प्रेमश्री देवकॉन को एसडीएम सांवेर ने थमाया नोटिस, ले-आउट निरस्त होगा !
इंदौर. विनोद शर्मा ।
बायपास से लगे सुल्लाखेड़ी में बिना विकास अनुमति के प्रेमश्री समूह की टाउनशीप प्राइम एक्सोटिका आकार ले रही है। मुण्डलाबाग की सरकरी जमीन पर कब्जा किया सो अलग। इस खुलासे के बाद एसडीएम सांवेर अनिल बनवारिया ने प्राइम एक्सोटिका के निर्माण पर रोक लगा दी है, हालांकि रोक के बावजूद मौके पर काम जारी है।
जितनी ऊंची टाउनशिप, उनकी जमीनी हकीकत उतनी ही जर्जर। इसका बड़ा उदाहरण है सुल्लाखेड़ी में जी.डी.गोयनका स्कूल के सामने बन रही प्राइम एक्सोटिका टाउनशीप। सुविधाओं के सब्जबाग के साथ बन रहे प्रेमश्री समूह के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट की एसडीएम बनवारिया के औचक निरीक्षण के दौरान सारी हकीकत सामने आ गई। बीते दिनों बनवारिया ने कारण बताओ नोटिस देते हुए टाउनशिप का काम रोकने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी जमीन भी जीम गए...
जांच रिपोर्ट के अनुसार सुल्लाखेड़ी से लगे ग्राम मुण्डलाबाग की सर्वे नं. 1 की 3.318 हेक्टेर जमीन के 20 बाय 1000 फीट हिस्से पर प्रेमश्री देवकॉन प्रा.लि. तर्फे डायरेक्टर राजकुमार पिता प्रेमचंद जैन निवासी मेट्रो टॉवर इंदर ने अपनी निजी जमीन पर आने-जाने का रास्ता बना दिया। इस संबंध में प्रकरण भी दर्ज हुआ। दंड वसूलकर कब्जा भी हटाया गया।
अभिन्यास में पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर जाने वाले 30 मीटर चौड़े पहुंचमार्ग के लिए ग्राम मुण्डलाबाग की सर्वे नं. 1 की जमीन को कांकड़ बताया गया। इसी आधार पर नक्शा पास हुआ। जबकि जिसे काकड़ बताया असल में वह जमीन ग्राम कोटवार के लिए निर्धारित सेवा भूमि है। इसीलिए स्वीकृत नक्शे की दोबारा जांच के लिए 29 सितंबर 2015 को टीएंडसीपी डिपार्टमेंट को भी एसडीएम कार्यालय की ओर से पत्र लिखा गया है।
बना अनुमति कैसे शुरू कर दिया काम...
प्रेम श्री देवकॉन तर्फे राजकुमार जैन व अन्य ने 22 दिसंबर 2011 को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) से आवासीय प्रयोजन के साथ भू-अभिन्यास स्वीकृत (प. 8826/नग्रानि/2011) कराया था। इसके बाद जमीन का डायवर्शन भी हुआ लेकिन कॉलोनाइजर ने विकास अनुमति मिले बिना ही मौके पर काम शुरू कर दिया। अभी भी अनुमति प्राप्त नहीं हुई है जबकि मौके पर 25 प्रतिशत से अधिक काम हो चुका है।
ऐसे मिलती है विकास अनुमति...
-- पंचायती राज अधिनियम के तहत गांवों में कॉलोनी विकास को लेकर नए नियम बनने के बाद इंदौर जिले में कॉलोनी विकास के लिए कमेटी बनाई गई है जिसकी अध्यक्षता कलेक्टर करते हैं।
-- गांव में कॉलोनी काटने के लिए कॉलोनाइजर को निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा। कमेटी में शामिल एसडीओ राजस्व, पीडब्ल्यूडी, पीएचई आदि विभागों के अधिकारी स्थल निरीक्षण करेंगे। इसके बाद इन अधिकारियों की कमेटी कलेक्टर को रिपोर्ट पेश करेगी।
-- कॉलोनाइजर प्रेजेंटेशन देगा कि कॉलोनी में किस स्तर की सड़क, बिजली, पानी और सीवेज की लाइन होगी। रिपोर्ट और प्रेजेंटेशन देखने के बाद तय करेंगे कि कॉलोनी को विकास अनुमति दी जाए या नहीं। यदि कोई कमी या खामी रही तो कमेटी कॉलोनाइजर को बताएगी। इन्हें दूर करने के लिए उसे एक सप्ताह का समय और दिया जाएगा। प्लान से संतुष्ट होने के बाद ही कलेक्टर विकास अनुमति जारी करेंगे।
ले-आउट निरस्त करना ही उचित है...
