एडवोकेट योगेंद्र गर्ग हत्याकांड
190 एकड़ जमीन को लेकर दस्तक और बशारत खां परिवार के बीच है विवाद
इंदौर. विनोद शर्मा ।
पिछले दिनों महू में हुई एडवोकेट योगेंद्र गर्ग की हत्या के मामले में पुलिस ने उन तमाम जमीन के केसों की जो फाइलें खंगालना शुरू की है उनमें एक फाइल चिखली की बेशकीमती जमीन की भी है। उक्त जमीन को लेकर जूना रिसाला के एक परिवार और इंदौर के ही एक पार्षद के परिवार के बीच विवाद चल रहा है। पुलिस जांच में यह बिंदु प्रमुख है। पुलिस इसे लेकर अब इंदौर और सिमरोल में सूत्र तलाश रही है।
मामला चिखली का है। यहां जूना रिसाला इंदौर के मोहम्मद बशारत खां उर्फ ठेकेदार और उनके परिवार की तकरबीन 400 एकड़ से अधिक जमीन थी। इसमें से तकरीबन 250 एकड़ जमीन अब भी इस परिवार के पास है। इसी गांव में तकरीबन 190 एकड़ जमीन इंदौर के शेख मोहम्मद सलीम, शेख मोहम्मद युनुस, शेख मोहम्मद असलम और उनके परिवार के नाम दर्ज है। यह कांग्रेस पार्षद अनवर दस्तक का परिवार है। इसमें से ज्यादातर जमीनें इस परिवार ने मोहम्मद बशारत खां के परिवार ‘जो आपसी विवाद के बाद बिखर गए थे लेकिनन बाद में एक हो गए’, से 2008-09 से 2012-13 के बीच खरीदी है। बाद में बशारत खां के परिवार ने सौदे को ठगी बताया। पूरा परिवार एक हो गया। सौदों पर आपत्ति आई। कोर्ट केस शुरू हुए। बशारत खां परिवार ने केस लड़ने की जिम्मेदारी दी महू के योगेश गर्ग को।
सीलिंग प्रभावित जमीनें भी खरीदी है...
बशारत खां परिवार का आरोप है कि दस्तक परिवार ने जितनी जमीनें खरीदी हैं उनमें कई ऐसी भी हैं जिनका कि सीलिंग को लेकर प्रशासन के साथ विवाद चल रहा है। कुछ जमीनें सरकारी भी है। इसी तरह माचला में भी सरकारी पट्टे की जमीनें खरीदी है।
दबाव प्रभाव बनाया, काम नहीं आया...
सूत्रों की मानें तो केस को लेकर मो.सलीम व उनके परिवार की गर्ग से कई बार बात हुई। कभी नरम, कभी गरम। हालांकि बातचीत या दबाव प्रभाव काम नहीं आया। गर्ग खां परिवार के लिए निष्ठा से लगे रहे। इसकी पुष्टि गर्ग के साथियों ने भी की। उनकी मानें तो गर्ग अक्सर इस प्रकरण में दबाव का जिक्र किया करते थे।
केस भी दर्ज कराया...
दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति इतनी ज्यादा हो गई कि मो.सलीम ने मो.बशारत खां और उनके परिवार के खिलाफ सिमरोल थाने में चोरी की रिपोर्ट तक दर्ज कराई थी। रिपोर्ट (अपराध क्रमांक 134) आईपीसी की धारा 379 के तहत 15 अपै्रल 2015 को दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट शेख मोहम्मद युनुस और शेख मोहम्मद सलीम ने साहिद, सादिक साजिद और मोइन उर्फ जुगनू पिता बशारत खां के खिलाफ लिखाई थी। जांच जारी है। हालांकि पुलिस को आरोप की पुष्टि करते कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
पुलिस की निगाहें क्यों..
