मैदानी अमले को आसानी से खरीदने का भर रहे हैं दम, कलेक्टर की कड़ाई ने उड़ा रखी है नींद
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
असरावद खुर्द की सरकारी जमीन पर कटी कॉलोनी के खुलासे और जांच शुरू होने के बाद से ही भू-माफियाओं ने अधिकारियों को सादने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। हालांकि इस कड़ी में उनकी राह का बड़ा रौड़ा स्वयं कलेक्टर पी.नरहरि हैं। इस बात को भू-माफिया भी हर जगह स्वीकारते हुए कहते हैं कि बाकी तो सध जाएंगे, इन्हें कैसे मनाएं। हालांकि भू-माफियाओं के तमाम दावों के विपरीत क्षेत्र में सरकारी जमीन की जांच लगातार दूसरे दिन भी हुई।
दबंग दुनिया के खुलासे और कलेक्टर पी.नरहरि के निदे्रश पर सरकारी जमीन पर कटी कॉलोनी की जांच बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी हुई। हालांकि कब्जेदारों के हाथों मिठाई खा चुके मैदानी अमला जांच के नाम पर सिर्फ 25-30 मकानों में ही पूछताछ करता रहा। इनमें से कुछ मकान तो वही हैं जिनमें मंगलवार को भी दस्तक दी गई थी। उधर, शिकायतकर्ताओं की उम्मीदें सिर्फ कलेक्टर पर टिकी हैं। उनका साफ कहना है कि मैदानी अमले को साधने के लिए कब्जेदार हर कीमत चुकाने को तैयार है। ऐसी स्थिति में सिर्फ कलेक्टर ही हैं जो निष्पक्ष रूप से सरकारी खसरे का सीमांकन कराकर जमीन पर बसे कब्जों की कहानी उजागर करा सकते हैं। बाकी अफसरों से उम्मीद कम है।
कलेक्टोरेट में ही डटे हैं कब्जेदार
एक तरफ कलेक्टर ने कॉलोनी की जांच के आदेश दिए हैं वहीं दो दिन से कॉलोनी काटने वाले दिनेश राजौरिया, पूर्व सरपंच पति पप्पू राजौरिया और उनके खासमखास व सहयोगी विनोद मोरे पूरे वक्त कलेक्टर में ही मंडराते रहे। मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान गांव के कुछ लोग कलेक्टर से मिलने पहुंचे तो उन्हें बाहर के बाहर ही भगा दिया गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना एसडीएम को भी दी।
अफसरों को साधकर नपवाता है सरकारी जमीन
खंडवा रोड से ही लगी कैलोद कर्ताल और असरावद खुर्द की सरकारी जमीनों पर कब्जे कराने में अनुराधा कॉलोनी, तेजाजीनगर चौराहा निवासी विनोद मोरे माहिर है। कलेक्टोरेट के सामने ही आॅफिस खोलकर बैठे मोरे के पास सेवानिवृत्त और निष्काशित अधिकारियों की फौज है जो पटवारी, राजस्व अधिकारियों और एसडीएम से मिलकर जमीनों के दस्तावेजों में खेल कराती है। पुरानी तारीखों में पट्टे बनवाने अरै नामांतरण करवाने से लेकर औद्योगिक उपयोग के लिए सरकारी जमीन का फर्जी आवंटन कराने तक के काम कराते हैं। इस काम में रिकार्ड शाखा से लेकर पंजीयन विभाग तक के बाबू भी 10-20 हजार के मासिक पैकेज पर इनका साथ दे रहे हैं। मोरोद और असरावद में ही कई फर्जी पट्टे करवाए हैं काम इतना पुख्ता किया जाता है कि अच्छे-अच्छे गच्चा खा जाएं।
गुंडों की मदद भी ले रहे हैं...
अपने खिलाफ खुले सरकारी मोर्चे से परेशान राजौरिया बंधु और मोरे ने अब गुंडों की मदद ले रहे हैं। उनका पूरा जोर है शिकायतकर्ता और उनकी मदद करने वालों को सबक सीखाना। इसके लिए वे किसी भी निचले स्तर पर जाने के लिए तैयार हैं।
कलेक्टर से मांग...