22 दिसंबर 2011 को झूठी जानकारी देकर जो ले-आउट मंजूर कराया गया था उसकी वैधता 21 दिसंबर 2012 तक की थी। बिना विकास अनुमति के काम भी शुरू कर दिया गया। इसीलिए कॉलोनी का ले-आउट निरस्त करना ही उचित होगा। इस संबंध में कलेक्टर को भी पत्र लिखा है।
अनिल बनवारिया, एसडीएम
सांवेर
इंदौर. विनोद शर्मा ।
बायपास से लगे सुल्लाखेड़ी में बिना विकास अनुमति के प्रेमश्री समूह की टाउनशीप प्राइम एक्सोटिका आकार ले रही है। मुण्डलाबाग की सरकरी जमीन पर कब्जा किया सो अलग। इस खुलासे के बाद एसडीएम सांवेर अनिल बनवारिया ने प्राइम एक्सोटिका के निर्माण पर रोक लगा दी है, हालांकि रोक के बावजूद मौके पर काम जारी है।
जितनी ऊंची टाउनशिप, उनकी जमीनी हकीकत उतनी ही जर्जर। इसका बड़ा उदाहरण है सुल्लाखेड़ी में जी.डी.गोयनका स्कूल के सामने बन रही प्राइम एक्सोटिका टाउनशीप। सुविधाओं के सब्जबाग के साथ बन रहे प्रेमश्री समूह के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट की एसडीएम बनवारिया के औचक निरीक्षण के दौरान सारी हकीकत सामने आ गई। बीते दिनों बनवारिया ने कारण बताओ नोटिस देते हुए टाउनशिप का काम रोकने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी जमीन भी जीम गए...
जांच रिपोर्ट के अनुसार सुल्लाखेड़ी से लगे ग्राम मुण्डलाबाग की सर्वे नं. 1 की 3.318 हेक्टेर जमीन के 20 बाय 1000 फीट हिस्से पर प्रेमश्री देवकॉन प्रा.लि. तर्फे डायरेक्टर राजकुमार पिता प्रेमचंद जैन निवासी मेट्रो टॉवर इंदर ने अपनी निजी जमीन पर आने-जाने का रास्ता बना दिया। इस संबंध में प्रकरण भी दर्ज हुआ। दंड वसूलकर कब्जा भी हटाया गया।
अभिन्यास में पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर जाने वाले 30 मीटर चौड़े पहुंचमार्ग के लिए ग्राम मुण्डलाबाग की सर्वे नं. 1 की जमीन को कांकड़ बताया गया। इसी आधार पर नक्शा पास हुआ। जबकि जिसे काकड़ बताया असल में वह जमीन ग्राम कोटवार के लिए निर्धारित सेवा भूमि है। इसीलिए स्वीकृत नक्शे की दोबारा जांच के लिए 29 सितंबर 2015 को टीएंडसीपी डिपार्टमेंट को भी एसडीएम कार्यालय की ओर से पत्र लिखा गया है।
बना अनुमति कैसे शुरू कर दिया काम...
प्रेम श्री देवकॉन तर्फे राजकुमार जैन व अन्य ने 22 दिसंबर 2011 को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) से आवासीय प्रयोजन के साथ भू-अभिन्यास स्वीकृत (प. 8826/नग्रानि/2011) कराया था। इसके बाद जमीन का डायवर्शन भी हुआ लेकिन कॉलोनाइजर ने विकास अनुमति मिले बिना ही मौके पर काम शुरू कर दिया। अभी भी अनुमति प्राप्त नहीं हुई है जबकि मौके पर 25 प्रतिशत से अधिक काम हो चुका है।
ऐसे मिलती है विकास अनुमति...
-- पंचायती राज अधिनियम के तहत गांवों में कॉलोनी विकास को लेकर नए नियम बनने के बाद इंदौर जिले में कॉलोनी विकास के लिए कमेटी बनाई गई है जिसकी अध्यक्षता कलेक्टर करते हैं।
-- गांव में कॉलोनी काटने के लिए कॉलोनाइजर को निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा। कमेटी में शामिल एसडीओ राजस्व, पीडब्ल्यूडी, पीएचई आदि विभागों के अधिकारी स्थल निरीक्षण करेंगे। इसके बाद इन अधिकारियों की कमेटी कलेक्टर को रिपोर्ट पेश करेगी।
-- कॉलोनाइजर प्रेजेंटेशन देगा कि कॉलोनी में किस स्तर की सड़क, बिजली, पानी और सीवेज की लाइन होगी। रिपोर्ट और प्रेजेंटेशन देखने के बाद तय करेंगे कि कॉलोनी को विकास अनुमति दी जाए या नहीं। यदि कोई कमी या खामी रही तो कमेटी कॉलोनाइजर को बताएगी। इन्हें दूर करने के लिए उसे एक सप्ताह का समय और दिया जाएगा। प्लान से संतुष्ट होने के बाद ही कलेक्टर विकास अनुमति जारी करेंगे।
ले-आउट निरस्त करना ही उचित है...
22 दिसंबर 2011 को झूठी जानकारी देकर जो ले-आउट मंजूर कराया गया था उसकी वैधता 21 दिसंबर 2012 तक की थी। बिना विकास अनुमति के काम भी शुरू कर दिया गया। इसीलिए कॉलोनी का ले-आउट निरस्त करना ही उचित होगा। इस संबंध में कलेक्टर को भी पत्र लिखा है।
अनिल बनवारिया, एसडीएम
सांवेर
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