एक्शन शुरू : मंगलवार को मौके पर पहुंची प्रशासन की टीम, जुटाई कब्जों की जानकारी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
दर्जनों शिकायतों और चार-चार जांच रिपोर्ट के बावजूद असरावद की सरकारी जमीन पर बेखौफ कटी कॉलोनियों के खिलाफ कलेक्टर पी.नरहरि ने कड़ाई से छानबीन शुरू कर दी है। इस कड़ी में मंगलवार को राजस्व अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और वहां बसे लोगों के दस्तावेज खंगाले।
‘सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटकर बेच दिए छह करोड़ के प्लॉट’ शीर्षक से दबंग दुनिया ने सोमवार के अंक में समाचार प्रकाशित किया था जिसने असरावद खुर्द में सरकारी जमीन पर कब्जे का खुलासा किया था। सोमवार को ही कलेक्टर ने फाइल निकालने के दस्तावेज दे दिए थे। मंगलवार को उनके निर्देश पर एसडीएम श्रृंगार श्रीवास्तव तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी सहित मौके पर पहुंचे। वहां सरकारी जमीन पर तने मकानों ने अधिकारियों को चौंका दिया। अफसरों ने पहले पटवारी और आरआई को जमकर फटकारा और बाद में उन लोगों से नौटरी या अन्य दस्तावेज ऐसे दस्तावेज मांगे जिनके आधार पर वे मकान बनाकर रह रहे हैं।
जांच तो पहले भी हो गई, अब सिर्फ एक्शन...
कलेक्टर ने जब फाइलें बुलाई तो उन्हें यह भी पता चला है कि इस पूरे मामले की विस्तृत जांच 2013-14 में नायब तहसीलदार राजेश सिंह ने की थी। जांच रिपोर्ट में उन्होंने कब्जे की पूरी कहानी बयां कर दी थी। दिक्कत यह है कि इस रिपोर्ट के साथ ही कुछ अन्य अहम दस्तावेज बाद में गायब कर दिए गए हैं। कलेक्टर ने ऐसे तमाम दस्तावेजों को ढूंढकर पेश करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब पहले जांच हो चुकी है तो बार-बार जांच क्यों करें, रिपोर्ट के आधार पर सीधे कार्रवाई शुरू करेंगे।
15 हेक्टेयर जमीन पर है कब्जा
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि असरावद खुर्द की 15 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कॉलोनी काटी गई। इस कॉलोनी में टुकड़े-टुकड़ों में तकरीबन सौ मकान बने हुए हैं। ज्यादातर कब्जे 2010 से 2015 में किए गए। इस दौरान क्षेत्र की सरपंच पिंकी पति पप्पू राजौरिया थी। सरकारी जमीन पर नौटरी करके उनके देवर दिनेश राजौरिया और उनके समधी महेश भिमाजी ने प्लॉट बेचे।
जहां तलाश जारी, वहीं सरकारी जमीनें लगा दी ठिकानें
जिला प्रशासन बड़े स्तर पर सरकारी जमीनें तलाश रहा है। इन जमीनों का इस्तेमाल अलग-अलग सार्वजनिक उपयोग के लिए किया जाना है। दूसरी तरफ पटवारी और आरआई के माध्यम से भू-माफिया इन्हीं सरकारी जमीनों को ठिकानें लगा रहे हैं। खंडवा रोड पर उमरीखेड़ा तक जहां प्लॉट 800 रुपए वर्गफीट में बेचे जा रहे हैं वहीं असरावद की जिस जमीन को कॉलोनी काटकर ठिकाने लगाने का प्रयास किया गया है उसकी बाजार कीमत सिर्फ 400 रुपए वर्गफीट के लिहाज से ही 64.55 करोड़ रुपए है।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
दर्जनों शिकायतों और चार-चार जांच रिपोर्ट के बावजूद असरावद की सरकारी जमीन पर बेखौफ कटी कॉलोनियों के खिलाफ कलेक्टर पी.नरहरि ने कड़ाई से छानबीन शुरू कर दी है। इस कड़ी में मंगलवार को राजस्व अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और वहां बसे लोगों के दस्तावेज खंगाले।
‘सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटकर बेच दिए छह करोड़ के प्लॉट’ शीर्षक से दबंग दुनिया ने सोमवार के अंक में समाचार प्रकाशित किया था जिसने असरावद खुर्द में सरकारी जमीन पर कब्जे का खुलासा किया था। सोमवार को ही कलेक्टर ने फाइल निकालने के दस्तावेज दे दिए थे। मंगलवार को उनके निर्देश पर एसडीएम श्रृंगार श्रीवास्तव तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी सहित मौके पर पहुंचे। वहां सरकारी जमीन पर तने मकानों ने अधिकारियों को चौंका दिया। अफसरों ने पहले पटवारी और आरआई को जमकर फटकारा और बाद में उन लोगों से नौटरी या अन्य दस्तावेज ऐसे दस्तावेज मांगे जिनके आधार पर वे मकान बनाकर रह रहे हैं।
जांच तो पहले भी हो गई, अब सिर्फ एक्शन...
कलेक्टर ने जब फाइलें बुलाई तो उन्हें यह भी पता चला है कि इस पूरे मामले की विस्तृत जांच 2013-14 में नायब तहसीलदार राजेश सिंह ने की थी। जांच रिपोर्ट में उन्होंने कब्जे की पूरी कहानी बयां कर दी थी। दिक्कत यह है कि इस रिपोर्ट के साथ ही कुछ अन्य अहम दस्तावेज बाद में गायब कर दिए गए हैं। कलेक्टर ने ऐसे तमाम दस्तावेजों को ढूंढकर पेश करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब पहले जांच हो चुकी है तो बार-बार जांच क्यों करें, रिपोर्ट के आधार पर सीधे कार्रवाई शुरू करेंगे।
15 हेक्टेयर जमीन पर है कब्जा
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि असरावद खुर्द की 15 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कॉलोनी काटी गई। इस कॉलोनी में टुकड़े-टुकड़ों में तकरीबन सौ मकान बने हुए हैं। ज्यादातर कब्जे 2010 से 2015 में किए गए। इस दौरान क्षेत्र की सरपंच पिंकी पति पप्पू राजौरिया थी। सरकारी जमीन पर नौटरी करके उनके देवर दिनेश राजौरिया और उनके समधी महेश भिमाजी ने प्लॉट बेचे।
जहां तलाश जारी, वहीं सरकारी जमीनें लगा दी ठिकानें
जिला प्रशासन बड़े स्तर पर सरकारी जमीनें तलाश रहा है। इन जमीनों का इस्तेमाल अलग-अलग सार्वजनिक उपयोग के लिए किया जाना है। दूसरी तरफ पटवारी और आरआई के माध्यम से भू-माफिया इन्हीं सरकारी जमीनों को ठिकानें लगा रहे हैं। खंडवा रोड पर उमरीखेड़ा तक जहां प्लॉट 800 रुपए वर्गफीट में बेचे जा रहे हैं वहीं असरावद की जिस जमीन को कॉलोनी काटकर ठिकाने लगाने का प्रयास किया गया है उसकी बाजार कीमत सिर्फ 400 रुपए वर्गफीट के लिहाज से ही 64.55 करोड़ रुपए है।
पिछले 6 साल से शिकायत कर रहा हूं मैं शिकायत की सारी आवेदन की रिसिप्ट मेरे पास रखी है एवं सूचना अधिकार का जवाब भी लोकायुक्त शिकायत आवेदन की प्राप्ति मेरा नंबर 99933 4685
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