क्षेत्रवासियों की मांग है कि सर्वे नं. 19/2, 19/3, 37/1/1, 37/1/3, 37/2, 171/1, 171/1/1, 171/1/2, 171/1/3, 171/1/4, 172/1 की जमीनें राजस्व रिकार्ड में किसके नाम है? कितनी जमीनें किसे लीज पर कितने साल के लिए दी गई? बाकी जमीनों पर मकान कैसे और किसकी अनुमति से बने? इसका मैदानी सर्वे कराने पर ही कब्जेदारों के झूठे किस्सों की कलई खुल जाएगी।
जोड़ कलेक्टर वाली न्यूज का
मैं यह सब काम नहीं करता हूं। आप ही करते होंगे। मुझे पता है रिपोर्टर खबरें दिखाकर क्या करते हैं। उनकी भागीदारी में कई अवैध कॉलोनियां कटी है।
विनोद मोरे
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
असरावद खुर्द की सरकारी जमीन पर कटी कॉलोनी के खुलासे और जांच शुरू होने के बाद से ही भू-माफियाओं ने अधिकारियों को सादने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। हालांकि इस कड़ी में उनकी राह का बड़ा रौड़ा स्वयं कलेक्टर पी.नरहरि हैं। इस बात को भू-माफिया भी हर जगह स्वीकारते हुए कहते हैं कि बाकी तो सध जाएंगे, इन्हें कैसे मनाएं। हालांकि भू-माफियाओं के तमाम दावों के विपरीत क्षेत्र में सरकारी जमीन की जांच लगातार दूसरे दिन भी हुई।
दबंग दुनिया के खुलासे और कलेक्टर पी.नरहरि के निदे्रश पर सरकारी जमीन पर कटी कॉलोनी की जांच बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी हुई। हालांकि कब्जेदारों के हाथों मिठाई खा चुके मैदानी अमला जांच के नाम पर सिर्फ 25-30 मकानों में ही पूछताछ करता रहा। इनमें से कुछ मकान तो वही हैं जिनमें मंगलवार को भी दस्तक दी गई थी। उधर, शिकायतकर्ताओं की उम्मीदें सिर्फ कलेक्टर पर टिकी हैं। उनका साफ कहना है कि मैदानी अमले को साधने के लिए कब्जेदार हर कीमत चुकाने को तैयार है। ऐसी स्थिति में सिर्फ कलेक्टर ही हैं जो निष्पक्ष रूप से सरकारी खसरे का सीमांकन कराकर जमीन पर बसे कब्जों की कहानी उजागर करा सकते हैं। बाकी अफसरों से उम्मीद कम है।
कलेक्टोरेट में ही डटे हैं कब्जेदार
एक तरफ कलेक्टर ने कॉलोनी की जांच के आदेश दिए हैं वहीं दो दिन से कॉलोनी काटने वाले दिनेश राजौरिया, पूर्व सरपंच पति पप्पू राजौरिया और उनके खासमखास व सहयोगी विनोद मोरे पूरे वक्त कलेक्टर में ही मंडराते रहे। मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान गांव के कुछ लोग कलेक्टर से मिलने पहुंचे तो उन्हें बाहर के बाहर ही भगा दिया गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना एसडीएम को भी दी।
अफसरों को साधकर नपवाता है सरकारी जमीन
खंडवा रोड से ही लगी कैलोद कर्ताल और असरावद खुर्द की सरकारी जमीनों पर कब्जे कराने में अनुराधा कॉलोनी, तेजाजीनगर चौराहा निवासी विनोद मोरे माहिर है। कलेक्टोरेट के सामने ही आॅफिस खोलकर बैठे मोरे के पास सेवानिवृत्त और निष्काशित अधिकारियों की फौज है जो पटवारी, राजस्व अधिकारियों और एसडीएम से मिलकर जमीनों के दस्तावेजों में खेल कराती है। पुरानी तारीखों में पट्टे बनवाने अरै नामांतरण करवाने से लेकर औद्योगिक उपयोग के लिए सरकारी जमीन का फर्जी आवंटन कराने तक के काम कराते हैं। इस काम में रिकार्ड शाखा से लेकर पंजीयन विभाग तक के बाबू भी 10-20 हजार के मासिक पैकेज पर इनका साथ दे रहे हैं। मोरोद और असरावद में ही कई फर्जी पट्टे करवाए हैं काम इतना पुख्ता किया जाता है कि अच्छे-अच्छे गच्चा खा जाएं।
गुंडों की मदद भी ले रहे हैं...
अपने खिलाफ खुले सरकारी मोर्चे से परेशान राजौरिया बंधु और मोरे ने अब गुंडों की मदद ले रहे हैं। उनका पूरा जोर है शिकायतकर्ता और उनकी मदद करने वालों को सबक सीखाना। इसके लिए वे किसी भी निचले स्तर पर जाने के लिए तैयार हैं।
कलेक्टर से मांग...
क्षेत्रवासियों की मांग है कि सर्वे नं. 19/2, 19/3, 37/1/1, 37/1/3, 37/2, 171/1, 171/1/1, 171/1/2, 171/1/3, 171/1/4, 172/1 की जमीनें राजस्व रिकार्ड में किसके नाम है? कितनी जमीनें किसे लीज पर कितने साल के लिए दी गई? बाकी जमीनों पर मकान कैसे और किसकी अनुमति से बने? इसका मैदानी सर्वे कराने पर ही कब्जेदारों के झूठे किस्सों की कलई खुल जाएगी।
जोड़ कलेक्टर वाली न्यूज का
मैं यह सब काम नहीं करता हूं। आप ही करते होंगे। मुझे पता है रिपोर्टर खबरें दिखाकर क्या करते हैं। उनकी भागीदारी में कई अवैध कॉलोनियां कटी है।
विनोद मोरे
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