2008 में जब यह जमीनें खरीदी-बेची जा रही थी तब चिखली गांव में जमीन का भाव 20-30 रुपए वर्गफीट था। चूंकि सिमरोल में आईआईटी बन रहा है और आईआईटी का पिछला हिस्सा चिखली गांव से लगा है। आईआईटी की आमद के समाचार के साथ ही न सिर्फ चिखली बल्कि घोसीखेड़ा, पठान पीपल्या व आसपास के गांव में जमीन की कीमतें 400-800 रुपए वर्गफीट तक पहुंच गई है। कई कॉलोनाइजरों ने कॉलोनी काट दी। चिखली में ही आधा दर्जन कॉलोनियां और फार्म हाउस आकार ले रहे हैं। ऐसे में जमीन को लेकर जंग जायज है वह भी तब जब जमीन 190 एकड़ हो।
यह है बशारत खां का परिवार
मो.बशारतखां पिता करामतखां, इशहाकबी बेवा मो.शराफत खां, मो.सलामत खां, मो.रियासत खां, मो. शौकत खां, शहादत खां नरगिस बी, आलियाबी पिता मो.शराफत खां, शमाजहां बेवा मो.शराफत, मो.हुसैन खा, मो.आसिफ, मो.आरिफ, नाजराबी पिता मो.शराफत खां, शाबराबी उर्फ रानीबी बेवा मो.शराफत खां, मो.मुश्ताक खां मो. इनायत खां मुमताज बी पिता मो. शराफत खां, मुस्सबीर पिता सरफराज एहमद, मोहम्मद मोइन, मोहम्मद जुगनु।
जांच कर रहे हैं...
गर्ग जमीन के जो केस लड़ रहे थे उन हर एक मामले पर पुलिस जांच कर रही है। चिखली की जमीन को लेकर भी जो विवाद है उसकी जांच कर रहे हैं।
अरविंद तिवारी, एडिशनल एसपी
जमीन को लेकर विवाद जारी है। केस एडवोकेट योगेंद्र गर्ग ही लड़ रहे थे। हमारे खिलाफ सिमरोल थाने में केस भी दर्ज कराया हुआ है। गर्ग की हत्या के मामले में हमारे केस को भी जांच के दायरे में रखा गया है तो अच्छा है।
(लगातार कोशिश की लेकिन मो.युनुस और मो.सलीम से बात नहीं हो पाई। पार्षद अनवर दस्तक को भी फोन लगाया लेकिन लगा नहीं।)
190 एकड़ जमीन को लेकर दस्तक और बशारत खां परिवार के बीच है विवाद
इंदौर. विनोद शर्मा ।
पिछले दिनों महू में हुई एडवोकेट योगेंद्र गर्ग की हत्या के मामले में पुलिस ने उन तमाम जमीन के केसों की जो फाइलें खंगालना शुरू की है उनमें एक फाइल चिखली की बेशकीमती जमीन की भी है। उक्त जमीन को लेकर जूना रिसाला के एक परिवार और इंदौर के ही एक पार्षद के परिवार के बीच विवाद चल रहा है। पुलिस जांच में यह बिंदु प्रमुख है। पुलिस इसे लेकर अब इंदौर और सिमरोल में सूत्र तलाश रही है।
मामला चिखली का है। यहां जूना रिसाला इंदौर के मोहम्मद बशारत खां उर्फ ठेकेदार और उनके परिवार की तकरबीन 400 एकड़ से अधिक जमीन थी। इसमें से तकरीबन 250 एकड़ जमीन अब भी इस परिवार के पास है। इसी गांव में तकरीबन 190 एकड़ जमीन इंदौर के शेख मोहम्मद सलीम, शेख मोहम्मद युनुस, शेख मोहम्मद असलम और उनके परिवार के नाम दर्ज है। यह कांग्रेस पार्षद अनवर दस्तक का परिवार है। इसमें से ज्यादातर जमीनें इस परिवार ने मोहम्मद बशारत खां के परिवार ‘जो आपसी विवाद के बाद बिखर गए थे लेकिनन बाद में एक हो गए’, से 2008-09 से 2012-13 के बीच खरीदी है। बाद में बशारत खां के परिवार ने सौदे को ठगी बताया। पूरा परिवार एक हो गया। सौदों पर आपत्ति आई। कोर्ट केस शुरू हुए। बशारत खां परिवार ने केस लड़ने की जिम्मेदारी दी महू के योगेश गर्ग को।
सीलिंग प्रभावित जमीनें भी खरीदी है...
