Monday, December 28, 2015

एक्शन प्लान बचाएगा बाघों की जान

- जंगलों में घास एरिया बढ़ेगा, कैमरे लगेंगे
- इंदौर-देवास में आधा दर्जन से अधिक है बाघ
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इंदौर और देवास के जंगलों में भूख-प्यास से बाघों की मौत नहीं होगी। इसके लिए वन विभाग ने एक्शन प्लान तैयार किया है जिसे वन मंत्रालय की मंजूरी भी मिल चुकी है। एक्शन प्लान के तहत जगह-जगह पेयजल स्रोत विकसित किए जाएंगे। घास एरिया बढ़ाया जाएगा ताकि शाकाहारी व वन्य प्राणियों की संख्या बढ़े। इतना ही नहीं जंगल और बाघों की निगरानी और सुरक्षा के मद्देनजर कैमरें लगाए जाएंगे।
2014 की एक आॅडिट रिपोर्ट के अनुसा मप्र में 2010 तक बाघों की संख्या 262 थी। इसमें इंदौर-देवास रेंज में 7 बाघों की गिनती की गई। इनका ज्यादातर मुवमेंट इंदौर, देवास और सिहोर के जंगलों में रहता है। बीच में कैमरा ट्रेप में बाघ के बच्चे भी दिखे। ऐसे में संख्या बढ़ने का अनुमान है। उदयनगर में हुई बाघ की मौत के बाद विभाग ने बाकी बाघों की सुरक्षा को लेकर कमर कस ली है। सिर्फ वन विभाग ने ही तकरीबन 25 लाख रुपए की बाघ संरक्षण योजना भेजी थी जिसे मंत्रालय ने मंजूर कर दिया है।
यह है कार्ययोजना...
- जगह-जगह जलस्रोत विकसित होंगे। तलई बनेगी। ऐसी व्यवस्था होगी कि गर्मी में भी बाघ व अन्य प्राणियों को पानी मिले। अभी पेयजल स्रोतों का अभाव है। गर्मी में ज्यादा दिक्कत।
- रहवास सुधार कर रहे हैं। इसमें घास एरिया बढ़ाया जाएगा ताकि शाकाहरी प्राणियों की संख्या बढ़े। इन्हीं प्राणियों का बाघ शिकार करेंगे। अभी हिरण व अन्य प्राणी काफी कम हो चुके हैं।
- 25-30 कैमरा ट्रेप लगाएंगे। इनमें बाघ के मुवमेंट के साथ ही जंगल में लोगों के अवैधानिक प्रवेश पर भी निगाह रखी जाएगी।
- वन विभाग के अमले को वाहन और संचार साधन उपलब्ध कराए जा रहे है। ताकि गश्त आसान हो। पीओपी से बाघ के पग मार्क लेना सिखाएंगे।
- ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग के अधिकारियों के मोबाइल नंबर व कंट्रोल रूम नंबर चस्पाए जा रह हैं। लोगों को समझाइश दी जाएगी ताकि वे जंगल में प्रवेश करने वाली अनाधिकृत गाड़ियों की सूचना दे सकें।
दो-चार दिन में काम शुरू कर देंगे
बाघों की सुरक्षा के मद्देनजर एहतियात के तौर पर जितने भी प्रयास किए जा सकते हैं, कर रहे हैं। एक एक्शन प्लान भी बनाया है जिसे  जिसे मंजूरी मिल चुकी है। दो-चार दिन में मैदानी काम शुरू कर रहे हैं। इसके परिणाम सकारात्मक होंगे।
पी.सी.दुबे, सीसीएफ
उज्जैन
मूलभूत सुविधाएं जुटाना जरूरी
उदयपुर में बाघ का पोस्टमार्टम करने के दौरान मैंने जो आॅबजर्व किया है उसके अनुसार जंगल में बाघों के लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाना जरूरी है। हिरण व वन्य प्राणी कम हुए हैं इनका विस्तार जरूरी है वरना भूख के मारे बाघ बस्तियों में प्रवेश करेंगे।
डॉ.उत्तम यादव, प्रभारी
चिड़ियाघर, इंदौर
न फोटो न स्थान की सूचना...
इंदौर-देवास-सिहोर वाइल्डलाइफ जोन है। उदयपुर में एक की मौत के बाद भी करीब छह बाघ है यहां। बच्चे अलग। इनकी लोकेशन गोपनीय रखी जाती है। सख्त हिदायत कोई फोटो खींचकर वॉट्स एप न करे ताकि बाघों पर शिकार के संकट की संभावना कम रहे। गांव में बाघ के प्रवेश से हुई हानियों के 35 मामलों में 20 लाख से अधिक मुआवजा भी दिया है।  एक बाघ 15 से 100 किलोमीटर के बीच भ्रमण करता है। उसका औसत एरिया 10 वर्गकिलोमीटर है।

बाघों की सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त है। इसीलिए जो प्रस्ताव मिलता है उसकी समीक्षा करके मंजूरी देने में देर नहीं की जाती है। जल्द ही मैदान में काम दिखेगा।
डॉ.गौरीशंकर शेजवार, वन मंत्री










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