Monday, December 28, 2015

asarawad सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटकर दादा बन गए कब्जेदार

- एक तरफ कलेक्टर ने खुलवाई असरावद खुर्द के कब्जे की फाइल, दूसरी तरफ शिकायतकर्ताओं को धमकाते रहे कब्जेदार
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालकर भू-माफियाओं क साथ देने वाले अफसरों के कारण ही खंडवा रोड के गांवों (असरावद खुर्द, मिर्जापुर, मोरोद नेहरू) में सरकारी जमीनें सिकुड़ती जा रही है। फिर पटवारी-आरआई से लेकर बड़े अधिकारी हों या फिर तेजाजीनगर थाने का मैदानी अमला। हर कोई कब्जेदारों के साथ है। यही वजह है कि जमीन कब्जाकर कॉलोनियां काटने वालों के हौंसले बुलंद है और चोरी के साथ सीनाजोरी में भी पीछे नहीं है।
असरावद खुर्द में सरकारी जमीन पर कटी कॉलोनी का खुलासा दबंग दुनिया ने सोमवार को ‘अवैध कॉलोनी काटकर बेच डाले छह करोड़ के प्लॉट’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में किया था। इस खुलासे के बाद जहां मैदानी अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा वहीं पूरे मामले पर स्वयं कलेक्टर पी.नरहरि ने संज्ञान लिया और छानबीन शुरू करवाई। उधर, गांव की पूर्व सरपंच पिंकी राजौरिया के पति और सर्वे नं. 37 की जमीन पर अवैध कॉलोनी काटने वाले दिनेश राजौरिया के भाई पप्पू राजौरिया दिनभर शिकायतकर्ता से लेकर खबर लिखने वाले रिपोर्टर को जान से मारने की धमकी दी।
अफसर कहते हैं तुम अपनी सरपंची संभालो,..
गांव की सरकारी जमीनों पर हो रहे बेधड़क कब्जों का विरोध राजौरिया के प्रतिद्वदी और मौजूदा सरपंच भोजराज चौधरी ने भी किया लेकिन उनकी शिकायतों को तरजीह तक नहीं दी। स्वयं चौधरी ने दबंग दुनिया को बताया कि अवैध कॉलोनी को लेकर वे हर स्तर पर शिकायत कर चुके हैं लेकिन अब तक किसी ने कार्रवाई नहीं की। तेजाजीनगर थाने पर शिकायत की तो पुलिस अधिकारियों ने जवाब दिया तुम अपनी सरपंची करो। क्यों फटे में टांग अड़ाते हो। यह काम पटवारी और आरआई पर छोड़ दो।
शिकायत की जरूरत क्यों? मैदानी अमले का क्या काम...
-- यहां बड़ा सवाल यह है कि सरकार से सरकार की ही जमीन पर हो रहे कब्जे के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शिकायत की जरूरत क्यों पड़ रही है? पटवारी और आरआई की नौकरी किस बात की है?
-- यदि शिकायत है और उसके साथ प्रमाण नहीं है तो प्रमाण जुटाने की जिम्मेदारी पटवारी और आरआई की हो। राजस्व रिकार्ड में जमीन सरकारी है। उसका क्षेत्रफल दर्ज है जिसके आधार पर सीमांकन कराएं, स्वत: कब्जे सामने आ जाएंगे।
-- गुगल अर्थ पर वर्ष 2001 तक की सेटेलाइट इमेज देखी जा सकती है जिसका इस्तेमाल यह जानने के लिए किया जा सकता है कि आखिर जमीन पर कब और कैसे कब्जे हुए।
-- जिन लोगों को नौटरी पर प्लॉट बेचे हैं उनसे पूछा जा सकता है कि नौटरी किसने की। नौटरी की कॉपी पर नौटरी करने वाले का नाम होगा तो उस आदमी का नाम भी सार्वजनिक होगा जिसने प्लॉट बेचे। नौटरी किसी और से करवा दी।
जिससे जो बनता है कर ले...
जिसको देखो आरोप लगाता रहता है किसी के पास कोई सबूत नहीं है। न शिकायतकर्ता मेरा कुछ बिगाड़ पाएंगे। न ही उनकी मदद करने वाले। ऐसे लोगों से निपटना मुझे आता है। दुनिया छोटी है, कभी कुछ भी हो सकता है।
पप्पू राजौरिया, पूर्व सरपंच पति
(यह बात राजौरिया ने 9826800574, 9753417487, 9425776062 नंबर से फोन करके धमकी भरे अंदाज में यह बात कही है। उसने शिकायतकर्ता और उसका साथ देने वाले को जान से मारने की धमकी भी दी।)
फाइल और मौका देखता हूं..
मुझे पूरा प्रकरण पता नहीं है। मैं फाइल और मौका स्थिति दोनों देखता हूं। सरकारी जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं होगा।
श्रृंगार श्रीवास्तव, एसडीएम
हर हाल में हटेगा कब्जा
दबंग दुनिया के खुलासे के बाद से ही मामले में मैंने संज्ञान ले लिया है। जानकारी मांगी है। जमीन हर हाल में कब्जा मुक्त होगी। यदि कब्जेदार धमकियां दे रहा है तो वह उसके खिलाफ हमारा पक्ष और मजबूत ही कर रहा है।
पी.नरहरि, कलेक्टर

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