बशारत खां परिवार का आरोप है कि दस्तक परिवार ने जितनी जमीनें खरीदी हैं उनमें कई ऐसी भी हैं जिनका कि सीलिंग को लेकर प्रशासन के साथ विवाद चल रहा है। कुछ जमीनें सरकारी भी है। इसी तरह माचला में भी सरकारी पट्टे की जमीनें खरीदी है।
दबाव प्रभाव बनाया, काम नहीं आया...
सूत्रों की मानें तो केस को लेकर मो.सलीम व उनके परिवार की गर्ग से कई बार बात हुई। कभी नरम, कभी गरम। हालांकि बातचीत या दबाव प्रभाव काम नहीं आया। गर्ग खां परिवार के लिए निष्ठा से लगे रहे। इसकी पुष्टि गर्ग के साथियों ने भी की। उनकी मानें तो गर्ग अक्सर इस प्रकरण में दबाव का जिक्र किया करते थे।
केस भी दर्ज कराया...
दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति इतनी ज्यादा हो गई कि मो.सलीम ने मो.बशारत खां और उनके परिवार के खिलाफ सिमरोल थाने में चोरी की रिपोर्ट तक दर्ज कराई थी। रिपोर्ट (अपराध क्रमांक 134) आईपीसी की धारा 379 के तहत 15 अपै्रल 2015 को दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट शेख मोहम्मद युनुस और शेख मोहम्मद सलीम ने साहिद, सादिक साजिद और मोइन उर्फ जुगनू पिता बशारत खां के खिलाफ लिखाई थी। जांच जारी है। हालांकि पुलिस को आरोप की पुष्टि करते कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
पुलिस की निगाहें क्यों..
2008 में जब यह जमीनें खरीदी-बेची जा रही थी तब चिखली गांव में जमीन का भाव 20-30 रुपए वर्गफीट था। चूंकि सिमरोल में आईआईटी बन रहा है और आईआईटी का पिछला हिस्सा चिखली गांव से लगा है। आईआईटी की आमद के समाचार के साथ ही न सिर्फ चिखली बल्कि घोसीखेड़ा, पठान पीपल्या व आसपास के गांव में जमीन की कीमतें 400-800 रुपए वर्गफीट तक पहुंच गई है। कई कॉलोनाइजरों ने कॉलोनी काट दी। चिखली में ही आधा दर्जन कॉलोनियां और फार्म हाउस आकार ले रहे हैं। ऐसे में जमीन को लेकर जंग जायज है वह भी तब जब जमीन 190 एकड़ हो।
यह है बशारत खां का परिवार
मो.बशारतखां पिता करामतखां, इशहाकबी बेवा मो.शराफत खां, मो.सलामत खां, मो.रियासत खां, मो. शौकत खां, शहादत खां नरगिस बी, आलियाबी पिता मो.शराफत खां, शमाजहां बेवा मो.शराफत, मो.हुसैन खा, मो.आसिफ, मो.आरिफ, नाजराबी पिता मो.शराफत खां, शाबराबी उर्फ रानीबी बेवा मो.शराफत खां, मो.मुश्ताक खां मो. इनायत खां मुमताज बी पिता मो. शराफत खां, मुस्सबीर पिता सरफराज एहमद, मोहम्मद मोइन, मोहम्मद जुगनु।
जांच कर रहे हैं...
गर्ग जमीन के जो केस लड़ रहे थे उन हर एक मामले पर पुलिस जांच कर रही है। चिखली की जमीन को लेकर भी जो विवाद है उसकी जांच कर रहे हैं।
अरविंद तिवारी, एडिशनल एसपी
जमीन को लेकर विवाद जारी है। केस एडवोकेट योगेंद्र गर्ग ही लड़ रहे थे। हमारे खिलाफ सिमरोल थाने में केस भी दर्ज कराया हुआ है। गर्ग की हत्या के मामले में हमारे केस को भी जांच के दायरे में रखा गया है तो अच्छा है।
(लगातार कोशिश की लेकिन मो.युनुस और मो.सलीम से बात नहीं हो पाई। पार्षद अनवर दस्तक को भी फोन लगाया लेकिन लगा नहीं।)
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