रेणुकामाता मल्टीस्टेट अर्बन क्रेडिट को-आॅपरेटिव सोसायटी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छापेमार कार्रवाई में अब तक रेणुकामाता मल्टी स्टेट अर्बन क्रेडिट को-आॅपरेटिव सोसायटी में 12000 करोड़ से ज्यादा का हवाला सामने आया है। इसमें 70 फीसदी राशि इंदौर के कारोबारियों की महाराष्ट्र, गुजराज, रायपुर पहुंचाई गई। जांच में सोसायटी की इंदौर-सेंधवा ब्रांच में 50 से अधिक ऐसे खाते भी सामने आए हैं जो पेन ही नहीं बिना केवाईसी फार्म के खोले गए। जो पते लिखे हैं वह भी फर्जी है। इसके अलावा तकरीबन 500 से अधिक ऐसे खाते हैं जो हैं किसी और के और इस्तेमाल कोई और कर रहा है।
मुलत: अहमदनगर, महाराष्ट्र की इस सोसायटी ने इंदौर में 10 साल पहले, सेंधवा में करीब 4 साल और रायपुर में दो साल पहले कदम रखा। इस समयावधि में आयकर को दो साल में 12000 करोड़ के ट्रांजेक्शन के प्रमाण मिले हैं। लेनदेन डीडी के माध्यम से हुआ। खुलासे के बाद इनकम टैक्स की निगाहें बैंक के हेडक्वार्टर सहित अन्य सभी ब्रांचों पर भी है।
पैसा जमा करने वाले का नाम ही नहीं...
डीडी के नाम पर हवाले की रकम इधर से उधर करने वाली इस बैंक के कई खाते ऐसे सामने आए हैं जिनमें लाखों रुपया जमा करना बताया है लेकिन जमा किसने और कब किये इसकी कोई इंट्री बैंक के पास नहीं है। जबकि अन्य बैंकों में 50 हजार से अधिक जमा करने पर पेन बताना पड़ता है।
अब व्यापारियों पर भी नजर
कार्रवाई का केंद्र रायपुर था इसीलिए सर्च करके जानकारी रायपुर भेजी जा रही है। यह भी बताया जा रहा है कि बैंक से मिली इन्फॉर्मेशन के आधार पर जैसे रायपुर में करीब सौ करोड़ रुपए का बिक्री हवाला होने की जानकारी मिलने के बाद रिद्धि-सिद्धि ज्वेलर्स के खिलाफ सर्च की कार्रवाई की गई वैसी ही कार्रवाई या नोटिस-पूछताछ की कार्रवाई इंदौर-सेंधवा में भी हो सकती है। इसीलिए इंदौर में भी व्यापारी दहशतजदा हैं।
खाता किसी का, इस्तेमाल करे कोई और...
सेंधवा में पदस्थ एक आयकर अधिकारी ने बताया कि बैंक में 100 से अधिक ऐसे खाते सामने आए हैं जिनके केवाईसी फार्म किसके नाम के हैं और उनका संचालन कोई और कर रहा है। ये खाते संबंधित लेनदेन करने वाले के कर्मचारी, परिचित के हो सकते हैं। शाखा में मौजूद दस्तावेजों में बाकायदा ये लिखा है कि किस खाते को कौन संचालित कर रहा था। अब विभाग खाताधारक सहित जिस व्यक्ति द्वारा इसे संचालित किया जा रहा था, दोनों से जानकारी लेगा।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छापेमार कार्रवाई में अब तक रेणुकामाता मल्टी स्टेट अर्बन क्रेडिट को-आॅपरेटिव सोसायटी में 12000 करोड़ से ज्यादा का हवाला सामने आया है। इसमें 70 फीसदी राशि इंदौर के कारोबारियों की महाराष्ट्र, गुजराज, रायपुर पहुंचाई गई। जांच में सोसायटी की इंदौर-सेंधवा ब्रांच में 50 से अधिक ऐसे खाते भी सामने आए हैं जो पेन ही नहीं बिना केवाईसी फार्म के खोले गए। जो पते लिखे हैं वह भी फर्जी है। इसके अलावा तकरीबन 500 से अधिक ऐसे खाते हैं जो हैं किसी और के और इस्तेमाल कोई और कर रहा है।
मुलत: अहमदनगर, महाराष्ट्र की इस सोसायटी ने इंदौर में 10 साल पहले, सेंधवा में करीब 4 साल और रायपुर में दो साल पहले कदम रखा। इस समयावधि में आयकर को दो साल में 12000 करोड़ के ट्रांजेक्शन के प्रमाण मिले हैं। लेनदेन डीडी के माध्यम से हुआ। खुलासे के बाद इनकम टैक्स की निगाहें बैंक के हेडक्वार्टर सहित अन्य सभी ब्रांचों पर भी है।
पैसा जमा करने वाले का नाम ही नहीं...
डीडी के नाम पर हवाले की रकम इधर से उधर करने वाली इस बैंक के कई खाते ऐसे सामने आए हैं जिनमें लाखों रुपया जमा करना बताया है लेकिन जमा किसने और कब किये इसकी कोई इंट्री बैंक के पास नहीं है। जबकि अन्य बैंकों में 50 हजार से अधिक जमा करने पर पेन बताना पड़ता है।
अब व्यापारियों पर भी नजर
कार्रवाई का केंद्र रायपुर था इसीलिए सर्च करके जानकारी रायपुर भेजी जा रही है। यह भी बताया जा रहा है कि बैंक से मिली इन्फॉर्मेशन के आधार पर जैसे रायपुर में करीब सौ करोड़ रुपए का बिक्री हवाला होने की जानकारी मिलने के बाद रिद्धि-सिद्धि ज्वेलर्स के खिलाफ सर्च की कार्रवाई की गई वैसी ही कार्रवाई या नोटिस-पूछताछ की कार्रवाई इंदौर-सेंधवा में भी हो सकती है। इसीलिए इंदौर में भी व्यापारी दहशतजदा हैं।
खाता किसी का, इस्तेमाल करे कोई और...
सेंधवा में पदस्थ एक आयकर अधिकारी ने बताया कि बैंक में 100 से अधिक ऐसे खाते सामने आए हैं जिनके केवाईसी फार्म किसके नाम के हैं और उनका संचालन कोई और कर रहा है। ये खाते संबंधित लेनदेन करने वाले के कर्मचारी, परिचित के हो सकते हैं। शाखा में मौजूद दस्तावेजों में बाकायदा ये लिखा है कि किस खाते को कौन संचालित कर रहा था। अब विभाग खाताधारक सहित जिस व्यक्ति द्वारा इसे संचालित किया जा रहा था, दोनों से जानकारी लेगा।
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