ।
फिनिक्स टाउन के नाम प्लॉट होल्डरों से लेकर सरकारी विभागों की आंख में धूल झौंकते आई चंपू चौकड़ी ने कैलोदहाला के किसानों को भी नहीं बख्शा। बेफिक्र होकर खेती करते आ रहे कुछ किसान तो ऐसे हैं जिन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि टीएनसी और डायवर्शन कराकर उनकी जमीन पर प्लॉट काटे जा चुके हैं। प्लॉट भी चार-छह-दस नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में है जिन्हें चमत्कारी चौकड़ी ने ओने-पोने दाम पर बेच चुकी है।
30 अक्टूबर 2010 को कैलोद हाला की 41.575 हेक्टेयर जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से कॉलोनी के तीन अलग-अलग नक्शे मंजूर हुए थे। दूसरे नंबर का ले-आउट प्लान 21 खसरों की 17.625 हेक्टेयर जमीन पर मंजूर हुआ था। इसमें लक्ष्मीचंद पिता कन्हैयालाल, राजूबाई बेवा मूलचंद, भगवानसिंह पिता मूलचंद की 1.740 हेक्टेयर जमीन (सर्वे नं. 263/1 और 263/2) भी शामिल है जहां खेती हो रही है। जिस जमीन पर खेती हो रही है वहां टीएनसी से स्वीकृत नक्शे में प्लॉट है यह जानकारी भी दबंग दुनिया की टीम ने किसान परिवार को दी। पहले तो परिवार के सदस्य हक्के-बक्के रह गए फिर उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि उनका और उनकी जमीन का कॉलोनी से कोई लेना-देना नहीं है।
कभी बेची ही नहीं जमीन
नक्शे में दो अलग-अलग खसरों का जिक्र है। खसरा नं. 263/1 की 1.384 हेक्टेयर और 163/2 की 0.356 हेक्टेयर जमीन। कुल 1.740 हेक्टेयर (4 एकड़, 13 हजार वर्गफीट) जमीन। किसान भगवान सिंह ने कहा कि उन्होंने या उनके परिवार ने कभी जमीन का सौदा चंपू-चिराग की चौकड़ी को नहीं किया है। एक बार सौदे की बात हुई थी। कुछ रकम बयाने के एवज में भी दी थी लेकिन आगे कोई न रकम मिली, न सौदा हुआ। ऐसे में बिना मेरी या मेरे परिवार की लिखित सहमति के जमीन की टीएनसी कैसे हुई और कैसे नक्शे पास हुए इसकी तस्दीक करने के बाद वे पुलिस की मदद लेंगे।
बाकी जमीनों की स्थिति भी यही है
सर्वे नं. 260, 261 और 262 की जमीन की स्थिति भी यही है। हालांकि कुछ हिस्से में कॉलोनाइजर ने सड़कें जरूर बना रखी है लेकिन सड़क के दोनों तरफ होती खेती ही है।
किसान का नुकसान...
- जिस जमीन पर वह खेती करके कृषि लगान चुका रहा है वह डायवर्शन के बाद आवासीय उपयोग की हो चुकी है। दोबारा डाइवर्शन कराना भी मुश्किल है और टीएनसी कराना भी।
- जो प्लॉट काटे है यदि उनके सौदे हो चुके हैं तो प्लॉट होल्डर भी परेशान हो रहे होंगे। यह बात अलग है कि खेत होने के कारण वे समझ नहीं पाते कि प्लॉट कहां और किस तरफ है। अन्यथा वे भी कब्जा लेने की कोशिश करेंगे। इससे जमीन मालिक और प्लॉट होल्डरों के बीच विवाद भी तय है।
जमीन पर कटे प्लॉट...
प्लॉट नं. 425 से 435 : 11
प्लॉट नं. 436 से 447 : 12
प्लॉट नं. 448 से 458 : 11
प्लॉट नं. 1073 से 1092 : 20
प्लॉट नं. 1156 से 1182 : 27
प्लॉट नं. 1281 से 1298 : 19
प्लॉट नं. 1363 से 1380 : 18
प्लॉट नं. 1465 से 1471 : 7
प्लॉट नं. 1529 से 1541 : 13
प्लॉट नं. 1542 से 1545 : 4
प्लॉट नं. 1474 से 1488 : 15
प्लॉट नं. 1470 से 1473 : 4
कुल 161 प्लॉट
सार्वजनिक उपयोग भी....
