Monday, December 28, 2015

जीएसटी के फेर में उलझा केंद्रीय बजट

जीएसटी लागू होगा या करों की नई दर, असमंजस बरकरार
इंदौर. विनोद शर्मा ।
विंटर सेशन में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) सहित इकोनॉमिक रिफार्म से जुडेÞ कई बिलों के अटकने से सरकार 28 फरवरी को पेश होने वाले बजट को लेकर असमंजस में है। 1 अपै्रल को बजट पेश करे या इनकम टैक्स, कस्टम, सेंट्रल एक्साइज व सर्विस टैक्स की दरें कम-ज्यादा करे। बहरहाल, दरों की घट-बढ़ को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। माना जा रहा है जीएसटी में देरी का खामियाजा एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स की दरों में बढ़ोत्तरी के रूप मे चुकाना होगा।
केंद्रीय बजट को लेकर कर सलाहकार, सीए और विशेषज्ञ ज्यादा सोच नहीं रहे हैं। वे मानकर बैठे हैं कि जीएसटी बिल लागू होगा। हालांकि अब तक बिल को संसद से स्वीकृति नहीं मिली है।  दूसरी तरफ बजट 2016-17 को फाइनल टच देना है। एक्साइज एक्सपर्ट आर.डी.जोशी ने बताया कि अभी एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स में बढ़ोत्तरी की संभावना कम है। जितने भी कयास लगाए जा रहे हैं कोरे हैं। सरकार 28 फरवरी को बजट पेश करेगी। कोशिश रहेगी कि तब तक जीएसटी भी क्लीयर हो जाए। क्लीयर हो जाता है तो 31 मार्च तक बजट 2015-16 के प्रावधान लागू रहेंगे। यदि जीएसटी नहीं आता है तो नए बजट के प्रावधान उस तारीख तक प्रभावी रहेंगे जिस तारीख से जीएसटी लागू किया जाएगा। उम्मीद है कि बजट सत्र में जीएसटी मंजूर हो जाएगा।
जीएसटी में समाहित हो जाएंगे टैक्स...
जीएसटी यदि लागू होता है तो उसमें एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स के साथ ही सेल टैक्स भी शामिल हो जाएगा। टैक्स की दर एक हो जाएगी। सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी का लाभ आम आदमी से लेकर कारोबारियों तक को मिलेगा।
सरकार की कमाई में छूट की संभावना कम..
बताया जा रहा है कि सरकार का पूरा जोर आय बढ़ाने पर रहेगा। ऐसे में कर या ड्यूटी में छूट की संभावना कम रहेगी। इसीलिए इनकम टैक्स की स्लैब 5 लाख तक करने की मांग इस बार भी पूरी नहीं होगी। स्लैब बढ़ी भी तो 3 से ऊपर नहीं जाएगी। उलटा, जो चीजें छूट के दायरे में आती हैं उन्हें दायरे में लाया जा सकता है।
एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स पर जोर...
कयास लगाऐ जा रहे हैं कि एक्साइज ड्यूटी से छूट प्राप्त उत्पादों की संख्या घटाई जाएगी।  डिब्बा बंद दूध, प्रीमियम चाय-कॉफी, बिस्कुट जैसी चीजों पर ड्यूटी लग सकती है। शुरू में एक्साइज की दर 2-4 फीसदी रह सकती है। अभी 300 उत्पादों को छूट प्राप्त है। इन उत्पादों की संख्या घटाकर 100 तक लाने पर विचार चल रहा है हालांकि 200 उत्पादों पर एक साथ ड्यूटी लगाकर सरकार जनविरोध का सामना नहीं करना चाहेगी।
2015-16 के बजट में सर्विस टैक्स की दर 12.45 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दी गई थी। बाद में इसमें 0.5 प्रतिशत का स्वच्छता उपकर भी जोड़ दिया। अभी कुल 14.50 प्रतिशत टैक्स लग रहा है जिसे 2016-17 के बजट में सरकार बढ़ाकर 16 प्रतिशत कर सकती है। ऐसा हुआ तो हर आइटम महंगा हो जाएगा। सुब्रह्मण्यन कमिटी ने 16.9-18.9 फीसदी स्टैंडर्ड रेट की सिफारिश की है।

No comments:

Post a Comment