- केंद्र सरकार ने तैयार किया नया लघु कारखाना कानून
- 40 से कम मजदूरों वाली कंपनियां आएंगी दायरे में
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जिन कारखानों में मजदूरों की संख्या 1 से 40 है वे फैक्टरी एक्ट-1948 से मुक्त होंगे। इनके लिए केंद्र सरकार लघु कारखाना विधेयक ला रही है। 16 कानूनों की खासियतों का सम्मिलित करके बनाए जा रहे इस विधेयक में लघु कारखानों के लिए छह श्रम कानूनों के दायरे से कुछ छूट पर जोर है। मप्र में लघू उद्योगों की संख्या 318632 हैं जिनमें मजदूरों की संख्या 1 से 40 है। इनमें तकरीबन 20 हजार से अधिक उद्योग इंदौर जिले में है।
लघु कारखाना विधेयक तैयार है। जल्द ही संसद में इसे रखा जाना है। कारखाने और श्रमिकों के हितों की चिंता के साथ विधेयक की सिफारिशें तैयार करने वाले डायरेक्टर जनरल फैक्टरी एडवाइस सर्विस एंड लेबर इंस्टिट्यूट (डीजीफासली) के एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक के तहत जिन कारखानों में 40 मजदूर तक काम करते हैं वे फैक्ट्री एक्ट, औद्योगिक विवाद अधिनियम, ईएसआई अधिनियम और मातृत्व लाभ जैसे अन्य 16 श्रम कानूनों की पकड़ से बाहर होंगे। देश में अभी जितने भी कारखाने हैं उनमें 65 फीसदी ऐसे हैं जिनमें मजदूरों की संख्या 40 या उससे कम है जो अब फेक्टरी एक्ट के मुताबिक श्रम कानूनों के दायरे में नहीं आयेंगे।
फायदे मजदूर के...
- छंटनी या कारखाना बंद करने की स्थिति में 45 दिन के वेतन के मुआवजे का प्रावधान है जबकि औद्योगिक विवाद कानून, 1947 के तहत अभी केवल 15 दिन के वेतन के बराबर मुआवजे का प्रावधान है।
लघु कारखानों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों के मजदूरी के समय पर भुगतान एवं वैधानिक कटौतीयों का प्रावधान है।
- शिकायत निपटान समिति (जीआरसी) का प्रस्ताव है। जिसमें नियोक्ता तथा कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी छोटे कारखाने में गठित की जाएगी।
इन कानून से मिलेगी आजादी
कारखान कानून, 1948, औद्योगिक विवाद कानून, 1947, औद्योगिकी रोजगार (स्थायी आदेश) कानून, 1946, न्यूनतम श्रमिक कानून, 1948, मजदूरी भुगतान कानून, 1936 तथा दुकान एवं प्रतिष्ठान कानूनों के जरूरी तत्व विधेयक में शामिल किये गये हैं।
- 40 से कम मजदूरों वाली कंपनियां आएंगी दायरे में
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जिन कारखानों में मजदूरों की संख्या 1 से 40 है वे फैक्टरी एक्ट-1948 से मुक्त होंगे। इनके लिए केंद्र सरकार लघु कारखाना विधेयक ला रही है। 16 कानूनों की खासियतों का सम्मिलित करके बनाए जा रहे इस विधेयक में लघु कारखानों के लिए छह श्रम कानूनों के दायरे से कुछ छूट पर जोर है। मप्र में लघू उद्योगों की संख्या 318632 हैं जिनमें मजदूरों की संख्या 1 से 40 है। इनमें तकरीबन 20 हजार से अधिक उद्योग इंदौर जिले में है।
लघु कारखाना विधेयक तैयार है। जल्द ही संसद में इसे रखा जाना है। कारखाने और श्रमिकों के हितों की चिंता के साथ विधेयक की सिफारिशें तैयार करने वाले डायरेक्टर जनरल फैक्टरी एडवाइस सर्विस एंड लेबर इंस्टिट्यूट (डीजीफासली) के एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक के तहत जिन कारखानों में 40 मजदूर तक काम करते हैं वे फैक्ट्री एक्ट, औद्योगिक विवाद अधिनियम, ईएसआई अधिनियम और मातृत्व लाभ जैसे अन्य 16 श्रम कानूनों की पकड़ से बाहर होंगे। देश में अभी जितने भी कारखाने हैं उनमें 65 फीसदी ऐसे हैं जिनमें मजदूरों की संख्या 40 या उससे कम है जो अब फेक्टरी एक्ट के मुताबिक श्रम कानूनों के दायरे में नहीं आयेंगे।
फायदे मजदूर के...
- छंटनी या कारखाना बंद करने की स्थिति में 45 दिन के वेतन के मुआवजे का प्रावधान है जबकि औद्योगिक विवाद कानून, 1947 के तहत अभी केवल 15 दिन के वेतन के बराबर मुआवजे का प्रावधान है।
लघु कारखानों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों के मजदूरी के समय पर भुगतान एवं वैधानिक कटौतीयों का प्रावधान है।
- शिकायत निपटान समिति (जीआरसी) का प्रस्ताव है। जिसमें नियोक्ता तथा कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी छोटे कारखाने में गठित की जाएगी।
इन कानून से मिलेगी आजादी
कारखान कानून, 1948, औद्योगिक विवाद कानून, 1947, औद्योगिकी रोजगार (स्थायी आदेश) कानून, 1946, न्यूनतम श्रमिक कानून, 1948, मजदूरी भुगतान कानून, 1936 तथा दुकान एवं प्रतिष्ठान कानूनों के जरूरी तत्व विधेयक में शामिल किये गये हैं।
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