2 दिसंबर को हुई एफआईआर, गिरफ्तारी अब तक नहीं
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
चार सौ प्लॉट होल्डरों के हितों पर पानी फेरकर कॉलोनी की जमीन बेचने निकले सुनील मंंधवानी पर राजेंद्रनगर पुलिस मेहरबान है। शायद यही वजह है कि नवीन पिता अमरलाल माटा की लिखित शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के महीनेभर बाद भी पुलिस मंधवानी को गिरफ्तार नहीं कर पाई। इससे पहले भी जुनी इंदौर और तेजाजीनगर थाने में भी महालक्ष्मीधाम के प्लॉट होल्डरों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बाद मंधवानी बंधुओं को अंदर करने में महीनों लगा दिए थे। हालांकि इस संबंध में राजेंद्रनगर पुलिस का कहना है कि प्रयास जारी है।
माटा ने अपने शिकायत में लिखा था कि उन्होंने मंधवानी की गणेश रियल मार्ट प्रा.लि. द्वारा निहालपुर मुंडी में काटी गई कॉलोनी शिव सिटी में प्लॉट (498) खरीदा था। 1200 वर्गफीट के इस प्लॉट की कीमत व विकास शुल्क पेटे 3 लाख रुपए चुका भी दिए गए। उस वक्त कंपनी के डायरेक्टरों के बीच दीवानी मुकदमा (97-ए-2010) चल रहा था। इसीलिए निराकरण के बाद रजिस्ट्री का आश्वासन दिया लेकिन विवाद निपटने के बाद हमें सूचित तक नहीं किया गया। न ही मंधवानी ने मुलाकात की। इसीलिए वे डाइवर्शन व क्लब शुल्क नहीं चुका पाए।
15 दिसंबर को विवाद निपटने की सूचना मिली। मंधवानी से मिले लेकिन उन्होंने निराकरण नकार दिया जबकि एक अन्य डायरेक्टर ईश्वर माखिजा ने निराकरण की पुष्टि की। कुछ दिन बाद माखिजा ने बताया कि जिस प्लॉट के लिए आप चक्कर काट रहे हो वह रामचंद्र पागारानी को 4.80 लाख में कंपनी ने 23 दिसंबर 2014 को बेच दिया है। नकल मांगने पर उन्होंने मंधवानी के पास भेज दिया। मिलने पहुंचे तो मंधवानी ने गालीगलौज की।
एफआईआर दर्ज, अग्रिम जमानत खारिज
माटा के बार-बार शिकायत करने के बाद 2 दिसंबर 2015 में राजेंद्रनगर पुलिस ने सुनील मंधवानी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया लेकिन पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया। इस दौरान मंधवानी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत का आवेदन (4178/2015) किया जो 9 दिसंबर 2015 को द्वितीय एजेएस इंदौर कमल जोशी ने निरस्त कर दिया।
दो थानों पर दर्ज है तीन एफआईआर...
मंधवानी के खिलाफ जूनी इंदौर में अपराध क्रमांक 56/2015, 58/2015 और तेजाजीनगर थाने में अपराध क्रमांक 265/15 दर्ज है जो कि शपथ-पत्र के साथ 90 प्लॉट होल्डरों की संयुक्त शिकायत के बाद दर्ज किया गया। तीनों मुÞकदमे धारा 420, 467, 468, 469 और 471 के तहत दर्ज हैं।
कोशिशें जारी है...
प्रयास जारी है, गुरुवार को भी एसआई को मंधवानी के ठिकानों पर दबिश देने पहुंचाया था लेकिन वह मौके पर मिला नहीं। गिरफ्तारी हर हाल में होगी, वक्त भले लग रहा हो।
आर.एस.शक्तावत, थाना प्रभारी
मंधवानी के ठिकानों पर दबिश दी थी इत्तेफाकन वह मिला नहीं है। अभी उससे जुड़े संपर्क तलाशे जा रहे हैं।
रुपेश द्विवेदी, एएसपी
क्यों शंका के घेरे में पुलिस
-- सामान्यत: आरोपी की फरारी के दशा में पुलिस उसके परिजन पर शिकंजा कसती है ताकि पेश होने के लिए दबाव बने।
-- पुलिस का अपना मुखबिर तंत्र होता है जो पुलिस को पल-पल की सूचना देता है ऐसे में यह बात हजम नहीं होती कि मुखबिर तंत्र ने मंधवानी की सूचना पुलिस को दी ही न हो।
-- मंधवानी का मोबाइल (98260-85610) चालू है वह बेखौफ सबसे बात कर रहा है पुलिस ने अब तक उसकी कॉल डिटेल से लोकेशन क्यों नहीं निकाली।
-- मंधवानी के घर में कैमरे लगे हैं उनकी रिकॉर्डिंग क्यों नहीं देखी गई। क्यों परिवार पर दबाव क्यों नहीं बनाया गया।
-- इससे पहले भी जूनी इंदौर और तेजाजीनगर में दर्ज प्रकरणों में गिरफ्तारी एफआईआर दर्ज होने के महीनों बाद हुई।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
