Monday, December 28, 2015

मुकाता के तालाबों पर किसानों का कब्जा

सांवेर तहसील के गांव में फेल कलेक्टर का कब्जा मुक्त सरकारी जमीन अभियान
इंदौर. विनोद शर्मा ।
शहर में नजूल और सीलिंग की जमीनें कब्जा मुक्त कराने के लिए कलेक्टर जितना जोर दे रहे हैं वहीं स्थानीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कब्जे बढ़ रहे हैं। इसका बड़ा उदाहरण सांवेर से लगा गांव मुकाता है। यहां तालाब की जमीन पर लगातार किसानों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। इसका खुलासा दो पक्षों की आपसी शिकवा-शिकायत के बाद हुआ। बहरहाल, सांवेर तहसील में बैठे अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है।
देपालपुर रोड पर सांवेर से महज ढ़ाई किलोमीटर दूर मुकाता राजस्व रिकार्ड में जल संसाधन के मामले में संपन्न है। रिकार्ड के अनुसार यहां कुल 114 एकड़ जमीन पर दो तालाब हैं। इनमें एक तालाब 28 एकड़ का है जबकि दूसरा 84 एकड़ का। इन दोनों तालाबों में किसान कब्जा करके खेती कर रहे हैं। कुछ किसानों ने मिट्टी का भराव करके जमीन को तालाब की जद से दूर करने के प्रयास भी किए हैं। जितनी जमीन पर कब्जा हुआ है उसकी बाजार कीमत करीब दस करोड़ है।
34 एकड़ जमीन पर कब्जा...
- 84 एकड़ का जो तालाब है उसमें 50 एकड़ जमीन ही जंगली झाड़ियों के कारण बची हुई है बाकी 34 एकड़ जमीन पर मुकाता में ही रहने वाले यादव परिवार ने खेती शुरू कर दी है।
- तालाब में तीन तरफ पाल है। पिछले हिस्से में एक नाली है जो सीमांंकन की तरह नजर आता है। इस नाली और तालाब के बीच खेती हो रही है। तालाब की लंबाई 800 मीटर है। इस 800 मीटर की लंबाई में आधा दर्जन से अधिक किसान खेती कर रहे हैं।
- यहां खेती करने वाले किसान रामरतन पिता लक्ष्मण ने कब्जा स्वीकारा लेकिन कहा कि कब्जा बहुत ही छोटे हिस्से पर है जबकि राजस्व रिकार्ड में खसरा नं. 334/1 की 1.064 हेक्टेयर जमीन उनके नाम दर्ज है। ये जमीन सांवेर की ओर तालाब की पाल के पार है। जबकि उनकी खेती नाली और तालाब के बीच जमीन पर है करीब दो-पांच एकड़ में।
- तालाब से लगी है इनकी जमीन। सर्वे नं. 336 और 375/1 (हरिसिंह पिता रामसिंह), 373 (धर्मपालसिंह और उनके भाई शिवनारायण), 372/1 (गोपाल पिता शिवनारायण), 372/1 (महेश बद्रीलाल), 370/2 (गंगाराम पिता लक्ष्मण) 370/3 (बद्रीचंद पिता आत्माराम), 370/1 (नारायण), 369/2(नगजीराम), 369/1 (मनोहर), 340/2 (मंजूला बाई), 340(मादू, महेशराव)। इनमें से भी कुछ ने तालाब की जमीन पर खेती शुरू कर दी है जबकि कुछ ने इनकी और तालाब की जमीन के बीच खेती शुरू कर दी।
- इसमें सर्वे नं. 232/1, 232/2 और 341/1 और 341/2 के बीच बड़ी जमीन पर कब्जा है।
5 एकड़ में कब्जा...
28 एकड़ का दूसरा तालाब है जो कांकड़ से लगा है। इस तालाब में बड़े तालाब के मुकाबले कब्जे कम है। यहां सर्वे नं. 327 और 328 के पास ही कब्जा है। तकरीबन पांच एकड़ जमीन पर अवैधानिक खेती हो रही है। सरकार की अनदेखी के कारण कब्जा बढ़ रहा है।
तालाब के बीच की सरकारी जमीन पर भी कब्जा
बड़े तालाब दो खसरे (337 और 339) की जमीन पर है। इनके बीच सर्वे नं. 338 की 0.227 हेक्टेयर और सर्वे नं. 371 की 0.413 हेक्टेयर जमीन है जो सरकारी है। सर्वे नं. 371 जो तालाब से सर्वे नं. कांकड़ (सर्वे नं. 395) तक रास्ते की तरह जाती है। इस पर भी किसानों ने कब्जा करके खेती शुरू कर दी।
ऐसे उजागर हुई कहानी...
इन तालाबों में मछली पालन का ठेका जिला प्रशासन ने एक स्व सहायता समूह को दे रखा है। लगातार कब्जे और तालाब के पानी के अवैधानिक दोहन से मछली पालन मुश्किल हो गया। इसीलिए स्वसहायता समूह ने एसडीएम आॅफिस में शिकायत की।
दूसरी और मुकातावासियों का कहना है कि स्वसहायता समूह ने मछली पालन का ठेका लिया था लेकिन बाद में तालाब का पानी बेचना शुरू कर दिया। जिसकी जमीन सिंचित नहीं है वे किसान पानी खरीदते थे। सरकारी जांच में जब इसका खुलासा हुआ तो स्व सहायता समूह ने कब्जे की कहानी गढ़ना शुरू कर दी।
नजूल और सरकारी जमीन
खसरा नं. रकबा भू-उपयोग
321 1.315 बाँध
322 11.392 तालाब
337 14.682 तालाब
339 19.999 तालाब

No comments:

Post a Comment