Monday, December 28, 2015

लोकायुक्त के निशाने पर आयकर अफसर

- भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सर्च और सर्वे से बड़े-बड़े कारोबारियों की नींद उड़ाने वाले आयकर विभाग के कुछ अफसर लोकायुक्त के निशाने पर है। बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचार की लगातार शिकायतों ने आयकर में लोकायुक्त अधिकारियों की आवाजाही बढ़ा दी है। एक तरफ जहां लोकायुक्त अफसर इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं वहीं आयकर की बैठकों में बड़े अधिकारी लोकायुक्त का हवाला देकर मैदानी अमले को ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे हैं।
आयकर में बीते कुछ दिनों से लोकायुक्त एसपी अरूण मिश्रा की आवाजाही बढ़ी है। उनकी आवाजाही की बड़ी वजह आयकर अधिकारियों के खिलाफ मिल रही शिकायतों को बताया जा रहा है। इन शिकायतों की चर्चा आयकर के गलियारों में भी है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों एक मीटिंग हुई थी जिसमें एक आला अधिकारी ने शिकायतों को लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने यहां तक कहा कि आप जो कर रहे हो उस पर लोकायुक्त व सीबीआई की नजर है। गौरतलब है कि चार-पांच साल पहले लोकायुक्त आयकर अधिकारी आर.के.कोष्ठा के खिलाफ भी छापेमार कार्रवाई कर चुकी है।
मंत्रालय तक है परेशान...
आयकर व अन्य राजस्व विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर वित्त मंत्रालय गंभीर है। बीते दिनों वित्त मंत्रालय के राजस्व सचिव सुमित बोस ने इस संबंध में कुछ सुझाव और भ्रष्ट आॅफिसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई  की चेतावनी भी दी है। वे कह चुके हैं कि आयकर, उत्पाद व कस्टम विभाग के विजिलेंस विंग का मुख्य उत्तरदायित्व है कि वह भ्रष्ट आॅफिसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।
लोकायुक्त कर सकता है कार्रवाई
चूंकि आयकर, सेंट्रल एक्साइज जैसे विभाग केंद्र सरकार का हिस्सा है, इनसे राज्य सरकार को कोई वास्ता नहीं। सामान्यत: इन विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई सीबीआई करती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या लोकायुक्त केंद्रीय कर्मचारियों पर कार्रवाई कर सकता है? स्वयं लोकायुक्त एस.पी. अरूण मिश्रा ने इस संबंध में बताया कि मप्र की भूमि पर जो भी भ्रष्टाचार करता है उस पर लोकायुक्त कार्रवाई कर सकता है। फिर वह राज्य कर्मचारी हो या केंद्रीय कर्मचारी। ऐसे मामलों में कार्रवाई से लेकर चालानी कार्रवाई तक लोकायुक्त करता है।
इन कामों के बदले लगते हैं पैसे..
- कर मुल्यांकन यदि ज्यादा है तो उसे कम करना
- इनकम टैक्स चुकाने के बाद जल्द रिफंड
- असेसमेंट रिपोर्ट देने के लिए।
- आईटीआर और बैंक रिपोर्ट के आधार पर सर्वे की कार्रवाई की चेतावनी देना और वसूली करना।
- पेन जल्द ट्रांसफर कराना।
(सर्वे और सर्च की चेतावनी बड़ी रकम दिलाती है)
सामने आकर शिकायत नहीं कर सकते...
सूत्रों की मानें तो पहले मुख्य आयकर आयुक्त को भी शिकायत की जाती थी । ज्यादा से ज्यादा सबूत मांगे जाते थे। कार्रवाई की संभावना कम और नाम उजागर होने की संभावना ज्यादा रहती है। नाम उजागर होने की स्थिति में कारोबारियों या व्यापारियों का काम करना मुश्किल हो जाता है। जबरिया परेशान किया जाता है। इसीलिए आॅफिस स्तर पर शिकायतें कम हो गई। अब सीवीसी, सीबीआई और  लोकायुक्त के पास पहुंचने वाले मामले बढ़ गए।
ये मामले आए सामने...
- मार्च 2012 में पेन ट्रांसफर के लिए 20 लाख रुपए की रिश्वत का मामला सामने आया था। सीबीआई ने कार्रवाई की।
- 2011 में सीबीआई अदालत ने भोपाल में पदस्थ रहे आयकर अधिकारी बीएस बांठिया को चार साल के कारावास और 33 लाख रुपये जुमार्ने की सजा सुनाई थी।
- 2012 में सीबीआई कोर्ट ने भोपाल में पदस्थ रहे एक असिस्टेंट इनकम टैक्स कमिश्नर सुरेश सोनी को तीन साल कैद की सजा सुनाई है। सोनी 1993 से 1999 तक भोपाल-इटारसी में पदस्थ रह चुके हैं। 1999 में उनके घर छापा पड़ा था।
रूटिन में जाता हूं ऐसे ही...
क्या आयकर अफसरों की शिकायतें मिली है।
नहीं, शिकायत सामने नहीं आई।
आयकर में आपकी आवाजाही बढ़ी है?
मैं तो यूं ही रूटी में आता-जाता हूं।
मीटिंग में लोकायुक्त का हवाला देकर चेताया जाता है?
इस संबंध में मैं क्या कह सकता हूं। अच्छा है अगर ऐसा है भी तो।
क्या आयकर पर लोकायुक्त कार्रवाई कर सकत है?
क्यों नहीं, पहले भी कर चुके हैं।
अरूण मिश्रा, एसपी
लोकायुक्तरू

No comments:

Post a Comment