Tuesday, February 9, 2016

शर्तों का कायदा, ठेकेदारों का फायदा

प्रतिद्विदी हुए कम, 19 लाख में होंगे 15.13 लाख के काम
इंदौर. विनोद शर्मा।
नगर निगम की तरह इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) में भी चहेते ठेकेदारों को फायदा पंहुचाने का खेल जारी है। इसका ताजा उदाहरण आईडीए बिल्डिंग के वार्षिक संधारण के निकाला गया टेंडर है जिसे खास कंडीशन अप्लाय करके जारी किया गया है ताकि सिर्फ वही ठेकेदार ठेका ले सके जिनका 'व्यवहार'  प्राधिकरण अफसरों और पदाधिकारियों को समझ आये। फिर भले वो एसओआर या टेंडर वेल्यु से 20-30 प्रतिशत अधिक का ही रेट कोट क्यों न करें।वैसे भी अतिरिक्त पैसाकौनसा अफसरों की जेब से जाने वाला है। जानकारों की माने तो आईडीए कन्डीशन हटाकर काम कराता है लागत 5-7 लाख रुपये कम आयगी।
मप्र लोक निर्माण विइएजी के संसोधित पत्र (एफ50/7/2015) के अनुसार 2 करोड़ तक के कामों को शर्तों(कंडीशन) से मुक्त रखने का आदेश सचिव सी.पी. अग्रवाल ने दिया था।इस आदेश को हवा में उड़ाते हुए आईडीए के अफसरों ने छोटे छोटे कामों में शर्तों का बोझ डाल दिया। इसी कड़ी में प्राधिकरण बिल्डिंग की मरम्मत के लिए बीते दिनों सशर्त टेंडर निकाला। रंगाई- टूटे कांच बदलने और टॉयलेट सुधार सहित अन्य कामों की लागत  15 लाख  13 हजार 699 आंकी गई। शर्तों के अनुसार इस काम को दो कम्पनियां ही कर सकती है। दोनों ही अधिकारियों की लाड़ली है। इसीलिए टेंडर 25 प्रतिशत ज्यादा के मिले। मतलब 15.13 लाख का काम अब 18.50 से 19 लाख के बीच होगा।
एक जैसे दो काम, एक विभाग, दो नियम
प्राधिकण 27 लाख की लागत से गंगवाल बस स्टैंड की दशा बदल रहा है। वहा भी संधारण का काम किया जा रहा है। प्राधिकरण ने टेंडर बुलाए तो 22.50 प्रतिशत कम के टेंडर मिले। यानी जिस काम की लागत आईडीए ने 27 लाख आंकी थी वही काम अब 20.92 लाख में हो रहा है। 6.08 लाख का फायदा हुआ प्राधिकरण को। काम 80 प्रतिशत तक हो चुका है। वहीं प्राधिकरण बिल्डिंग के काम को शर्तें लादकर 25 प्रतिशत ज्यादा में देन की तैयारी है अफसरों की। यहां अधिकारी 3.75 से 4 लाख रुपए ज्यादा देना चाह रहे हैं।
ओपन टेंडर हो तो 4-5 लाख का फायदा...
जानकारों की मानें तो शर्तों की जिद छोड़कर प्राधिकरण यदि ओपन टेंडर निकालता है तो 15.13 लाख का काम 10 से 11 लाख में ही हो जाएगा। 4-5 लाख की बचत होगी। इस राशि का इस्तेमाल कहीं ओर शहर के विकास में हो सकता है।
एक तीर, तीन शिकार...
पीडब्ल्यूडी एसओआर के विपरीत सशर्त टेंडर निकालकर प्राधिकरण के अधिकारी एक तीर से तीन शिकार कर रहे हैं। पहला : अपने चहेते ठेकेदारों को प्रतिद्विदियों से मुक्ति दिलाना। दूसरा : ठेकेदारों को फायदा पहुंचाना और तीसरा उसी फायदे में कमीशन लेकर अपनी जेब भरना।
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प्राधिकरण बोर्ड के समक्ष बड़े कामों की जानकारी आती है। छोटे काम अधिकारी अपने स्तर पर करते हैं। चूंकि अब मामला मेरे ध्यान में आया है तो मैं जानकारी लेता हूं, ऐसा क्यों हो रहा है।
शंकर लालवानी, अध्यक्ष
आईडीए

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