राजौरिया ने थामा कांग्रेस नेता का हाथ
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
असरावद खुर्द की सरकारी जमीन पर कटी अवैध कॉलोनी के खिलाफ प्रशासन की जांच शुरू होते ही पप्पू राजौरिया और उनकी चौकड़ी ने राजनीतिक आकाओं का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में उनकी भोपाल तक आवाज बुलंद करने की ताकत रखने वाले क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता से बात हुई जो उन्हें प्रशासन के शिकंजे से मुक्त कराने में मदद करने के लिए तैयार हैं। कुछ अफसरों से उन्होंने बैठक भी करवा दी है।
प्रशासन की जांच में दो हिस्सों में कुल 170 मकानों की सूची बनाई गई है जिनका निर्माण बिना किसी अनुमति पर हुआ है। मकानों की सूची के साथ अब प्रशासन के हाथ इस बात के भी दस्तावेजी सबुत हाथ लग चुके हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्लॉट पूर्व सरपंच पिंकी राजौरिया के कार्यकाल के दौरान उनके पति पप्पू राजौरिया और देवर दिनेश राजौरिया, विनोद मोरे, अमरचंद, सिकंदर, संदीप ने बेचे हैं। 100 रुपए के स्टॉम्प पर सरकारी जमीन के सौदे किए गए हैं। इसीलिए राजौरिया और उसके गुंडे सीमांकन के दौरान राजस्व टीम के साथ घुमते रहे ताकि वे लोगों को डरा सकें और अफसरों को दस्तावेजी प्रमाण न मिले। बैठक की बात हो जाए।
मोरोद पर थी नजर...
पप्पू राजौरिया ने अपनी पत्नी की सरपंची जाते देख अपने खास अय्यार और अधिकारियों को सेट कर सरकारी जमीनों में खेल करने वाले विनोद मोरे को मोरोद के लिए आगे कर दिया। कुछ समय पहले संपन्न हुए पंचायत चुनाव में मोरे की पत्नी रेखा मोरे चुनाव लड़ी लेकिन मोरोद की जनता ने संगीता बिलोनिया पर भरौसा जताया। हालांकि राजौरिया-मोरे की जोड़ी ने मतदाता सूची में फेरबदल तक किया और बिलोनिया परिवार सहित गांव के सौ से अधिक लोगों के नाम बालेबाले उड़ा दिए। अपने समर्थकों के नाम जोड़ दिए ताकि वे चुनाव जीत जाएं। मामले का खुलासा होने के बाद एसडीएम संतोष टैगोर ने फर्जी नाम हटाए और असली नाम जोड़े।
किसी तरह की कोई अनुमति नहीं
पंचायत स्टाफ ने बताया कि जितने भी निर्माण सामने आए हैं उनमें से एक के पास भी पंचायत की अनुमति नहीं मिली है। 15 बाय 30 और15 बाय 40 के ये प्लॉट नौटरी पर सरकार की आंखों में धूल झौंकते हुए बेचे गए हैं। हालांकि कोशिश की जा रही तारीखों में पंचायत के दस्तावेज बनाने की।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
असरावद खुर्द की सरकारी जमीन पर कटी अवैध कॉलोनी के खिलाफ प्रशासन की जांच शुरू होते ही पप्पू राजौरिया और उनकी चौकड़ी ने राजनीतिक आकाओं का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में उनकी भोपाल तक आवाज बुलंद करने की ताकत रखने वाले क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता से बात हुई जो उन्हें प्रशासन के शिकंजे से मुक्त कराने में मदद करने के लिए तैयार हैं। कुछ अफसरों से उन्होंने बैठक भी करवा दी है।
प्रशासन की जांच में दो हिस्सों में कुल 170 मकानों की सूची बनाई गई है जिनका निर्माण बिना किसी अनुमति पर हुआ है। मकानों की सूची के साथ अब प्रशासन के हाथ इस बात के भी दस्तावेजी सबुत हाथ लग चुके हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्लॉट पूर्व सरपंच पिंकी राजौरिया के कार्यकाल के दौरान उनके पति पप्पू राजौरिया और देवर दिनेश राजौरिया, विनोद मोरे, अमरचंद, सिकंदर, संदीप ने बेचे हैं। 100 रुपए के स्टॉम्प पर सरकारी जमीन के सौदे किए गए हैं। इसीलिए राजौरिया और उसके गुंडे सीमांकन के दौरान राजस्व टीम के साथ घुमते रहे ताकि वे लोगों को डरा सकें और अफसरों को दस्तावेजी प्रमाण न मिले। बैठक की बात हो जाए।
मोरोद पर थी नजर...
पप्पू राजौरिया ने अपनी पत्नी की सरपंची जाते देख अपने खास अय्यार और अधिकारियों को सेट कर सरकारी जमीनों में खेल करने वाले विनोद मोरे को मोरोद के लिए आगे कर दिया। कुछ समय पहले संपन्न हुए पंचायत चुनाव में मोरे की पत्नी रेखा मोरे चुनाव लड़ी लेकिन मोरोद की जनता ने संगीता बिलोनिया पर भरौसा जताया। हालांकि राजौरिया-मोरे की जोड़ी ने मतदाता सूची में फेरबदल तक किया और बिलोनिया परिवार सहित गांव के सौ से अधिक लोगों के नाम बालेबाले उड़ा दिए। अपने समर्थकों के नाम जोड़ दिए ताकि वे चुनाव जीत जाएं। मामले का खुलासा होने के बाद एसडीएम संतोष टैगोर ने फर्जी नाम हटाए और असली नाम जोड़े।
किसी तरह की कोई अनुमति नहीं
पंचायत स्टाफ ने बताया कि जितने भी निर्माण सामने आए हैं उनमें से एक के पास भी पंचायत की अनुमति नहीं मिली है। 15 बाय 30 और15 बाय 40 के ये प्लॉट नौटरी पर सरकार की आंखों में धूल झौंकते हुए बेचे गए हैं। हालांकि कोशिश की जा रही तारीखों में पंचायत के दस्तावेज बनाने की।
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