Monday, December 28, 2015

डीटीएम से 25 करोड़ की जमीन का कब्जा लेगा डीआईसी

- 3.380 एकड़ जमीन पर लाखों का किराया वसूल रही है कागजी कंपनी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
दस्तावेजों में ही चल रही डीटीएम ग्लोबल को बेदखल करके जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र (डीआईसी) गुरुवार को पोलोग्राउंड की 3.830 एकड़ जमीन का कब्जा लेगा। इस जमीन की कीमत 25 करोड़ है। मप्र स्टेट इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (एमपीएसआईसी) के साथ अनुबंध निरस्त होने और डीआईसी द्वारा लीज निरस्त किए जाने के बाद भी इस जमीन और जमीन पर बने शेड किराए पर देकर कंपनी लाखों रुपए महीना किराया वसूल रही है।
मप्र स्टेट इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (एमपीएसआईसी)  उद्योग से संबंधित अहम विभाग था जो अपने स्तर पर कारखानों का संचालन करता था। इसी एमपीएसआईसी की पोलोग्राउंड में 3.830 एकड़ जमीन थी जहां सात शेड बने हैं। एक अनुबंध के तहत एमपीएसआईसी ने शेड सहित जमीन डीटीएम के डायरेक्टर मनीष जाजू को दे दी जो कि द धार टेक्सटाइल्स के भी डायरेक्टर हैं। डीटीएम सिर्फ कागजों में ही रही। कुछ समय बाद एमपीएसआईसी का अस्तित्व समाप्त हो गया। उसकी सारी संपत्ति जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र को हस्तांतरित हो गई।
2007 में खत्म हो गई थी लीज...
2007 में जमीन की लीज खत्म हो गई। मुद्दा आया कि जमीन डीआईसी ले ले और जितना पैसा जाजू ने लगाया है उतना वह ले ले। जाजू की रकम थी करीब 30 लाख रुपए। हक की लड़ाई हाईकोर्ट और बाद में आर्बिटेशन पहुंची। इन सबसे दूर राज्य सरकार के निर्देश पर डीआईसी ने 2012 में अनुबंध निरस्त करके कब्जा लेने की तैयारी शुरू कर दी।
डीटीएम का बिजली शेड में...
कब्जा लेने गए तब पता चला डीटीएम ने सातों शेड तो किराए पर दे ही दिए हैं, कुछ नए शेड भी बनाकर किराए पर दे डाले। किसी ने गोदाम खोला तो किसी ने ट्रांसपोर्ट। जिनका कुल किराया लाखों रुपए महीना है। इतना ही नहीं डीटीएम के नाम पर जो बिजली कनेक्शन था उससे सभी शेड को बिजली बांट दी गई। डीआईसी इस संबंध में मप्र पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी को भी पत्र लिखकर बिजली काटने के लिए कह चुकी है। हालांकि अब तक बिजली कटी नहीं।
25 करोड़ की है जमीन
पोलोग्राउंड वार्ड-57 में आता है। यहां प्लॉट की गाइडलाइन 700 रु/वर्गफीट है जबकि शेड की गाइडलाइन 1800 रु/वर्गफीट है। औसत 1500 रुपए भी गाइडलाइन मानी जाए तो 3.830 एकड़ (166834 वर्गफीट) जमीन की कीमत 25 करोड़ से ज्यादा है। जमीन पर गुुरूवार सुबह 10 बजे डीआईसी व जिला प्रशासन की टीम कब्जा लेगी।
एसआईसी खुद चलाता था अपनी कंपनियां..
एसआईसी अपने जमाने में खुद कंपनियां चलाता था। पोलोग्राउंड और राऊ में भी एसआईसी की कॉलोनियां है। इसके अलावा एसआईसी की महिदपुर में शकर फेक्टरी भी है। अब इन सभी संपत्तियों का स्वामित्व डीआईसी के पास है।
धार टेक्सटाइल्स में है डायरेक्टर
15 जून 1984 को पंजीबद्ध हुई द धार टेक्सटाइल्स मिल्स लिमिटेड में मनीष जाजू 31 अगस्त 1990 से डायरेक्टर हैं। उनके अलावा उनके भाई पंकज जाजू, विजय बाकलीवाल, पंकज सिंघल और सुनील चौधरी भी डायरेक्टर हैं। 

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