पार्क- 4 और एमिनिटीज - 1
इंदौर. विनोद शर्मा ।
फिनिक्स टाउन के नाम प्लॉट होल्डरों से लेकर सरकारी विभागों की आंख में धूल झौंकते आई चंपू चौकड़ी ने कैलोदहाला के किसानों को भी नहीं बख्शा। बेफिक्र होकर खेती करते आ रहे कुछ किसान तो ऐसे हैं जिन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि टीएनसी और डायवर्शन कराकर उनकी जमीन पर प्लॉट काटे जा चुके हैं। प्लॉट भी चार-छह-दस नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में है जिन्हें चमत्कारी चौकड़ी ने ओने-पोने दाम पर बेच चुकी है।
30 अक्टूबर 2010 को कैलोद हाला की 41.575 हेक्टेयर जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से कॉलोनी के तीन अलग-अलग नक्शे मंजूर हुए थे। दूसरे नंबर का ले-आउट प्लान 21 खसरों की 17.625 हेक्टेयर जमीन पर मंजूर हुआ था। इसमें लक्ष्मीचंद पिता कन्हैयालाल, राजूबाई बेवा मूलचंद, भगवानसिंह पिता मूलचंद की 1.740 हेक्टेयर जमीन (सर्वे नं. 263/1 और 263/2) भी शामिल है जहां खेती हो रही है। जिस जमीन पर खेती हो रही है वहां टीएनसी से स्वीकृत नक्शे में प्लॉट है यह जानकारी भी दबंग दुनिया की टीम ने किसान परिवार को दी। पहले तो परिवार के सदस्य हक्के-बक्के रह गए फिर उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि उनका और उनकी जमीन का कॉलोनी से कोई लेना-देना नहीं है।
कभी बेची ही नहीं जमीन
नक्शे में दो अलग-अलग खसरों का जिक्र है। खसरा नं. 263/1 की 1.384 हेक्टेयर और 163/2 की 0.356 हेक्टेयर जमीन। कुल 1.740 हेक्टेयर (4 एकड़, 13 हजार वर्गफीट) जमीन। किसान भगवान सिंह ने कहा कि उन्होंने या उनके परिवार ने कभी जमीन का सौदा चंपू-चिराग की चौकड़ी को नहीं किया है। एक बार सौदे की बात हुई थी। कुछ रकम बयाने के एवज में भी दी थी लेकिन आगे कोई न रकम मिली, न सौदा हुआ। ऐसे में बिना मेरी या मेरे परिवार की लिखित सहमति के जमीन की टीएनसी कैसे हुई और कैसे नक्शे पास हुए इसकी तस्दीक करने के बाद वे पुलिस की मदद लेंगे।
बाकी जमीनों की स्थिति भी यही है
सर्वे नं. 260, 261 और 262 की जमीन की स्थिति भी यही है। हालांकि कुछ हिस्से में कॉलोनाइजर ने सड़कें जरूर बना रखी है लेकिन सड़क के दोनों तरफ होती खेती ही है।
किसान का नुकसान...
- जिस जमीन पर वह खेती करके कृषि लगान चुका रहा है वह डायवर्शन के बाद आवासीय उपयोग की हो चुकी है। दोबारा डाइवर्शन कराना भी मुश्किल है और टीएनसी कराना भी।
- जो प्लॉट काटे है यदि उनके सौदे हो चुके हैं तो प्लॉट होल्डर भी परेशान हो रहे होंगे। यह बात अलग है कि खेत होने के कारण वे समझ नहीं पाते कि प्लॉट कहां और किस तरफ है। अन्यथा वे भी कब्जा लेने की कोशिश करेंगे। इससे जमीन मालिक और प्लॉट होल्डरों के बीच विवाद भी तय है।
जमीन पर कटे प्लॉट...
प्लॉट नं. 425 से 435 : 11
प्लॉट नं. 436 से 447 : 12
प्लॉट नं. 448 से 458 : 11
प्लॉट नं. 1073 से 1092 : 20
प्लॉट नं. 1156 से 1182 : 27
प्लॉट नं. 1281 से 1298 : 19
प्लॉट नं. 1363 से 1380 : 18
प्लॉट नं. 1465 से 1471 : 7
प्लॉट नं. 1529 से 1541 : 13
प्लॉट नं. 1542 से 1545 : 4
प्लॉट नं. 1474 से 1488 : 15
प्लॉट नं. 1470 से 1473 : 4
कुल 161 प्लॉट
सार्वजनिक उपयोग भी....
पार्क- 4 और एमिनिटीज - 1
No comments:
Post a Comment