चार सौ प्लॉट होल्डरों के हितों पर पानी फेरकर कॉलोनी की जमीन बेचने निकले सुनील मंंधवानी पर राजेंद्रनगर पुलिस मेहरबान है। शायद यही वजह है कि नवीन पिता अमरलाल माटा की लिखित शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के महीनेभर बाद भी पुलिस मंधवानी को गिरफ्तार नहीं कर पाई। इससे पहले भी जुनी इंदौर और तेजाजीनगर थाने में भी महालक्ष्मीधाम के प्लॉट होल्डरों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बाद मंधवानी बंधुओं को अंदर करने में महीनों लगा दिए थे। हालांकि इस संबंध में राजेंद्रनगर पुलिस का कहना है कि प्रयास जारी है।
माटा ने अपने शिकायत में लिखा था कि उन्होंने मंधवानी की गणेश रियल मार्ट प्रा.लि. द्वारा निहालपुर मुंडी में काटी गई कॉलोनी शिव सिटी में प्लॉट (498) खरीदा था। 1200 वर्गफीट के इस प्लॉट की कीमत व विकास शुल्क पेटे 3 लाख रुपए चुका भी दिए गए। उस वक्त कंपनी के डायरेक्टरों के बीच दीवानी मुकदमा (97-ए-2010) चल रहा था। इसीलिए निराकरण के बाद रजिस्ट्री का आश्वासन दिया लेकिन विवाद निपटने के बाद हमें सूचित तक नहीं किया गया। न ही मंधवानी ने मुलाकात की। इसीलिए वे डाइवर्शन व क्लब शुल्क नहीं चुका पाए।
15 दिसंबर को विवाद निपटने की सूचना मिली। मंधवानी से मिले लेकिन उन्होंने निराकरण नकार दिया जबकि एक अन्य डायरेक्टर ईश्वर माखिजा ने निराकरण की पुष्टि की। कुछ दिन बाद माखिजा ने बताया कि जिस प्लॉट के लिए आप चक्कर काट रहे हो वह रामचंद्र पागारानी को 4.80 लाख में कंपनी ने 23 दिसंबर 2014 को बेच दिया है। नकल मांगने पर उन्होंने मंधवानी के पास भेज दिया। मिलने पहुंचे तो मंधवानी ने गालीगलौज की।
एफआईआर दर्ज, अग्रिम जमानत खारिज
माटा के बार-बार शिकायत करने के बाद 2 दिसंबर 2015 में राजेंद्रनगर पुलिस ने सुनील मंधवानी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया लेकिन पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया। इस दौरान मंधवानी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत का आवेदन (4178/2015) किया जो 9 दिसंबर 2015 को द्वितीय एजेएस इंदौर कमल जोशी ने निरस्त कर दिया।
दो थानों पर दर्ज है तीन एफआईआर...
मंधवानी के खिलाफ जूनी इंदौर में अपराध क्रमांक 56/2015, 58/2015 और तेजाजीनगर थाने में अपराध क्रमांक 265/15 दर्ज है जो कि शपथ-पत्र के साथ 90 प्लॉट होल्डरों की संयुक्त शिकायत के बाद दर्ज किया गया। तीनों मुÞकदमे धारा 420, 467, 468, 469 और 471 के तहत दर्ज हैं।
कोशिशें जारी है...
प्रयास जारी है, गुरुवार को भी एसआई को मंधवानी के ठिकानों पर दबिश देने पहुंचाया था लेकिन वह मौके पर मिला नहीं। गिरफ्तारी हर हाल में होगी, वक्त भले लग रहा हो।
आर.एस.शक्तावत, थाना प्रभारी
मंधवानी के ठिकानों पर दबिश दी थी इत्तेफाकन वह मिला नहीं है। अभी उससे जुड़े संपर्क तलाशे जा रहे हैं।
रुपेश द्विवेदी, एएसपी
क्यों शंका के घेरे में पुलिस
-- सामान्यत: आरोपी की फरारी के दशा में पुलिस उसके परिजन पर शिकंजा कसती है ताकि पेश होने के लिए दबाव बने।
-- पुलिस का अपना मुखबिर तंत्र होता है जो पुलिस को पल-पल की सूचना देता है ऐसे में यह बात हजम नहीं होती कि मुखबिर तंत्र ने मंधवानी की सूचना पुलिस को दी ही न हो।
-- मंधवानी का मोबाइल (98260-85610) चालू है वह बेखौफ सबसे बात कर रहा है पुलिस ने अब तक उसकी कॉल डिटेल से लोकेशन क्यों नहीं निकाली।
-- मंधवानी के घर में कैमरे लगे हैं उनकी रिकॉर्डिंग क्यों नहीं देखी गई। क्यों परिवार पर दबाव क्यों नहीं बनाया गया।
-- इससे पहले भी जूनी इंदौर और तेजाजीनगर में दर्ज प्रकरणों में गिरफ्तारी एफआईआर दर्ज होने के महीनों बाद हुई।
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