भोपाल। प्रदेश में रोजाना एक भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी लोकायुक्त की गिरफ्त में आ रहा है। मौजूदा साल में लोकायुक्त की विशेष स्थापना पुलिस ने 400 से ज्यादा लोगों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर चुका है। इनसे 50 लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं, जबकि आय से अधिक संपत्ति के 23 मामलों में 37 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति उजागर हुई है। नौ दिन बाद समाप्त होने वाले साल में लोकायुक्त संगठन ने भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को रंगे हाथों पकड?े के मामले में अपना पिछला रिकार्ड तोड़ा है।
पिछले साल 390 ट्रेप (रंगे हाथों रिश्वत लेने के) केस बने थे, जबकि इस साल ये संख्या 400 पहुंच चुकी है। बरामद राशि भी 38 लाख से बढकर 50 लाख पहुंच चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि जिस तरह एक दिन में एक से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं उसे देखते हुए प्रकरणों की संख्या 425 के आसपास पहुंच जाएगी। छापे की संख्या जरूर बीते साल के 38 से घटकर 23 रह गई है। इसमें करीब 37 करोड़ की संपत्ति प्रथम दृष्टया अनुपातहीन उजागर हुई है। इस बार पद के दुरुपयोग के मामले तेजी से बढ़े हैें। संगठन ने 179 नए प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।
रिश्वत लेने में पटवारी आगे- लोकायुक्त पुलिस का सालभर का रिकार्ड देखने से साफ है कि रिश्वत लेने के मामले में पटवारी सबसे आगे हैं। इनके खिलाफ ही प्रदेश में सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद पंचायत सचिव का नंबर आता है। संगठन अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक काम इन्हीं दोनों से पड़ता है।
इंदौर अव्वल
रिश्वत के मामले सर्वाधिक इंदौर संभाग में सामने आए हैं। यहां अभी तक 89 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जबकि भोपाल में 52, ग्वालियर 41 और जबलपुर में 46 अधिकारी-कर्मचारी रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ाए हैं।
शिकायतें बढ़ी हैं
विशेष स्थापना पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक अशोक अवस्थी का कहना है कि संगठन के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है। शासकीय कार्यालयों के बाहर रिश्वत मांगने या लेते देखने पर सूचना देने के पोस्टर चस्पा करना भी फायदेमंद रहा है। एक साल में शिकायतों की संख्या काफी बढ़ गई है। शिकायत की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की जा रही हैं। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में दोषियों को अदालत से सजा मिल रही है।
भ्रष्ट अफसरों की सोशल मीडिया पर खुली पोल
पिछले तीन माह में सोशल मीडिया पर भी कई भ्रष्ट अफसरों की पोल खुल चुकी है। प्रमुख सचिव, विभाग प्रमुख से लेकर कलेक्टर तक पर मैदानी अफसरों से डिमांड करने के आरोप लग चुके हैं। हालत ये है कि सरकार में छह अपर मुख्य सचिव में से तीन सोशल मीडिया से सामने आए भ्रष्टाचार की जांच कर रहे हैं। ताजा मामला पीडब्ल्यूडी के एसडीओ अरूण मिश्रा ने कार्यपालन यंत्री रमाकांत तिवारी पर प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल के लिए वसूली करने का आॅडियो वायरल होने का है। इसकी जांच लोकायुक्त पुलिस रीवा कर रही है।
इसके पूर्व आदिम जाति कल्याण आयुक्त जेएन मालपानी का आॅडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे खुलेआम मैदानी अफसर से अकेले खाने पर बदहजमी की बात कह रहे थे। प्रकरण की जांच अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया कर रहे हैं। उन्होंने अभी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। इसी तरह आईएफएस अफसर अजीत श्रीवास्तव का भी आॅडियो वायरल हुआ था। इसमें वे वन विभाग के ठेकेदार से 55 लाख रुपए की मांग कर रहे थे।
इस मामले में अपर मुख्य सचिव बीपी सिंह जांच कर रहे हैं। इसके पहले वन विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपकर खांडेकर दतिया कलेक्टर प्रकाश जांगरे के खिलाफ रिपोर्ट दे चुके हैं। हालांकि, उन्होंने भ्रष्टाचार की जांच नहीं करते हुए कार्यपालन यंत्री से की गई अभद्रता के लिए कलेक्टर को दोषी ठहराया है। इस आॅडियो में कलेक्टर संबंधित कार्यपालन यंत्री से अपने बाथरूम के लिए सोप हैंगिंग लगाने की बात कर रहे थे।
पिछले साल 390 ट्रेप (रंगे हाथों रिश्वत लेने के) केस बने थे, जबकि इस साल ये संख्या 400 पहुंच चुकी है। बरामद राशि भी 38 लाख से बढकर 50 लाख पहुंच चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि जिस तरह एक दिन में एक से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं उसे देखते हुए प्रकरणों की संख्या 425 के आसपास पहुंच जाएगी। छापे की संख्या जरूर बीते साल के 38 से घटकर 23 रह गई है। इसमें करीब 37 करोड़ की संपत्ति प्रथम दृष्टया अनुपातहीन उजागर हुई है। इस बार पद के दुरुपयोग के मामले तेजी से बढ़े हैें। संगठन ने 179 नए प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।
रिश्वत लेने में पटवारी आगे- लोकायुक्त पुलिस का सालभर का रिकार्ड देखने से साफ है कि रिश्वत लेने के मामले में पटवारी सबसे आगे हैं। इनके खिलाफ ही प्रदेश में सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद पंचायत सचिव का नंबर आता है। संगठन अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक काम इन्हीं दोनों से पड़ता है।
इंदौर अव्वल
रिश्वत के मामले सर्वाधिक इंदौर संभाग में सामने आए हैं। यहां अभी तक 89 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जबकि भोपाल में 52, ग्वालियर 41 और जबलपुर में 46 अधिकारी-कर्मचारी रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ाए हैं।
शिकायतें बढ़ी हैं
विशेष स्थापना पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक अशोक अवस्थी का कहना है कि संगठन के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है। शासकीय कार्यालयों के बाहर रिश्वत मांगने या लेते देखने पर सूचना देने के पोस्टर चस्पा करना भी फायदेमंद रहा है। एक साल में शिकायतों की संख्या काफी बढ़ गई है। शिकायत की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की जा रही हैं। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में दोषियों को अदालत से सजा मिल रही है।
भ्रष्ट अफसरों की सोशल मीडिया पर खुली पोल
पिछले तीन माह में सोशल मीडिया पर भी कई भ्रष्ट अफसरों की पोल खुल चुकी है। प्रमुख सचिव, विभाग प्रमुख से लेकर कलेक्टर तक पर मैदानी अफसरों से डिमांड करने के आरोप लग चुके हैं। हालत ये है कि सरकार में छह अपर मुख्य सचिव में से तीन सोशल मीडिया से सामने आए भ्रष्टाचार की जांच कर रहे हैं। ताजा मामला पीडब्ल्यूडी के एसडीओ अरूण मिश्रा ने कार्यपालन यंत्री रमाकांत तिवारी पर प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल के लिए वसूली करने का आॅडियो वायरल होने का है। इसकी जांच लोकायुक्त पुलिस रीवा कर रही है।
इसके पूर्व आदिम जाति कल्याण आयुक्त जेएन मालपानी का आॅडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे खुलेआम मैदानी अफसर से अकेले खाने पर बदहजमी की बात कह रहे थे। प्रकरण की जांच अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया कर रहे हैं। उन्होंने अभी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। इसी तरह आईएफएस अफसर अजीत श्रीवास्तव का भी आॅडियो वायरल हुआ था। इसमें वे वन विभाग के ठेकेदार से 55 लाख रुपए की मांग कर रहे थे।
इस मामले में अपर मुख्य सचिव बीपी सिंह जांच कर रहे हैं। इसके पहले वन विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपकर खांडेकर दतिया कलेक्टर प्रकाश जांगरे के खिलाफ रिपोर्ट दे चुके हैं। हालांकि, उन्होंने भ्रष्टाचार की जांच नहीं करते हुए कार्यपालन यंत्री से की गई अभद्रता के लिए कलेक्टर को दोषी ठहराया है। इस आॅडियो में कलेक्टर संबंधित कार्यपालन यंत्री से अपने बाथरूम के लिए सोप हैंगिंग लगाने की बात कर रहे थे।
No comments:
Post a Comment